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12 नवंबर 2024

धान की सरकारी खरीद 166.90 लाख टन के पार, लिफ्टिंग के अभाव में जाम की स्थिति

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 166.90 लाख टन के पार पहुंच गई है। धान की लिफ्टिंग नहीं होने से हरियाणा की कई मंडियों में जाम की स्थिति पैदा हो गई है, जिस कारण अगले दो दिनों तक खरीद बंद करनी पड़ी है।


सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार पंजाब की मंडियों में 8 नवंबर तक कुल 109.74 लाख टन धान की खरीद एजेंसियों और एफसीआई द्वारा की जा चुकी है। इस दौरान हरियाणा की मंडियों से 48.19 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है।

अन्य राज्यों में हिमाचल से 21,352 टन, जम्मू कश्मीर से 15,283 टन, बिहार से 1,452 टन तथा आंध्र प्रदेश से 17,789 टन धान की एमएसपी पर खरीद हो चुकी है। इस दौरान केरल से 4,104 टन, तमिलनाडु से 4,59,918 टन तथा तेलंगाना से 4,077 टन के अलावा उत्तराखंड से 1,83,067 टन तथा उत्तर प्रदेश से 1,16,567 टन धान की खरीद समर्थन मूल्य पर हुई है। महाराष्ट्र से 72,560 टन धान की सरकारी खरीद हुई है।

हरियाणा की फतेहाबाद और सिरसा मंडी में अगले दो दिनों 9 और 10 नवंबर को धान की आवक बंद कर दी गई है, तथा इस दौरान केवल लिफ्टिंग का कार्य किया जायेगा। उधर रतिया मंडी में जाम लगने से लोडिंग वाली लेबर द्वारा खिंलाई, सिलाई बंद कर दी गई है तथा लेबर का कहना है कि नया माल मंडी में आना रोककर सिर्फ लोडिंग चलाई जाए।

केंद्रीय खाद्वय मंत्रालय के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए धान की खरीद पंजाब से 1 अक्टूबर 2024 से शुरू की गई थी तथा राज्य के किसानों से सुचारू खरीद के लिए पूरे राज्य में 2,927 मंडियों के अलावा अस्थायी खरीद केंद्र खोले गए हैं। केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए पंजाब से धान की खरीद का अनुमानित लक्ष्य 185 लाख टन तय किया है, तथा राज्य में 30.11.2024 तक खरीद जारी रहेगी।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए कॉमन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य,एमएसपी 2,300 रुपये और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

08 नवंबर 2024

राजस्थान में सरसों एवं चना के साथ ही गेहूं की बुआई पिछड़ी

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में राजस्थान में सरसों के साथ ही चना एवं गेहूं की बुआई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है। राज्य में रबी फसलों की कुल बुआई 6 नवंबर तक 42.17 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 49.44 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार सरसों की बुआई चालू रबी सीजन में 25.73 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 28.43 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। राज्य में सरसों की बुआई का लक्ष्य 40.50 लाख हेक्टेयर का तय किया गया है।

अन्य तिलहनी फसलों में तामीरा की बुआई 50 हजार हेक्टेयर में और अलसी की 3 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।  

रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 10.75 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 12.53 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। चना की बुआई का लक्ष्य राज्य सरकार ने 22.50 लाख हेक्टेयर का तय किया है।

रबी दलहन की अन्य फसलों की बुआई राज्य में 9 हजार हेक्टेयर में ही हुई है।

गेहूं की बुआई चालू रबी सीजन में 1.59 लाख हेक्टेयर में और जौ की 61,000 हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 2.06 लाख हेक्टेयर और 58 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू पेराई सीजन में 333 लाख टन चीनी का आरंभिक उत्पादन अनुमान - इस्मा

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन 2024-25 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान देश में 333 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है जोकि पिछले पेराई सीजन 2023-24 के 340.64 लाख टन की तुलना में थोड़ा कम है।


इंडियन शुगर और जैव-ऊर्जा निर्माता एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन में चीनी के उत्पादन अनुमान में कमी आने के बावजूद भी देश में चल रहे इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) का समर्थन करने और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने के लिए देश में पर्याप्त चीनी की उलब्धता रहेगी।

इस्मा के अनुसार प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में फसल की स्थिति अनुकूल दिखती है, और फील्ड रिपोर्ट भी सैटेलाइट मैपिंग रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुरूप हैं। इस्मा के अनुसार, चीनी की पर्याप्त उपलब्धता से न केवल घरेलू खपत के लिए पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित होगा, साथ ही इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को बनाए रखा जा सकेगा। इसके साथ निर्यात के लिए भी गुंजाइश बनी रहेगी। अत: चालू पेराई सीजन में चीनी मिलों की वित्तीय तरलता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी और किसानों को समय पर भुगतान संभव हो सकेगा।

इस्मा के चालू पेराई सीजन के आरंभिक अनुमान के अनुसार महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 111.02 लाख टन और उत्तर प्रदेश में 110.10 लाख टन तथा कर्नाटक में 58.07 लाख टन होने का अनुमान है। अन्य राज्यों में इस दौरान 53.81 लाख टन चीनी के उत्पादन का अनुमान है।

पेराई सीजन 2023-24 के दौरान महाराष्ट्र में 118.48 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 110 लाख टन और कर्नाटक में 58.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। अन्य राज्यों में इस दौरान 54.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

इस्मा के अनुसार पेराई सीजन 2023-24 के दौरान 19 लाख टन चीनी इथेनॉल ब्लेंडिंग में खपत हुई थी, अत: कुल उत्पादन 319.64 लाख टन का बैठा था।

चालू पेराई सीजन में पहली अक्टूबर 2024 को 84.79 लाख टन चीनी का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जबकि 333 लाख टन के उत्पादन का अनुमान है। अत: कल उपलब्धता 417.79 लाख टन की बैठेगी। देश में चीनी की सालाना खपत 290 लाख टन होने का अनुमान है जबकि करीब 40 लाख टन चीनी का उपयोग इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (ईबीपी) में हो सकता है।

चालू खरीफ में खाद्यान्न का रिकॉर्ड 1647.05 लाख टन उत्पादन का अनुमान - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2024-25 के दौरान देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड 1647.05 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान है। चावल के साथ ही मक्का के उत्पादन में बढ़ोतरी होने का अनुमान है।


कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को फसल सीजन 2024-25 के लिए खरीफ सीजन की मुख्य फसलों के उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान जारी किया है। देश में खरीफ का खाद्यान्न उत्पादन 1647.05 लाख टन अनुमानित है, जोकि पिछले खरीफ की तुलना में 89.37 लाख टन अधिक एवं औसत उत्पादन के मुकाबले 124.59 लाख टन ज्यादा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा क‍ि किसानों, वैज्ञानिकों की मेहनत और सरकार की सही नीति की वजह से खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान है। चालू खरीफ सीजन में मक्का का उत्पादन 245.41 लाख टन होने का अनुमान है, जो क‍ि पिछले साल यानी 2023-24 में हुए 222.45 टन की तुलना में ज्यादा है। फसल सीजन 2024-25 के दौरान देश में 1199.34 लाख टन चावल पैदा होने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 1132.59 लाख टन से ज्यादा है।

मोटे अनाजों का उत्पादन चालू खरीफ सीजन में 378.18 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि 2024-25 खरीफ सीजन के दौरान दलहन का कुल उत्पादन 69.54 लाख टन होने का अनुमान है। खरीफ में तिलहनी फसलों का उत्पादन 257.45 लाख टन होने का अनुमान लगाया गया है, जो क‍ि पिछले साल की तुलना में 15.83 लाख टन अधिक है।

मोटे अनाज में बाजरा का उत्पादन का उत्पादन चालू खरीफ में 93.75 लाख टन होने का अनुमान है, जो 2023-24 के 96.63 लाख टन की तुलना में कम है।

दलहनी फसलों में अरहर का उत्पादन 35.02 लाख टन, उड़द का 12.09 लाख टन और मूंग का 13.83 लाख टन होने का अनुमान है।

पहले आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों में सोयाबीन का उत्पादन 133.60 लाख टन, मूंगफली का 103.60 लाख टन होने का अनुमान है।

गन्ने का उत्पादन चालू खरीफ सीजन में 4,399.30 लाख टन होने का अनुमान है।

चालू खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 299.26 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जो क‍ि पिछले खरीफ 2023-24 के 325.22 लाख गांठ के मुकाबले कम है। इस दौरान पटसन एवं मेस्ता का उत्पादन 84.56 लाख गांठ, एक गांठ-180 किलो होने का अनुमान है।

05 नवंबर 2024

चालू खरीफ सीजन में धान की सरकारी खरीद 135 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 में धान की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद बढ़कर 135 लाख टन के पार पहुंच गई है। अभी हुई खरीद में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी पंजाब एवं हरियाणा की है।


केंद्रीय खाद्वय मंत्रालय के अनुसार पंजाब की मंडियों में 2 नवंबर तक कुल 90.69 लाख टन धान की आवक हो चुकी है, जिसमें से 85.41 लाख टन राज्य एजेंसियों और एफसीआई द्वारा खरीदा जा चुका है।

सेंट्रल फूड ग्रेन प्रोक्योरमेंट पोर्टल के अनुसार हरियाणा की मंडियों से चालू खरीफ विपणन सीजन में 44.06 लाख टन धान की खरीद हो चुकी है। अन्य राज्यों में हिमाचल से 17,610 टन, जम्मू कश्मीर से 12,086 टन, बिहार से 1,366 टन तथा आंध्र प्रदेश से 6,857 टन धान की एमएसपी पर खरीद हो चुकी है।

चालू खरीफ में केरल से 1,186 टन, तमिलनाडु से 4,45,837 टन तथा तेलंगाना से 3,995 टन के अलावा उत्तराखंड से 99,919 टन तथा उत्तर प्रदेश से 58,637 टन धान की खरीद समर्थन मूल्य पर हुई है।

केंद्रीय खाद्वय मंत्रालय के अनुसार खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए धान की खरीद पंजाब से 1 अक्टूबर 2024 से शुरू की गई थी तथा राज्य के किसानों से सुचारू खरीद के लिए पूरे राज्य में 2,927 मंडियों के अलावा अस्थायी खरीद केंद्र खोले गए हैं। केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए पंजाब से धान की खरीद का अनुमानित लक्ष्य 185 लाख टन तय किया है, तथा राज्य में 30.11.2024 तक खरीद जारी रहेगी।

हालांकि सितंबर में भारी बारिश और धान में नमी की मात्रा अधिक होने के कारण खरीद थोड़ी देर से शुरू हुई थी, लेकिन अब सरकारी खरीद में पूरे जोरों पर है।

केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2024-25 के लिए कॉमन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य,एमएसपी 2,300 रुपये और ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में ग्वार गम का निर्यात 5.09 फीसदी बढ़ा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले पांच महीनों अप्रैल से अगस्त के दौरान देश से ग्वार गम उत्पादों के निर्यात में 5.09 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में ग्वार सीड की आवकों में दीपावली के अवकश के बाद बढ़ोतरी होगी। इसलिए ग्वार गम एवं ग्वार सीड की कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से सितंबर के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात बढ़कर 2.27 लाख टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 2.16 लाख टन का ही हुआ था।

मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले छह महीनों के दौरान ग्वार गम उत्पादों का निर्यात 2,343.16 करोड़ रुपये का हुआ है।

उत्पादक मंडियों में ग्वार सीड की दैनिक आवक बढ़कर 46 से 48 हजार बोरियों की हो रही है। इसमें नए ग्वार सीड की हिस्सेदारी 42 से 44 हजार बोरियों की तथा पुरानी की चार से पांच हजार बोरियों की हो रही है। जानकारों के अनुसार दीपावली की छुट्टियों के बाद ग्वार सीड की आवक बढ़ने की उम्मीद है।

जानकारों के अनुसार चालू सीजन में ग्वार सीड की बुआई में आई कमी से उत्पादन अनुमान कम है, लेकिन ग्वार गम उत्पादों में निर्यात मांग भी सीमित ही बनी हुई है।

उत्पादक मंडियों में ग्वार सीड के भाव 4,500 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं, जबकि ग्वार गम के दाम जोधपुर में 10,600 से 10,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात बढ़ा, गैर बासमती का घटा - एपिडा

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान देश से बासमती चावल के निर्यात में 17.90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, वहीं इस दौरान गैर बासमती चावल के निर्यात में 32.39 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।


वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2024-25 के अप्रैल से सितंबर के दौरान बासमती चावल का निर्यात 17.90 फीसदी बढ़कर 27.20 लाख टन का हो चुका है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2023-24 की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 23.07 लाख टन का ही हुआ था।

गैर बासमती चावल के निर्यात में चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान 32.39 फीसदी की भारी गिरावट आकर कुल निर्यात 46.52 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान इसका निर्यात 68.81 लाख टन का हुआ था।

केंद्र सरकार ने गैर-बासमती चावल पर 10 फीसदी के निर्यात शुल्क पूरी तरह से हटा दिया है, जबकि सितंबर में सरकार ने गैर-बासमती उबले चावल, भूरे चावल और धान पर निर्यात शुल्क 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया था। पिछले दिनों बासमती चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य, एमईपी 950 डॉलर प्रति टन को समाप्त किया था।

पंजाब एवं हरियाणा के साथ ही राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश की मंडियों में सप्ताह में जहां धान की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है, वहीं इस दौरान बारिक चावल के दाम भी 100 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार आगे धान की आवकों में कमी आयेगी, जबकि मिलों की खरीद बनी रहने का अनुमान है। इसलिए धान के साथ ही चावल की कीमतों में सुधार आने की उम्मीद है।

हरियाणा की खरखौदा मंडी में मंगलवार को पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4,271 रुपये, 1,718 किस्म के 3,751 रुपये तथा 1,509 किस्म के 2,900 से 3,221 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। पंजाब की नाभा मंडी में डीपी धान के भाव 2,400 से 3,350 रुपये, 1,718 किस्म के 3,200 से 3,405 रुपये तथा 1,847 किस्म के धान के दाम 2,650 से 2,955 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। राजस्थान की बारा मंडी में 1,509 किस्म के धान के भाव 2,700 से 2,800 रुपये, सुगंधा किस्म के धान के दाम 2,000 से 2,501 रुपये और 1,718 किस्म के 3,051 से 3,351 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

दिल्ली के नया बाजार में पूसा 1,509 किस्म के स्टीम चावल का व्यापार 6,200 से 6,400 रुपये और इसके सेला चावल का 5,500 से 5,700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। इस दौरान पूसा 1,121 किस्म के सेला चावल के भाव 7,500 से 7,700 रुपये और स्टीम चावल के 8,500 से 8,700 रुपये प्रति क्विंटल रहे।