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30 नवंबर 2024

स्पिनिंग मिलों की मांग से गुजरात में कॉटन तेज, उत्तर भारत में कमजोर

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शनिवार को गुजरात में कॉटन के दाम तेज हुए, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसकी कीमतों में गिरावट आई।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव में 150 रुपये की तेजी आकर दाम 54,200 से 54,500 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। अत: पिछले दो कार्यदिवस में राज्य में कॉटन की कीमत 400 रुपये प्रति कैंडी तक तेज हुई हैं।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5650 से 5660 रुपये प्रति मन रह गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5630 से 5640 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव घटकर 5620 से 5670 रुपये प्रति मन रह गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव कमजोर होकर 54,300 से 54,400 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए। देशभर की मंडियों में कपास की आव 1,20,000 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने से जहां गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है, वहीं उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम कमजोर हुए। व्यापारी कॉटन में बड़ी तेजी के पक्ष में नहीं है क्योंकि खपत का सीजन होने के बावजूद भी सूती धागे की स्थानीय मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है साथ ही कॉटन के निर्यात में भी पड़ते नहीं लग रहे। हालांकि चालू सीजन में बुआई में आई कमी के साथ ही कई राज्यों में अक्टूबर में हुई बारिश से कॉटन के उत्पादन और क्वालिटी पर पड़ने की आशंका है। इसलिए कॉटन की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। भारती की तुलना में विश्व बाजार में दाम कम होने के कारण चालू सीजन में अभी तक आयात सौदे ज्यादा मात्रा में हुए हैं।

कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने 21 नवंबर को ई-नीलामी के माध्यम से तेलंगाना, अहमदाबाद, मध्य प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा में फसल सीजन 2023-24 की खरीदी हुई 13,200 गांठ कॉटन की बिक्री की।

कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 299.26 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जो क‍ि पिछले खरीफ 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के आरंभिक अनुसार के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में 302.25 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन 2023-24 के 325.29 लाख गांठ से कम है।

धान की सरकारी खरीद 244.17 लाख टन के पार, पंजाब एवं हरियाणा की हिस्सेदारी ज्यादा

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 244.17 लाख टन के पार पहुंच गई है। अभी तक कुल खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब एवं हरियाणा की है।


सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार पंजाब की मंडियों में 22 नवंबर तक कुल 160.17 लाख टन धान की खरीद एजेंसियों और एफसीआई द्वारा की जा चुकी है। इस दौरान हरियाणा की मंडियों से 53.28 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है।

अन्य राज्यों में हिमाचल से 32,152 टन, जम्मू कश्मीर से 23,684 टन, बिहार से 27,288 टन तथा आंध्र प्रदेश से 2.73 लाख टन धान की एमएसपी पर खरीद हो चुकी है। इस दौरान केरल से 8,830 टन, तमिलनाडु से 4,92,067 टन तथा तेलंगाना से 7,55,176 टन के अलावा उत्तराखंड से 3,50,466 टन तथा उत्तर प्रदेश से 6,01,400 टन धान की खरीद समर्थन मूल्य पर हुई है। गुजरात से 2,825 टन धान की सरकारी खरीद हुई है।

हरियाणा की फतेहाबाद मंडी में अगले दो दिनों 23 और 24 नवंबर को धान की आवक बंद कर दी गई है, तथा इस दौरान केवल लिफ्टिंग का कार्य किया जायेगा।

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए धान की खरीद 1 अक्टूबर 2024 से शुरू करने का निर्णय लिया था, लेकिन नमी ज्यादा होने के कारण खरीद में तेजी मध्य अक्टूबर के बाद आई।

केंद्र सरकार के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के दौरान पंजाब से करीब 185 लाख टन और हरियाणा से 60 लाख टन धान की खरीद होने का अनुमान है।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए कॉमन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य,एमएसपी 2,300 रुपये और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

22 नवंबर 2024

तेल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से सरसों दूसरे दिन मंदी, दैनिक आवक बढ़ी

नई दिल्ली। तेल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने के कारण घरेलू बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सरसों की कीमतों में मंदा आया। जयपुर में कंडीशन की सरसों के भाव 50 रुपये कमजोर होकर दाम 6,675 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 2 लाख बोरियों की हुई।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। मलेशियाई पाम तेल के दाम एक फीसदी के करीब कमजोर हुए। हालांकि इस दौरान शिकागो में सोया तेल की कीमतों में शाम से सत्र में तेजी आई। उधर डालियान में खाद्वय तेलों में गिरावट दर्ज की गई। जानकारों के अनुसार बाजार में इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि आने वाला ट्रम्प प्रशासन चीनी वस्तुओं के आयात पर 40 फीसदी टैरिफ लगा सकता है। बुधवार को घरेलू बाजार में सरसों तेल की कीमतों में दूसरे दिन गिरावट आई, जबकि इस दौरान सरसों खल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई।

उत्पादक राज्यों की मंडियों में सरसों की दैनिक आवकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। घरेलू बाजार में तेल मिलों के मुकाबले, किसान एवं स्टॉकिस्ट के पास सरसों का बकाया स्टॉक ज्यादा मात्रा में बचा हुआ है। हालांकि खपत का सीजन होने के कारण घरेलू बाजार में सरसों तेल में मांग अभी बनी रहेगी, लेकिन इसकी कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक आयातित खाद्वय तेलों के दाम पर ही निर्भर करेगी।

चीन से आयात पर अमेरिकी टैरिफ की आशंका और खाद्वय तेल बाजार में सुस्त मांग के कारण मलेशियाई क्रूड पाम तेल (सीपीओ) वायदा गुरुवार को लगातार दूसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ।

बुर्सा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज, बीएमडी पर फरवरी डिलीवरी के पाम तेल वायदा अनुबंध में 46 रिंगिट यानी की 0.96 फीसदी की गिरावट आकर भाव 4,769 रिंगिट प्रति टन पर बंद हुए। इस दौरान डालियान के सबसे सक्रिय सोया तेल वायदा अनुबंध में 1.41 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि इसके पाम ऑयल वायदा अनुबंध में 3.94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड में, सोया तेल की कीमतों में 0.85 फीसदी की तेजी आई।

विश्व स्तर पर कमजोर मांग की आशंका ने पाम तेल की कीमतों पर दबाव डाला। वैसे भी नवंबर और दिसंबर में पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद है क्योंकि प्रमुख खरीदार भारत ने पहले ही खाद्वय तेलों का पर्याप्त स्टॉक जमा कर लिया है।

पाम तेल के व्यापार की मुद्रा रिंगिट डॉलर के मुकाबले 0.2 फीसदी मजबूत हुआ, जिससे मलेशियाई पाम तेल विदेशी खरीदारों के लिए महंगा हो गया।

जयपुर में सरसों तेल कच्ची घानी और एक्सपेलर की कीमतों में गुरूवार को भी गिरावट आई। कच्ची घानी सरसों तेल के भाव 20 रुपये कमजोर होकर 1,365 रुपये प्रति 10 किलो रह गए, जबकि सरसों एक्सपेलर तेल के दाम भी 20 रुपये घटकर 1,355 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। इस दौरान जयपुर में सरसों खल के भाव 70 रुपये कमजोर होकर 2,355 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

देशभर की मंडियों में सरसों की दैनिक आवक बढ़कर 2 लाख बोरियों की हुई, जबकि इसके पिछले कार्यदिवस में आवक केवल 1.95 लाख बोरियों की ही हुई थी। कुल आवकों में से प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान की मंडियों में सरसों की एक लाख बोरी, जबकि मध्य प्रदेश की मंडियों में 20 हजार बोरी, उत्तर प्रदेश की मंडियों में 25 हजार बोरी, पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में 5 हजार बोरी तथा गुजरात में 10 हजार बोरी, एवं अन्य राज्यों की मंडियों में 40 हजार बोरियों की आवक हुई।

स्पिनिंग मिलों की खरीद से गुजरात एवं उत्तर भारत में कॉटन तेज

नई दिल्ली। नीचे दाम पर स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण गुरुवार को दोपहर बाद गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई। गुजरात की मंडियों में पिछले सात कार्य दिवसों से इसके भाव में लगातार गिरावट बनी हुई थी।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव में गुरुवार को 250 रुपये की तेजी आकर दाम 53,800 से 54,100 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। इसकी कीमतों में 12 नवंबर से 20 नवंबर तक 1,350 रुपये प्रति कैंडी का मंदा आया था।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5640 से 5650 रुपये प्रति मन बोले गए।
हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5625 से 5635 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5610 से 5660 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव तेज होकर 54,200 से 54,300 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आव 1,46,900 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में में मिलाजुला रुख रहा। इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी आई।

नीचे दाम पर स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। व्यापारियों के अनुसार विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतों में सुधार तो आया है, लेकिन अभी एकतरफा बड़ी तेजी के आसार नहीं है। खपत का सीजन होने के बावजूद भी सूती धागे की स्थानीय मांग सामान्य की तुलना में कमजोर बनी हुई है साथ ही कॉटन के निर्यात में भी पड़ते नहीं लग रहे, क्योंकि विश्व बाजार में कॉटन की कीमत अभी भी भारत की तुलना में पांच से छह फीसदी कम हैं। हालांकि चालू सीजन में बुआई में आई कमी के साथ ही कई राज्यों में अक्टूबर में हुई बारिश से कॉटन के उत्पादन और क्वालिटी पर पड़ने की आशंका है। इसलिए कॉटन की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। हालांकि विश्व बाजार में दाम कम होने के कारण चालू सीजन में अभी तक आयात सौदे ज्यादा मात्रा में हुए हैं।

सीसीआई ने 15 नवंबर को तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा में फसल सीजन 2023-24 की 28,800 गांठ कॉटन की बिक्री की थी।

कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 299.26 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जो क‍ि पिछले खरीफ 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के आरंभिक अनुसार के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में 302.25 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन 2023-24 के 325.29 लाख गांठ से कम है।

जनवरी से अक्टूबर के दौरान कैस्टर तेल का निर्यात 12.75 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वर्ष के जनवरी से अक्टूबर के दौरान कैस्टर तेल के निर्यात में 12.75 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 4,21,018 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 3,73,406 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 48,209 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात केवल 47,473 टन का ही हुआ था। मूल्य के हिसाब से अक्टूबर में कैस्टर तेल का निर्यात 601.65 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले साल अक्टूबर में इसका निर्यात 604.50 करोड़ रुपये का ही हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में बुआई में आई कमी से कैस्टर सीड का उत्पादन कम होने का अनुमान है, जिस कारण इसके भाव में हाल ही में तेजी आई है।

गुजरात की मंडियों में बुधवार को कैस्टर सीड के भाव पांच रुपये कमजोर होकर 1,280 से 1,300 रुपये प्रति 20 किलो रह गए। राजकोट में कमर्शियल तेल के भाव इस दौरान 10 रुपये घटकर 1,320 रुपये और एफएसजी के 10 रुपये कमजोर होकर 1,330 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

देशभर की मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक सोमवार को 29 से 30 हजार बोरी, एक बोरी 35 किलो की हुई, जिसमें से गुजरात की मंडियों में 22 से 24 हजार बोरी तथा राजस्थान की मंडियों में चार से पांच हजार बोरियों की हो रही है। इसके अलावा करीब 2,000 से 2,500 बोरी सीधे मिल पहुंच का व्यापार हो रहा है।

कृषि मंत्रालय के आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन घटकर 15.53 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में 19.59 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में कैस्टर सीड की बुआई घटकर केवल 8.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.50 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम थी। 

राजस्थान में रबी फसलों की बुआई 3.25 फीसदी बढ़ी, गेहूं के साथ जौ की ज्यादा

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में राजस्थान में रबी फसलों की बुआई 3.25 फीसदी बढ़कर 18 नवंबर तक 68.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 66.07 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।


चालू रबी में गेहूं के साथ ही जौ की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि सरसों एवं चना की बुआई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार सरसों की बुआई चालू रबी सीजन में 30.18 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 32.22 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। राज्य में सरसों की बुआई का लक्ष्य 40.50 लाख हेक्टेयर का तय किया गया है।

अन्य तिलहनी फसलों में तामीरा की बुआई 67 हजार हेक्टेयर में और अलसी की 8 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।  

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में घटकर 14.58 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 15.17 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। चना की बुआई का लक्ष्य राज्य सरकार ने 22.50 लाख हेक्टेयर का तय किया है।

रबी दलहन की अन्य फसलों की बुआई राज्य में 37 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।

गेहूं की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 11.77 लाख हेक्टेयर में और जौ की 2.12 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 7.91 लाख हेक्टेयर और 1.43 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

19 नवंबर 2024

सीसीआई ने पुरानी कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती की, नई की खरीद सीमित

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में सोमवार को कॉटन की कीमतों पर दबाव देखा गया, क्योंकि कॉटन कारपोरेशन आफ इंडिया, सीसीआई ने जहां पुरानी कपास की बिक्री कीमतों में कटौती की, वहीं नई कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सीमित मात्रा में हो रही है।


गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव में सोमवार को 150 रुपये की गिरावट आकर दाम 53,800 से 54,200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो रह गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5580 से 5590 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव घटकर 5570 से 5580 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5560 से 5610 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव 53,600 से 53,900 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आव 1,34,650 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में में गिरावट का रुख रहा। हालांकि इस दौरान आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में सुधार आया।

स्पिनिंग मिलों की मांग कमजोर होने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में गिरावट आई है। जानकारों के अनुसार घरेलू बाजार में सीसीआई लगातार कॉटन बेच रही है, तथा कॉटन की बिक्री कीमतों में कटौती से भाव पर दबाव है। उधर विदेशी बाजार में कॉटन की कीमतों में हाल ही में मंदा आया है, जिस कारण घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव है।

व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के बावजूद भी सूती धागे की मांग सामान्य की तुलना में कमजोर हुई है साथ ही कॉटन के निर्यात में भी पड़ते नहीं लग रहे। हालांकि चालू सीजन में बुआई में आई कमी के साथ ही कई राज्यों में अक्टूबर में हुई बारिश से कॉटन के उत्पादन और क्वालिटी पर पड़ने की आशंका है। इसलिए कॉटन की कीमतों में सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है। हालांकि विश्व बाजार में दाम कम होने के कारण आयात सौदे ज्यादा मात्रा में हुए हैं।

कृषि मंत्रालय के पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 299.26 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जो क‍ि पिछले खरीफ 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के आरंभिक अनुसार के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में 302.25 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन 2023-24 के 325.29 लाख गांठ से कम है।