कुल पेज दृश्य

02 सितंबर 2016

चालू खरीफ में दलहन की रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान

दलहन के साथ ही तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई ज्यादा
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अनुकूल मौसम से जहां दलहन, तिलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं कपास के साथ ही गन्ने और केस्टर की बुवाई पिछड़ी है। दलहन की बुवाई में हुई भारी बढ़ोतरी से खरीफ में दलहन की रिकार्ड पैदावार होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार देषभर में अभी तक 142.02 लाख हैक्टेयर में दलहन की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुवाई 106.92 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई बढ़कर 51.77 लाख हैक्टेयर में, मूंग की बुवाई 33.04 लाख हैक्टेयर में और उड़द की बुवाई 34.36 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इनकी बुवाई क्रमषः 35.22 लाख हैक्टेयर, 24.27 लाख हैक्टेयर और 27 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। मूंग और उड़द की नई फसल की आवक षुरु हो गई है तथा आगामी दिनों इनकी दैनिक आवक में बढ़ोतरी होगी जबकि अरहर की नई फसल की आवक दिसंबर-जनवरी महीने में बनेगी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में अभी तक 1,033.99 लाख हैक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 997.11 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो पाई थी। तिलहन की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 179.60 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 178.67 लाख हैक्टेयर में ही तिलहनों की बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 112.27 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 115.35 लाख हैक्टेयर में ही चुकी थी। हालांकि मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 44.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 35.69 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई चालू खरीफ में अभी तक 372.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 364.43 लाख हैक्टेयर में रोपाई हो पाई थी। मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 184.13 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 175.59 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 101.96 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.17 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 45.77 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले की समान अवधि में 49.60 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। इसी तरह से केस्टर सीड की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 6.53 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.90 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।.............आर एस राणा

राजस्थान के साथ ही गुजरात में ग्वार की बुवाई कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में राजस्थान के साथ ही गुजरात में भी ग्वार सीड की बुवाई में कमी आई है। राजस्थान कृषि निदेषालय के अनुसार अभी तक राज्य में 2.98 लाख हैक्टेयर में ही ग्वार सीड की बुवाई हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 3.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
उधर गुजरात कृषि निदेषालय के अनुसार राज्य में ग्वार सीड की बुवाई अभी तक केवल 1.93 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 2.94 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।.....आर एस राणा

सेबीः एक्सचेंजों का रिस्क मैनेजमेंट नियम सख्त

सेबीः एक्सचेंजों का रिस्क मैनेजमेंट नियम सख्त
सेबी ने कमोडिटी एक्सचेंजों के रिस्क मैनेजमेंट के नियमों को और सख्त कर दिया है। सेबी ने इसके लिए नए गाइडलाइंस जारी किए हैं। नए नियम के तहत डिफॉल्ट की स्थिति में अब एक्सचेंज को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी। इसके लिए सेटमलमेंट गारंटी फंड में पहले तो एक्सचेंजों की हिस्सेदारी पर 5 फीसदी की सीमा थी उसे खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा वायदा में शुरुआती मार्जिन को दोगुना कर दिया गया है।  सेबी की कोशिश है कि सीरियस ट्रेडर्स को ही बाजार मे आने दिया जाए। स्प्रेड ट्रेड पर मिलने वाला मार्जिन लाभ पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। साथ ही कमोडिटी में एकतरफा चाल रोकने के लिए कॉन्सेनट्रेशन मार्जिन लगाया गया है।

चीनी मिल पर स्टॉक लिमिट

 त्योहारों के सीजन में चीनी की कीमतों पर काबू के लिए सरकार ने मिलों पर स्टॉक लिमिट लगा दी है।  खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने इसकी जानकारी दी। फैसले के तहत मिलों को सितंबर में इस पूरे साल के उत्पादन का 37 फीसदी से ज्यादा स्टॉक नहीं रखना होगा। वहीं अक्टूबर के लिए ये सीमा 24 फीसदी की है। इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट को लेकर भी 20 फीसदी ड्यूटी लगा चुकी है। इसके अलावा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने चीनी वायदा पर रोक की भी सिफारिश की है। दरअसल कुछ राज्यों ने मिलों में जमाखोरी होने की केंद्र सरकार से शिकायत की थी।

नॉन कमोडिटी बाजार

अमेरिका में आज नॉन फार्म पेरोल आंकड़ों से पहले सोने की चाल छोटे दायरे में सिमट गई है। एसपीडीआर गोल्ड की होल्डिंग लगातार तीसरे दिन गिरकर 938 टन के नीचे आ गई है। अमेरिका में रोजगार के आंकड़े अगर अच्छे आए तो सोने में गिरावट बढ़ सकती है। इस बीच कल की भारी गिरावट के बाद आज कच्चा तेल संभलने की कोशिश में है। अमेरिका में भंडार बढ़ने और खराब मैन्युफैक्चरिंग आंकड़ों से कल क्रूड में भारी गिरावट आई थी। फिलहाल ब्रेंट 46 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 44 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहे हैं। आज डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आई है।

01 सितंबर 2016

क्रूड सुस्त, नैचुरल गैस 0.75% गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में गिरावट बढ़ गई है। ब्रेंट का दाम 47 डॉलर के नीचे आ गया है। नायमैक्स पर क्रूड 45 डॉलर के नीचे कारोबार हो रहा है। घरेलू बाजार में नैचुरल गैस का दाम करीब 1 फीसदी गिर गया है। फिलहाल एमसीएक्स पर कच्चा तेल सपाट होकर 3005 रुपये पर कारोबार कर रहा है। नैचुरल गैस 0.75 फीसदी गिरकर 193 रुपये पर नजर आ रहा है।
कल नॉन फार्म पेरोल से पहले आज सोने पर भी दबाव बढ़ गया है और ये 2 महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। कॉमैक्स पर सोने का भाव 1310 डॉलर के नीचे आ गया है। फिलहाल एमसीएक्स पर सोना 0.1 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 30700 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि एमसीएक्स पर चांदी 0.3 फीसदी बढ़कर 44140 रुपये पर कारोबार कर रही है।
बेस मेटल्स में रिकवरी आई है और एल्युमीनियम को छोड़कर सभी मेटल बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। एमसीएक्स पर कॉपर 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 314.15 रुपये पर कारोबार कर रहा है। निकेल 0.4 फीसदी की तेजी के साथ 659.6 रुपये पर कारोबार कर रहा है। लेड में 1 फीसदी और जिंक में 0.5 फीसदी की मजबूती आई है। एल्युमिनियम 0.5 फीसदी गिरकर 107.5 रुपये पर आ गया है।
एग्री कमोडिटी पर नजर डालें तो सोयाबीन और सरसों में आज तेजी आई है। वायदा में सरसों का दाम करीब 1 फीसदी बढ़ गया है। जीरा और ग्वार में भी बढ़त पर कारोबार हो रहा है। लेकिन मेंथा तेल का दाम करीब 1.5 फीसदी गिर गया है। (Hindimoneycantorl.com)

कपास खली वायदा में 10% कैश मार्जिन

एनसीडीईएक्स ने कपास खली वायदा में 10 फीसदी का अतिरिक्त कैश मार्जिन लगा दिया है। ये मार्जिन खरीद और बिक्री दोनों तरह के सौदों पर देना होगा। मार्जिन की नई दरें कल यानि शुक्रवार से लागू हो जाएंगी। एक्सचेंज के इस फैसले के बाद कपास खली वायदा में आज गिरावट आई है। इस बीच गुजरात के कुछ गोदामों में कपास खली की क्वालिटी को लेकर शिकायत मिली है जिसकी सेबी जांच करा रहा है। सेबी ने गोदामों से कपास खली के सैंपल मंगाए हैं। कारोबारियों की शिकायत है कि कड़ी के गोदामों में कपास खली का मिलावटी स्टॉक रखा जा रहा है।