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05 जुलाई 2025

गुजरात में चालू खरीफ में मूंगफली के साथ ही कपास की बुआई में बढ़ोतरी

नई दिल्ली। गुजरात में चालू खरीफ सीजन में मूंगफली के साथ ही कपास की बुआई में बढ़ोतरी हुई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 30 जून तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 3,391,478 हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2,440,707 हेक्टेयर से ज्यादा है।


चालू खरीफ सीजन में 30 जून 25 तक मूंगफली की बुआई बढ़कर 1,544,695 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 899,807 हेक्टेयर में ही हुई थी।

इस दौरान राज्य में कपास की बुआई बढ़कर 1,399,771 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में इसकी बुआई केवल 1,272,631 हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई 36,548 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 26,515 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। मोटे अनाजों में बाजरा की 14,421 हेक्टेयर में तथा मक्का की 16,264 हेक्टेयर में तथा ज्वार की 1,223 हेक्टेयर में हो चुकी है। इसके अलावा धान की रोपाई 4,558 हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 30,415 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 18,520 हेक्टेयर में ही हुई थी। खरीफ दलहन में अरहर  की बुआई 22,706 हेक्टेयर में और मूंग की 3,995 हेक्टेयर में तथा उड़द की 3,265 हेक्टेयर में तथा मोठ की 325 हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में 1,671,835 हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 944,504 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बुआई 1,20,560 हेक्टेयर में, शीशम की 4,925 हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 1,621 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में ग्वार सीड की बुआई राज्य में 1,240 हेक्टेयर में हो चुकी है।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई, तय लक्ष्य की 31 फीसदी पूरी

नई दिल्ली। चालू सप्ताह के अंत तक राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 27 जून तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 52.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य का 21 फीसदी है। राज्य के कृषि निदेशालय ने चालू खरीफ सीजन में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू खरीफ सीजन में 27 जून 25 तक मोटे अनाजों की बुआई 24.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाजों में बाजरा की 18.73 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 3.14 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 35 हजार हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 2.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 9 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 7.33 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 1.11 लाख हेक्टेयर तथा उड़द की 25 हजार हेक्टेयर तथा छौला की 28 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में 8.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 5.76 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 2.60 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 28,000 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 5.79 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 2.58 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

28 जून 2025

चालू सप्ताह में सीसीआई ने दूसरी बार कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई से घरेलू स्पिनिंग मिलों की खरीद बढ़ने से निगम शुक्रवार को इसकी बिक्री कीमतों में 100 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। मालूम हो कि सीसीआई ने 25 जून को भी कॉटन की बिक्री कीमतों में 100 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की थी।


घरेलू बाजार में जिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक नहीं के बराबर बचा हुआ है, जिस कारण स्पिनिंग मिलों के साथ ही व्यापारियों ने सीसीआई से खरीद बढ़ा दी है। निगम ने 26 जून को फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई 2,60,600 गांठ कॉटन की बिक्री की है। इससे पहले 24 जून को भी निगम ने घरेलू बाजार में 1,26,200 गांठ कॉटन की बिक्री की थी।  

व्यापारियों के अनुसार प्राइवेट बाजार की तुलना में सीसीआई द्वारा बेची जा रही कपास की गुणवत्ता अच्छी है। साथ ही जिनिंग मिल के पास कॉटन का बकाया नहीं के बराबर है। ऐसे में नई फसल तक स्पिनिंग मिलों को कॉटन की ज्यादातर खरीद सीसीआई से ही करनी होगी। अत: आगामी दिनों में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमत तेज हुई। गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को चौथे दिन 50 रुपये तेज होकर दाम 54,200 से 54,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 8,500 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में तेजी का रुख रहा।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमत 50 रुपये प्रति कैंडी तेज हुई। व्यापारियों के अनुसार चालू सप्ताह में सीसीआई ने कॉटन के बिक्री कीमतों में लगातार दूसरी बार बढ़ोतरी की है। उधर जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: मिलों को कॉटन की ज्यादा खरीद सीसीआई से करनी पड़ रही है। घरेलू बाजार सीसीआई के पास कॉटन का स्टॉक ज्यादा है।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई 32.84 लाख हेक्टेयर के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई 32.84 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में हो चुकी है जोकि तय लक्ष्य का 20 फीसदी है। राज्य के कृषि निदेशालय ने चालू खरीफ सीजन में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 23 जून 25 तक मोटे अनाजों की बुआई 13.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। मोटे अनाजों में बाजरा की 10.57 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 1.90 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 25 हजार और ज्वार की बुआई 78 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 4.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 4.03 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 56 हजार तथा उड़द की 8 हजार हेक्टेयर तथा छौला की 15 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में 6.59 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 4.42 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 1.79 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 17,000 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 5.50 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 1.32 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है।

केंद्र सरकार ने जुलाई के लिए 22 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया

नई दिल्ली। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने जुलाई 2025 के लिए 22 लाख टन चीनी का का मासिक कोटा जारी किया है जो कि जुलाई 2024 के लिए जारी किए गए कोटा से कम है। जुलाई 2024 में केंद्र सरकार ने घरेलू बिक्री के लिए 24 लाख टन चीनी का मासिक कोटा जारी किया था।


मालूम हो कि सरकार ने जून 2025 के लिए 23 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया था।

जानकारों के अनुसार 22 लाख टन की घोषणा के साथ, बाजार में स्थिरता बने रहने की संभावना है। पिछले साल जून में चीनी की खपत 21.30 लाख टन की हुई थी।

दिल्ली में गुरुवार को एम ग्रेड चीनी की थोक कीमत 4,320 रुपये और कानपुर में 4,300 रुपये तथा मुंबई में 4,120 रुपये और कोलकाता में 4,340 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पिछले कार्यदिवस के मुकाबले इसके दाम 20 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए हैं।

सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, जिनर्स के पास स्टॉक नहीं के बराबर

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में जिनिंग मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक नहीं के बराबर बचा होने के कारण कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में बुधवार को 100 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की।


सूत्रों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की खरीद सीसीआई से बढ़ गई है, क्योंकि जिनर्स के पास हल्की क्वालिटी के माल ही ज्यादा बचे हुए हैं। निगम ने 24 जून को घरेलू व्यापारियों को 1,26,200 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री की थी।

सीसीआई ने बुधवार को फसल सीजन 2023-24 के साथ ही 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कपास की बिक्री कीमतों के फ्लोर प्राइस में 100 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन का सबसे ऊंचा फ्लोर प्राइस 55,800 रुपये प्रति कैंडी हो गया है।

व्यापारियों के अनुसार निगम द्वारा बेची जा रही कपास की गुणवत्ता, जिनिंग मीलों से बेहतर है। वैसे भी जिनिंग मिल के पास कॉटन का बकाया नहीं के बराबर है। ऐसे में नई फसल तक स्पिनिंग मिलों को कॉटन की ज्यादातर खरीद सीसीआई से ही करनी होगी। अत: आगामी दिनों में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण बुधवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमत तेज हुई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को दूसरे दिन 50 रुपये तेज होकर दाम 54,000 से 54,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,740 से 5,750 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,530 से 5,610 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,680 से 5,800 रुपये प्रति मन बोले गए।लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के 54,800 से 55,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 10,550 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में शाम के सत्र में मिलाजुला रुख रहा।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमत 50 रुपये प्रति कैंडी तेज हुई, लेकिन इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिल जरुरत के हिसाब से ही कॉटन की खरीद कर रही है, क्योंकि विश्व बाजार में इसके दाम घरेलू बाजार के मुकाबले नीचे बने हुए हैं। चालू सीजन में कॉटन के आयात में भारी बढ़ोतरी का अनुमान है साथ ही घरेलू बाजार में सीसीआई के पास कॉटन का बंपर स्टॉक मौजूद है। इसलिए घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री भाव पर भी निर्भर करेगी।

कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार कपास का उत्पादन 306.92 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है, जो क‍ि इसके पिछले फसल सीजन 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

मध्य प्रदेश से मूंग तथा उड़द और उत्तर प्रदेश से उड़द की खरीद को केंद्र की मंजूरी

नई दिल्ली, मध्य प्रदेश में मूंग और उड़द तथा उत्तर प्रदेश में उड़द को मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत खरीदने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही खरीद से संबंधित व्यवस्था को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने राज्य के कृषि मंत्रियों के साथ मंगलवार को संवाद भी किया और नेफेड, एनसीसीएफ व राज्य के संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मध्य प्रदेश की राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्ताव पर मंत्रालय द्वारा विचार करने तथा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह द्वारा राज्य सरकार तथा अन्य हितधारकों के साथ बैठक के उपरांत मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत राज्य में ग्रीष्मकालीन मूंग तथा ग्रीष्मकालीन उड़द खरीद करने की मंजूरी प्रदान की गई है।

उत्तर प्रदेश में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत राज्य में ग्रीष्मकालीन उड़द खरीद करने की मंजूरी प्रदान की गई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बैठक में कहा कि मूंग और उड़द की खरीद के फैसले से केंद्र सरकार को बड़ा वित्तीय भार वहन करना पड़ेगा, लेकिन बावजूद इसके प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किसान हित में सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि खरीद सही तरीके से हो। किसानों से सीधे खरीद से ही बिचौलियों की सक्रियता कम होगी और लाभ सही मायनों में किसान तक पहुंच पाएगा। अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिकतम व कारगर प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के साथ किसानों के पंजीकरण की उचित व्यवस्था की जाएं। आवश्यकता हो तो खरीद केंद्रों की संख्या में भी इजाफा करें व उचित और पारदर्शी व्यवस्था के साथ खरीद सुनिश्चित करें।  

शिवराज सिंह चौहान ने भंडारण को लेकर मिल रही अनियमितताओं की शिकायत को लेकर भी चिंता व्यक्त की और अधिकारियों व कृषि मंत्रियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने के प्रयास करने की बात कही। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री से कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हित में हर संभव काम करेगी।

बैठक में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।