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09 नवंबर 2023

फसल सीजन 2023-24 में 295.10 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान - उद्योग

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2023 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2023-24 में देश में 295.10 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन 2022-23 के 318.90 लाख गांठ से कम है।


कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के आरंभिक अनुसार के अनुसार उत्तर भारत के राज्यों पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2023-24 में 4.50 लाख गांठ, हरियाणा में 16 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 11 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 11.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 43 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 85 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 76.60 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 18 लाख गांठ को मिलाकर कुल 179.60 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 30 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12.50 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 18.50 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 6.50 लाख गांठ को मिलाकर कुल 67.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2023 को कॉटन का बकाया स्टॉक 28.90 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 295.10 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 22 लाख गांठ कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 346 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 311 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 14 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है।

बुआई में कमी के साथ ही अगस्त में बारिश की भारी कमी का असर चालू सीजन में कपास की फसल पर पड़ा है, जिस कारण इसके उत्पादन अनुमान में कमी आने की आशंका है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुआई 123.87 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसकी बुआई 127.73 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

खरीफ में 14.85 करोड़ टन खाद्यान्न के आरंभिक उत्पादन का अनुमान - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में खाद्यान्न का 14.85 करोड़ टन उत्पादन का अनुमान है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी 2023-24 के आरंभिक अनुमान में चावल, कपास, मूंगफली, सोयाबीन तथा उड़द एवं मूंग के उत्पादन में कमी आने की आशंका है।


मानसूनी सीजन में देशभर के कई राज्यों में अगस्त में बारिश की भारी कमी एवं सितंबर के आरंभ में कई क्षेत्रों में भारी बारिश का असर खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है।  

मंत्रालय के अनुसार खरीफ फसल सीजन 2023-24 में चावल का उत्पादन घटकर 1,063.1 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि 2022-23 के दूसरे आरंभिक अनुमान में 1,105.1 लाख टन का उत्पादन हुआ था। इसी तरह से मक्का का उत्पादन घटकर चालू खरीफ सीजन में 224.8 लाख टन ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 236.7 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर का उत्पादन चालू खरीफ में 34.2 लाख टन होने का अनुमान है, जोकि पिछले खरीफ सीजन के 33.1 लाख टन से थोड़ा अधिक है। हालांकि उड़द का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 15.1 लाख टन का और मूंग का 14.1 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इनका उत्पादन क्रमश: 17.7 लाख टन और 17.2 लाख टन का हुआ था।

आरंभिक अनुमान के अनुसार चालू खरीफ सीजन में मूंगफली का उत्पादन घटकर 78.3 लाख टन और सोयाबीन का 115.3 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल खरीफ में इनका उत्पादन क्रमश: 85.6 लाख टन का तथा 149.9 लाख टन का हुआ था।

कपास का उत्पादन चालू खरीफ में कम होकर 316.6 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो ही होने का अनुमान है, जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 336.6 लाख गांठ का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार गन्ने का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 4,347.9 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ सीजन में इसका उत्पादन 4,905.3 लाख टन का हुआ था। 

27 अक्टूबर 2023

गुजरात में मूंगफली का उत्पादन 11.50 बढ़कर 33.50 लाख टन होने का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। बुआई में कमी आने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन 11.50 फीसदी बढ़कर 33.50 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 30 लाख टन का उत्पादन हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू खरीफ सीजन में गुजरात में मूंगफली की बुआई 4.33 फीसदी घटकर 16.35 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इसकी बुआई 17.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

एसईए के अनुसार देशभर के राज्यों में चालू खरीफ में मूंगफली की बुआई 43.91 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले खरीफ के 45.54 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.62 लाख हेक्टेयर कम है।

उत्तरी गुजरात की उत्पादक मंडियों में इस समय मूंगफली की नई फसल की आवक जोरों पर है, क्योंकि इस क्षेत्र में किसान फसल काटते ही बेचना पसंद करते हैं और लंबे समय तक रोक कर नहीं रखते हैं। उत्पादक मंडियों में अच्छी क्वालिटी की मूंगफली के भाव 6,250 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि चालू खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार ने मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 6,377 रुपये प्रति क्विंटल है।

एसईए के अनुसार गुजरात के द्वारका जिले में मूंगफली का सबसे ज्यादा उत्पादन 5.80 लाख टन एवं जूनागढ़ में 4.90 लाख टन होने का अनुमान है। अन्य जिलों में जामनगर में 3.20 लाख टन, राजकोट में 3.95 लाख टन, पोरबंदर में 1.95 लाख टन, गिर सोमनाथ में 1.90 लाख टन, भावनगर में 1.70 लाख टन, अमरेली में 1.50 लाख टन, मोरबी में 1.05 लाख टन तथा सुरेंद्रनगर में 30 हजार टन होने का अनुमान है।

अन्य राज्यों कच्छ में 1.30 लाख टन, साबरकांठा में 1.25 लाख टन, बनासकांठा में 2.90 लाख टन तथा अरावली में 90 हजार टन तथा अन्य जिलों में 80 हजार टन के उत्पादन का अनुमान है।

चालू रबी में तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई आगे, दलहन एवं धान की पिछे

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन के शुरूआती चरण में जहां तिलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई आगे चल रही है, वहीं दलहनी फसलों के साथ धान की रोपाई पिछड़ रही है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 21 अक्टूबर तक देशभर में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 12.93 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.97 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों की बुआई चालू रबी में 12.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 11.97 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। अन्य तिलहनों में मूंगफली की बुआई 19 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 18 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 3.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.88 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 2.90 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.04 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मक्का की बुआई चालू रबी में 73 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 70 हजार हेक्टेयर से ज्यादा है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू रबी में 21 अक्टूबर तक केवल 3.71 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 4.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी में 3.03 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अविध के 3.51 लाख हेक्टेयर से कम है।

धान की रोपाई चालू रबी में 2.18 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले रबी सीजन की समान अवधि के 2.71 लाख हेक्टेयर से कम है।  

राइस मिलों की खरीद शुरू होने से धान की कीमतों में सुधार, दैनिक आवक भी बढ़ी

नई दिल्ली। राइस मिलों की खरीद शुरू होने से शुक्रवार को धान की कीमतों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। साथ ही उत्पादक मंडियों धान की दैनिक आवकों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।


ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, एआईआरईए के अध्यक्ष नाथी राम गुप्ता ने राइस मिलर्स एवं निर्यातकों से कहां है धान की खरीद अपने विवेक से करे, क्योंकि बासमती सेला चावल के न्यूनतम निर्यात मूल्य, एमईपी को 1,200 डॉलर प्रति टन कम करने की फाइल जीओएम की बैठक में आने वाली है, तथा यह बैठक होने में अभी समय लग सकता है।

केंद्र सरकार द्वारा बासमती सेला चावल का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) 1,200 डॉलर प्रति टन करने के साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को देखते हुए ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने अपने सदस्यों से चावल एवं धान की खरीद को बंद करने को कहां था, जिस कारण पंजाब एवं हरियाणा की मंडियों में पिछले चार, पांच दिनों से धान की खरीद लगभग बंद सी हो गई थी, साथ ही इसकी दैनिक आवकों में भी कमी आई थी। इसका असर मंडियों में धान की कीमतों पर भी पड़ा था।

पंजाब की अमृतसर मंडी में शुक्रवार को धान की दैनिक आवक बढ़कर एक लाख कट्टों की हुई तथा पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 2,300 से 3,435 रुपये और 1,847 किस्म के धान के भाव 2,400 से 3,125 रुपये प्रति क्विंटल रहे। राज्य तरनतारन मंडी में धान की आवक 22,000 कट्टों की हुई तथा 1,509 किस्म के धान के दाम 150 रुपये तेज होकर 3,660 रुपये और कंबाइन के 2,700 से 3,610 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

हरियाणा की जींद मंडी में पूसा 1,121 किस्म के हाथ के धान के भाव 100 रुपये तेज होकर दाम 4,515 रुपये और 1,718 किस्म के धान के दाम 4,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव 3,350 से 3,650 रुपये प्रति क्विंटल रहे। राज्य की खरखौदा मंडी में पूसा 1,121 किस्म के धान के भाव 4,551 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 3,951 रुपये तथा 1,847 किस्म के धान के दाम 3,471 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

दिल्ली की नरेला मंडी में 1,121 किस्म के धान के दाम तेज होकर 4,614 रुपये, 1,718 किस्म के धान के भाव 4,000 रुपये और 1,509 किस्म के धान के भाव 3,200 से 3,470 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

उत्तर भारत के राज्यों में पूसा 1,509 किस्म के सेला चावल का भाव 6,500 से 6,700 रुपये और इसके स्टीम चावल का 7,500 से 7,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा। 

दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में रिकार्ड 32.35 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली फसल सीजन 2022-23 में देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड 32.35 करोड़ टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन 2021-22 में 31.56 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।


कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 में चावल का रिकार्ड उत्पादन 1,308.37 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान उत्पादन 1,294.71 लाख टन का हुआ था।

इस दौरान गेहूं का उत्पादन बढ़कर 1,121.82 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है जबकि पिछले फसल सीजन के दौरान इसका उत्पादन 1,077.42 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान मक्का का रिकार्ड उत्पादन 346.13 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इसका उत्पादन 337.30 लाख टन का ही हुआ था। इस दौरान जौ का उत्पादन बढ़कर रिकार्ड 22.04 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इसका उत्पादन 13.71 लाख टन का ही हुआ था।

फसल सीजन 2022-23 के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार दालों का उत्पादन बढ़कर 278.10 लाख का रिकॉर्ड होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 273.2 लाख टन का ही उत्पादन हुआ था।

दलहनी फसलों में अरहर का उत्पादन घटकर फसल सीजन 2022-23 के दौरान 36.66 लाख टन का ही होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 42.20 लाख टन का हुआ था। चना का उत्पादन बढ़कर 136.32 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले फसल सीजन में उत्पादन 135.44 लाख टन का ही हुआ था। अन्य दलहन में उड़द का 26.82 लाख टन तथा मूंग का 35.45 लाख टन होने का उत्पादन अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इनका उत्पादन क्रमश: 27.76 लाख टन और 31.66 लाख टन का हुआ था। मसूर का उत्पादन फसल सीजन 2022-23 के दौरान बढ़कर 15.99 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन के दौरान 12.69 लाख टन का हुआ था।

दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान तिलहनी फसलों का उत्पादन 400.01 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान इनका उत्पादन केवल 379.63 लाख टन का ही हुआ था। हालांकि तिलहनी फसलों में मूंगफली का उत्पादन घटकर 100.56 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले सीजन में 101.35 लाख टन का हुआ था। कैस्टर सीड का उत्पादन बढ़कर 18.82 लाख टन और शीशम का 7.49 लाख टन होने का अनुमान है, जबकि पिछले फसल सीजन में इनका उत्पादन क्रमश: 16.19 लाख टन एवं 7.89 लाख टन का हुआ था।

मंत्रालय के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान सोयाबीन का उत्पादन बढ़कर 139.75 लाख टन होने का अनुमान है जबकि इसके पिछले फसल सीजन में उत्पादन 129.87 लाख टन का ही हुआ था। दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2022-23 के दौरान सरसों का उत्पादन 128.28 लाख टन होने का होने का अनुमान है, जबकि इसके पिछले सीजन में उत्पादन 119.63 लाख टन का हुआ था।

कपास का उत्पादन फसल सीजन 2022-23 के दौरान बढ़कर 337.23 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है, जबकि फसल सीजन 2021-22 के दौरान उत्पादन 311.18 लाख गांठ होने का अनुमान है। 

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में डीओसी का निर्यात 29 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान डीओसी का निर्यात 29 फीसदी बढ़कर 2,276,121 टन का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 1,762,343 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार सितंबर में डीओसी का निर्यात 37 फीसदी बढ़कर 330,568 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल अगस्त में इसका निर्यात केवल 240,669 टन का ही हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर में सोया डीओसी का निर्यात बढ़कर 586,850 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में केवल 121,338 टन का हुआ था। इसी तरह से सरसों डीओसी का निर्यात अप्रैल से सितंबर के दौरान बढ़कर 1,344,495 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में निर्यात केवल 1,240,733 टन का हुआ था। हालांकि राइस ब्रान डीओसी का निर्यात चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में घटकर 151,614 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 204,895 टन का हुआ था।

चालू वित्त वर्ष 2023-24 के पहले छह महीनों अप्रैल से सितंबर के दौरान कैस्टर डीओसी का निर्यात बढ़कर 181,996 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 154,291 टन का हुआ था।

भारतीय बंदरगाह पर सोया डीओसी का भाव सितंबर 23 में घटकर औसतन 545 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर 2022 में इसका दाम 565 डॉलर प्रति टन था। हालांकि इस दौरान सरसों डीओसी का भाव सितंबर 23 में भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 314 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि पिछले साल सितंबर 22 में भी इसका भाव 295 डॉलर प्रति टन ही था। कैस्टर डीओसी का दाम सितंबर 23 में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 120 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि सितंबर 22 में इसका दाम 152 डॉलर प्रति टन था।  

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली छमाही अप्रैल से सितंबर के दौरान दक्षिण कोरिया और वियतनाम को डीओसी के निर्यात में कमी आई है जबकि इस दौरान थाईलैंड और बांग्लादेश तथा ताइवान को निर्यात में बढ़ोतरी हुई है।