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14 जनवरी 2026

चालू रबी सीजन में फसलों की कुल बुआई बढ़कर 2.81 फीसदी बढ़ी - कृषि मंत्रालय

नई दिल्ली। चालू रबी सीजन में फसलों की बुआई 2.81 फीसदी बढ़कर 644.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 626.64 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। गेहूं के साथ ही दलहन एवं तिलहनी फसलों की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।  

कृषि मंत्रालय के अनुसार 9 जनवरी तक रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की बुआई बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल 328.04 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू रबी में दलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 136.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 132.61 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। रबी दलहन की प्रमुख फसल चना की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 95.88 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस समय तक 91.22 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी।

अन्य रबी दलहन में मसूर की बुआई बढ़कर 18.12 लाख हेक्टेयर में तथा मटर की 7.92 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.66 लाख हेक्टेयर में और 8.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द की बुआई चालू रबी में घटकर 4.37 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में 4.70 लाख हेक्टेयर की तुलना में हो चुकी थी है।

चालू रबी सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई देशभर में बढ़कर 96.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 93.33 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में सरसों की बुआई बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 86.57 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। मूंगफली की बुआई बढ़कर 3.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 3.37 लाख हेक्टेयर में हुई थी। अलसी की बुआई भी चालू रबी में बढ़कर 1.99 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 55.20 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 53.17 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में ज्वार की 21.36 लाख हेक्टेयर और मक्का की 25.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 22.66 और 23.49 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

जौ की बुआई चालू रबी सीजन में बढ़कर 7.36 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.08 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

चालू रबी सीजन में राज्य में धान की रोपाई बढ़कर 21.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 19.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दिसंबर 2025 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ा - एसईए

नई दिल्ली। दिसंबर 2025 में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़कर 1,383,245 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल दिसंबर में इनका आयात 1,275,554 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्य तेलों का आयात 1,362,245 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 21,000 टन का हुआ है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2025-26 के पहले दो महीनों नवंबर-25 एवं दिसंबर-25 के दौरान देश में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 12 फीसदी कम होकर 2,567,077 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 2,926,53 टन का हुआ था।

एसईए के अनुसार दिसंबर 2025 में पाम तेल का आयात घटकर 5.07 लाख टन रह गया, जो नवंबर 2025 के 6.32 लाख टन की तुलना में 1.25 लाख टन कम है, यानी 20 फीसदी की कमी आई है। पाम तेल का बंदरगाह पर स्टॉक 6.27 लाख टन से घटकर 4.53 लाख टन का रह गया, जो पिछले महीने की तुलना से 1.74 लाख टन कम है।

सोया तेल का आयात दिसंबर 2025 में बढ़कर 5.05 लाख टन का हो गया, जबकि नवंबर 2025 में इसका आयात 3.71 लाख टन का हुआ था, यानी इसके आयात में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सोया तेल का बंदरगाह पर स्टॉक पिछले महीनों के 2.65 लाख टन की तुलना में 0.25 लाख टन बढ़कर 3.00 लाख टन का हो गया।

सूरजमुखी तेल का आयात दिसंबर 2025 में 3.50 लाख टन का हुआ है, जो कि नवंबर 2025 के 1.43 लाख टन के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है, हालांकि पहले दो महीनों में कुल आयात 6.05 लाख टन के मुकाबले घटकर 4.92 लाख टन का रह गया, जो 19 फीसदी कम है। सूरजमुखी तेल का बंदरगाह पर स्टॉक पिछले महीने के 1.25 लाख टन से 0.75 लाख टन बढ़कर 2.00 लाख टन का हो गया।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 2 जनवरी, 2026 तक रबी तिलहन की फसलों की बुआई 3.04 फीसदी बढ़कर 99.30 लाख हेक्टेयर में हो गई हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 93.27 लाख हेक्टेयर में हुई थी। रबी तिलहन की प्रमुख फसल सरसों का रकबा 2.79 फीसदी बढ़कर 89.36 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 86.57 लाख हेक्टेयर था। दिसंबर 2025 के दूसरे पखवाड़े में बारिश नहीं हुई, हालांकि अनुकूल तापमान ने फसल की सामान्य ग्रोथ में मदद की।

नवंबर एवं दिसंबर 2025 के दौरान 517,067 टन की तुलना में सिर्फ 3,500 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलिन) का आयात किया है और नवंबर-दिसंबर, 2024 में 2,326,358 टन की तुलना में 2,509,700 टन क्रूड पाम तेल का आयात किया गया। अत: रिफाइंड तेल का रेश्यो तेजी से 18 फीसदी से घटकर 0.14 फीसदी का रह गया, जबकि क्रूड पाम तेल के आयात में बढ़ोतरी के कारण क्रूड तेल का रेश्यो 82 फीसदी से बढ़कर 99.86 फीसदी का हो गया है।

दिसंबर में आयातित खाद्य तेलों की कीमतों में भारतीय बंदरगाह पर मिलाजुला रुख रहा। दिसंबर में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,058 डॉलर प्रति टन का हो गया, जबकि नवंबर में इसका भाव 1,049 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर दिसंबर में घटकर 1,094 डॉलर प्रति टन का रह गया, जबकि नवंबर में इसका भाव 1,096 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव नवंबर में भारतीय बंदरगाह पर 1,188 डॉलर प्रति टन था, जोकि दिसंबर में घटकर 1,175 डॉलर प्रति टन रह गया।

सीसीआई ने बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की, हाजिर बाजार में भाव मजबूत

नई दिल्ली। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को बिनौले की बिक्री कीमतों में 80 से 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी। अत: हाजिर बाजार में बिनौला के साथ ही कपास खली के दाम 100 से 125 रुपये प्रति क्विंटल तक तेज हुए।


कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने सोमवार को घरेलू बाजार में ई नीलामी के माध्यम से 15,23,300 क्विंटल बिनौले की बिक्री की पेशकश की। निगम ने बिनौले की बिक्री कीमतों में 80 से 180 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की। सीसीआई ने पिछले सप्ताह भी बिनौले की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की थी।

व्यापारियों के अनुसार सीसीआई लगातार बिनौला की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी कर रही है तथा चालू फसल सीजन में सीसीआई उत्पादक राज्यों से करीब 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद कर चुकी है। अत: बिनौला का सबसे ज्यादा स्टॉक सीसीआई के पास होने के कारण हाजिर बाजार में बिनौला एवं कपास खली की कीमत निगम के बिक्री भाव के हिसाब से ही तेज हो रही है। प्राइवेट जिनिंग मिलों के पास बिनौले का स्टॉक कम है, तथा हाल ही में भाव में आई तेजी के कारण जिनिंग मिलों की बिक्री कम हुई है।

तेल मिलों की खरीद बढ़ने के कारण बिनौले की कीमत तेज हुई। हरियाणा में बिनौले के भाव 150 रुपये तेज होकर 3,850 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इस दौरान राजस्थान में बिनौला के भाव 100 रुपये बढ़कर 3,900 से 4,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 100 रुपये तेज होकर 3,850 से 4,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हुबली में रेगुलर क्वालिटी के बिनौले के दाम तेज होकर 3,950 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। विश्व बाजार में खाद्य तेलों के दाम तेज हुए हैं, जिस कारण घरेलू बाजार में बिनौले में तेल मिलों की खरीद बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि इसकी कीमतों में तेजी, सीसीआई के बिक्री दाम पर ही निर्भर करेगी।

पशु आहार वालों की मांग सीमित होने से कपास खली की कीमत स्थिर बनी रही। सेलू में रेगुलर क्वालिटी की कपास खली की कीमत 3,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान भोकर में रेगुलर कपास खली की कीमत 3,800 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। शहापूर में रेगुलर कपास खली के भाव 3,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 54 फीसदी बढ़कर 56.29 लाख टन के पार

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू पेराई सीजन (अक्टूबर-25 से सितंबर-26) में 8 जनवरी तक महाराष्ट्र में चीनी का उत्पादन 53.88 फीसदी बढ़कर 56.29 लाख टन का हो चुका है। पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 37.80 लाख टन चीनी का ही उत्पादन हुआ था।

 
शुगर कमिश्नर के अनुसार 8 जनवरी तक राज्य में 632.92 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 56.29 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। राज्य की औसत चीनी रिकवरी 8.89 फीसदी की बैठ रही है। राज्य में 8 जनवरी तक कुल 197 फैक्ट्रियों (98 कोऑपरेटिव और 99 प्राइवेट) ने पेराई शुरू की है।

पिछले पेराई सीजन की समान अवधि में राज्य में 199 चीनी फैक्ट्रियों (98 को ऑपरेटिव और 101 प्राइवेट) ने पेराई आरंभ कर दी थी। पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 434.14 लाख टन गन्ने की पेराई की थी और 37.80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था। औसत चीनी की रिकवरी दर 8.71 फीसदी की थी।

कोल्हापुर डिवीजन ने 137.73 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 14.42 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। कोल्हापुर डिवीजन में रिकवरी की दर 10.47 फीसदी की है। डिवीजन में 37 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 25 सहकारी और 12 प्राइवेट हैं।

इसी तरह से पुणे डिवीजन में कुल 30 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 13 प्राइवेट मिलें है। उन्होंने अब तक 146.95 लाख टन गन्ने की पेराई कर 13.44 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। पुणे डिवीजन की रिकवरी दर 9.16 फीसदी की है।

सोलापुर डिवीजन में कुल 46 फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिसमें 17 सहकारी और 29 प्राइवेट हैं। अब तक डिवीजन में 138.05 लाख टन गन्ने की पेराई हो चुकी है और 11.04 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है। चीनी की रिकवरी दर 8 फीसदी की है।

अहमदनगर (अहिल्यानगर) डिवीजन में कुल 27 फैक्ट्रियां, 15 को ऑपरेटिव और 12 प्राइवेट ने पेराई शुरू कर दी हैं। इन सभी फैक्ट्रियों ने अब तक 77.8 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 6.55 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। अहमदनगर डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.43 फीसदी है। छत्रपति संभाजीनगर डिवीजन में कुल 22 चीनी मिलों (13 कोऑपरेटिव और 9 प्राइवेट) ने पेराई शुरू कर दी है तथा उन्होंने 60.39 लाख टन गन्ने की पेराई कर 4.56 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। चीनी की रिकवरी की दर 7.56 फीसदी है।

नांदेड़ डिवीजन में कुल 29 फैक्ट्रियां (10 कोऑपरेटिव और 19 प्राइवेट) चल रही हैं और उन्होंने 64.94 लाख टन गन्ने की पेराई कर 5.64 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। इस डिवीजन में चीनी की रिकवरी दर 8.69 फीसदी है। अमरावती डिवीजन में एक को ऑपरेटिव और 3 प्राइवेट फैक्ट्रियां चल रही हैं, और उन्होंने 6.64 लाख टन गन्ने की पेराई की है।

10 जनवरी 2026

सीसीआई ने चालू सप्ताह में 2,23,100 गांठ कॉटन की बिक्री की, पिछले सप्ताह से ज्यादा

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई ने 5 जनवरी से 9 जनवरी के दौरान 2,23,100 गांठ, एक गांठ 170 किलो फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई कॉटन की बिक्री की। इसके पिछले सप्ताह में निगम ने केवल 2,02,100 गांठ बेची थी।


सूत्रों के अनुसार अभी तक पिछले फसल सीजन 2024-25 के दौरान खरीदी हुई 98,53,300 गांठ कॉटन की बिक्री कर चुकी है। फसल सीजन 2024-25 की खरीदी हुई कॉटन की लगातार घरेलू बाजार में मिलों को बिकवाली कर रही है।

पहली अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू फसल सीजन में सीसीआई 72 लाख गांठ से ज्यादा कपास की खरीद समर्थन मूल्य पर कर चुकी है। माना जा रहा है कि निगम की कुल खरीद एक करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को शाम के सत्र में गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके भाव में स्थिर से सुधार आया।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव शुक्रवार को 200 रुपये तेज होकर दम 55,100 से 55,400 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव सुधरकर 5,500 से 5,660 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,460 से 5,600 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,525 से 5,680 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 53,000 से 54,000 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 208,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 4.5 रुपये तेज होकर 1,590 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा।

व्यापारियों के अनुसार स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही, जबकि उत्तर भारत में इसकी कीमतों में स्थिर से सुधार आया। व्यापारियों के अनुसार अधिकांश मिलों के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है जबकि सूती धागे की स्थानीय मांग बराबर बनी हुई है, जिस कारण स्पिनिंग मिलें अच्छे मार्जिन में व्यापार कर रही है। हालांकि घरेलू बाजार में कॉटन की कुल उपलब्धता ज्यादा है। सीसीआई घरेलू बाजार में लगातार पिछले साल की खरीदी हुई कॉटन बेच रही है। अत: मिलों को आसानी से कच्चा माल मिल रहा है। हाल ही में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी आई है। बढ़े दाम पर मिलों की खरीद सीमित हुई है इसलिए कॉटन के दाम रुक सकते हैं।

मुद्रा संकट के कारण ईरान को बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ा

नई दिल्ली। मुद्रा संकट के कारण ईरान को बासमती चावल के निर्यात पर असर पड़ा, बंदरगाहों पर 2,000 करोड़ रुपये का स्टॉक फंसा हुआ है।


ईरानी सरकार ने खाद्य आयात पर सब्सिडी देना बंद कर दिया है, जिसके चलते भारतीय निर्यातकों को अपने माल की खेप रोकनी पड़ी है।

घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतों में आई 200 से 300 रुपये की गिरावट।

24वें एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस का आयोजन 27 से 28 फरवरी को गुजरात में

नई दिल्ली, गुजरात में 27 से 28 फरवरी को सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) 24वें ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 की मेजबानी करेगा, जिसमें कैस्टर सीड एवं कैस्टर तेल की मांग एवं उत्पादन के रुझानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) 24वें एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 की घोषणा करते हुए बहुत खुश है, जो कि कैस्टर उद्योग का डेडिकेटेड एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म है। इसका आयोजन 27-28 फरवरी, 2026 को मशहूर लीला गांधीनगर, गुजरात, भारत में होगा।

भारत दुनिया की 90 फीसदी से ज़्यादा कैस्टर तेल की डिमांड पूरी करता है, जिससे वर्ल्ड कैस्टर सिनेरियो में इसका दबदबा है। भारत का कैस्टर तेल और डेरिवेटिव्स का एक्सपोर्ट हर साल लगभग 15,000 करोड़ रुपये (यूएसा डॉलर में 1.8 बिलियन) का है। ग्लोबल कैस्टर डेरिवेटिव्स मार्केट, जिसका अंदाज़ा यूएस डॉलर में 6.0 बिलियन से ज्यादा है, भारत पर सबसे ज्यादा निर्भर है।

कैस्टर उद्योग को एक साथ लाने की अपनी कोशिश में, एसईए 24वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर रहा है ताकि कैस्टर उद्योग के सामने आने वाले मुद्दों पर बात की जा सके और उन पर फोकस किया जा सके और साथ ही भारत और विदेश के जाने-माने स्पीकर्स और पैनल मेंबर्स के साथ अच्छी बातचीत करके उसका हल निकाला जा सकें। यह 24वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस कैस्टर बिजनेस से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा और विचारों के लेन-देन का एक खास मौका भी देगी, ताकि दुनिया भर में मैन्युफैक्चरर्स, इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स, टेक्नोलॉजिस्ट्स, कमोडिटी एक्सचेंज के प्लेयर्स, ब्रोकर्स, कैस्टर सीड किसानों और कैस्टर बिजनेस के डीलर्स के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान ढूंढा जा सके।

एसईए-ग्लोबल कैस्टर कॉन्फ्रेंस 2026 में भागीदारी को बढ़ावा देने और बिजनेस रिलेशनशिप बनाने के लिए एक खास प्लेटफॉर्म बनने वाला है। डेलीगेट्स को कैस्टर तेल और डेरिवेटिव्स के सप्लायर के साथ वन टू वन मीटिंग का मौका मिलेगा, जिससे नए बिजनेस के मौके खुलेंगे और मौजूदा पार्टनरशिप मजबूत होंगी।