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07 जून 2025

चालू समर सीजन में फसलों की बुआई 12 फीसदी से ज्यादा बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू समर सीजन में धान के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा मोटे अनाज की बुआई 12.32 फीसदी बढ़कर 83.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले समर सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 74.72 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू समर सीजन में 30 मई 25 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 35.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 31.06 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू समर में बढ़कर 24.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि  पिछले साल की समान अवधि के 21.48 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान मूंग की बुआई 21 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 3.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 18.74 लाख हेक्टेयर और 2.57 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू समर सीजन में 14.37 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 12.95 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 8.80 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 4.90 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 7.37 और 4.96 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 48 हजार हेक्टेयर में तथा रागी की 16 हजार हेक्टेयर में हुई है।

चालू समर सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 9.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 9.23 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 4.31 लाख हेक्टेयर में, शीशम की 4.70 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 36,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.11 लाख हेक्टेयर में, 4.73 लाख हेक्टेयर में तथा 31,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

आगामी पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन 350 लाख टन होने का अनुमान - उद्योग

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाले चालू पेराई सीजन 2025-26 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान देश में चीनी का उत्पादन बढ़कर 350 लाख टन होने का अनुमान है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) के अनुसार चालू पेराई सीजन में देश में चीनी का उत्पादन निराशाजनक रहा है, लेकिन अनुमान है कि अगला सीजन चीनी उत्पादन वृद्धि के लिहाज से अच्छा रहेगा।


एनएफसीएसएफ के अनुसार देश में गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। देश का चीनी उत्पादन इन राज्यों के उत्पादन पर ही ज्यादा निर्भर करता है। पिछले साल पानी की कमी के कारण इन राज्यों में गन्ने की खेती कम हुई थी। साथ ही सीजन की शुरुआत में महाराष्ट्र और कर्नाटक में भारी बारिश के कारण जलभराव हुआ था, जिससे गन्ना उत्पादन को बड़ा नुकसान हुआ था। गन्ने की खेती में कमी आने के कारण चीनी के उत्पादन में बड़ी गिरावट की उम्मीद थी, लेकिन वापसी की बारिश ने फसल को फायदा किया। अत: चीनी के उत्पादन में लगभग बीस फीसदी की ही कमी आई।

चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन में गिरावट के बावजूद अगले सीजन के लिए बकाया स्टॉक 48.65 लाख टन बचने की संभावना है तथा यह स्टॉक अक्टूबर और नवंबर 2025 के महीनों में घरेलू खपत की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। उद्योग ने भरोसा जताया है कि, अगले पेराई सीजन की शुरुआत तक देश में चीनी की कमी नहीं होगी और यह स्टॉक अक्टूबर और नवंबर के दो महीनों के लिए पर्याप्त हो सकता है।

चीनी की एक्स मिल कीमत 3,880 से 3,920 प्रति क्विंटल के बीच स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में एम 30 चीनी के थोक दाम, जीएसटी सहित 4,350 रुपये, कानपुर में 4,340 रुपये और मुंबई में 4,180 रुपये तथा कोलकाता में 4,360 रुपये प्रति क्विंटल हैं।

आगामी पेराई सीजन में गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की खेती में बढ़ोतरी से चीनी उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना है। चीनी उद्योग द्वारा 2022-23 में 43 लाख टन चीनी की खपत इथेनॉल उत्पादन में की गई थी, जिससे 369 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया गया। इसी तरह से 2023-24 में चीनी के कच्चे माल से बने इथेनॉल की आपूर्ति 270 करोड़ लीटर थी। यह गिरावट 2024-25 में भी जारी रही। इस साल इथेनॉल की आपूर्ति 250 करोड़ लीटर रहने का अनुमान है।

एनएफसीएसएफ के अनुसार मानसून की अनुकूल स्थिति और महाराष्ट्र तथा कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की खेती बढ़ने के बाद चीनी के उत्पादन की उम्मीद बढ़ी हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने साल की शुरुआत में ही गन्ने के लिए बढ़ी हुई एफआरपी की घोषणा कर दी है, जिससे किसानों का गन्ने की खेती की ओर झुकाव बढ़ा है। ऐसे में आगामी पेराई सीजन में चीनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

03 जून 2025

आयात पड़ते सस्ते होने से उड़द एवं अरहर के साथ चना तथा देसी मसूर में गिरावट

नई दिल्ली। आयात पड़ते सस्ते होने के साथ ही दाल मिलों की खरीद कमजोर होने के कारण घरेलू बाजार में सोमवार को लगातार दूसरे कार्यदिवस में अरहर एवं उड़द के साथ ही देसी मसूर तथा चना और मूंग की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।


जानकारों के अनुसार आम का सीजन शुरू होने के कारण दालों की मांग प्रभावित हुई है।

बर्मा से आयातित उड़द एफएक्यू एवं एसक्यू के भाव में चेन्नई में स्थिर से कमजोर हो गए। उड़द एफएक्यू के भाव जून शिपमेंट के 15 डॉलर कमजोर होकर 760 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव 5 डॉलर कमजोर होकर 830 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए। लेमन अरहर के भाव चेन्नई में जून शिपमेंट के 20 डॉलर घटकर 715 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए।

चेन्नई में उड़द एसक्यू और एफएक्यू के दाम कमजोर हुए हैं। हालांकि बर्मा में इनकी कीमत स्थिर हो गई। हालांकि घरेलू बाजार में दाल मिलों की खरीद कमजोर होने से उड़द के भाव लगातार दूसरे कार्यदिवस में कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार दाल मिलें उड़द की खरीद जरूरत के हिसाब से कर रही है क्योंकि बर्मा के साथ ही ब्राजील में नई उड़द का उत्पादन अनुमान ज्यादा है। म्यांमार के निर्यातकों की बिकवाली बराबर बनी हुई है। जबलपुर लाइन से देसी उड़द की आवक पहले की तुलना में बढ़ी है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण उड़द दाल में मांग भी बनी रहने की उम्मीद है साथ ही दक्षिण भारत की दाल मिलों की खरीद भी उड़द में अभी बनी रहेगी। जानकारों के अनुसार जबलपुर और गुजरात की गर्मियों की फसल आने लगी है, इसलिए कीमतों पर दबाव देखा जा रहा है। ऐसे में उड़द की कीमतों में तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए।

जबलपुर मंडी हल्की क्वालिटी की उड़द लूज में 6300 से 6500 रुपये और बेस्ट क्वालिटी की 6550 से 6750 प्रति क्विंटल की दर से बिकी।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव लगातार दूसरे कार्यदिवस में कमजरेी हो गए जबकि इस दौरान बर्मा में भी इसकी कीमत स्थिर बनी रही। हालांकि घरेलू बाजार में दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से अरहर की कीमतों में लगातार पांचवें दिन गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों के अनुसार अरहर में दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, इसलिए इसकी कीमतों पर दबाव है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल की मांग बनी रहने की उम्मीद है। उत्पादक राज्यों कर्नाटक के साथ ही महाराष्ट्र में देसी अरहर की आवकों में काफी कमी आई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में अरहर का उत्पादन अनुमान ज्यादा था, साथ ही बर्मा से लेमन अरहर का आयात बराबर बना रहने की उम्मीद है। केंद्र सरकार लगातार अरहर की कीमतों की समीक्षा कर रही है। ऐसे में अरहर के भाव में हल्की नरमी और भी बन सकती है।

चना के दाम दिल्ली में लगातार दूसरे कार्यदिवस में कमजोर हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार चना में दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है, इसलिए इसकी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन स्टॉकिस्टों की पास स्टॉक ज्यादा है। मानसूनी सीजन शुरू हो गया है, इसलिए आगामी दिनों में बेसन की खपत बढ़ेगी। ऐसे में आगामी दिनों में दाल मिलों की खरीद चना में बढ़ेगी। वैसे भी केंद्रीय पूल में चना का स्टॉक कम है। चालू रबी सीजन में व्यापारी चना का उत्पादन अनुमान कम मान रहे हैं। इसलिए चना की कीमतों में चल रही गिरावट रुकने की उम्मीद है।

देसी मसूर के दाम लगातार चौथे कार्यदिवस में 25 रुपये कमजोर हुए हैं। इस दौरान आयातित मसूर के भाव बंदरगाह पर स्थिर हो गए। जानकारों के अनुसार दाल मिलों की खरीद मसूर में सीमित मात्रा में बनी हुई है, लेकिन नीचे दाम पर स्टॉकिस्टों की बिकवाली भी कम आ रही है, इसलिए इसके भाव रुक सकते हैं। वैसे भी प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में मसूर की आवक पहले की तुलना में कम हुई है तथा चालू सीजन में मसूर का घरेलू उत्पादन अनुमान कम है। हालांकि कनाडा में फसल सीजन 2025-26 में मसूर का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में मसूर का उत्पादन 18.17 लाख टन होने का अनुमान है। ऐसे में मसूर की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रह सकती है।

मूंग की कीमत इंदौर में कमजोर हुई, जबकि अन्य मंडियों में इसके दाम स्थिर हो गए।। व्यापारियों के अनुसार दाल मिलें मूंग की खरीद जरुरत के हिसाब से ही कर रही है क्योंकि समर सीजन में मूंग की बुआई बढ़ी है, तथा मौसम अनुकूल रहा तो अगले महीने समर मूंग की नई फसल की आवक बनेगी। इसलिए मूंग में तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। हालांकि राज्यों की मंडियों में मूंग की आवक पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि उत्पादक राज्यों में बकाया स्टॉक ज्यादा है। साथ ही सरकार भी केंद्रीय पूल से लगातार मूंग की बिकवाली कर रही है।

जबलपुर मंडी में बेस्ट क्वालिटी की मूंग 7,000 से 7,300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकी।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये नरम होकर 6,650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि एसक्यू के भाव 25 रुपये घटकर 7,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में उड़द एफएक्यू के दाम 75 रुपये कमजोर होकर 7,000 से 7,025 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि एसक्यू के भाव 50 रुपये कमजोर होकर 7,750 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

मुंबई में उड़द एफएक्यू के भाव कमजोर होकर 6,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कोलकाता में उड़द एफएक्यू के भाव 6,850 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

गुंटूर में उड़द पॉलिश के भाव 75 रुपये कमजोर होकर दाम 7,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि विजयवाड़ा में उड़द पॉलिश के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 7,225 से 7,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में कमजोर होकर 6,225 से 6,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 100 रुपये घटकर 6,625 से 6,650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंबई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 50 रुपये कमजोर होकर 6,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देसी अरहर के दाम कटनी एवं दुधानी, तथा इंदौर और अकोला तथा अमरावती में कमजोर हुए, जबकि अन्य अधिकांश उत्पादक मंडियों में लगभग स्थिर बने रहे।

मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव कमजोर हुए। सूडान से आयातित अरहर के भाव घटकर 6,200 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 5700 से 5750 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। मतवारा की अरहर के भाव 50 रुपये घटकर 5,700 से 5,750 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। सफेद अरहर के दाम 6,050 से 6,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में देसी मसूर के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 6,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर के भाव 5,950 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। कांडला बंदरगाह पर मसूर के भाव 5,900 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। हजिरा बंदरगाह पर मसूर के भाव 6,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,150 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। पटना में देसी मसूर के भाव 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में राजस्थान के बेस्ट चना के दाम 75 रुपये कमजोर होकर 5,675 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना का व्यापार 100 रुपये घटकर 5,600 से 5,625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ।

इंदौर में बोल्ड मूंग के भाव 300 रुपये कमजोर होकर 6800 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। जयपुर में मूंग के बिल्टी भाव 6,700 से 7,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जलगांव में चमकी मूंग के दाम 50 रुपये घटकर 7,600 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। अकोला में चमकी मूंग के दाम 7,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

सीसीआई ने 9,200 गांठ कॉटन की बिक्री की, कीमतों में हल्का सुधार

नई दिल्ली। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को 9,200 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री घरेलू बाजार में की। निगम ने फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई  6,200 गांठ की बिक्री जहां स्पिनिंग मिलों को की, वहीं 3,000 गांठ की खरीद व्यापारियों ने की।


सूत्रों के अनुसार सीसीआई चालू फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई कुल 29,90,800 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है, जोकि चालू सीजन में कुल खरीदी गई कॉटन का लगभग 29.90 फीसदी है।

निगम ने इस दौरान सबसे ज्यादा कॉटन महाराष्ट्र में 14.41 लाख गांठ, तेलंगाना में 6.55 लाख गांठ तथा गुजरात में 4.45 लाख गांठ की बिक्री है। इसके अलावा सीसीआई ने मध्य प्रदेश में 1.57 लाख गांठ, कर्नाटक में 1.34 लाख गांठ के अलावा राजस्थान में 52,500 गांठ तथा ओडिशा में 80,900 गांठ कॉटन बेची है।

अन्य राज्यों में हरियाणा में 50,700 गांठ तथा पंजाब में 1,700 गांठ के अलावा आंध्र प्रदेश में सबसे कम 400 गांठ कॉटन की बिक्री की है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण सोमवार को गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव सोमवार को 100 रुपये तेज होकर 53,900 से 54,300 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव 5720 से 5730 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5530 से 5590 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5720 से 5750 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव 54,700 से 54,800 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 18,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन शाम के सत्र में तेजी का रुख रहा।

स्पिनिंग मिलों की मांग सुधरने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में कपास के उत्पादन में कमी आई थी, लेकिन एक तो घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ चालू सीजन में अभी तक आयात ज्यादा मात्रा में हुआ है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास करीब 70 लाख गांठ का स्टॉक बचा हुआ है। इसलिए घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री भाव पर भी निर्भर करेगी।

क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेल के बीच शुल्क अंतर बढ़ाना केंद्र का सराहनीय कदम - एसईए

नई दिल्ली। आयातित क्रूड एवं रिफाइंड तेलों के बीच शुल्क अंतर को 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 19.25 फीसदी करने का केंद्र सरकार ने एक साहसिक और समयानुकूल कदम उठाया है। इससे रिफाइंड पामोलिन के आयात में कमी आएगी और मांग पुनः क्रूड पाम तेल की ओर बढ़ेगी, जिससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग को फायदा होगा। क्रूड तेल पर आयात शुल्क में कमी करने से घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को भी फायदा होगा।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार क्रूड पाम तेल, क्रूड सोयाबीन तेल और क्रूड सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क पहले के 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इन तीनों उत्पादों पर प्रभावी आयात शुल्क (मूल सीमा शुल्क और अन्य शुल्क सहित) अब 16.5 फीसदी होगा, जबकि पहले यह 27.5 फीसदी था। वहीं, रिफाइंड तेल पर मूल सीमा शुल्क 32.5 फीसदी पर अपरिवर्तित बना हुआ है। वर्तमान में रिफाइंड तेलों पर प्रभावी शुल्क 35.75 फीसदी है।

एसईए के अनुसार भारत मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल का आयात करता है। ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रिफाइनर क्रूड पाम तेल (सीपीओ) का आयात करते रहे हैं, और पाम तेल की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बंदरगाह आधारित पाम तेल रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश किया गया है। सीपीओ का आयात देश के भीतर मूल्य संवर्धन को सक्षम बनाता है और रिफाइनिंग क्षेत्र में रोजगार सृजन का समर्थन करता है।

हालांकि, सीपीओ और रिफाइंड पाम तेल के बीच 8.25 फीसदी के पिछले आयात शुल्क अंतर ने अनजाने में क्रूड की तुलना में तैयार उत्पाद के आयात को प्रोत्साहित किया था। परिणामस्वरूप, तेल वर्ष 2023-24 (नवंबर-अक्टूबर) के दौरान, रिफाइंड पामोलीन का कुल पाम ऑयल आयात में 20 फीसदी से अधिक हिस्सा था, और तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर 2024 से अप्रैल 2025) की पहली छमाही में, इसका हिस्सा 2019-20 में 6 फीसदी हिस्सेदारी के मुकाबले लगभग 27 फीसदी हो गया। वर्तमान में, आरबीडी पामोलीन का सीएंडएफ मूल्य सीपीओ की तुलना में लगभग 45 से 50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन कम है, जिससे घरेलू मूल्य संवर्धन की कीमत पर रिफाइंड आयात को बढ़ावा मिल रहा है।

यह प्रवृत्ति आपूर्तिकर्ता देशों की निर्यात नीतियों से और बढ़ गई है, जो सीपीओ (क्रूड तेल) पर उच्च निर्यात शुल्क और रिफाइंड पामोलीन (तैयार माल) पर कम शुल्क लगाते हैं, जिससे रिफाइंड तेल के निर्यात को प्रोत्साहन मिलता है। पहले का 8.25 फीसदी आयात शुल्क अंतर इन उपायों का मुकाबला करने और हमारे घरेलू उद्योग की रक्षा करने के लिए अपर्याप्त था, जो कम क्षमता पर काम कर रहा था और केवल पैकेजिंग संचालन तक सीमित हो गया था, इस प्रकार इस क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण निवेश को कमजोर कर रहा था।

अत: केंद्र सरकार द्वारा शुल्क अंतर को 8.25 फीसदी से बढ़ाकर 19.25 फीसदी करने का निर्णय एक साहसिक और समय पर उठाया गया कदम है। यह रिफाइंड पाम तेल के आयात को हतोत्साहित करेगा और क्रूड पाम तेल की मांग को बढ़ायेगा, जिससे घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र में नई जान आएगी। इस कदम से खाद्य तेल के आयात की कुल मात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा और इससे खाद्य तेल की कीमतों पर कोई दबाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसके विपरीत, क्रूड तेल पर शुल्क में कमी से घरेलू कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा।

सीसीआई ने 18,000 गांठ कॉटन की बिक्री की, कॉटन के भाव कमजोर

नई दिल्ली। कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 27 से 30 मई 2025 के दौरान घरेलू बाजार में 18,000 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इस दौरान निगम ने पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई 17,900 गांठ के अलावा फसल सीजन 2023-24 में खरीदी हुई 100 गांठ कॉटन की बिक्री की।

सूत्रों के अनुसार निगम के पास चालू फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई कॉटन का करीब 70 लाख गांठ का स्टॉक बचा हुआ है। सीसीआई के बिक्री नियम सख्त होने के कारण हाल ही में इसकी बिक्री पहले की तुलना में कम हुई है।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने के कारण शुक्रवार को गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन की कीमत स्थिर से नरम हुई।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 100 रुपये कमजोर होकर 53,700 से 54,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव 5720 से 5730 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 20 रुपये नरम होकर 5520 से 5570 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5710 से 5750 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव 54,700 से 54,800 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमत स्थिर से नरम हुई। व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में कपास के उत्पादन में कमी आई थी, लेकिन एक तो घरेलू बाजार से कॉटन के निर्यात में कमी आई है, वहीं दूसरी तरफ चालू सीजन में अभी तक आयात ज्यादा मात्रा में हुआ है। घरेलू बाजार में सीसीआई के पास करीब 70 लाख गांठ का स्टॉक बचा हुआ है। इसलिए घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री भाव पर भी निर्भर करेगी।

29 मई 2025

केंद्र सरकार ने जून के लिए 23 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जून 2025 के लिए 23 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया है। य​ह पिछले साल जून में जारी किए गए कोटे की तुलना में कम है।

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने 28 मई को जून 2025 के लिए 23 लाख टन चीनी का मासिक कोटा आवंटित किया, जो कि जून 2024 के लिए आवंटित कोटा से कम है।

जून 2024 में केंद्र सरकार ने घरेलू बिक्री के लिए 25.50 लाख टन चीनी का मासिक कोटा आवंटित किया था। मई 2025 के लिए सरकार ने 23.5 लाख टन चीनी का कोटा आवंटन किया था।