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30 सितंबर 2024

सरकारी सख्ती के बावजूद गेहूं में तेजी जारी, दिल्ली में भाव तीन हजार के पार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा सख्ती करने के बावजूद भी गेहूं की कीमतों में तेजी जारी है। शनिवार को दिल्ली में गेहूं के दाम 60 रुपये तेज होकर भाव 3,010 से 3,015 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। दिल्ली में गेहूं की आवक 6,000 बोरियों की हुई।


केंद्र सरकार ने गेहूं पर तत्काल प्रभाव से स्टॉक लिमिट लगाई हुई है जोकि 31 मार्च, 2025 तक लागू रहेगी।

केंद्र सरकार ने हाल ही में गेहूं की स्टॉक लिमिट में कमी की थी, साथ ही खाद्वय सुरक्षा अधिनियम, एनएफएसए 2013 और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना, पीएमजीकेएवाई के तहत गेहूं का आवंटन बढ़ाने का फैसला लिया था।

केंद्र सरकार ने 13 सितंबर 2024 को व्यापारियों एवं होलसेलर पर गेहूं की स्टॉक लिमिट को घटाकर 2,000 टन कर दिया था, जबकि पहले यह 3,000 टन थी। मिलर्स भी अपनी मासिक क्षमता का 60 फीसदी गेहूं की रख सकता है, जबकि पहले यह लिमिट 70 फीसदी मासिक की थी।

केंद्रीय खाद्वय सचिव संजीव चोपड़ा ने 18 सितंबर को घोषणा की थी कि मंत्रियों की एक सीमित ने पीएमजीकेएवाई के तहत 35 लाख टन गेहूं का आवंटन बढ़ाने को मंजूरी दी है।

केंद्र सरकार के अनुसार रबी 2024 के दौरान देश में कुल 11.29 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हुआ था, जोकि खपत के हिसाब से पर्याप्त उपलब्धता है।

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय पूल में पहली सितंबर 2024 को 251.46 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है।

चालू रबी विपणन सीजन 2024-25 में प्रमुख उत्पादक राज्यों से 266 लाख टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी हुई थी, जोकि पिछले रबी विपणन सीजन 2023-24 में 262 लाख टन खरीद गए गेहूं से ज्यादा है। 

हरियाणा में शुक्रवार से शुरू हुई धान की सरकारी खरीद, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। हरियाणा की मंडियों से शुक्रवार से धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद शुरू हो गई, हालांकि परमल धान की आवक नहीं के बराबर होने के साथ ही कई जिलों में बारिश होने से पहले दिन खरीद नाममात्र की ही हुई।


राज्य की अंबाला एवं पिहोवा के साथ ही कई अन्य मंडियों में शुक्रवार को बारिश हुई।

राज्य सरकार ने पहले चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए 23 सितंबर से धान की खरीद करने का निर्णय लिया था, जिसे बाद में बढ़ाकर एक अक्टूबर 2024 कर दिया था।

राज्य की मंडियों से 27 सितंबर 2024 से 15 नवंबर 2024 तक धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद होगी। केंद्र सरकार को राज्य की ओर से जल्द खरीद शुरू करने का अनुरोध किया गया था, जिसे भारत सरकार ने मंजूरी दे दी।

केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2,300 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

अधिकारियों ने किसानों से धान की फसल को सरकारी मापदंड के अनुसार अच्छे से सुखाकर तय नमी मात्रा में लेकर आने का आग्रह किया है, ताकि फसल की खरीद तुरंत सुनिश्चित की जा सके।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में राज्य में धान की रोपाई 15.73 लाख हेक्टेयर में हुई है।

राज्य की गोहाना मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक शुक्रवार को 4,000 क्विंटल की हुई तथा भाव 2,500 से 2,686 रुपये प्रति क्विंटल रहे। सफीदों मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक 2,500 बोरियों की हुई तथा इसका व्यापार 2,550 से 2,730 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। व्यापारियों के अनुसार राज्य की मंडियों में अभी पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक ज्यादा हो रही है तथा परमल धान की आवक अक्टूबर में बढ़ेगी।

कर्नाटक में खरीफ फसलों की बुआई 11 फीसदी के करीब बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में कर्नाटक में 20 सितंबर तक खरीफ फसलों की कुल बुआई 10.89 फीसदी बढ़कर 81.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में बुआई केवल 73.26 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में मोटे अनाजों के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन कपास एवं गन्ने की बुआई पिछले साल की तुलना में घटी है।

राज्य में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 22.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इनकी बुआई केवल 17.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 15.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई केवल 13.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मूंग की बुआई राज्य में चालू खरीफ में 0.42 लाख हेक्टेयर में तथा उड़द की 0.93 लाख हेक्टेयर में ही हुई है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 8.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 7.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 4.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 4.11 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 3.32 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 3.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। सनफ्लावर की बुआई चालू खरीफ में 0.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का तथा रागी की बुआई चालू खरीफ में 35.88 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 32.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई चालू सीजन में 10.14 हेक्टेयर में और मक्का की 15.90 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इस समय तक इनकी बुआई क्रमशः 8.83 लाख हेक्टेयर और 16.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रागी की बुआई चालू खरीफ में 7.39 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 1.41 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 6.05 लाख हेक्टेयर में तथा 1.29 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 6.91 लाख हेक्टेयर ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 7.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 1.87 फीसदी घटकर 6.84 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 6.97 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

स्पिनिंग मिलों की खरीद घटने से लगातार चौथे सत्र में कॉटन के भाव कमजोर

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण गुरुवार को लगातार चौथे दिन गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में मंदा आया।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 50 रुपये कमजोर होकर दाम 58,800 से 59,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए। पिछले चार दिनों में कॉटन की कीमतों में 800 रुपये प्रति कैंडी का मंदा आ चुका है।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5,820 से 5825 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5710 से 5730 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव घटकर 5425 से 5900 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव घटकर 57,400 से 57,600 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 16,100 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में में तेजी का रुख रहा। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में भी कॉटन की कीमतों में भी तेजी दर्ज की आई।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में लगातार चौथे दिन मंदा आया है। व्यापारियों के अनुसार कई राज्यों में नई कपास की आवक शुरू हो गई है, अत: नई फसल को देखते हुए स्पिनिंग मिलें कॉटन की खरीद सीमित मात्रा में ही कर रही है, इसलिए कीमतों पर दबाव बना है। जानकारों के अनुसार पिछले दो सीजन में व्यापारियों के साथ ही स्टॉकिस्ट एवं मिलर्स को नुकसान हुआ है इसलिए नए सीजन में मिलें कॉटन की खरीद में जल्दबाजी नहीं कर रही।

हालांकि चालू सीजन में कपास की बुआई में कमी आई, जिस कारण उत्पादन अनुमान तो घटने की आशंका है, लेकिन अगले महीने आवकों में बढ़ोतरी होगी तथा आगामी महीनों के सौदे नीचे दाम के हो रहे हैं। इसलिए कॉटन की कीमतों में और भी नरमी आने का अनुमान है।

हरियाणा एवं राजस्थान के साथ ही मध्य प्रदेश की मंडियों में नई कपास की आवक शुरू हो गई है तथा मौसम अनुकूल रहा तो पंजाब की मंडियों में नई फसल की आवक आगामी दिनों में बनेगी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 13 सितंबर तक कपास की बुआई 9.06 फीसदी घटकर 112.48 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 123.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में बासमती चावल का निर्यात 19.14 फीसदी बढ़ा - एपिडा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान देश से बासमती चावल के निर्यात में 19.14 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं इस दौरान गैर बासमती चावल के निर्यात में 37.64 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से जुलाई के दौरान बासमती चावल का निर्यात 19.14 फीसदी बढ़कर 19.17 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 16.09 लाख टन का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों अप्रैल एवं जुलाई के दौरान 37.64 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 33.41 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 53.58 लाख टन का हुआ था।

मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों के दौरान बासमती चावल का निर्यात 16,997.77 करोड़ रुपये का और गैर बासमती चावल का 13,370.58 करोड़ रुपये का हुआ है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य, एमईपी 950 डॉलर प्रति टन को समाप्त किया था। 

व्यापारियों के अनुसार उत्पादक मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। चालू महीने में इसके भाव में 100 से 200 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ चुकी है।

हरियाणा की पानीपत मंडी में धान की आवक मंगलवार को 7,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 2,500 से 2,731 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इसी तरह से राज्य की करनाल मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान की आवक मंगलवार को बढ़कर 22,000 बोरियों की हुई तथा इसके दाम कमजोर होकर 2,200 से 2,670 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। उत्तर प्रदेश की हापुड़ मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के 2,300 से 2,751 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। पंजाब की संगरूर मंडी में 1,509 किस्म के धान की आवक 8,000 बोरियों की हुई तथा इसके भाव 2,550 से 2,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली के नया बाजार में पूसा 1,509 किस्म के नए सेला चावल का भाव मंगलवार को 5,300 से 5,400 रुपये और इसके नए स्टीम चावल का भाव 5,800 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। हाल ही में इसकी कीमतों में भी मंदा आया है। 

25 सितंबर 2024

गुजरात में खरीफ फसलों की बुआई 2.32 फीसदी घटकर 83.70 लाख हेक्टेयर में ही हुई

नई दिल्ली। गुजरात में चालू खरीफ सीजन में फसलों की कुल बुआई में 2.32 फीसदी की कमी आकर 23 सितंबर 2024 तक 83.70 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 85.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार दलहनी फसलों की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है, लेकिन कपास एवं कैस्टर सीड की बुआई में कमी आई है।

दलहन की बुआई बढ़कर राज्य में 39.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 37.43 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुआई चालू खरीफ में 2.31 लाख हेक्टेयर में, मूंग की बुआई 55,161 हेक्टेयर में एवं उड़द की 83,753 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.11 लाख हेक्टेयर में, 64,616 हेक्टेयर में और 79,275 हेक्टेयर में हो चुकी थी।
 
कपास की बुआई राज्य में चालू खरीफ में 11.77 फीसदी घटकर 23.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 26.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 28.60 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 26.75 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई बढ़कर 19.10 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 16.35 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

अन्य तिलहन की फसलों में सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में 3 लाख हेक्टेयर में, कैस्टर सीड की 5.99 लाख हेक्टेयर तथा शीशम की 49,426 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.65 लाख हेक्टेयर में और 7.14 लाख हेक्टेयर तथा 58,205 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में धान की रोपाई चालू खरीफ सीजन में 23 सितंबर तक 8.86 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.72 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

राज्य में बाजरा की बुआई घटकर चालू खरीफ में अभी तक 1.68 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.97 लाख हेक्टेयर में इसकी बुआई हो चुकी थी। मक्का की बुआई राज्य में बढ़कर 2.85 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 2.82 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

ग्वार सीड की बुआई राज्य में 84,627 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

उत्तर भारत के राज्यों में नई कपास की आवक बढ़ी, कीमतों पर दबाव

नई दिल्ली। उत्तर भारत के हरियाणा और राजस्थान की मंडियों में सोमवार को नई कपास की आवक बढ़कर 1,400 गांठ, एक गांठ-170 किलो की आवक हुई। नई फसल को देखते हुए जिनर्स सीमित मात्रा में कपास की खरीद कर रहे हैं, इसलिए कीमतों पर दबाव देखा गया।


जानकारों के अनुसार इस वर्ष उत्तर भारत के राज्यों हरियाणा, राजस्थान एवं पंजाब में कपास की फसल बहुत अच्छी स्थिति में है, तथा मंडियों में जो नए माल आ रहे हैं उनकी गुणवत्ता और ग्रेड शानदार है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो पैदावार बढ़ने की उम्मीद है। इन राज्यों में कपास की पहली पिकिंग शुरू हो गई। हालांकि चालू सीजन में उत्तर भारत के राज्यों में कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई है।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5,875 से 5900 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव नरम होकर 5800 से 5825 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5525 से 5975 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव 58,600 से 58,800 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

पंजाब में नई के अक्टूबर के सौदे 5,875 रुपये, हरियाणा में 5,860 रुपये और राजस्थान में 5,870 से 5,900 रुपये प्रति मन की दर से हो रहे हैं।

हरियाणा की मंडियों में नई कपास की आवक बढ़कर सोमवार को 900 गांठ एवं राजस्थान की मंडियों में 500 गांठ, एक गांठ-170 किलो को मिलाकर कुल आवक 1,400 गांठ की हुई। जानकारों के अनुसार चालू सप्ताह के अंत तक पंजाब की मंडियों में भी नई कपास की आवक शुरू हो जायेगी।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने के कारण उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में मंदा आया है। नई फसल को देखते हुए स्पिनिंग मिलें कॉटन की खरीद सीमित मात्रा में ही कर रही है, तथा अक्टूबर के सौदे नीचे दाम के हो रहे है, इसलिए मौजूदा कीमतों और भी नरमी आने का अनुमान है। हालांकि चालू सीजन में कपास की बुआई में कमी आई, जिस कारण उत्पादन अनुमान घटने की आशंका है। अक्टूबर में इन राज्यों में नई कपास की आवकों में बढ़ोतरी होगी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 13 सितंबर तक हरियाणा में कपास की बुआई 4.76 लाख हेक्टेयर में, पंजाब में एक लाख हेक्टेयर में तथा राजस्थान में 5.19 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों में कपास की बुआई क्रमश: 6.65 लाख हेक्टेयर में, 2.10 लाख हेक्टेयर और 7.90 लाख हेक्टेयर में हुई थी।