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09 फ़रवरी 2026

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन के पार पहुंचा



नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 4 फरवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 35 फीसदी बढ़कर 80.63 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 59.81 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

शुगर कमिश्नर के अनुसार 4 जनवरी तक राज्य में 870.29 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 80.63 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 9.27 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 4 फरवरी तक कुल 199 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में भी 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई चल रही थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 657.6 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 59.81 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 9.1 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 187.24 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 20.29 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.84 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं। इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 197.45 लाख टन गन्ने की पेराई कर 18.92 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.58 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 47 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 30 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 186.23 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 15.57 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8.37 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 26 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 11 प्राइवेट में पेराई चल रही हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 108.22 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 9.54 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.82 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) में पेराई चल रही है तथा उन्होंने 85.29 लाख टन गन्ने की पेराई कर 6.72 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.88 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 20 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 94.91 लाख टन गन्ने की पेराई कर 8.65 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.12 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 1.41 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

दालों में आत्मनिर्भर भारत, मध्य प्रदेश के सिहोर में होगी नेशनल प्लसेस कॉन्फ्रेंस

सिहोर/नई दिल्ली। देश को दालों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को गति देने के लिए शनिवार, 7 फरवरी 2026 को मध्य प्रदेश के सिहोर जिले के आमला स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (फूड लेग्यूम रिसर्च प्लेटफार्म – एफएलआरपी) में राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भी शामिल होंगे।


यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (आईसीएआरडीए) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत 7 फरवरी को सुबह पौधारोपण से होगी। तत्पश्चात, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह खेतों में उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं दलहन की नई किस्मों के प्रदर्शन का अवलोकन करेंगे और किसानों से संवाद करेंगे। वे यहां प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र और पादप जीनोमिक्स, ऊतक संवर्धन, प्रजनन एवं रोग विज्ञान से संबंधित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन भी करेंगे। साथ ही, दलहन के उन्नत बीज, उत्पाद एवं तकनीक से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद “दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन” पर राष्ट्रीय परामर्श शुरू होगा। इस अवसर पर "पल्सेस मिशन पोर्टल” भी लांच होगा और प्रगतिशील किसानों को उन्नत किस्मों के बीजों का प्रतीकात्मक वितरण किया जाएगा।

कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान देश में दालों के उत्पादन, एमएसपी, बीज प्रणाली, वैल्यू चेन और किसानों की आय में वृद्धि से जुड़ी सरकार की रणनीति पर विस्तृत संबोधन देंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा।

इस राष्ट्रीय परामर्श में ओडिशा, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री भाग लेंगे, वहीं पश्चिम बंगाल के कृषि मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक से जुड़ेंगे।

आईसीएआर और आईसीएआरडीए के शीर्ष वैज्ञानिक, नेफेड–एनसीसीएफ, राष्ट्रीय बीज निगम, विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), सहकारी संस्थाएँ, बीज व प्रसंस्करण क्षेत्र के साथी और प्लांट–बेस्ड फूड सेक्टर के प्रतिनिधि एक प्लेटफ़ॉर्म पर बैठकर नई किस्मों, बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन, मशीनीकरण, वैल्यू एडिशन और बाजार से जुड़ाव की ठोस रणनीति पर विचार–विमर्श करेंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस महत्वपूर्ण मिशन का लक्ष्य है कि भारत दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बने, आयात पर निर्भरता कम हो और किसानों को अच्छी उपज के साथ उचित दाम भी सुनिश्चित हो। इस राष्ट्रीय परामर्श में अरहर, उड़द, मसूर जैसी प्रमुख दलहनी फसलों पर विशेष ध्यान देते हुए बीज, उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, भंडारण, विपणन और एमएसपी पर समयबद्ध खरीद जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, ताकि खेत से थाली तक पूरी दलहन वैल्यू चेन मजबूत हो सके।

यह राष्ट्रीय परामर्श केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगी संघवाद की भावना को और सुदृढ़ करेगा तथा विभिन्न हितधारकों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर भविष्य की स्पष्ट और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने में मदद करेगा।

शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि इस पहल से न केवल दलहन क्षेत्र को नई दिशा मिले, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और दालों में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करने में भी ऐतिहासिक योगदान हो।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देश के किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित - केंद्रीय कृषि मंत्री

नई दिल्ली। भारत एवं अमेरिका व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि यह समझौता “भारतीय किसानों के हितों” की रक्षा के लिए पूरी सावधानी के साथ किया गया है। भारत तथा अमेरिका व्यापार समझौते से अमेरिका में भारतीय सामानों पर टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो जाएगा, जबकि वाशिंगटन ने दावा किया है कि यह समझौता उसे नई दिल्ली को अधिक कृषि उत्पाद निर्यात करने में मदद करेगा।


केंद्रीय कृषि मंत्री के अनुसार प्रमुख कृषि क्षेत्र जिसमें मुख्य फसलें और डेयरी शामिल हैं, इनका हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसी भी तरह से घरेलू कृषि हितों से समझौता नहीं करता है। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता कूटनीति, विकास और गरिमा का एक नया उदाहरण है। हम संतुलित और मजबूत बातचीत में विश्वास करते हैं, संघर्ष में नहीं।किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की गई है। किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें और बाजरा सभी सुरक्षित हैं। साथ ही हमारे डेयरी उत्पाद भी सुरक्षित हैं।

उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, खासकर टैरिफ में कमी के माध्यम से, जिसका किसानों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। टैरिफ में कमी से हमारा निर्यात बढ़ेगा। जब कपड़ा निर्यात बढ़ेगा, तो कपास किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि मैं भरोसा दिलाता हूं कि हमारी सभी मुख्य फसलें और डेयरी सेक्टर सुरक्षित हैं। यह डील किसानों की भलाई और देश के हितों को ध्यान में रखकर की गई है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने बाजार इस तरह से नहीं खोले हैं कि इससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो।

भारत एवं अमेरिका की ट्रेड डील से कॉटन और टेक्सटाइल सेक्टर को होगा फायदा - सीएआई

नई दिल्ली। पूरे भारतीय कॉटन व्यापार और इंडस्ट्री की ओर से, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ मुद्दे के समाधान का स्वागत करता है, जिससे भारतीय टेक्सटाइल पर निर्यात शुल्क कम होकर 18 फीसदी रह गया है।


सीएआई के अध्यक्ष विनय एन कोटक के अनुसार भारत के साथ अमेरिका की ट्रेड डील से घरेलू कॉटन उद्योग और टेक्सटाइल सेक्टर को फायदा होगा। यह आपसी व्यापार के लिए एक पॉजिटिव और आगे की सोच वाला डेवलपमेंट है और इससे भारत तथा यूएसए के बीच व्यापार संबंध और मजबूत और आपसी फायदे वाले बनेंगे।

अमेरिका टेक्सटाइल में भारत के सबसे अहम ट्रेडिंग पार्टनर में से एक बना हुआ है और लंबे समय की प्लानिंग और कॉम्पिटिटिवनेस के लिए सही ट्रेड पॉलिसी जरूरी हैं और इससे भारत और यूएसए के बीच गहरे सहयोग के रास्ते खुलते हैं।

विनय एन कोटक के अनुसार यूनाइटेड स्टेट्स द्वारा भारतीय सामान के आयात पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर एक जैसा 18 फीसदी करने से लागत का दबाव कम होगा। इससे मार्केट एक्सेस बेहतर होने के साथ ही भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने और सबसे अच्छा कैपेसिटी इस्तेमाल फिर से शुरू होने की उम्मीद है, जिससे किसानों से लेकर जिनिंग और प्रेसिंग फैक्ट्रियों तथा सभी टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग प्रोडक्ट्स के मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स तक कॉटन और टेक्सटाइल वैल्यू चेन के सभी स्टेकहोल्डर्स को इसका फायदा मिलेगा।

चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.40 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय



नई दिल्ली, 3 फरवरी। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.40 फीसदी बढ़कर 676.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 660.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार 30 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 139.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 134.52 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 96.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में बढ़कर 6.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 5.678 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 97.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.67 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 60.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 59.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 23.13 लाख हेक्टेयर और मक्का की 29.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 25.17 और 27.80 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 44.73 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू पेराई सीजन में जनवरी अंत तक चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी ज्यादा- इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 31 जनवरी तक देशभर के राज्यों में चीनी का उत्पादन 18.35 फीसदी बढ़कर 195.03 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में 164.79 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।


इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के आंकड़ों के अनुसार चालू सीजन में 515 मिलों में पेराई चल रही हैं, जबकि पिछले सीजन की समान अवधि में केवल 501 मिलें ही पेराई चल रही थी।

चालू पेराई सीजन में उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी 2026 तक 55.01 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जो कि पिछले पेराई सीजन के 52.6 लाख टन से ज्यादा है। महाराष्ट्र में चालू सीजन में 78.72 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि में 55.52 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था। राज्य में वर्तमान में 206 चीनी मिल चल रही हैं, जबकि पिछले साल इस समय केवल 190 मिलें चल रही थी।

कर्नाटक में चालू पेराई सीजन में 38.1 लाख टन चीनी का उत्पादन जनवरी अंत तक हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 33.27 लाख टन की तुलना में ज्यादा है। गुजरात में चालू पेराई सीजन में 31 जनवरी तक 4.9 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के बराबर है। तमिलनाडु में चालू पेराई सीजन में 2.52 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में केवल 1.68 लाख टन चीनी का उत्पादन ही हुआ था। अन्य राज्यों में जनवरी अंत तक 15.69 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 16.82 लाख टन की तुलना में कम है।

इस्मा के अनुसार बचे हुए गन्ने के रकबे का अंदाजा लगाने के लिए पूरे भारत से सैटेलाइट प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही, इस्मा की एग्रीकल्चर टीम खड़ी फसल का जमीनी सर्वे करने के लिए बड़े चीनी उत्पादक राज्यों का दौरा कर रही है। खेत की स्थितियों, सैटेलाइट डेटा, अब तक की अनुमानित पैदावार और रिकवरी और बाकी सीजन के लिए उम्मीद की गई पैदावार और रिकवरी के डिटेल्ड एनालिसिस के आधार पर, इस्मा फरवरी 2026 में चीनी उत्पादन का अपना तीसरा आरंभिक अनुमान जारी करेगा।

इस्मा के डीजी के अनुसार जैसे-जैसे पेराई सीजन आगे बढ़ रहा है उससे चीनी मिलों में चीनी का स्टॉक बढ़ रहा है। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि गन्ने के पेमेंट का बकाया बढ़ने लगा है। चीनी उत्पादन की लागत और चीनी की कमाई के बीच अंतर के कारण इंडस्ट्री को ऑपरेशनल और कैश-फ्लो के दबाव का सामना करना पड़ रहा है।