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10 जनवरी 2026

24वें एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस का आयोजन 27 से 28 फरवरी को गुजरात में

नई दिल्ली, गुजरात में 27 से 28 फरवरी को सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) 24वें ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 की मेजबानी करेगा, जिसमें कैस्टर सीड एवं कैस्टर तेल की मांग एवं उत्पादन के रुझानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) 24वें एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 की घोषणा करते हुए बहुत खुश है, जो कि कैस्टर उद्योग का डेडिकेटेड एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म है। इसका आयोजन 27-28 फरवरी, 2026 को मशहूर लीला गांधीनगर, गुजरात, भारत में होगा।

भारत दुनिया की 90 फीसदी से ज़्यादा कैस्टर तेल की डिमांड पूरी करता है, जिससे वर्ल्ड कैस्टर सिनेरियो में इसका दबदबा है। भारत का कैस्टर तेल और डेरिवेटिव्स का एक्सपोर्ट हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपये (यूएसा डॉलर में 1.8 बिलियन) का है। ग्लोबल कैस्टर डेरिवेटिव्स मार्केट, जिसका अंदाज़ा यूएस डॉलर में 6.0 बिलियन से ज्यादा है, भारत पर सबसे ज्यादा निर्भर है।

कैस्टर उद्योग को एक साथ लाने की अपनी कोशिश में, एसईए 24वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर रहा है ताकि कैस्टर उद्योग के सामने आने वाले मुद्दों पर बात की जा सके और उन पर फोकस किया जा सके और साथ ही भारत और विदेश के जाने-माने स्पीकर्स और पैनल मेंबर्स के साथ अच्छी बातचीत करके उसका हल निकाला जा सकें। यह 24वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस कैस्टर बिजनेस से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा और विचारों के लेन-देन का एक खास मौका भी देगी, ताकि दुनिया भर में मैन्युफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स, टेक्नोलॉजिस्ट्स, कमोडिटी एक्सचेंज के प्लेयर्स, ब्रोकर्स, कैस्टर सीड किसानों और कैस्टर बिजनेस के डीलर्स के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान ढूंढा जा सके।

एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 में भागीदारी को बढ़ावा देने और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने के लिए एक खास प्लेटफॉर्म बनने वाला है। डेलीगेट्स को कैस्टर तेल और डेरिवेटिव्स के सप्लायर के साथ वन टू वन मीटिंग का मौका मिलेगा, जिससे नए बिजनेस के मौके खुलेंगे और मौजूदा पार्टनरशिप मजबूत होंगी।

08 जनवरी 2026

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भारतीय कृषि के समग्र विकास के लिए वैश्विक मंथ

बजट पूर्व बैठकों के क्रम में शिवराज सिंह ने किया अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों से संवाद


नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026, 
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आज प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय विकास साझेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। शिवराज सिंह बजट पूर्व लगातार बैठकें कर कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों से सीधा संवाद कर रहे हैं।

बैठक में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP), इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD), वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), डॉइचे गेज़ेलशाफ्ट फ़्यूर इंटर्नैशियोनाले ज़ुसामेनआर्बाइट (GIZ) और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधि सहित विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हुए।

भारत की समृद्ध कृषि यात्रा

बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि भारत की कृषि यात्रा खाद्य-अभाव से वैश्विक खाद्य आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनने तक पहुंची है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज देश कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यातक बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद अब पोषण सुरक्षा और सतत आजीविका को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

डिजिटल एग्रीकल्चर: कृषि नीति का मजबूत स्तंभ

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर भारत की कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और मंत्रालय इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई–नाम (e-NAM), डिजिटल फसल आकलन और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं के माध्यम से कृषि को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और किसान-केंद्रित बनाया जा रहा है।

जल संरक्षण: “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की दिशा में ठोस कदम

शिवराज सिंह चौहान ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जल संरक्षण और जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि माइक्रो-इरिगेशन, सिंचाई दक्षता बढ़ाने और जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने से किसानों की लागत घटेगी और उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

पोषण आधारित खेती और फसल विविधीकरण की दिशा में योजनाबद्ध कार्य

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बताया कि मंत्रालय पोषण आधारित खेती, मांग आधारित कृषि उत्पादन और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं पहले से ही संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से किसानों की आय बढ़ाने के साथ–साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

वैश्विक अनुभवों से सीख, भारत का मॉडल दुनिया के लिए उदाहरण

श्री चौहान ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में अपने सफल अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, साथ ही वैश्विक नवाचारों से सीखकर उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद परस्पर लाभकारी सहयोग, ज्ञान-साझेदारी और दीर्घकालिक नीति निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी संस्थानों के प्रतिनिधियों का धन्यवाद करते हुए आश्वासन दिया कि ऐसे संवाद भविष्य में भी नियमित रूप से जारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, निजी क्षेत्र और किसानों के सामूहिक प्रयास से भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, प्रौद्योगिकी–समर्थ और किसान–हितैषी बनाने का लक्ष्य पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

किसानों की आय व उत्पादकता बढ़ाने और नवाचार पर चर्चा

बैठक में संस्थानों के प्रतिनिधियों ने किसानों की आय और बढ़ाने, फसल उत्पादकता में सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने सहित विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। चर्चा के प्रमुख बिंदु थे: छोटे किसानों के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस और मूल्य संवर्धन, युवा और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और उन्नत क्रॉप मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से फसलों की रीयल-टाइम निगरानी और जोखिम प्रबंधन। साथ ही हाई वैल्यू क्रॉप्स, ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती पर जोर दिया गया।

बैठक में हाई वैल्यू क्रॉप्स, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि सही नीतिगत समर्थन और तकनीकी सहयोग से इन क्षेत्रों में किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं और कृषि को अधिक लाभकारी तथा पर्यावरण–अनुकूल बनाया जा सकता है।

बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी, ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हरियाणा में खाद्य आपूर्ति विभाग फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद के नियम कड़े करेगा

नई दिल्ली। हरियाणा में चालू खरीफ सीजन में हुए धान घोटाले से राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग ने बड़ा सबक लिया है। प्रदेश में आगामी सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर होने वाली फसलों की खरीद को लेकर नियमों में बदलाव किया जायेगा। जिंसों की सरकारी खरीद की जांच भी सख्त होगी। आगामी सीजन के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होने वाला कि अब गेटपास घर से नहीं बनेंगे। मंडी में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों के वाहनों की फिजिकल जांच होगी और फसल वाहन में है इसका सत्यापन किया जायेगा।


राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर का कहना है कि भविष्य में गड़बड़ी न हो इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभाग की तरफ से किसानों के वाहन की ट्रैकिंग की व्यवस्था होगी। जो किसान मंडी में फसल लेकर आएंगे उनके वाहन नंबर, वाहन की श्रेणी का लाइव फोटो होगा। जिस गेट से एंट्री होगी उस पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाये जायेंगे तथा कैमरे से निगरानी के बाद वाहन को अंदर आने की अनुमति होगी। गेट में अंदर घुसने से पहले किसान की फसल, वजन, किसान का नाम, पंजीकृत मोबाइल नंबर का ब्योरा भी दर्ज किया जायेगा।

मेरी फसल-मेरा ब्यौरा के अनुसार पंजीकृत फसल का क्षेत्र आदि ब्योरे से भी मिलान किया जाश्येगा। मंडी के गेट पर ही फिजिकल जांच होगी। संबंधित फसल ब्यौरे के अनुसार किसान के वाहन में हैं, इसका सत्यापन होने के बाद ही गेट पास काटा जाएगा। मंडी में जो निकासी वाले गेट होंगे वहां भी कैमरे लगाए जाएंगे और निकासी के दौरान भी किसानों के वाहनों की जांच होगी।

खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने किसानों के वाहनों की ट्रैकिंग को लेकर विभागीय मंत्री के समक्ष एक प्रेजेंटेशन दिया है। आगामी दिनों में दो और प्रेजेंटेशन मिलेंगे और बाद में सुझावों को शामिल करके इसे फाइनल किया जाएगा। मंत्री नागर का कहना है कि इसका लाभ यह होगा कि आढ़तियों व राइस मिल में खरीदे गए धान की वास्तविक रिपोर्ट तैयार हो सकेगी। जांच भी आसान होगी। मंडियों से राइस मिलों से धान की ढुलाई वाले वाहनों को लेकर भी और मजबूत ट्रैकिंग होगी। जो भी वाहन पहुंचेंगे उनमें निकासी के दौरान फसल थी या वाहन खाली था यह भी पता चल सकेगा।

धान घोटाले के संबंध में राज्य के खाद्य आपूर्ति विभाग पर अक्सर अनियमितताओं, धान की खरीद में गड़बड़ी, और किसानों से जुड़े घोटालों के आरोप लगते हैं, जिसमें बिचौलियों द्वारा हेराफेरी, गलत डेटा एंट्री, और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार शामिल है। अतः: इससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ती है, जैसे कि पोर्टल पर सही डेटा की अनिवार्यता और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।

चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुआई बढ़कर 2.65 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.65 फीसदी बढ़कर 634.14 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 617.74 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार 2 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 134.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 130.87 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 17.06 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 16.85 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 3.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 4.27 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 96.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.27 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। हालांकि मूंगफली की बुआई घटकर 3.13 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 51.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 50.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 20.74 लाख हेक्टेयर और मक्का की 23.32 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 22 और 21.87 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 6.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 17.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 14.90 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

गुजरात में चालू रबी में गेहूं, चना एवं मक्का की बुआई बढ़ी, मसालों की घटी - कृषि निदेशालय

नई दिल्ली। गुजरात में चालू रबी सीजन में गेहूं के साथ ही मक्का एवं चना की बुआई सामान्य क्षेत्रफल की तुलना में बढ़ी है, जबकि इस दौरान राज्य मसालों में जीरा के साथ ही धनिया की बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ी है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 5 जनवरी तक राज्य में रबी फसलों की बुआई 47.30 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 47.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी सीजन में राज्य में सामान्यत: 46.43 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई होती है।

चालू रबी सीजन में राज्य में गेहूं की बुआई बढ़कर 1,422,312 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 1,341,778 हेक्टेयर में ही हुई थी। इस दौरान मोटे अनाजों में मक्का की बुआई बढ़कर 142,253 हेक्टेयर में, ज्वार की 14,645 हेक्टेयर में तथा अन्य मोटे अनाजों की 14,613 हेक्टेयर में हुई है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 282,284 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 259,650 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। सरसों की बुआई बढ़कर 281,190 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी की समान अवधि में इसकी बुआई 257,529 हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी सीजन में दलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 938,828 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 910,683 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। चना की बुआई बढ़कर 888,992 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी की समान अवधि में इसकी बुआई 839,724 हेक्टेयर में ही हुई थी। अन्य दालों की बुआई 49,886 हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 70,595 हेक्टेयर की तुलना में कम है।

जीरा की बुआई राज्य में चालू रबी सीजन में घटकर 397,644 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक इसकी बुआई 473,615 हेक्टेयर में हो चुकी थी। इस दौरान धनिया की बुआई 125,336 हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 129,343 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है।

राजस्थान में गेहूं की बुआई 7 फीसदी से ज्यादा घटी, चना के साथ ही जौ की बढ़ी

नई दिल्ली। राजस्थान में चालू रबी सीजन में गेहूं की बुआई पिछले साल की तुलना में 7.34 फीसदी क्षेत्रफल में कम हुई है जबकि चना के साथ ही जौ की बुआई तय लक्ष्य से ज्यादा हुआ है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 2 जनवरी तक राज्य में गेहूं की बुआई केवल 35.55 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में इसकी बुआई 38.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य सरकार ने चालू रबी में बुआई का लक्ष्य 36 लाख हेक्टेयर का तय किया था।

चालू रबी में जौ की बुआई बढ़कर 4.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 3.30 लाख हेक्टेयर में हो पाई थी।

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई राज्य में बढ़कर 22.40 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 16.55 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी। चालू रबी में चना की बुआई का लक्ष्य 21.50 लाख हेक्टेयर तय किया गया था। अन्य रबी दलहन की बुआई 34 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 38 हजार हेक्टेयर की तुलना में कम है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 36.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 35.03 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 34.90 लाख हेक्टेयर में, तारामीरा की 1.38 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले रबी की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 33.72 लाख हेक्टेयर और 1.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 2 जनवरी तक राज्य में रबी फसलों की बुआई 119.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 114.86 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। चालू रबी सीजन में राज्य में 120.15 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

सीसीआई ने दो लाख गांठ से ज्यादा कॉटन की बिक्री की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने चालू सप्ताह में घरेलू बाजार में 2,02,100 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री की जबकि निगम के पास अभी भी पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन का 4 लाख गांठ से ज्यादा का स्टॉक बचा हुआ है।


सीसीआई ने घरेलू बाजार में 25 दिसंबर से 2 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में 2,02,100 गांठ कॉटन की बिक्री की, जबकि इसके पिछले सप्ताह में निगम ने केवल 100,400 गांठ कॉटन की बिक्री की थी। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।

पहली अक्टूबर से शुरू हुए चालू फसल सीजन में दिसंबर अंत तक सीसीआई ने 61.5 लाख गांठ कॉटन की खरीद की है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 100 रुपये तेज होकर दम 53,800 से 54,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,380 से 5,550 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,320 से 5,460 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम तेज होकर 5,350 से 5,530 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 52,000 से 53,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 204,800 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 11.5 रुपये तेज होकर 1,570 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में नरमी का रुख रहा।

कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने शुक्रवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम से 16,99,700 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की। अधिकांश बिक्री केंद्रों पर इसके बिकी के भाव स्थिर ही रहे।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई। व्यापारियों के अनुसार हाल ही में सूती धागे की स्थानीय मांग में सुधार आया है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। वैसे भी अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए कॉटन के भाव में हल्का सुधार बन सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। इसलिए स्पिनिंग मिलें कॉटन की खरीद जरुरत के हिसाब से ही कर रही है।