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08 फ़रवरी 2014

अब लुढ़कते प्याज से निकले किसानों के आंसू

जब प्याज की कीमतें आसमान छू रही थीं तब बेहतर मुनाफे की आस में महाराष्ट्र के प्याज किसान संतोष ढगे ने अपने खेतों में ज्यादा प्याज की बुआई की थी। लेकिन अब बदले हालात में उनके जैसे हजारों किसानों के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। दरअसल प्याज की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है जिससे किसानों को मुनाफा तो दूर लागत तक निकलने में पसीने बहाने पड़ रहे हैं। रिकॉर्ड पैदावार के कारण प्याज के भाव उत्पादन लागत से भी नीचे चले गए हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वर्तमान मौसम में वे प्याज का भंडारण भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से प्याज के सडऩे का खतरा है। इसलिए मजबूरी में उन्हें घाटे में प्याज बेचना पड़ रहा है। जानकारों के मुताबिक भारी आवक के बीच सुस्त निर्यात के कारण भी प्याज के दाम लगातार गिर रहे हैं। पिछले साल इन दिनों के मुकाबले प्याज आधे भाव पर बिक रहा है। बीते तीन माह के दौरान तो इसका भाव पांच गुना से भी अधिक गिर चुका है। महाराष्ट्र की लासलगांव मंडी में प्याज का मॉडल भाव (इस भाव पर 90 फीसदी बिक्री होती है) 735 रुपये, गुजरात की महुआ में 620 रुपये, राजस्थान की जयपुर में 750 रुपये और दिल्ली में 900 रुपये प्रति क्विंटल है। संतोष कहते हैं कि पिछले साल ऊंचे भाव से किसानों ने प्याज की खेती ज्यादा की जिससे उत्पादन भी बंपर हुआ है। ऐसे में किसानों को 600 से 800 रुपये क्विंटल का ही भाव मिल रहा है, जबकि उत्पादन लागत 800-900 रुपये प्रति क्विंटल है। अखिल भारतीय सब्जी उत्पादक संघ के अध्यक्ष श्रीराम गाढवे भी मानते हैं कि किसानों को प्याज बेचने पर नुकसान हो रहा है। इस समय भंडारण करने पर प्याज सडऩे का खतरा है। इसलिए घाटे पर भी प्याज बेचना किसानों की मजबूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को घाटे से बचाने के लिए सरकार को प्याज निर्यात बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। राष्टï्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ) के निदेशक आर पी गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2013-14 में 189.84 लाख टन प्याज पैदा होने का अनुमान है, जो पिछले साल से 12.91 फीसदी अधिक है। इसी कारण मंडियों में जोरदार आवक से प्याज के भाव लगातार इतने गिर चुके हैं कि मुनाफा तो दूर किसानों का खर्चा निकलना भी दूभर हो गया है। वहीं पिछले साल भाव बेतहाशा बढऩे पर प्याज निर्यात पर बंदिश से चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक 9.87 लाख टन प्याज निर्यात हुआ है, जो पिछली समान अवधि में निर्यात हुए 14.04 लाख टन प्याज से करीब 30 फीसदी कम है। (BS Hindi)

Gold tumbles on profit-selling, lack of demand

New Delhi, Feb 8. Gold prices tumbled by Rs 340 to Rs 30,200 per ten grams in the national capital today on emergence of profit-selling by stockists at existing higher levels. Silver also fell by Rs 180 to Rs 44,620 per kg on lack of buying support from industrial units and coin makers. Traders said emergence of profit-selling by stockists at prevailing higher levels mainly kept pressure on gold prices to surrendered moderate ground. They said local demand dried up at current levels and appreciation of rupee against the US dollar also influenced gold. On the domestic front, gold of 99.9 and 99.5 per cent purity dropped by Rs 340 each to Rs 30,200 and Rs 30,000 per ten grams, respectively. It shed Rs 80 in last two trading sessions. Sovereign declined by Rs 50 at Rs 25,250 per piece of eight grams. In line with a general weak trend, silver ready moved down by Rs 180 to Rs 44,620 per kg and weekly-based delivery by Rs 30 to Rs 44,370 per kg. The white metal had lost Rs 300 yesterday. Silver coins plunged by Rs 1,000 to Rs 86,000 for buying and Rs 87,000 for selling of 100 pieces.

07 फ़रवरी 2014

एक्सचेंज में हिस्सेदार कर सकेंगे कारोबार!

वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) एक्सचेंज में हिस्सेदारी रखने वाले ब्रोकरों के कारोबार करने पर लगे हुए प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार कर रहा है। नियामक के इस कदम से उन ब्रोकरों को ट्रेडिंग शुरू करने में मदद मिलेगी, जिनकी एक्सचेंज में बहुत कम या नगण्य हिस्सेदारी है। जिंस वायदा बाजार में कारोबार की मात्रा को फिर से बढ़ाने के लिए नियामक द्वारा किए जा रहे विभिन्न उपायों में से यह एक उपाय होगा। नई दिल्ली में आज एसोचैम के एक सम्मेलन में एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने कहा, 'वर्तमान नियम एक्सचेंज में हिस्सेदारी रखने वाले ब्रोकरों को कारोबार की इजाजत नहीं देते हैं, चाहे यह हिस्सेदारी अन्य एक्सचेंज में हो।' उन्होंने कहा, 'हम इन्हें बदलने के लिए सरकार के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। हमारा मानना है कि करीब 2 फीसदी तक हिस्सेदारी रखने वाले ब्रोकरों को कारोबार की इजाजत दी जा सकती है, बशर्ते कि वे प्रबंधन या बोर्ड में शामिल न हों।' अभिषेक ने कहा, 'इससे एक्सचेंजों में भागीदारी बढ़ेगी और इसकी प्रक्रिया चल रही है।' वर्तमान में जिंस एक्सचेंज का कोई भी हिस्सेदार उस एक्सचेंज में कारोबार नहीं कर सकता, जिसमें उसकी हिस्सेदारी है। एमसीएक्स के सार्वजनिक निर्गम के समय इसमें 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी रखने वाले ब्रोकरों को इस पर कारोबार करने की इजाजत दी गई थी, लेकिन आईपीओ की वजह से एमसीएक्स को यह विशेष छूट दी गई थी। अब नियामक यह नियम बनाने पर विचार कर रहा है कि 2 फीसदी से कम हिस्सेदारी वाले ब्रोकर को कारोबार की इजाजत दी जाए। इसके दायरे में देशभर के सभी जिंस डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज आएंगे। हालांकि इसका सबसे ज्यादा फायदा जेपी कैपिटल को मिलेगा। गौरव अरोड़ा की अगुआई वाली जेपी कैपिटल 2009-10 में एनसीडीईएक्स में 22 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने से पहले सभी एक्सचेंज डेरिवेटिव्ज को करोबार देने वाली प्रमुख कंपनी थी। हालांकि अरोड़ा ने अब अपनी हिस्सेदारी घटाकर 2 फीसदी से कम कर दी है और वह पहले की तरह फिर से मार्केट मेकिंग (खरीद और बिक्री) शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इससे पहले एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले मुद्रा डेरिवेटिव्ज, एनएसई शेयर डेरिवेटिव्ज और एमसीएक्स जिसों में 10-15 कारोबारी मात्रा उनकी ओर से निकल रही थी। हालांकि वर्तमान माहौल में मार्केट मेकिंग मुश्किल काम है। जिंसों पर सीटीटी और करेंसी डेरिवेटिव्ज पर आरबीआई के प्रतिबंध लगाने से जिंस वायदा और मुद्रा डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबारी मात्रा कम हुई है। एफएमसी के मुखिया ने कहा कि आयोग सेटलमेंट गारंटी फंड और कारोबारी मार्जिन पर भी दिशानिर्देशों की घोषणा कर सकता है। इससे पहले एफएमसी ने सेटलमेंट गारंटी फंड में धन के हस्तांतरण के नियमों की घोषणा की थी, जिनका एक्सचेंज पालन करने लगे हैं। हालांकि अब इसके निवेश और फंड के इस्तेमाल पर विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। एफएमसी ने मार्क टू मार्केट (बाजार निर्धारित) मार्जिन के भुगतान में एक्सचेंज और सदस्यों को होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों पर भी चर्चा की। शेयर बाजार से इतर जिंस डेरिवेटिव्ज कारोबार रात में 11.30 बजे तक चालू रहता है और देर रात होने वाले कारोबार के दौरान कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आम बात है, इसलिए अगले दिन सुबह सदस्यों को सबसे पहले अतिरिक्त मार्जिन देना पड़ता है। उद्योग का मानना है कि इसके लिए उन्हें और ज्यादा समय दिया जा सकता है। वायदा बाजार आयोग के अगले महीने तक नए उपभोक्ता संरक्षण कानून लागू करने की संभावना है। ये नियम वित्तीय क्षेत्र विधायी सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) द्वारा सुझाए गए थे। एफएमसी चेयरमैन ने कहा, 'हम इन्हें इस साल मार्च तक लागू करेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमने लोगों के सुझावों के लिए प्रारूप सर्कुलर जारी किया है। इस पर आने वाले सुझावों पर विचार करने के बाद हम नियम तय करेंगे। ग्राहक और सदस्यों के बीच होने वाले समझौते में खंड शामिल किए जाएंगे। इन्हें केवाईसी दस्तावेजों का हिस्सा बनाया जाएगा।' (BS Hindi)

मसालों के निर्यात में 28 फीसदी इजाफा

भारत से मसालों का निर्यात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से नवंबर के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में मात्रा के लिहाज से 28 फीसदी, रुपये में कीमत के लिहाज से 46 फीसदी और डॉलर में 32 फीसदी बढ़ा है। वर्ष 2013 में अप्रैल से नवंबर के दौरान मसालों के निर्यात की कीमत 8377.20 करोड़ रुपये (1,39.65 करोड़ डॉलर) और मात्रा 5,08,555 टन दर्ज की गई है। भारतीय मसाला बोर्ड के चेयरमैन ए जयतिलक ने कहा कि वर्ष 2012 में अप्रैल से नवंबर तक भारत ने 3,98,000 टन मसालों का निर्यात किया था, जिसकी कीमत 5,732.25 करोड़ रुपये (105.58 करोड़ डॉलर) थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय मसालों की बढ़ती मांग उनकी खराब न होने की विशेषता और उनमें लोगों के बढ़ते विश्वास का एक उदाहरण है। मिंट ऑयल, मेंथॉल और मेंथॉल क्रिस्टल का निर्यात में अहम योगदान रहा है। इनका निर्यात 15,850 टन रहा है, जिससे 1975.17 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। अगर इसकी तुलना पिछले साल की समान अवधि से की जाए तो इनके निर्यात में मात्रात्मक लिहाज से 129 फीसदी और कीमत के लिहाज से 62 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल की इसी अवधि में इनका निर्यात 6,916 टन रहा था, जिससे 1,223 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। इनसे होने वाली आमदनी मिर्च से थोड़ी ही कम रही। अप्रैल से नवंबर, 2012 के दौरान मिर्च से सबसे ज्यादा आय हुई थी। मसाला बोर्ड ने कहा कि इस साल 1,81,500 टन मिर्च का निर्यात हुआ, जिससे 1,614.17 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। वहीं, पिछले साल मिर्च का निर्यात 1,74,798 टन रहा था, जिसकी कीमत 1,408.68 करोड़ रुपये थी। आलोच्य अवधि में 1150.56 करोड़ रुपये कीमत के 86,500 टन जीरे का निर्यात हुआ। पिछले साल 604.16 करोड़ रुपये के 44,436 टन जीरे का निर्यात हुआ था। इस तरह पिछले साल की तुलना में जीरे का निर्यात मात्रात्मक लिहाज से 95 फीसदी और कीमत की दृष्टि से 90 फीसदी बढ़ा है। इस साल भी मूल्य संवर्धित मसालों का निर्यात में अच्छा खासा योगदान रहा। मसालों के निर्यात में कालीमिर्च और हल्दी ने अहम हिस्सेदारी बना ली है। इनके निर्यात में कीमत के लिहाज से क्रमश: 42 और 41 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। (BS Hindi)

अगले सीजन के लिए गन्नामूल्य में मामूली बढ़त

नया एफआरपी 220 प्रति क्विंटल मूल्य निर्धारित किया गया 10 प्रति क्विंटल की बढ़त हुई गन्ना मूल्य में केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2014 से शुरू होने वाले आगामी पेराई सीजन के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में मामूली 10 रुपये की बढ़ोतरी कर भाव 220 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की गुरुवार को हुई बैठक में पेराई वर्ष 2014-15 के लिए गन्ने के एफआरपी में बढ़ोतरी की गई, लेकिन चीनी मिलों को 40 लाख टन रॉ-शुगर के निर्यात पर इंसेंटिव देने पर कोई फैसला नहीं हो सका। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. के वी थॉमस ने बैठक के बाद बताया कि सीसीईए ने गन्ने के एफआरपी में 10 रुपये की बढ़ोतरी कर अक्टूबर 2014 से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन के लिए दाम 220 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया। चीनी मिलें किसानों से एफआरसी से नीचे भाव पर गन्ने की खरीद नहीं कर सकती है, हालांकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में राज्य सरकारें गन्ने का अलग से राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) तय करती है। चालू पेराई सीजन के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी 210 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने का एसएपी 280 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन के लिए गन्ने के एफआरपी में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का प्रस्ताव किया था। उधर खाद्य मंत्रालय ने भी सीएसीपी की सिफारिशों के आधार पर ही गन्ने का एसएपी 220 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की सिफारिश की थी। सूत्रों के अनुसार खाद्य मंत्रालय और कृषि मंत्रालय की आपसी सहमति नहीं होने के कारण ही 40 लाख टन रॉ-शुगर के निर्यात पर चीनी मिलों को इंसेंटिव देने पर फैसला गुरुवार को हुई सीसीईए की बैठक में भी नहीं हो सका। इससे पहले भी सीसीईए की बैठक में इस आशय का प्रस्ताव आया था लेकिन सहमति नहीं होने से फैसला नहीं हो सका था। (Business Bhaskar....R S Rana)

कमोडिटी निवेशकों को सीटीटी के साथ ट्रेडिंग की आदत डालनी होगी

कैसे बढ़ेगा वायदा कारोबार एक्सचेंजों के शेयरधारक ब्रोकरों को भी कारोबार करने की अनुमति मिलेगी एफआईआई और म्यूचुअल फंडों को वायदा कारोबार की अनुमति दी जाएगी ऑप्शन जैसे नए प्रोडक्ट लांच के लिए एफसीआरए के संशोधन जरूरी निवेशकों की सुरक्षा के लिए सिफारिशें मार्च तक लागू करने की योजना छोटे निवेशकों के लिए छोटे कांट्रेक्ट व डिलीवरी सेंटर के हिसाब से कांट्रेक्ट पोजीशन लिमिट, शुरूआती मार्जिन व वेयरहाउसिंग सुविधाओं पर भी गौर कमोडिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (सीटीटी) लगने के बाद फ्यूचर ट्रेडिंग में भारी गिरावट आने के बीच फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन (एफएमसी) ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को सीटीटी के साथ ही सौदे करने की आदत डालनी होगी। सीटीटी हटाने के बारे में कोई विचार नहीं है। हालांकि निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई सुधार किए जा रहे हैं। पिछले जुलाई 2013 के दौरान फ्यूचर एक्सचेंजों में नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी पर 0.01 फीसदी की दर से सीटीटी लगाया गया था। दूसरे शब्दों में कहें तो कमोडिटी एक्सचेंज में अगर सौदे का मूल्य 10,000 रुपये है तो एक रुपया सीटीटी के तौर पर लगाने का प्रावधान है। देश में पांच राष्ट्रीय और 12 क्षेत्रीय कमोडिटी एक्सचेंजों में कामकाज हो रहा है। चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से 15 जनवरी तक सभी एक्सचेंजों का संयुक्त कारोबार 37 फीसदी घटकर 85.28 लाख करोड़ रुपये रह गया। एफएमसी के चेयरमैन रमेश अभिषेक ने उद्योग संगठन एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा कि तमाम कमोडिटी एक्सचेंजों में कारोबार कम रहने के कई कारण हैं। सीटीटी ऐसा पहलू है, जिसके साथ कारोबार करने की निवेशकों को आदत डालनी होगी। लेकिन हमें यह देखना चाहिए कि ऐसे और क्या उपाय हो सकते हैं, जिससे कमोडिटी एक्सचेंजों में कारोबार सुधरे। उन्होंने विश्वास जताया कि एक्सचेंजों में कारोबार फिर से बढ़ जाएगा क्योंकि विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए एफएमसी कई कदम उठाने जा रहा है। कमोडिटी एक्सचेंजों में बेहतर गवर्नेंस से भी कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। वित्त मंत्रालय में सलाहकार के. जी. नायर ने कहा कि कारोबार अनायास नहीं बढ़ाया जा सकता है। हमें पहले कॉरपोरेट गवर्नेंस और सदाचार से संस्था का निर्माण करना होगा। दुर्भाग्य से बाजार का विकास ज्यादा तेजी से हुआ और रेगुलेटर यानि एफएमसी को मजबूत नहीं बनाया जा सका। एफएमसी प्रमुख ने इससे पहले एक्सचेंजों में भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रस्तावित सुधारों की चर्चा करते हुए कहा कि एक्सचेंजों में कारोबार करने के लिए ब्रोकरों के नियमों में ढील दी जाएगी। ऐसे ब्रोकरों को कारोबार करने की अनुमति दी जाएगी, जिनके पास उस एक्सचेंज की इक्विटी है। उन्होंने कहा कि इस समय एक्सचेंज में इक्विटी रखने वाले ब्रोकरों को कारोबार करने की अनुमति नहीं हैं। हम सरकार से सिफारिश करने जा रहे हैं कि जिन ब्रोकरों के पास अधिकतम दो फीसदी इक्विटी है, उन्हें कारोबार करने की अनुमति दी जाए, बशर्ते एक्सचेंज के निदेशक मंडल में उस ब्रोकर की कोई भूमिका न हो। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और म्यूचुअल फंडों को वायदा कारोबार की अनुमति दिए जाने के सवाल पर अभिषेक ने कहा कि फॉरवर्ड कांट्रेक्ट रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) अभी भी उन्हें नहीं रोकता है। इस पर नियामकों को फैसला करना है। एफसीआरए में संशोधन की प्रतीक्षा किए बगैर ही यह किया जा सकता है। लेकिन ऑप्शन जैसे नए प्रोडक्ट लांच करने के लिए लंबे समय से लटके एफसीआरए के संशोधन विधेयक के पारित होने की आवश्यकता है। मौजूदा शीतकालीन सत्र में यह संशोधन विधेयक पेश होने की संभावना है। बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए एफएमसी प्रमुख ने कहा कि फाइनेंशियल सेक्टर लेजिस्लेटिव रिफॉम्र्स कमीशन (एफएसएलआरसी) की सिफारिशों को लागू करने की योजना बनाई गई है। मार्च के अंत तक ये सिफारिशें लागू होने से निवेशकों की सुरक्षा बढ़ेगी। छोटे निवेशकों को प्रोत्साहन देने के सवाल पर एफएमसी ने कहा कि एक्सचेंजों को छोटे कांट्रेक्ट और डिलीवरी सेंटर के हिसाब से कांट्रेक्ट लांच करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पोजीशन लिमिट, शुरूआती मार्जिन, सेटलमेंट गारंटी फंड के कोरपस साइज और वेयरहाउसिंग सुविधाएं बढ़ाने पर भी गौर किया जा रहा है। (Business Bhaskar)

5-day 'Krishi Vasant' exhibition to begin in Nagpur from Feb 9

Nagpur, Feb 7. About one lakh farmers from across the country are expected to visit the five-day national agriculture exhibition -- Krishi Vasant -- which will begin here from February 9. Besides, the event is expected to be watched by about five million farmers from the country through web-casting. There will be live demonstrations of 307 varieties of 54 crops, particularly cereals, fibres, fodder, oilseeds, vegetables, pulses, medicinal and aromatic plants during the exhibition, the state's Additional Chief Agriculture Secretary, Sudhir Goel, and Joint Secretary in Union Agriculture Ministry, Sanjay Gupta, told reporters here yesterday. With an aim to boost farm economy in the country, the Centre and the state government are jointly holding the biggest fair-cum-exhibition to commemorate the birth centenary celebrations of former Maharashtra Chief Minister Vasantrao Naik, they said. The Railways will run around 31 special trains for the farmers congregating at the event. The visitors will be accompanied by a government official as tour guide who would be responsible for their well being. The sprawling 20 sq km open area of CICR campus is witnessing hectic preparations to host the farmers' event. The event is also aimed at bridging the gap between technology-experts and the last person in the chain. There will be two seminars every day and farmers can interact with the officials and experts in their regional language, Gupta said. To make the interaction of farmers with scientists and experts more real, there would be interactive sessions through video conferencing from selected district centres. There would be demonstration of techniques for crop protection. Besides, webcast technology is going to take the fair-cum-expo to all villages in the country. The event will also provide an opportunity to companies to showcase their latest products. Several national and international companies like ADM, Aditya Birla, Bayer, Dupont, Force Motors, IFFCO, KRIBCHO, Mahyco, Venky's and others have confirmed their participation for the event, which is being jointly organised by Union Agriculture Ministry and Maharashtra Agriculture department. The Confederation of Indian Industries (CII) is the strategic partner for the event.