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05 जुलाई 2022

मंडियों में 5 जुलाई के जिंसों के भाव

मंडियों में 5 जुलाई के जिंसों के भाव

 

Sella 1718@8500
Sugand @7700

 

Narela mandi Wheat 2150 rs 2200

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Today delhi market

1121 steam 8900-9000
1401 steam 8150-8250 

Garh Mandi
1509...........3950/

गढ़मुक्तेश्वर मंडी यूपी
न्यू 1509 कंपाइन
3601@4000
7000bags
Ek dheri
4100
सरबती Noori
No
05.07.2022

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 Sᗩᗪᑌᒪ Sᕼᗩᕼᗩᖇ
 
सरसौ आमदनी 550 किव: से ऊपर
बोली भाव  5820 से  6115 तक

गेहूं आमदनी 600 किव:की
बोलीभाव 1951 से  2029 तक

गुवार आमदनी 15 किव: की
बोली भाव 4650 तक

जौ आमदनी 150 किव: की
बोली भाव 2431 से  2610 तक

तारामिरा बोली भाव 5300 तक 

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धान मन्डी-गोलूवाला 05-07-2022
आषाढ़ शुक्ल पक्ष-षष्ठी (मंगलवार)
🌱गेहू-1851-2025/-
🌱चना-4450-4500/-
🌱जौ-2607/-
🌱सरसों-5651-6125/-250-कि.
🌳खल बिनोला-3700/- 0.98kg

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Karnal 1509 3925

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नोहर मंडी भाव

चना   4500   4550
गुवार   4800   5005
सरसों   5900    6200
अरण्डी    6500   7000   7346
कंनक    2040
जौ    2500
तारामीरा    5200
मोठ    6000   675

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Mansa
Moong 6130 top

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Narela Mandi New 1509. ₹₹₹₹₹₹3653

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आज सलोनी भाव 7350 रुपए

 सरसों

जयपुर-6800

दिल्ली-6600

संगरिया 6416

नोहर 5800/6200

आदमपुर 6230

सिरसा 6250

भरतपुर 6401

भटिंडा 6000

हापुड़ 6600

अलवर 6500

उचाना सरसो 6400

गोलू वाला 6125



ग्वार भाव

सिरसा 4500/4900

नोहर 4700/5000

आदमपुर 4950

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कृषि उपज मंडी समिति संगरिया
दिनांक 05.07.2022 के बाजार भाव

जौ
उच्चतम 2865
न्यूनतम 2400

गेहूं
उच्चतम 2016
न्यून्तम 1988

सरसों
उच्चतम 6416
न्यून्तम 5781

ग्वार
उच्चतम 4615

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Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Sarso Boli 6231

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सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 05-07-2022
नरमा 8000-10200/-
गेहूं 1960-1990/-
मूंग 4800-5220/-
सरसों 5500-6251/-
गवार 4400-4901/-

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ऐलनाबाद मंडी बोली भाव
 दिनांक 05/07/2022
भरत कानसरिया
नरमा = 10100
ग्वार = 4000/4600
सरसो = 5700/6213
चना = 3800/4570
जो = 2400/2550
कनक = 1960/2000

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मिलों की कमजोर मांग से उड़द एवं मसूर नरम, केंद्रीय पूल में अरहर एवं उड़द का बकाया स्टॉक कम

नई दिल्ली। दाल मिलों की कमजोर मांग एवं स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से सोमवार को उड़द और मसूर की कीमतों में नरमी दर्ज की गई, जबकि अरहर के भाव स्थिर बने रहे। नीचे दाम पर बिकवाली कम आने से चना की कीमतों में सुधार आया। जानकारों के अनुसार अरहर एवं उड़द के आयात पड़ते महंगे हैं, तथा आगामी दिनों दालों की खपत में सुधार आयेगा, इसलिए इनके भाव बढ़ने का अनुमान है।

जानकारों के अनुसार सरकार द्वारा उड़द के आयात की खबर से बाजार में मुनाफावसूली आने से कीमतों में नरमी तो आई है, लेकिन एक तो आयात पड़ते महंगे हैं। दूसरा खरीफ उड़द की आवक सितंबर में बनेगी, इसलिए आगे उड़द की कीमतों में फिर सुधार आने के आसार हैं। अरहर का उत्पादक राज्यों में बकाया स्टॉक तो है, लेकिन एक तो केंद्रीय पूल में अरहर कम है, दूसरा नई फसल की आवक दिसंबर में बनेगी। अरहर के आयात पड़ते भी महंगे हैंं। इसलिए अरहर की कीमतों में भी आगे सुधार आने क आसार हैं।

कनाडा से मसूर का आयात होने से इसकी कीमतों पर दबाव है, लेकिन चालू महीने के अंत तक देसी मसूर की आवक कम हो जायेगी, तथा मध्य जुलाई के बाद मसूर दाल की खपत बढ़ने का अनुमान है। इसलिए मसूर की कीमतों में ज्यादा मंदा आने के आसार नहीं है। चना की कीमतों में आगे हल्का सुधार और भी बनने की उम्मीद है।

कन्फेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स, सीएआईटी ने सरकार से प्रि पैक्ड और प्री लेबल्ड पर 5 फीसदी जीएसटी लगाए जाने पर पुनर्विचार करने को कहां है। आज सीएआईटी की मीटिंग में कहां गया कि जीएसटी से देश की 6,500 अनाज मंडियों में काम कर रहे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। सभी पर एक समान 5 फीसदी जीएसटी लगाने से छोटे कारोबारी खत्म हो जायेंगे, तथा बड़ी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ेगा। साथ ही इससे उपभोक्ताओं को भी महंगा सामान खरीदना पड़ेगा। जीएसटी को लेकर देशभर के व्यापारी एवं मिल मालिक हड़ताल पर जाने का विचार कर रहे हैं।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार देशभर में मानसून सक्रिय हो गया है, हालांकि देशभर के करीब 32 फीसदी क्षेत्रफल में अभी भी बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है। मोसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तरी मध्य महाराष्ट्र, दक्षिण-पूर्व राजस्थान, तटीय कर्नाटक और गुजरात के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। ओडिशा के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक दो स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

खरीफ दलहन उत्पादक राज्यों में मध्य जुलाई तक बारिश कैसी होगी, इस पर भी दालों की तेजी, मंदी निर्भर करेगी। अच्छी बारिश हुई तो फिर बुआई में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 6,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव 6,650 से 6,850 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर बोले गए।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतें 6,500 से 6,525 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर में मिलों की सीमित मांग से भाव 6,450 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें भी स्थिर बनी रही। तंजानिया की अरुषा अरहर के दाम 5,550-5,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मटवारा अरहर के दाम 5,450 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,400 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गई। मलावी अरहर के दाम 5,000 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव में 50-50 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 7,450 रुपये और 8,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

आंध्रप्रदेश लाइन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 100 रुपये कमजोर 7,900 से 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 7,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

चेन्नई में उड़द एसक्यू हाजिर डिलीवरी के भाव में 100 रुपये का मंदा आकर दाम 8,075 रुपये और अगस्त डिलीवरी के दाम 100 रुपये कमजोर होकर 8,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

दिल्ली में मध्य प्रदेश और कनाडा की मसूर की कीमतों में 25-25 रुपये की गिरावट आकर भाव क्रमश: 7,250 रुपये और 7,050 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

कनाडा की मसूर के भाव मुंबई और मुंद्रा बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई मसूर की कीमतें स्थिर बने रही। ऑस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में जहां 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर टिके रहे।

दिल्ली में चना के दाम 25 रुपये तेज होकर राजस्थानी के भाव 4,850 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,775 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

कॉटन का उत्पादन 315.43 लाख गांठ, सीजन के अंत में 39.29 लाख गांठ बकाया स्टॉक

नई दिल्ली। कपास उत्पादन और खपत संबंधी समिति (सीओसीपीसी) ने कपास के अनुसार चालू फसल सीजन में कपास का उत्पादन 315.43 लाख गांठ होने का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 352.48 लाख गांठ से कम है। चालू सीजन के आरंभ में 71.84 लाख गांठ कपास का बकाया स्टॉक बचा हुआ था, जबकि 15 लाख गांठ का आयात होने का अनुमान है। ऐसे में कुल उपलब्धता 402.27 लाख गांठ की बैठेगी। चालू सीजन में कॉटन की घरेलू खपत 321 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि 42 लाख गांठ कॉटन के निर्यात की उम्मीद है।

चालू फसल सीजन 2021-22 के अंत यानी 30 सितंबर को देश में 39.29 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन का बकाया स्टॉक बचेगा, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 71.84 लाख गांठ से कम है।

सीओसीपीसी के अनुसार फसल सीजन 2021-22 में उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में 44.48 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जोकि पिछले साल के 60.53 लाख गांठ से कम है। गुजरात में कपास का उत्पादन चालू सीजन में 75.57 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 71.18 लाख गांठ एवं मध्य प्रदेश में 14.27 लाख गांठ होने का अनुमान है। फसल सीजन 2020-21 में इन राज्यों में कॉटन का उत्पादन क्रमश: 72.18 लाख गांठ, 101.05 लाख गांठ एवं 13.38 लाख गांठ का हुआ था।

फसल सीजन 2021-22 के दौरान दक्षिण भारत के राज्यों तेलंगाना में 66.45 लाख गांठ, आंध्रप्रदेश में 15.18 लाख गांठ एवं कर्नाटक 19.52 लाख गांठ तथा तमिलनाडु में 2.80 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है, जबकि इसके पिछले फसल सीजन में इन राज्यों में क्रमश: 57.97 लाख गांठ, 16 लाख गांठ एवं 23.20 लाख गांठ तथा 2.43 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।

ओडिशा में चालू फसल सीजन में 5.70 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 0.28 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है, जबकि पिछले साल ओडिशा में 5.51 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 0.23 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

01 जुलाई 2022

देश की विभिन्न मंडियों में 1 जुलाई को जिंसों के भाव

देश की विभिन्न मंडियों में 1 जुलाई को जिंसों के भाव

 

 New Sarbti panjab seed Narela 2150

1121..4350
Narela midiam
Sarbati seed 2150

Gadarpur.
1509............3725/

Bhattu Guar 4450

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Sarso Boli 6451

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Guwar Boli 4850

SIRSA
Narma 💨 10400

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Narma Boli 10850

स्टॉकिस्टों की कमजोर बिकवाली से अरहर एवं उड़द तेज, अन्य दालों के भाव लगभग स्थिर

 नई दिल्ली। आयात पड़ते महंगे होने के साथ ही स्टॉकिस्टों की बिकवाली कम आने से गुरूवार को अरहर के साथ ही उड़द की कीमतें में सुधार आया, जबकि अन्य दालों के दाम लगभग स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार देश के कई राज्यों में बारिश सामान्य की तुलना में कम होने खरीफ दलहन की बुआई प्रभावित हो रही है, जबकि आयात महंगा है। इसलिए अरहर और उड़द के साथ मसूर की कीमतों में आगे और भी सुधार बनने के आसार है। बेसन में मांग बढ़ने से चना में भी हल्की तेजी बन सकती है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार जून में देशभर के 36 सबडिवीजनों में 20 में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है। यानी की देश के आधे से ज्यादा भाग में जून में बारिश सामान्य की तुलना में कम हुई है जिसका असर खरीफ दलहन की बुआई पर पड़ेगा। जिन राज्यों में बारिश कम हुई, उनमें महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक के साथ ही छत्तीसगढ़ और ओडिशा प्रमुख दलहन उत्पादक राज्य हैं।

बर्मा में आज उड़द एसक्यू और एफएक्यू के भाव क्रमश: 1,070 डॉलर और 970 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे। सूत्रों के अनुसार जून महीने में उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में क्रमश: 125 डॉलर और 130 डॉलर प्रति टन की तेजी आ चुकी है। पहली जून को बर्मा में एसक्यू और एफएक्यू के भाव क्रमश: 940 डॉलर और 845 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ  थे। घरेलू बाजार में हालांकि इसके अनुपात में कीमतें तेज नहीं हो पाई, क्योंकि दालों में खुदरा के साथ ही थोक में ग्राहकी कमजोर थी। बर्मा में लेमन अरहर के दाम आज 870 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।

केंद्रीय पूल में अरहर और उड़द का बकाया स्टॉक कम है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से आयात पड़ते भी महंगे हैं, इसलिए इनकी कीमतों में आगे और भी सुधार आयेगा। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर 78.96 के स्तर पर बंद हुआ है। जानकारों के अनुसार मध्य जुलाई तक दलहन के प्रमुख उत्पादक राज्यों में बारिश औसत से कम रही है, तो फिर दालों के बुआई क्षेत्र में भी कमी आयेगी। जिससे इनकी कीमतों में तेजी को और बल मिलेगा।

कनाडा से करीब 55 हजार टन मसूर लेकर दो वैसल आ रहे हैं, जिनमें से एक वैसल मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच गया है, तथा दूसरा वैसल अगले छह से सात दिनों में मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच जायेगा। हालांकि आयातित मसूर के पड़ते महंगे हैं, इसलिए आयातक मसूर के भाव तेज करना चाहते हैं।  

देशभर में मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद बेसन में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे चना की कीमतों में आगे सुधार तो आयेगा, लेकिन बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी नेफेड कई राज्यों में केंद्रीय पूल से पुराने चना की बिकवाली कर रही है।
 
दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव भी 150 रुपये बढ़कर 6,750 से 6,950 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतें 100 रुपये बढ़कर 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर में मिलों की मांग से भाव 50 रुपये तेज होकर दाम 6,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर की कीमतें स्थिर बनी रही। तंजानिया की अरुषा अरहर के दाम 5,550-5,650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मटवारा अरहर के दाम 5,450 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,400 से 5,450 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर हो गई। मलावी अरहर के दाम 5,000 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव क्रमश: 7,600 से 7,625 रुपये और 8,425 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

आंध्रप्रदेश लाईन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 8,200 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर दाम 7,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

चेन्नई में उड़द एफएक्यू के भाव 7,500 रुपये एवं एसक्यू के 8,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली में कनाडा एवं मध्य प्रदेश लाईन की मसूर की कीमतें क्रमश: 7,100 रुपये और 7,250 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बनी रही।

उत्तर प्रदेश की कानपुर मंडी में देसी मसूर के दाम 25 रुपये तेज होकर 7,150 से 7,175 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।

कनाडा की मसूर के भाव मुंबई और मुंद्रा बंदरगाह के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई मसूर की कीमतें स्थिर बने रही। ऑस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में जहां 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर टिके रहे।

दिल्ली में राजस्थानी चना के दाम 25 रुपये तेज होकर 4,825 से 4,850 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

अच्छी बारिश के बावजूद शुरूआती चरण में तेलंगाना में खरीफ फसलों की बुआई 9 फीसदी पिछड़ी

नई दिल्ली। अच्छी बारिश के बावजूद भी शुरूआती चरण में चालू खरीफ सीजन में तेलंगाना में 29 जून तक खरीफ फसलों की बुआई 9.41 फीसदी पिछे चल रही है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 29.62 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 32.70 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में राज्य में दलहनी फसलों की बुआई अभी तक केवल 1.96 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.70 लाख हेक्टेयर से कम है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 1.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 3.05 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 22.75 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 24.88 लाख हेक्टयेर में हो चुकी थी। कपास की बुआई राज्य में औसतन 49.96 लाख हेक्टेयर में होती है।

खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 1.88 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.92 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में 1.91 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस सयम तक इनकी बुआई 1.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का तथा रागी की बुआई चालू खरीफ में 79,012 हेक्टेयर में ही हुइर्द है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 1.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। धान की रोपाई चालू सीजन में 46,778 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी रोपाई 72,313 हेक्टेयर में हो चुकी थी।

जानकारों के अनुसार राज्य में खरीफ फसलों की बुआई शुरूआती चरण में पिछले चल रही है, लेकिन जून में राज्य में बारिश सामान्य की तुलना में 9 फीसदी ज्यादा हुई है, इसलिए आगामी दिनों में बुआई के कार्य में तेजी आयेगी।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई बढ़ी, कपास के साथ ही ग्वार की आगे

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में राजस्थान में कपास के साथ ही गुवार की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, जबकि तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली के साथ ही सोयाबीन की बुआई पिछड़ रही है। राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 29 जून तक राज्य में 39.93 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 30.90 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।


निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर राज्य में 5.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.38 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। हालांकि कुल बुआई तय लक्ष्य 8 लाख हेक्टेयर से कम है। ग्वार सीड की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 4.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.42 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 3.55 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 5.09 लाख हेक्टेयर में इसकी बुआई हो चुकी थी। इसी तरह से सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में 2.22 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.27 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में 6.04 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस सयम तक इनकी बुआई 7.51 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 8.35 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 4.45 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई राज्य में 6.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.58 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का की बुआई चालू खरीफ में 14.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.15 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। बाजरा की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 12.37 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 6.97 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।