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28 फ़रवरी 2026

सीसीआई ने चालू सप्ताह में लगातार दूसरी बार कॉटन के बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने चालू सप्ताह में शुक्रवार को कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। इससे पहले भी निगम ने बुधवार को बिक्री भाव में बढ़ोतरी की थी।


सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 800 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इस दौरान निगम ने 1,00,500 गांठ कॉटन की बिक्री की, जिसमें मिलों ने 45,500 गांठ कॉटन की खरीद की, इसके अलावा व्यापारियों ने इस दौरान 55,000 गांठ खरीदी।

सीसीआई चालू सप्ताह में बुधवार को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 से 900 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी, तथा इस दौरान 2,78,000 गांठ की बिक्री की थी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 100 रुपये तेज होकर 54,300 से 54,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,140 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,140 से 5,480 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,200 से 51,200 रुपये कैंडी बोले गए।
देशभर की मंडियों में कपास की आवक 112,350 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में शुक्रवार को तेजी का रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार सीसीआई द्वारा बिक्री दाम बढ़ा देने से स्पिनिंग मिलों की खरीद से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार आया, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम लगभग स्थिर हो गए। सीसीआई चालू सप्ताह में कॉटन की बिक्री कीमतों में दो बार बढ़ोतरी कर चुकी है, जबकि इससे पहले चालू महीने में ही दो बाद इसके बिक्री भाव कम किए थे। ऐसे में स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही खरीद रही है। अत: हाजिर बाजार में भी इसकी कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। चालू सीजन में उत्पादन अनुमान तो ज्यादा है ही, साथ ही आयात भी बढ़ेगा। मौजूदा भाव में प्राइवेट जिनिंग मिलों की बिकवाली कम आ रही है, क्योंकि उनके पास कुल स्टॉक कम है। घरेलू बाजार में कॉटन का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास है, इसलिए हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई की बिक्री दाम पर ही ज्यादा निर्भर करेगी।

सीसीआई ने तेलंगाना में कपास की एमएसपी पर खरीद हेतु पंजीकरण की तिथि बढ़ाई


नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने तेलंगाना के कपास किसानों को राहत देने के लिए पंजीकरण की तिथि को बढ़ा दिया है। सीसीआई ने किसानों से आग्रह किया है, जिन किसानों के पास कपास का स्टॉक बचा हुआ है, वह 27 फरवरी 2026 तक कपास किसान एप पर जाकर पंजीकरण कर सकते है ताकि उनकी कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर की जा सके। पंजीकरण के बाद किसान सीसीआई के नजदीकी खरीद केंद्र पर कपास समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं।

सीसीआई के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता ने क्वालिटी स्टैंडर्ड, सेफ्टी और सिक्योरिटी उपायों, और पूरे सर्विस डिलीवरी सिस्टम का रिव्यू करने के लिए तेलंगाना के अलग-अलग गोदामों का दौरा किया। यह दौरा एमएसपी के तहत खरीदे गए कपास के स्टॉक को सुरक्षित रखने में ट्रांसपेरेंसी, एफिशिएंसी, और बेस्ट इन क्लास स्टोरेज प्रैक्टिस बनाए रखने के लिए है।

सीसीआई ने गुरुवार को ई नीलामी के माध्यम से 4,18,000 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की, जिसमें से केवल 53,000 क्विंटल बिनौले की बिक्री हुई।


स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण गुरुवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन के दाम लगभग स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 54,200 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,300 से 5,490 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,140 से 5,300 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,140 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,200 से 51,200 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 77,850 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

महाराष्ट्र में 60 चीनी मिलों में पेराई बंद, उत्पादन 25 फीसदी बढ़कर 92 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 23 फरवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 24.73 फीसदी बढ़कर 92.29 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 73.99 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। राज्य की 60 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है।


शुगर कमिश्नर के अनुसार 23 फरवरी तक राज्य में 980.85 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 92.29 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.41 फीसदी की बैठ रही है। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 793.56 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 73.99 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.32 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 206.19 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 22.59 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.96 फीसदी की है। इसी तरह से पुणे डिवीजन में अब तक 209.11 लाख टन गन्ने की पेराई कर 20.37 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.75 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में 211.34 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 18.04 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.54 फीसदी की है। अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में चीनी मिलों ने 122.42 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 10.03 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.01 फीसदी है।

छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में चीनी मिलों ने अब तक 103.3 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.38 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 8.11 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में चीनी मिलों ने 115.3 लाख टन गन्ने की पेराई कर 10.73 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.31 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में चीनी मिलों ने अब तक 11.39 लाख टन गन्ने की पेराई की है तथा 1.05 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। चीनी में रिकवरी की दर इस डिवीजन में 9.27 फीसदी है। नागपुर डिवीजन में 1.8 लाख टन पेराई हुई है।

चालू समर सीजन में फसलों की कुल बुआई 4.51 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 में फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 4.51 फीसदी आगे चल रही है। इस दौरान दलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, जबकि धान की रोपाई पिछले साल के लगभग बराबर ही हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 20 फरवरी 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई बढ़कर 21.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 20.38 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में 17.78 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल के लगभग बराबर ही है। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 0.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 0.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 59 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 56 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 1.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.08 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान समर मक्का की बुआई 1.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 0.89 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 1.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 0.77 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 1.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 0.60 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर और शीशम सीड की बुआई क्रमश 7 हजार एवं 12 हजार हेक्टेयर हो चुकी है। 

समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद को पारदर्शी और मजबूत बनाने पर सरकार का जोर - केंद्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली। जिंसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य, (एमएसपी) पर खरीद को और मजबूत बनाने के साथ ही खरीद पारदर्शिता होनी चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को परेशानी से बचाने के लिए खरीद केंद्रों को अच्छी तरह से तैयार और मैनेज किया जाना चाहिए।


शुक्रवार को नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) की रिव्यू मीटिंग में उन्होंने कहा कि प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) और प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (पीएसएफ) के तहत खरीद ऑपरेशन की मजबूत करने पर सरकार का जोर है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने चल रही खरीद की स्थिति का रिव्यू किया साथ ही ऑपरेशनल चुनौतियों का आकलन किया और खरीद सिस्टम को और ज्यादा कुशल और किसान केंद्रित बनाने के तरीके खोजने पर जोर दिया, ताकि किसानों को बिना देरी के उनकी उपज का सही दाम मिल सके।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों को परेशानी से बचाने के लिए खरीद केंद्रों में जरूरी सामान और अच्छा मैनेजमेंट होना चाहिए। उन्होंने खरीद केंद्र पर आसान और बिना किसी परेशानी के काम करने की जरूरत पर जोर दिया, जिसमें समय पर पेमेंट, सही इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोक्योरमेंट शेड्यूल पर ईमानदारी से काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद सिस्टम में किसानों का भरोसा पक्का करना सबसे जरूरी है। अरहर, उड़द और मसूर जैसी खास दालों का उत्पादन और खरीद बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी और आयात पर बाध्यता कम करने के लिए इन फसलों की अहमियत को देखते हुए, इनका उत्पादन और खरीद बढ़ाने की जरूरत है। घरेलू उत्पादन बढ़ाने और एमएसपवी पर खरीद की गारंटी देने के मकसद से छह साल के ‘दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन’ पर भी जोर दिया।

प्रस्तावित मिशन के तहत, खेती के तरीकों को बेहतर बनाने, अच्छी क्वालिटी के बीजों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को टेक्निकल सपोर्ट देने और मार्केटिंग और खरीद सिस्टम को मजबूत करने जैसे उपायों पर अधिकारियों संग चर्चा की। इस मिशन का मकसद भारत को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू कीमतों को स्थिर करना और किसानों की इनकम में लगातार बढ़ोतरी सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों को सीधे सरकारी खरीद सिस्टम से जोड़कर बिचौलियों पर निर्भरता से मुक्त करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अधिकारियों को खरीद के कामों को सुचारू और एक जैसा लागू करने के लिए राज्य सरकारों के साथ तालमेल मजबूत करने का निर्देश दिया। एमएसपी पर खरीदी गई उपज की सुरक्षित और कुशल हैंडलिंग सुनिश्चित करने के लिए खरीद और स्टोरेज के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि बाजार की स्थिरता के लिए प्रभावी खरीद और पर्याप्त स्टोरेज जरूरी है। कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम करने और किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा करने में मदद करना जरुरी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद की योजना प्रोएक्टिव होनी चाहिए और फसल की आवक के समय खरीद सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन अनुमान के साथ नीति बनानी चाहिए।

21 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में एफआरपी भुगतान के देरी पर मिलों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा - चीनी आयुक्त

पुणे, महाराष्ट्र। राज्य में चीनी का पेराई सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है और शुगर कमिश्नरेट ने किसानों को उनके गन्ने के बकाया भुगतान के लिए शुगर फैक्ट्रियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। शुगर कमिश्नर डॉ. संजय कोलते ने पिछले हफ्ते हुई सुनवाई के दौरान मिलों को चेतावनी दी थी कि, शुगर फैक्ट्रियों द्वारा एफआरपी भुगतान में अगर देरी होती है तो उन्हें किसानों को 15 फीसदी ब्याज देना होगा। हालांकि, कुछ फैक्ट्रियों ने कहा कि एग्रीमेंट के मुताबिक किसानों को एफआरपी का भुगतान किया जा रही है।


राज्य की जिन मिलों ने किसानों को एफआरपी का 60 फीसदी से कम पेमेंट किया है, उन 45 शुगर फैक्ट्रियों की सुनवाई 17 और 18 फरवरी को शुगर कमिश्नरेट कार्यालय में हुई। डॉ. कोलते ने कहा कि जैसे ही कमिश्नरेट ने फैक्ट्रियों को बकाया एफआरपी मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया, कुछ फैक्ट्रियों ने बकाया रकम का भुगतान कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिलें, इसके लिए हमारी कोशिशें जारी हैं।

शुगर कमिश्नरेट की तरफ से 18 फरवरी को जारी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य की 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक गन्ना किसानों को 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी का भुगतान कर दिया है। शुगर कमिश्नरेट की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, पेराई कर रही 206 चीनी मिलों में से 157 चीनी मिलों ने 15 फरवरी के आखिर तक पूरा एफआरपी का भुगतान नहीं किया है तथा इस दौरान केवल 49 मिलों ने ही 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान किया है। 31 जनवरी तक राज्य की चीनी मिलों ने 870.11 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

इस गन्ने के लिए (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) कुल एफआरपी 33,697 करोड़ रुपये होता है। इसमें से 29,382 करोड़ रुपये (कटिंग और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर) का भुगतान किसानों को किया जा चुका हैं तथा 49 फैक्ट्रियों ने 100 फीसदी एफआरपी का भुगतान कर दिया है। 58 फैक्ट्रियों ने 80 से 99.99 फीसदी एफआरपी का भुगतान किसानों को किया है। 58 फैक्ट्रियों ने 60 से 79.99 फीसदी एफआरपी किसानों के अकाउंट में ट्रांसफर किया है। 41 फैक्ट्रियों ने 60 परसेंट से कम एफआरपी अभी तक किसानों को दिया है। अत: राज्य की गन्ना मिलों पर 4,315 करोड़ रुपये का एफआरपी अभी बकाया है।

चालू समर सीजन के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई 2.19 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। चालू समर सीजन 2026 के शुरूआती चरण में फसलों की कुल बुआई पिछले साल की तुलना में 2.19 फीसदी आगे चल रही है, हालांकि इस दौरान धान की रोपाई 2.73 फीसदी पिछड़ रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार 13 फरवरी 2026 तक देशभर में समर सीजन की फसलों की बुआई बढ़कर 15.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 14.75 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

समर की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू सीजन में घटकर 12.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 13.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। समर सीजन में धान की रोपाई सामान्यत 31.49 लाख हेक्टेयर में होती है तथा फसल सीजन 2025 में इसकी रोपाई 33.28 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

समर सीजन में दालों की बुआई बढ़कर 0.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 0.50 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। समर में दलहन की प्रमुख फसल मूंग की बुआई 44 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के लगभग बराबर है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू समर सीजन में बढ़कर 82 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 50 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान समर मक्का की बुआई 63 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 48 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 99 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 59 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू समर सीजन में बढ़कर 87 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल के 49 हजार हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। इस दौरान सनफ्लावर और शीशम सीड की बुआई शुरू हो चुकी है। 

मध्य फरवरी तक चीनी का उत्पादन 14 फीसदी बढ़कर 225 लाख टन के पार - एनएफसीएसएफ

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 14 फरवरी तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 13.90 फीसदी बढ़कर 225.30 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 197.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था। देशभर के राज्यों में अब तक तकरीबन 80 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी है।


नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के आकड़ों के अनुसार 14 फरवरी 2026 तक 454 चीनी मिलों में पेराई चल रही है, जबकि सीजन में कुल 534 मिलों में पेराई हो रही थी। अत: तक 80 मिलें पेराई बंद कर चुकी है। चालू सीजन में देशभर की चीनी मिलों ने अब तक 2419.59 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

चालू पेराई सीजन में गन्ने में रिकवरी की दर पिछले पेराई सीजन की तुलना में ज्यादा आई है। चालू सीजन में अब तक औसत चीनी की रिकवरी की दर 9.31 फीसदी की बैठी है जबकि पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में औसत चीनी रिकवरी की दर 9.09 फीसदी बैठी थी।

पेराई सीजन 2024-25 के दौरान देशभर में 532 चीनी मिलों ने पेराई में हिस्सा लिया था और 14 फरवरी 2025 तक 75 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दी थी तथा इस दौरान चीनी मिलों द्वारा 2176.97 लाख टन गन्ना पेराई कर 197.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

चीनी उत्पादन के मामलें में महाराष्ट्र सबसे आगे है और उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है। एनएफसीएसएफ के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र में 14 फरवरी तक 89.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश में इस दौरान 65.60 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है। तीसरे नंबर पर कर्नाटक है।कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 14 फरवरी तक 41.70 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।

सोमवार को दिल्ली में एम ग्रेड चीनी के थोक दाम 4,370 रुपये और कानपुर में 4,400 रुपये तथा मुंबई में 4,120 रुपये तथा कोलकाता में 4,380 रुपये प्रति क्विंटल रहे। इस दौरान दिल्ली में चीनी के रिटेल भाव 46 रुपये और कानपुर में 45 रुपये तथा मुंबई और कोलकाता में क्रमश: 45-45 रुपये प्रति किलो बोले गए।

सीसीआई ने 28,800 गांठ कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 9 फरवरी से 13 फरवरी के बीच फसल सीजन 2025-26 के दौरान खरीदी हुई 28,800 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की।  निगम ने अपनी बिक्री को बढ़ावा देने के लिए 2025-26 की कॉटन की कीमत में 1,400-1,700 रुपये प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की कटौती की है।


स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शनिवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमत स्थिर हो गई।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शनिवार को 100 रुपये तेज होकर 54,000 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,270 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,150 से 5,280 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,300 से 5,470 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 50,000 से 51,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 93,700 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने से गुजरात में कॉटन की कीमतों में सुधार, लेकिन इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार अमेरिका एवं बांग्लादेश के बीच हुई ट्रेड डील के बाद घरेलू मिलें जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है।

घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। इसलिए अधिकांश मिलें इन्वेंट्री नहीं बढ़ाना चाहती। चालू सीजन में कॉटन का आयात भी रिकॉर्ड होने का अनुमान है। सीसीआई लगातार घरेलू बाजार में कॉटन की बिकवाली कर रही है तथा चालू सीजन में सीसीआई ने 89 लाख गांठ के करीब कॉटन की खरीद की है। ऐसे में कॉटन की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है।

14 फ़रवरी 2026

केंद्र ने 30 लाख टन गेहूं एवं गेहूं उत्पादों के साथ 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात को मंजूरी दी

नई दिल्ली, 13 फरवरी। केंद्र सरकार ने देश में गेहूं और चीनी के जरुरत से ज्यादा स्टॉक को हल्का करने और इनकी कीमतों में स्थिरता को ध्यान में रखते हुए 25 लाख टन गेहूं के साथ-साथ 5 लाख टन गेहूं उत्पादों एवं पांच लाख टन चीनी के और निर्यात को मंजूरी दी है।


केंद्र सरकार ने गेहूं और चीनी के निर्यात को मंजूरी दे दी है। सरकार ने 25 लाख टन गेहूं, 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है। यह निर्णय घरेलू बाजार की उपलब्ध स्टॉक और कीमतों के व्यापक आकलन के बाद लिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्यात की इस अनुमति से देश की खाद्य सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के केंद्रीय भंडार में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध होने का अनुमान है। वहीं, निजी संस्थाओं के पास 2025-26 के दौरान लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 32 लाख टन अधिक है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर का हो गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मजबूत खरीद तंत्र पर किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है और आने वाले समय में बेहतर उत्पादन की संभावना को मजबूत करता है। अधिक स्टॉक, कीमतों में नरमी और फसल आवक के चरम समय में मजबूरी में बिक्री को रोकने के उद्देश्य से सरकार ने गेहूं और गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है। इससे घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिरता, स्टॉक रोटेशन में सुधार और किसानों को बेहतर दाम मिलने में मदद मिलेगी।

चीनी निर्यात को भी मिली अतिरिक्त मंजूरी

केंद्र सरकार ने चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान इच्छुक चीनी मिलों को अतिरिक्त 5 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का भी फैसला किया है। इससे पहले नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई थी। सरकारी आदेश के अनुसार, अतिरिक्त चीनी का निर्यात कोटा उन्हीं मिलों को मिलेगा, जो आवंटित मात्रा का कम से कम 70 फीसदी निर्यात 30 जून 2026 तक पूरा करेंगी। चीनी के कोटा का आवंटन आनुपातिक आधार पर किया जाएगा और इसे किसी अन्य मिल के साथ बदला या स्थानांतरित नहीं किया जा सकेगा।

सरकार का मानना है कि इस फैसले से गेहूं और चीनी दोनों के निर्यात में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश में उपलब्ध अतिरिक्त स्टॉक के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे किसानों की आय को मजबूती और कृषि बाजारों में स्थिरता आएगी।

चालू तेल वर्ष की पहली तिमाही में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले तीन महीनों नवंबर-25 एवं जनवरी-26 के दौरान देश में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 2 फीसदी कम होकर 3,960,102 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 4,046,423 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जनवरी 2026 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 20 फीसदी बढ़कर 1,339,375 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी में इनका आयात 1,119,893 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,311,847 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 27,528 टन का हुआ है।

जनवरी 2026 में खाद्य तेलों का आयात थोड़ा कम होकर 13.12 लाख टन का रह गया, जबकि दिसंबर 2025 में 13.62 लाख टन का था। हालांकि, जनवरी 2026 में आयात 20 फीसदी बढ़कर 13.39 लाख टन हो गया, जबकि पिछले साल यह 11.20 लाख टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) के दौरान पाम तेल का आयात 18 फीसदी बढ़कर 19.08 लाख टन का हो गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इनका आयात 16.22 लाख टन का हुआ था। पहली फरवरी, 2026 को पाम तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 4.53 लाख टन से बढ़कर 4.86 लाख टन का बताया गया, जो पिछले महीनों से 33,000 टन ज्यादा है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सोया तेल का आयात 9 फीसदी घटकर 12.03 लाख टन का रह गया, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान 12.72 लाख टन का आयात हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सोया तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.90 लाख टन का है, जबकि पिछले महीनों में यह 3.00 लाख टन था, जो कि 1.10 लाख टन कम है।

पहली तिमाही (नवंबर’25-जनवरी’26) में क्रूड सनफ्लावर तेल का आयात 15 फीसदी घटकर 7.59 लाख टन का ही हुआ है, जबकि नवंबर’24-जनवरी’25 के दौरान इसका आयात 8.94 लाख टन का हुआ था। 1 फरवरी, 2026 को सनफ्लावर तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 1.85 लाख टन बताया गया, जबकि पिछले महीनों में यह 2.00 लाख टन था, जो कि 15,000 टन कम है।

नवंबर 2025 के दौरान, नेपाल ने लगभग 54,000 टन रिफाइंड तेल का निर्यात किया, जिसमें 47,639 टन रिफाइंड सोया तेल, 3,022 टन रिफाइंड सूरजमुखी तेल और 2,484 टन आरबीडी पामोलिन शामिल थे। दिसंबर 2025 में, नेपाल ने, भारत को लगभग 48,000 टन रिफाइंड तेल निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से रिफाइंड सोया तेल और थोड़ी मात्रा में सूरजमुखी तेल और आरबीडी पामोलिन शामिल थे।

एसईए के अनुसार नवंबर’25-जनवरी’26 के दौरान, 617,837 टन के मुकाबले सिर्फ़ 60,445 टन रिफाइंड तेल के आयात किया गया और नवंबर’24-जनवरी’25 के 3,303,867 टन के मुकाबले 3,818,252 टन क्रूड तेल का आयात किया गया। अत: रिफाइंड तेल का रेश्यो इस दौरान 16 फीसदी से घटकर 2 फीसदी रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण क्रूड तेल का रेश्यो 84 फीसदी से बढ़कर 98 फीसदी हो गया।

जनवरी में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भारतीय बंदरगाह पर तेजी का रुख रहा। जनवरी में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,079 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,058 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर जनवरी में बढ़कर 1,119 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि दिसंबर में इसका भाव 1,094 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव दिसंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1,188 डॉलर प्रति टन था, जोकि जनवरी में बढ़कर 1,220 डॉलर प्रति टन का हो गया।

जनवरी अंत तक उत्पादक मंडियों में 220 लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की आवक - सीएआई

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2025-26 में जनवरी अंत तक उत्पादक राज्यों की मंडियों में 220.58 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो की आवक हो चुकी है।


देश में कॉटन का उत्पादन 317 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि इसके पहले के अनुमान के बराबर ही है। मालूम हो कि उद्योग ने दिसंबर 2025 में 309.50 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान जारी किया था, जोकि आरंभिक अनुमान से 4.50 लाख गांठ ज्यादा था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन में 50 लाख गांठ कॉटन के आयात का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 41 लाख गांठ से 9 लाख गांठ ज्यादा है। चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत तक 35 लाख गांठ आयातित कॉटन भारतीय बंदरगाह पर पहुंच चुकी है।

चालू फसल सीजन 2025-26 के दौरान देश से 15 लाख गांठ कॉटन के निर्यात का अनुमान है, जबकि चालू फसल सीजन के पहले चार महीनों में जनवरी अंत देश से 6 लाख गांठ कॉटन का निर्यात हो चुका है।

सीएआई के अनुसार चालू फसल सीजन 2025-26 में देश में 317 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन का कुल उत्पादन 30.50 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें पंजाब की हिस्सेदारी 2 लाख गांठ, हरियाणा की 7 लाख गांठ के अलावा अपर राजस्थान में 12.50 लाख गांठ के अलावा लोअर राजस्थान में 9 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

मध्य भारत के राज्यों में कॉटन का उत्पादन 187 लाख गांठ होने का अनुमान है। इसमें गुजरात की हिस्सेदारी 75 लाख गांठ तथा महाराष्ट्र की 94 लाख गांठ के अलावा मध्य प्रदेश की 18 लाख गांठ है।

दक्षिण भारत के राज्यों में चालू फसल सीजन में 94 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है। इसमें तेलंगाना की हिस्सेदारी 45 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश 17 लाख गांठ के अलावा कर्नाटक 27 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 5 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

अन्य राज्यों में ओडिशा में चालू सीजन में 3.50 लाख गांठ तथा अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

एसएआई के अनुसार चालू फसल सीजन के आरंभ में 60.59 लाख गांठ का बकाया स्टॉक बचा हुआ था जबकि 317 लाख गांठ का उत्पादन होने की उम्मीद है। इस दौरान 50 लाख गांठ आयातित कॉटन आयेगी। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता 427.59 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल खपत 305 लाख गांठ की होने का अनुमान है, इसके अलावा 15 लाख गांठ का निर्यात हो जायेगा। अत: क्लोजिंग स्टॉक 107.59 लाख गांठ का बैठेगा। सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी एवं जिनर्स के साथ ही व्यापारियों एवं निर्यातकों के पास 131.17 लाख गांठ कॉटन का स्टॉक है। 

सीसीआई ने बिनौले की बिक्री कीमतों में कटौती की, हाजिर बाजार में इसके भाव पर दबाव

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने सोमवार को बिनौले की बिक्री कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की। इससे हाजिर बाजार में भी इसकी कीमतों पर दबाव देखा गया।


सीसीआई ने सोमवार को 3 ई नीलामी के माध्यम से 6,89,300 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की तथा बिक्री केंद्रों पर इसकी कीमतों में कटौती की। सीसीआई द्वारा बिनौले के बिक्री दाम घटाने से हाजिर बाजार में इसकी कीमतों में 75 से 100 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया।

तेल मिलों की खरीद कमजोर होने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में बिनौले की कीमत 100 रुपये कमजोर हुई। हरियाणा में बिनौले के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 3,800 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 100 रुपये घटकर 3,850 से 4,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। बिनौला के दाम में पंजाब में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 3,875 से 3,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मध्य प्रदेश में बिनौले के बिक्री दाम 75 रुपये कमजोर होकर 3,500 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

पशु आहार वालों की मांग कमजोर होने से कपास खली की कीमतों में भी मंदा आया। सेलू में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 90 रुपये कमजोर होकर 3,680 रुपये प्रति क्विंटल स्थिर रह गई। इस दौरान भोकर में रेगुलर कपास खली की कीमतों में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 3,670 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। शाहपुर में रेगुलर कपास खली के भाव 90 रुपये कमजोर होकर 3,680 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरा बीड में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली के दाम कमजोर होकर 3,650 से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

व्यापारियों के अनुसार प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास बिनौले का स्टॉक कम है। चालू फसल सीजन 2025-26 में सीसीआई समर्थन मूल्य पर 89 लाख गांठ कॉटन की खरीद कर चुकी है जिस कारण बिनौले का निगम के पास बंपर स्टॉक है। निगम लगातार घरेलू बाजार में बिनौले की बिक्री कर रही है। अत: हाजिर बाजार में बिनौले के साथ ही कपास खली के भाव में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री भाव पर ही निर्भर कर रही है।

09 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन के पार पहुंचा



नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 4 फरवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 59.81 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

शुगर कमिश्नर के अनुसार 4 जनवरी तक राज्य में 870.29 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 80.63 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.27 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 4 फरवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 657.6 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 59.81 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.1 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 187.24 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 20.29 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.84 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं। इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 197.45 लाख टन गन्ने की पेराई कर 18.92 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.58 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 186.23 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 15.57 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.37 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट में पेराई चल रही हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 108.22 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 9.54 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.82 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) में पेराई चल रही है तथा उन्होंने 85.29 लाख टन गन्ने की पेराई कर 6.72 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.88 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 94.91 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.65 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.12 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 1.41 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

दालों में आत्मनिर्भर भारत, मध्य प्रदेश के सिहोर में होगी नेशनल प्लसेस कॉन्फ्रेंस

सिहोर/नई दिल्ली। देश को दालों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को गति देने के लिए शनिवार, 7 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के आमला स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (फूड लेग्यूम रिसर्च प्लेटफार्म – एफएलआरपी) में राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भी शामिल होंगे।


यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत 7 फरवरी को सुबह पौधारोपण से होगी। तत्पश्चात, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह खेतों में उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं दलहन की नई किस्मों के प्रदर्शन का अवलोकन करेंगे और किसानों से संवाद करेंगे। वे यहां प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र और पादप जीनोमिक्स, ऊतक संवर्धन, प्रजनन एवं रोग विज्ञान से संबंधित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन भी करेंगे। साथ ही, दलहन के उन्नत बीज, उत्पाद एवं तकनीक से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद “दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन” पर राष्ट्रीय परामर्श शुरू होगा। इस अवसर पर "पल्सेस मिशन पोर्टल” भी लांच होगा और प्रगतिशील किसानों को उन्नत किस्मों के बीजों का प्रतीकात्मक वितरण किया जाएगा।

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान देश में दालों के उत्पादन, एमएसपी, बीज प्रणाली, वैल्यू चेन और किसानों की आय में वृद्धि से जुड़ी सरकार की रणनीति पर विस्तृत संबोधन देंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा।

इस राष्ट्रीय परामर्श में ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भाग लेंगे, वहीं पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़ेंगे।

आईसीएआर और आईसीएआरडीए के शीर्ष वैज्ञानिक, नेफेड–एनसीसीएफ, राष्ट्रीय बीज निगम, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी संस्थाएँ, बीज व प्रसंस्करण क्षेत्र के साथी और प्लांट–बेस्ड फूड सेक्टर के प्रतिनिधि एक प्लेटफ़ॉर्म पर बैठकर नई किस्मों, बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन, मशीनीकरण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव की ठोस रणनीति पर विचार–विमर्श करेंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण मिशन का लक्ष्य है कि भारत दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने, आयात पर निर्भरता कम हो और किसानों को अच्छी उपज के साथ उचित दाम भी सुनिश्चित हो। इस राष्ट्रीय परामर्श में अरहर, उड़द, मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों पर विशेष ध्यान देते हुए बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण, विपणन और एमएसपी पर समयबद्ध खरीद जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि खेत से थाली तक पूरी दलहन वैल्यू चेन मजबूत हो सके।

यह राष्ट्रीय परामर्श केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करेगा तथा विभिन्न हितधारकों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर भविष्य की स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने में मदद करेगा।

शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि इस पहल से न केवल दलहन क्षेत्र को नई दिशा मिले, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और दालों में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में भी ऐतिहासिक योगदान हो।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित - केंद्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली। भारत एवं अमेरिका व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि यह समझौता “भारतीय किसानों के हितों” की रक्षा के लिए पूरी सावधानी के साथ किया गया है। भारत तथा अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो जाएगा, जबकि वाशिंगटन ने दावा किया है कि यह समझौता उसे नई दिल्ली को अधिक कृषि उत्पाद निर्यात करने में मदद करेगा।


केंद्रीय कृषि मंत्री के अनुसार प्रमुख कृषि क्षेत्र जिसमें मुख्य फसलें और डेयरी शामिल हैं, इनका हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी भी तरह से घरेलू कृषि हितों से समझौता नहीं करता है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। हम संतुलित और मजबूत बातचीत में विश्वास करते हैं, संघर्ष में नहीं।किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें और बाजरा सभी सुरक्षित हैं। साथ ही हमारे डेयरी उत्पाद भी सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, खासकर टैरिफ में कमी के माध्यम से, जिसका किसानों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। टैरिफ में कमी से हमारा निर्यात बढ़ेगा। जब कपड़ा निर्यात बढ़ेगा, तो कपास किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि हमारी सभी मुख्य फसलें और डेयरी सेक्टर सुरक्षित हैं। यह डील किसानों की भलाई और देश के हितों को ध्यान में रखकर की गई है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने बाजार इस तरह से नहीं खोले हैं कि इससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो।

भारत एवं अमेरिका की ट्रेड डील से कॉटन और टेक्सटाइल सेक्टर को होगा फायदा - सीएआई

नई दिल्ली। पूरे भारतीय कॉटन व्यापार और इंडस्ट्री की ओर से, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ मुद्दे के समाधान का स्वागत करता है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल पर निर्यात शुल्क कम होकर 18 फीसदी रह गया है।


सीएआई के अध्यक्ष विनय एन कोटक के अनुसार भारत के साथ अमेरिका की ट्रेड डील से घरेलू कॉटन उद्योग और टेक्सटाइल सेक्टर को फायदा होगा। यह आपसी व्यापार के लिए एक पॉजिटिव और आगे की सोच वाला डेवलपमेंट है और इससे भारत तथा यूएसए के बीच व्यापार संबंध और मजबूत और आपसी फायदे वाले बनेंगे।

अमेरिका टेक्सटाइल में भारत के सबसे अहम ट्रेडिंग पार्टनर में से एक बना हुआ है और लंबे समय की प्लानिंग और कॉम्पिटिटिवनेस के लिए सही ट्रेड पॉलिसी जरूरी हैं और इससे भारत और यूएसए के बीच गहरे सहयोग के रास्ते खुलते हैं।

विनय एन कोटक के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स द्वारा भारतीय सामान के आयात पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर एक जैसा 18 फीसदी करने से लागत का दबाव कम होगा। इससे मार्केट एक्सेस बेहतर होने के साथ ही भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने और सबसे अच्छा कैपेसिटी इस्तेमाल फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे किसानों से लेकर जिनिंग और प्रेसिंग फैक्ट्रियों तथा सभी टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग प्रोडक्ट्स के मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स तक कॉटन और टेक्सटाइल वैल्यू चेन के सभी स्टेकहोल्डर्स को इसका फायदा मिलेगा।

चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.40 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय



नई दिल्ली, 3 फरवरी। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.40 फीसदी बढ़कर 676.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 660.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार 30 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 139.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 134.52 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 96.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में बढ़कर 6.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5.678 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 97.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.67 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 60.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 59.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 23.13 लाख हेक्टेयर और मक्का की 29.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 25.17 और 27.80 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 44.73 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू पेराई सीजन में जनवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी ज्यादा- इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 31 जनवरी तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी बढ़कर 195.03 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 164.79 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में 515 मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन की समान अवधि में केवल 501 मिलें ही पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी 2026 तक 55.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो कि पिछले पेराई सीजन के 52.6 लाख टन से ज्यादा है। महाराष्ट्र में चालू सीजन में 78.72 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि में 55.52 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में वर्तमान में 206 चीनी मिल चल रही हैं, जबकि पिछले साल इस समय केवल 190 मिलें चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 38.1 लाख टन चीनी का उत्पादन जनवरी अंत तक हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 33.27 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। गुजरात में चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी तक 4.9 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर है। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 2.52 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 1.68 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था। अन्य राज्यों में जनवरी अंत तक 15.69 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 16.82 लाख टन की तुलना में कम है।

इस्मा के अनुसार बचे हुए गन्ने के रकबे का अंदाजा लगाने के लिए पूरे भारत से सैटेलाइट प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही, इस्मा की एग्रीकल्चर टीम खड़ी फसल का जमीनी सर्वे करने के लिए बड़े चीनी उत्पादक राज्यों का दौरा कर रही है। खेत की स्थितियों, सैटेलाइट डेटा, अब तक की अनुमानित पैदावार और रिकवरी और बाकी सीजन के लिए उम्मीद की गई पैदावार और रिकवरी के डिटेल्ड एनालिसिस के आधार पर, इस्मा फरवरी 2026 में चीनी उत्पादन का अपना तीसरा आरंभिक अनुमान जारी करेगा।

इस्मा के डीजी के अनुसार जैसे-जैसे पेराई सीजन आगे बढ़ रहा है उससे चीनी मिलों में चीनी का स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया बढ़ने लगा है। चीनी उत्पादन की लागत और चीनी की कमाई के बीच अंतर के कारण इंडस्ट्री को ऑपरेशनल और कैश-फ्लो के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।