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26 जुलाई 2022

चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में डीओसी का निर्यात 39 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान डीओसी के निर्यात में 39 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 1,021,265 टन का हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात केवल 735,892 टन का ही हुआ था।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जून में डीओसी के निर्यात में 119 फीसदी की भारी बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 431,840 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जून में इसका निर्यात 203,868 टन का ही हुआ था।

एसईए के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले तीन महीनों में सरसों डीओसी का निर्यात 84 फीसदी बढ़कर 706,904 टन हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 384,807 टन का ही हुआ था। चालू रबी में सरसों के उत्पादन में हुई बढ़ोतरी के साथ ही इसकी क्रॉसिंग ज्यादा होने से डीओसी की उपलब्धता ज्यादा रही, जिसका असर चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में निर्यात पर देखा गया। वर्तमान में भारत दक्षिण कोरिया, वियतनाम, थाईलैंड और सुदूर पूर्व के देशों को सरसों डीओसी का सबसे ज्यादा निर्यात कर रहा है।

हालांकि विश्व बाजार में कीमतें कम होने के कारण चालू वित्त वर्ष के पहले तीन महीनों में सोया डीओसी के निर्यात में कमी आई है। सोया डीओसी का भाव कांडला बंदरगाह पर औसतन 675 डॉलर प्रति टन, एफओबी है, जबकि अर्जेंटीना के सोया डीओसी का भाव 539 डॉलर सीआईएफ रॉटरडैम और ब्राजील के सोया डीओसी का भाव 522 डॉलर प्रति टन है।

भारतीय बंदरगाह पर जून मेें सोया डीओसी का भाव 694 डॉलर प्रति टन रहा, जोकि मई के भाव 720 डॉलर प्रति टन से कम है। इस दौरान सरसों डीओसी का भाव भारतीय बंदरगाह पर जून में घटकर 294 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि मई में इसका भाव 306 डॉलर प्रति टन था। हालांकि इस दौरान केस्टर डीओसी का भाव मई के 143 डॉलर प्रति टन से बढ़कर जून में 152 डॉलर प्रति टन हो गया।

19 जुलाई 2022

मध्य और दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश एवं उत्तर प्रदेश के साथ बिहार में कमी

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 19 जुलाई तक देशभर में सामान्य से 12 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है लेकिन इस दौरान मध्य और दक्षिण भारत के कई राज्यों में जहां भारी बारिश से फसलों को नुकसान की आशंका है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।

मौसम विभाग के अनुसार पिछले 48 घंटों में महराष्ट्र के कई जिलों में भारी बारिश होने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, इससे खरीफ दलहन अरहर, उड़द और मूूंग को नुकसान होने की आशंका है। जानकारों के अनुसार भारी बारिश से लगभग 12 जिले जो सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है। उनमें वर्धा में सामान्य से 1171.4 फीसदी अधिक बारिश हुई है, जबकि गढ़चिरोली में 596.1 फीसदी, चंद्रपुर में 495.9 फीसदी, नागपुर में 426.4 फीसदी, यवतमाल मेें 717.1 फीसदी, भंडारा में 289.2 फीसदी, नांदेड़ में 573 फीसदी, वाशिम में 508.1 फीसदी, अकोला में 462.1 फीसदी, बुलढाणा में 684.80 फीसदी, लातूर में 1170.40 फीसदी, परभनी में 406.70 फीसदी, हिंगोली में 406.70 फीसदी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। मौसम विभाग ने आज 19 जुलाई के लिए भी महाराष्ट्र के विदर्भ में भारी बारिश का एलर्ट जारी किया है।

गुजरात सरकार के पहले प्राथमिक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में भारी बारिश व बाढ़ से 50000 हेक्टेयर में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ। मध्य गुजरात में सबसे अधिक नुक्सान हुआ है। जबकि दक्षिण गुजरात में तिलहन, अनाज और दलहन को सबसे अधिक नुकसान। सरकारी अधिकारीयों ने बताया कि अभी कई इलाकों में जल भराव होने से सर्वे बाकी है। महाराष्ट्र में भी 250000 हेक्टेयर में खरीफ फसलों को नुकसान। सबसे अधिक नुकसान सोयाबीन, अरहर, कॉटन, उड़द और मूंग को। सरकारी अधिकारी के अनुसार यदि बारिश कम नहीं हुई तो फसलों में नुकसान का दायरा बढ़ सकता है। राज्य के मुख्यमंत्री ने किसानों को हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।

तेलंगाना राज्य में भी भारी बारिश से खरीफ फसलों को नुकसान की रिपोर्ट मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में तेलंगाना में हुई मूसलाधार बारिश ने राज्य में फसलों को नुकसान पहुंचाया है। कृषि अधिकारियों के शुरूआती अनुमान के अनुसार, लगभग 20 प्रतिशत बिजाई की गई फसल बारिश के कारण ख़राब। आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर, वारंगल, खम्मम, मेडक और  रेड्डी जिलों में फसल को भारी नुकसान। चालू खरीफ सीजन में किसानों ने राज्य में लगभग 53.79 लाख एकड़ फसलों की बिजाई की थी। जिसमे कपास 38.48 लाख एकड़, सोयाबीन 3.21 लाख एकड़, मक्का 2.50 लाख एकड़, धान 2.58 लाख एकड़ और दलहन 4.10 लाख एकड़ शामिल है।

दक्षिणी और मध्य भारत में अच्छी बारिश। लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश (-71%) पश्चिमी उत्तर प्रदेश (-56%) इन केंद्रों में बारिश औसत से कम रही। दक्षिणी प्रायद्वीप +38% मध्य भारत +33%,  उत्तर पश्चिमी क्षेत्र -8% इन केंद्रों में बारिश औसत से अधिक रही। मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, तटीय आंध्र प्रदेश, कर्णाटक के तटीय क्षेत्रों, पश्चिमी राजस्थान, झारखण्ड (-49%बारिश), बिहार (-47%बारिश), पश्चिम बंगाल (-45%बारिश), नागालैंड-मणिपुर-मिजोरम-त्रिपुरा (-25%बारिश) इन राज्यों में भारी बारिश की संभावनाएं।

चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में बासमती एवं गैर बासमती चावल का निर्यात घटा

नई दिल्ली। घरेलू बाजार में कीमतें तेज होने के कारण चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में बासमती के साथ ही गैर बासमती चावल के निर्यात में क्रमश: 6.03 और 7.68 फीसदी की कमी आई है।

चालू सीजन में उत्पादन अनुमान में आई कमी के कारण घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतें तेज बनी हुई है, साथ ही उत्पादक मंडियों में साठी धान की आवक होने लगी है, जबकि प्रमुख फसल सितंबर, अक्टूबर में आयेगी। इसलिए बासमती चावल के दाम अभी तेज ही बने रहने की उम्मीद है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले दो महीनों अप्रैल तथा मई में बासमती चावल का निर्यात 6.03 फीसदी घटकर केवल 6.85 लाख टन का ही हुआ है, जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 7.29 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने अप्रैल एवं मई में गैर बासमती चावल का निर्यात 7.68 फीसदी घटकर केवल 26.79 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसका निर्यात 29.02 लाख टन का हुआ था।

मूल्य के हिसाब से चालू वित्त वर्ष 2022-23 के पहले दो महीनों अप्रैल एवं मई में बासमती चावल का निर्यात बढ़कर 5,361 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में अप्रैल एवं मई के दौरान 4,556 करोड़ रुपये मूल्य का ही निर्यात हुआ था। हालांकि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में गैर बासमती चावल का निर्यात मूल्य के हिसाब से घटकर 7,395 करोड़ रुपये का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 7,784 करोड़ रुपये का हुआ था।

दिल्ली की नरेला मंडी में पूसा 1,509 किस्म के धान के भाव सोमवार को 4,022 से 4,171 रुपये प्रति क्विंटल रहे, जबकि नए साठी धान के भाव 3,800 रुपये प्रति क्विंटल रह। उत्तर प्रदेश की मंडियों में पूसा 1,509 किस्म के साठी के भाव 3,300 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटी अनुसार हैं।

उत्तर भारत के राज्यों में धान की रोपाई पीछे, मानसूनी बारिश की कमी का असर

नई दिल्ली। मानसूनी बारिश कम होने के कारण चालू खरीफ सीजन में उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई पीछे चल रही है। भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार इन राज्यों में पहली जून से 15 जुलाई तक बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार पंजाब में चालू खरीफ में अभी तक 27.80 लाख हेक्टेयर में, उत्तर प्रदेश में 26.98 लाख हेक्टेयर में और हरियाणा 7.41 लाख हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इन राज्यों में क्रमश: 29.47 लाख हेक्टेयर में, 35.29 लाख हेक्टेयर में और 7.94 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी थी।

आईएमडी के अनुसार चालू खरीफ में पहली जून से 15 जुलाई तक पूर्वी उत्तर प्रदेश में जहां सामान्य की तुलना में 69 फीसदी बारिश कम हुई है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 59 फीसदी बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई। पंजाब में चालू सीजन में अभी तक सामान्य से 2 फीसदी और हरियाणा में 4 फीसदी बारिश कम हुई है।

जानकारों के अनुसार इन उत्तर भारत के राज्यों में सिंचाई के साधन है, तथा चालू सीजन में धान की कीमतें तेज रही थी, जिस कारण आगामी दिनों में धान की रोपाई में तेजी आएगी, साथ ही कुल रोपाई पिछले साल की तुलना में बढ़ने का अनुमान है।

मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में छत्तीसगढ़ में धान की रोपाई अभी तक 16.38 लाख हेक्टेयर में, बिहार में 6.06 लाख हेक्टेयर में और मध्य प्रदेश में 7.01 लाख हेक्टेयर में ही हुई है। पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी रोपाई क्रमश: 19.69 लाख हेक्टेयर में, 8.77 लाख हेक्टेयर में और 9.63 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी।

चालू खरीफ में धान की कुल रोपाई अभी तक कुल 128.50 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले खरीफ की समान अवधि में इसकी रोपाई 155.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।


देशभर में मानसून सक्रिय होने से खरीफ फसलों की बुआई 592 लाख हेक्टेयर के पार

नई दिल्ली। देशभर में मानसून की सक्रियता बढ़ने से खरीफ फसलों की बुआई में भी तेजी आई है। पहली जून से 15 जुलाई तक देशभर में सामान्य से 14 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, हालांकि अभी भी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में 15 जुलाई 2022 तक फसलों की बुआई बढ़कर 592.11 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 591.30 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

मंत्रालय के अनुसार धान की रोपाई चालू खरीफ में 128.50 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 155.33 लाख हेक्टयेर से कम है।

दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 72.66 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 66.69 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 25.81 लाख हेक्टेयर में, उड़द की 18.06 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 20.19 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 31.58 लाख हेक्टेयर में, 15.67 लाख हेक्टेयर में और 15.85 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 93.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 87.06 लाख हेक्टयेर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 6.78 लाख हेक्टेयर में और बाजरा की 34.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल समय तक इनकी बुआई क्रमश: 6.32 लाख हेक्टेयर और 20.88 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। इसके अलावा मक्का की बुआई चालू खरीफ में 49.90 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 56.69 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 134.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 124.83 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहन में मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में 28.89 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 99.35 लाख हेक्टेयर में और सनफ्लवर की 1.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई क्रमश: 29.72 लाख हेक्टेयर में, 90.32 लाख हेक्टेयर में और 91 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 102.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 96.58 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में 53.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 53.70 लाख हेक्टेयर से कम है।

14 जुलाई 2022

देशभर की मंडियों में विभिन्नों जिंसों के दाम 14 जुलाई 2022 के

देशभर की मंडियों में विभिन्नों जिंसों के दाम 14 जुलाई 2022 के

अहमदनगर
चना.नया
देसी 4600
चापा 4700
मोसमी 4800
आवक 1300 बोरी
तुअर.नयी
काली 6600
लाल 6800
सफेद 6800
आवक 900 बोरी
मूँग 5000/7000
आवक 300 बोरी
उड़द 4500/7500
आवक 400 बोरी

1401 steam 8700 delhi for

बरवाला गेहूं 2060 ग्राहक हैं

Bulandshahr Mandi UP
1509-3301-3901
Aarival -6000 bag

ऐलनाबाद मंडी बोली भाव
 दिनांक 14/07/2022
भरत कानसरिया
नरमा = 9600
ग्वार =4300/4500
सरसो = 5650/6200
चना = 4500/4616
कनक = 2000/2030
जो = 2400/2491
मूग = 3500/5100


MANDI- GARHMUKTESHWAR. UP

Aarival- 5'000. Bags.

Rate- 3800 se 4000.

Chharra Mandi makka 1890.2031 arrival 10000 kuntal sarson 5950.6100 arrival 250 katta pady no arrival

सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 14-07-2022
नरमा   = 9700/-
कनक  = 2020/-
सरसों  = 6080/-
Sirsa Mandi group
मूँग.    = 5450/-
ग्वार    = 4890/-
चना    = 4400/-

Gulaothi Mandi
Wheat 🌾 2150
Arrival   500bags

Gharaunda mandi 1509 @3571

Narela mandi
New
1509-3800
1121-4525
Sugandh-3695

MANDI- DABRA. MP

Aarival- 7'000. Bags.

New 1509.
Rate- 3850. Top

MANDI- BILASPUR. UP

Aarival- 30'000.+ Bags.

Sarbati New.
Rate- 1900 se 2120.

MANDI- JAHANGIRABAD. UP

Aarival- 5'000. Bags.

1509. New.
Rate- 3801 se 4061.

Moisture 20/25.


MANDI- GARHMUKTESHWAR. UP

Aarival- 5'000. Bags.

Rate- 3800 se 4000.


MANDI- NARELA. DEHLI

1509. New.
Rate- 3800. KRBL.

बर्मा में दाम बढ़ने के साथ ही कई राज्यों में भारी बारिश से अरहर एवं उड़द में तेजी

नई दिल्ली। बर्मा में कीमतें बढ़ने के साथ ही देश के कई राज्यों में पिछले 48 घंटों के दौरान हुई भारी बारिश से खरीफ दलहन को नुकसान होने की आशंका से घरेलू बाजार में बुधवार को अरहर एवं उड़द की कीमतें तेज हुई। इस दौरान चना एवं मसूर के भाव नरम हुए, जबकि मूंग की कीमतें लगभग स्थिर बनी रही।

भारतीय आयातकों की मांग से बर्मा में अरहर और उड़द की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। बर्मा में लेमन अरहर के भाव 20 डॉलर तेज होकर दाम 865 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए। जानकारों के अनुसार भारतीय आयातकों ने आज लेमन अरहर के 50 कंटेनरों का व्यापार 760 डॉलर प्रति टन, एफओबी आधार पर किया।

इसी तरह से बर्मा में उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में 25-25 डॉलर की तेजी आकर भाव क्रमश: 920 डॉलर और 1,020 डॉलर प्रति टन हो गए। हालांकि, भारत के खरीदारों द्वारा उड़द का कोई व्यापार नहीं किया गया। बर्मा से भारत में चेन्नई के लिए लगभग 5,000 टन उड़द और अरहर लेकर आने वाला एक वैसल रवाना हुआ है, इसके अलावा चालू महीने में दो वैसल और अरहर और उड़द के लोड होने की खबर है।

जानकारों के अनुसार आयातित अरहर और उड़द का बकाया स्टॉक कम है, साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से अरहर और उड़द के आयात पड़ते महंगे हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 79.66 के स्तर पर आ गया। अत: आयात महंगा होने से अरहर और उड़द की कीमतों में आगे और तेजी आने के आसार हैं।

दलहन उत्पादक क्षेत्रों में भारी बारिश और आगे भी भारी बारिश की चेतावनी ने दलहन किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक में पिछले 48 घंटों के दौरान भारी बारिश हुई है, जिससे अरहर और उड़द की फसल को नुकसान होने की आशंका है वहीं क्वालिटी को भी नुकसान होगा।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान गुजरात रीजन में सामान्य की तुलना में क्रमश: 253 फीसदी और 864 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इसी तरह से मध्य महाराष्ट्र में इस दौरान 175 फीसदी और विदर्भ में 523 फीसदी तथा मराठवाड़ा में 1,393 फीसदी बारिश ज्यादा हुई है। तेलंगाना में इस दौरान सामान्य के मुकाबले 1,096 फीसदी और कर्नाटक में 300 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है।

चना एवं मसूर की कीमतों में आज गिरावट दर्ज की गई, लेकिन चना में व्यापारी ज्यादा मंदे में नहीं है। माना जा रहा है कि आगे चना दाल और बेसन की खपत में सुधार आयेगा। कनाडा से आयातित मसूर के भाव में कमजोर होने से घरेलू बाजार में मसूर की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 25 रुपये तेज होकर दाम 6,900 से 6,925 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव 6,900 से 7,100 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर स्थिर बने रहे।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतें 50 रुपये तेज होकर 6,575 से 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दाल मिलों की मांग सुधरने से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।  

इस दौरान मुंबई में अफ्रीकी लाइन की अरहर के भाव स्थिर बने रहे। तंजानिया की अरुषा और मटवारा अरहर के भाव क्रमश: 5,700 रुपये और 5,500 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,550 से 5,600 रुपये और मलावी अरहर के भाव 5,150 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव में 100-100 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 7,500 रुपये तथा 8,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

आंध्रप्रदेश लाइन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 100 रुपये तेज होकर 7,900 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 100 रुपये की तेजी आकर भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के हाजिर डिलीवरी के भाव 75 रुपये तेज होकर 8,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि अगस्त डिलीवरी के भाव भी 75 रुपये बढ़कर 8,250 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

कोलकाता में उड़द एफएक्यू के भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

कनाडा से आयातित मसूर के भाव बंदरगाह पर 6,800 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की गिरावट आकर भाव 7,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि कनाडा की मसूर के दाम इस दौरान 7,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

ऑस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर टिके रहे।

दिल्ली में चना की कीमतों में 25 रुपये की गिरावट आकर, राजस्थानी के भाव 4,950 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,875 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।