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28 जून 2025

चालू खरीफ में धान एवं दलहन के साथ कपास तथा मोटे अनाज की बुआई बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई में तेजी आई है। धान के साथ ही दलहन एवं कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में आगे चल रही है। चालू खरीफ में अभी तक 137.84 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हो चुकी है, जोकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि के 124.88 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 20 जून 25 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 13.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 8.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 9.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.63 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान मूंग की बुआई 4.43 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 1.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.67 लाख हेक्टेयर और 0.62 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अरहर की बुआई 2.48 लाख हेक्टेयर और अन्य दलहन की 0.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई 5.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय 5.49 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 1.78 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 3.70 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 27,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 1.91 लाख हेक्टेयर में, 2.71 लाख हेक्टेयर में तथा 26,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 18.03 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 14.77 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 12.32 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 3.70 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 10.31 और 2.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 1.51 लाख हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 55.07 लाख हेक्टेयर में और कपास की 31.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 54.88 लाख हेक्टेयर और 29.12 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मई में कैस्टर तेल का निर्यात 23 फीसदी घटा - उद्योग

नई दिल्ली। मई में कैस्टर तेल का निर्यात 23.17 फीसदी घटकर 68,982 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल मई में इसका निर्यात 89,786 टन हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार चालू वर्ष 2025 के पहले पांच महीनों जनवरी से मई के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 308,699 टन का ही हुआ है जबकि इसके पिछले वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 346,624 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार मूल्य के हिसाब से वर्ष 2025 के पहले पांच महीनों में कैस्टर तेल का निर्यात 4,075.78 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जबकि पिछले वर्ष 2024 के जनवरी से मई के दौरान इसका निर्यात 4,213.27 करोड़ रुपये का हुआ था। चालू वर्ष 2025 के मई में डीओसी का निर्यात मूल्य के हिसाब से 882.46 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जबकि पिछले साल मई में इसका निर्यात 1,066.24 करोड़ रुपये का हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में बुआई में आई कमी से कैस्टर सीड का उत्पादन कम होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक पहले की तुलना में कम हुई है।

गुजरात में कैस्टर सीड के भाव शनिवार को 5 रुपये तेज होकर दाम 1,280 से 1,320 रुपये प्रति 20 किलो हो गए, तथा दैनिक आवक 60,000 बोरी, एक बोरी 35 किलो की हुई।

कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 17.30 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान उत्पादन 19.59 लाख टन का हुआ था।

कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में कैस्टर सीड की बुआई 12 फीसदी घटकर केवल 8.67 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

सरकार का फोकस दलहन एवं तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने पर – शिवराज सिंह

नई दिल्ली। सरकार का पूरा फोकस इस वक्त दलहन एवं तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने पर है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष पर आधारित 'सहकार से समृद्धि 2025' विषय पर मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहां किसान अपनी फसलों को वहां बेच सकते हैं, जहां उसका उचित दाम मिल रहा हो। इसमें ट्रांसपोर्टेशन का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।


उन्होंने कहा कि यह अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष है। संयुक्त राष्ट्र संघ में आज आयोजन हो रहा होगा लेकिन सहकारिता भारत की मिट्टी और इसकी जड़ों में वर्षों से व्याप्त है। हजारों साल पहले भारत के ऋषियों ने उद्घोष किया था, ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु। सभी प्राणियों में एक ही चेतना है। विश्व के कल्याण का भाव की सहकारिता है।

उन्होंने कहा कि किसान का महत्व कभी समाप्त नहीं हो सकता। आज भी कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। जीडीपी में कृषि क्षेत्र की भागीदारी 18 फीसदी है। लगभग 46 फीसदी आबादी कृषि पर ही निर्भर है। मैं स्वयं किसान हूं। अपने खेतों में ट्रैक्टर चलाकर खेती करता हूं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसान कल्याण के लिए कार्य करना ही जीवन का उद्देश्य है। चौहान ने बताया कि खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 44 फीसदी की वृद्धि हुई है। किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की उन्नति के लिए जो रोडमैप बनाया गया उसमें शामिल हैं, प्रति हेक्टेयर उत्पादन को बढ़ाना, उत्पादन की लागत घटाना, उत्पादन के ठीक दाम, फसल नुकसान की स्थिति में उचित मुआवजा, कृषि का विविधीकरण और उर्वरकों में सीमित उपयोग के साथ आने वाली पीढ़ी के लिए धरती को सुरक्षित रखना।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हमें देश की परिस्थितियों के अनुसार कृषि क्षेत्र में उन्नति के मार्ग तय करने होंगे। भारत में अत्यधिक किसान छोटी जोत वाले हैं। इसलिए हमारी नीतियों का केंद्र छोटा किसान है। तीन चीजें और जो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तय हुई हैं उनमें शामिल हैं, पहला देश 144 करोड़ आबादी के खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना,  दूसरा किसानों की आय बढ़ाना और तीसरा देशवासियों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध करवाना।

शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों को उनके उत्पादन का सही दाम मिले, इसके लिए भारत सरकार पूरी कोशिश कर रही है। किसान द्वारा पंजीकरण के बाद अरहर, मसूर और उड़द की भी खरीद की जाएगी। दलहन-तिलहन साथ ही सोयाबीन में भी रिकॉर्ड स्तर पर खरीद हुई है।

कृषि मंत्री ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का ब्योरा भी दिया। कहा कि किसान तक शोध की सही जानकारी पहुंचाने के लिए भी व्यापक स्तर पर कोशिश की गई। प्रधानमंत्री के विजन में ‘लैब टू लैंड’ को जोड़ने के लिए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ भी आयोजित किया गया। वैज्ञानिकों की 2,170 टीमों ने जमीनी स्तर पर जाकर किसानों से संवाद किया, उन्हें कृषि की विभिन्न पद्धतियों और शोध की जानकारी दी। साथ ही उनकी व्यावहारिक समस्याओं को सुनकर आगे के शोध की दिशा तय करने का भी काम किया। इस अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण अनुभव और नवाचार देखने मिले, जिनका आगे की नीतियां तय करने व अनुसंधान करते समय अवश्य ध्यान रखा जाएगा। अभियान के दौरान कई गंभीर मुद्दे भी सामने आए हैं, जिनमें सबसे गंभीर है, किसानों को घटिया कीटनाशक और घटिया बीज का विषय। इसलिए अब अमानक बीज एवं कीटनाशक बनाने वाले और बेचने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। कड़ा कानूनी प्रावधान बनाने की दिशा में तत्परता से काम चल रहा है। 

उन्होंने कहा कि टमाटर, आलू, प्याज इन फसलों के उत्पादन की बिक्री से जुड़ा एक और प्रावधान किसानों के हित में किया गया है। किसान इन फसलों को जहां उत्पादन के ज्यादा दाम मिल रहे हैं, बेचना चाहे तो सरकार परिवहन का खर्चा उठाएगी। बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) के जरिये यह प्रावधान किया गया है। भंडारण की व्यवस्था के लिए भी वित्तीय सहायता देने की कोशिश की जाएगी।

उन्होंने कहा कि तिलहन का उत्पादन बढ़ाना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। सोयाबीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्परता से प्रयास किए जा रहे हैं। 26 जून को इंदौर में सोयाबीन उत्पादन पर अहम बैठक की जाएगी। वर्तमान बजट में ‘कपास मिशन’ की घोषणा के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद करता हूं। 27 जून को इसी संबंध में कपास पर गुजरात में अहम बैठक की जाएगी। आगे गन्ने की खेती के लिए भी विशेष बैठक उत्तर-प्रदेश में की जाएगी। समस्याओं के अनुरूप ही उनके समाधान खोजने की कोशिश और कारगर कार्यान्वयन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नाफेड, एफपीओ सहित सभी संस्थाएं बेहतर काम कर रही हैं, लेकिन अभी भी अनंत संभावनाएं बाकी हैं। भारत को दुनिया का फूड बास्केट बनाने के लिए पूरे प्रयास करने होंगे। छोटी जोत होने के बावजूद हम ऐसा करके रहेंगे।

कॉटन के आयात में 156 फीसदी की भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान - उद्योग

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में कॉटन का आयात 156.57 फीसदी बढ़कर 39 लाख गांठ, एक गांठ 170 किलो होने का अनुमान है जबकि इस दौरान निर्यात 17 लाख गांठ का ही होने का अनुमान है।


कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार मई 2025 अंत तक कॉटन का आयात बढ़कर 26.25 लाख गांठ का हो चुका है, वहीं इस दौरान निर्यात 15.25 लाख गांठ का हुआ है। फसल सीजन 2023-24 के दौरान 15.20 लाख गांठ कॉटन का आयात हुआ था। फसल सीजन 2024-25 के दौरान देश से कॉटन का निर्यात 17 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में 301.15 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इससे पहले के अनुमान 291.35 लाख गांठ की तुलना में ज्यादा है।

सीएआई के अनुमान के अनुसार पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2024-25 में 1.50 लाख गांठ, हरियाणा में 7.80 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 10.10 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 9.40 लाख गांठ को मिलाकर कुल 28.80 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 76 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 85 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 19 लाख गांठ को मिलाकर कुल 180 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 48 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 11.50 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 23 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 4 लाख गांठ को मिलाकर कुल 86.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3.85 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 को कॉटन का बकाया स्टॉक 30.19 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 301.15 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 39 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 370.34 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 305 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 17 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है।

सीएआई के अनुसार उत्पादक मंडियों में मई अंत तक 285.09 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है, जिसमें से 208 लाख गांठ की खपत हो चुकी है। अत: पहली जून को मिलों के पास 35 लाख गांठ एवं सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी, जिनर्स एवं निर्यातकों के साथ ही व्यापारियों के पास 85.28 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक है।

कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार कपास का उत्पादन 306.92 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है, जो क‍ि इसके पिछले फसल सीजन 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में डीओसी का निर्यात 1.79 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों अप्रैल एवं मई में डीओसी का निर्यात 1.79 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 781,189 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 767,436 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार मई में डीओसी के निर्यात में 4 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 315,326 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल मई में इसका निर्यात 302,280 टन का ही हुआ था।

ऑयल वर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, पशुधन उत्पादन में वृद्धि और मिश्रित फीड में सोया डीओसी की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण अफ्रीकी देशों में सोया डीओसी की खपत बढ़ रही है। भारत ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में मध्य पूर्व और अफ्रीकी देशों को 1,18,000 टन से अधिक सोया डीओसी का निर्यात किया, जिसे मुख्य रूप से केन्या और कुवैत को भेजा गया। 2024-25 में, भारत ने इस क्षेत्र में निर्यात को बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (ईरान और अन्य देशों को) को 800,000 टन से अधिक सोया डीओसी का निर्यात किया था। अफ्रीकी देश सोया डीओसी के लिए बढ़ते बाजार हैं। भारत के पास लॉजिस्टिक लाभ है और वह अफ्रीकी देशों को कंटेनर लोड द्वारा छोटे पार्सल भेज सकता है।

सुदूर पूर्व के देशों में, लॉजिस्टिक और मूल्य कम होने के कारण भारतीय सरसों डीओसी को मवेशी चारा के उपयोग लिए बहुत अच्छी मांग बनी हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों में, भारत ने लगभग 3.5 लाख टन सरसों डीओसी का निर्यात किया, जिसमें चीन सबसे आगे है, उसके बाद दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और बांग्लादेश का स्थान है। इससे सरसों की घरेलू कीमत को भी समर्थन मिला और यह 5,950 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से ऊपर बनी रही। 2024-25 में, भारत ने मूल्य समानता के कारण सुदूर पूर्व और दक्षिण पूर्व देशों को मुख्य रूप से दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और बांग्लादेश को 18.62 लाख टन से अधिक सरसों डीओसी का निर्यात किया था। भारतीय सरसों डीओसी की मौजूदा कीमत एफओबी कांडला सिर्फ 200 डॉलर प्रति टन है, जबकि सरसों डीओसी (कैनोला खली) एफओबी एक्स-मिल हैम्बर्ग 290 डॉलर प्रति टन है।

भारतीय बंदरगाह पर मई में सोया डीओसी का भाव कमजोर होकर 382 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि अप्रैल में इसका दाम 388 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य मई में भारतीय बंदरगाह पर घटकर 201 डॉलर प्रति टन का रह गया, जबकि अप्रैल में इसका भाव 207 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम अप्रैल के 79 डॉलर प्रति टन से कमजोर होकर मई में 77 डॉलर प्रति टन का रह गया।

शुरूआती चरण में खरीफ फसलों धान एवं दलहन तथा तिलहन की बुआई बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन के शुरूआती चरण में धान के साथ ही दलहन एवं तिलहन की बुआई बढ़कर 89.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 87.81 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 13 जून 25 तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 4.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 4 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 3.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.60 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान मूंग की बुआई 1.56 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 0.43 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 1.38 लाख हेक्टेयर और 0.18 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। अरहर की बुआई 0.30 लाख हेक्टेयर और अन्य दलहन की 0.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 2.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 1.50 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 0.58 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 1.07 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 22,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 0.71 लाख हेक्टेयर में, 0.40 लाख हेक्टेयर में तथा 22,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई मामूली कम होकर चालू खरीफ सीजन में 5.89 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.90 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में मक्का की 3.60 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 0.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.28 और 0.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 1.01 लाख हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 55.07 लाख हेक्टेयर में और कपास की 13.19 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 54.88 लाख हेक्टेयर और 13.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

अक्टूबर से मई के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 11 फीसदी घटा - सोपा

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2024-25 के पहले आठ महीनों अक्टूबर 24 से मई 25 के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 10.84 फीसदी घटकर केवल 14.63 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि में इसका निर्यात 16.41 लाख टन का हुआ था।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन के अक्टूबर से मई के दौरान 62.34 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हुआ है, जबकि नई सीजन के आरंभ में 1.33 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। इस दौरान 14.63 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है जबकि 5.55 लाख टन की खपत फूड में एवं 42 लाख टन की फीड में हुई है। अत: पहली जून को मिलों के पास 1.49 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.31 लाख टन से कम है।

सोपा के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के पहले आठ महीनों में देशभर की उत्पादक मंडियों में 83.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जिसमें से मई अंत तक 79 लाख टन की पेराई हुई है। इस दौरान 3.85 लाख टन सोयाबीन की खपत डारेक्ट हुई है जबकि 0.09 लाख टन का निर्यात हुआ है। अत: प्लांटों एवं व्यापारियों तथा किसानों के पास पहली जून को 22.84 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 45.71 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में सोयाबीन का उत्पादन 125.82 लाख टन का हुआ है, जबकि 8.94 लाख टन का बकाया स्टॉक नई फसल की आवक के समय बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 134.76 लाख टन की बैठी है, जबकि चालू सीजन में करीब 25 हजार लाख टन सोयाबीन के आयात का अनुमान है। पिछले फसल सीजन में 118.74 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि नई फसल की आवक के समय 24.07 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: पिछले साल कुल उपलब्धता 142.81 लाख टन की बैठी थी, जबकि 6.25 लाख टन का आयात हुआ था।