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10 जून 2015

प्याज पर चढऩे लगा महंगाई का रंग

घरेलू प्याज मंडियों में आवक कम होने और विदेशी मांग बढऩे से प्याज पर महंगाई का रंग चढऩा शुरू हो गया है। पिछले एक महीने में प्याज करीब 70 फीसदी महंगा हो गया है जबकि चालू महीने में इसके दाम लगभग 24 फीसदी बढ़े हैं। मॉनसून दस्तक दे चुका है। अगले कुछ दिनों में देश के दूसरे हिस्सों में भी मॉनसून सक्रिय होगा जिसके चलते मंडियों में आवक और कमजोर पडऩे की आशंका जताई जा रही है। इससे कीमतें और चढ़ेंगी।

प्याज की कीमतें एक बार फिर रुलाने वाली है। थोक मंडिय़ों में प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। एक महीना पहले 1400 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाले प्याज के दाम बढ़कर 2350 रुपये क्विंटल हो गए हैं। राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मुंबई थोक मंडी में मई के शुरू में प्याज 1400 रुपये क्विटल पर बिक रहा था जो 1 जून को बढ़कर 1900 रुपये और 9 जून को बढ़कर 2350 रुपये क्विंटल हो गया। दिल्ली थोक मंडी में प्याज मुंबई की अपेक्षा सस्ता बिक रहा है। दिल्ली में प्याज की औसत कीमत बढ़कर 1636 रुपये हो गई जबकि अधिकतम कीमत 2250 रुपये क्विंटल बोली गई, जबकि 1 जून को दिल्ली थोक मंडी में प्याज की औसत कीमत 1396 रुपये पति क्विंटल पर थी। देशभर की थोक मंडियों में प्याज का औसत भाव 2050 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया जबकि अप्रैल में औसत कीमत 1327 रुपये और मई में 1572 रुपये प्रति क्विंटल बताई जा रही थी। थोक बाजार में कीमत बढऩे का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है।

पिछले एक सप्ताह में मुंबई और आसपास के इलाके में प्याज के खुदरा दाम तेजी से बढ़े हैं। मुंबई में प्याज 30 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है जबकि जून महीने की शुरुआत में यह भाव 22 रुपये से 30 रुपये के बीच था। उपभोक्ता मामलों के विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में प्याज की औसत कीमत 25 रुपये से बढ़कर 28 रुपये और दिल्ली में 28 रुपये से बढ़कर 33 रुपये किलोग्राम बताई जा रही है। वहीं देशभर में प्याज की औसत कीमत अभी भी 20 रुपये प्रति किलोग्राम और अधिकतम खुदरा कीमत 49 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। एपीएमसी में प्याज कारोबारी मनोहर तोतलानी कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों से आवक कमजोर हुई है, जबकि मांग बढ़ी है। वह कहते हैं कि बारिश शुरू होने के कारण जून में प्याज 3500 रुपये तक पहुंच जाता है जबकि अभी 2400 रुपये के करीब चल रहा है। प्याज निर्यातकों का कहना है कि प्याज के महंगे होने की सबसे बड़ी वजह विदेशी मांग बढऩा है।  (BS hindi)

Australia Forecasts 23.6 MMT Wheat Production In 2015-16



Wheat production forecast in Australia remains unchanged at23.6 million tonne i  2015-16 despite drought like condition  and developing EL Nino pattern.According to Australian Bureau of Agricultural and Resource Economics and Science (ABARES) winter crop season started with favourable condition with below average rains across southeastern Australia in March replaced with generally above average rainfall in April.Higher soil moisture in the east coast may boost production of high-protein prime hard wheat.The impact of crop's yield due to El Nino is not uniform as of now.

नाफ्था आधारित यूरिया संयंत्रों को उत्पादन जारी रखने की मंजूरी मिली

दक्षिणी राज्यों में यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नाफ्था को कच्चेमाल के रूप में इस्तेमाल कर यूरिया बनाने वाले तीन संयंत्रों को पाइपलाइन या किसी अन्य माध्यम से गैस उपलब्ध होने तक यूरिया उत्पादन जारी रखने की बुधवार को मंजूरी दी। उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने बताया, 'आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने मद्रास फर्टिलाइजर्स (एमएफएल), मंगलूरु केमिकल्स ऐंड फर्टिलाइजर्स (एमसीएफएल) और सदर्न पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन (एसपीआईसी) से नाफ्था का उपयोग कर यूरिया का उत्पादन जारी रखने को बुधवार को मंजूरी प्रदान की।'
उन्होंने कहा, 'दक्षिणी राज्यों में उर्वरक की निर्बाध रूप से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय किया गया है। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की कुल जरूरत 23 लाख टन की है और इन तीन संयंत्रों का सालाना यूरिया उत्पादन 15 लाख टन है।' संशोधित नई मूल्य निर्धारण योजना (एनपीएस)-3 के तहत एमएफएल-मनाली, एमसीएफएल-मंगलूरु और एसपीआईसी-तूतिकोरिन को पिछले साल 30 जून तक नाफ्था का उपयोग कर यूरिया का उत्पादन करने की अनुमति दी गई थी जिसे मंत्रिमंडल द्वारा बाद में दो बार समय विस्तार दिया गया। BS Hindi

Iraq Is Likely Import 1MMT Wheat in 2015-16 For Blending

Iraq is likely to import one million tonne wheat this year too and imported wheat would be blended with local crop-says local officials.Iraq import wheat with high gluten content as it is used  to make bread. local produce has low gluten content wheatIraq's totoal yearly wheat requirement is 4 million tonne,out of which it imports 25 percent of its actual need.This year 3.5 million tonne wheat is expected from local crop

दालों की तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय

आर एस राणा
दलहल आयात बढ़ाने पर जोर देगी सरकार
नई दिल्ली। दलहन की कीमतों में चल रही तेजी रोकने के लिए केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर उचित कदम उठाने की मांग की है, साथ ही दालों का आयात बढ़ाने पर भी जोर देगी सरकार।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहां कि दलहन की कीमतों में आई तेजी को लेकर सरकार चितिंत है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर दलहन की कीमतों में तेजी रोकने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि दालों की कीमतों में चल रही तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार हर संभव कदम उठायेगी। सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहां  कि दलहल की कीमतों में तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार आयात बढ़ाने पर जोर देगी। सरकार सार्वजनिक कंपनियों एमएमटीसी, एसटीसी और पीईसी के माध्यम से दालों का आयात करती है।
इससे पहले कृषि सचिव भारत सरकार सिराज हुसैन ने भी बताया था कि दालों की कीमतों में चल रही तेजी रोकने के लिए सरकार ने केंद्रीय पूल से चना और अरहर की बिक्री के लिए राज्यों को पत्र लिखा है। तथा दो राज्यों तेलंगाना और तमिलनाडु ने दालों की खरीद में रुचि दिखाई है।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में दालों की पैदावार घटकर 173.8 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी रिकार्ड पैदावार 192.5 लाख टन की हुई थी। पैदावार में आई कमी के कारण ही वित वर्ष 2014-15 में देष में रिकार्ड 45 लाख टन दालों का आयात हो चुका है।
दलहन कारोबारी दुर्गा प्रसाद ने बताया कि आयातित दालों की कीमतें भी तेज बनी हुई है। आस्ट्रेलिया से आयातित चना के भाव मुंबई पहुंच 4,650 रुपये प्रति क्विंटल हैं जबकि आयातित उड़द के भाव 7,900 रुपये, लेमन अरहर के 7,300 रुपये प्रति क्विंटल मुंबई पहुंच चल रहे हैं। कनाडा की मसूर के भाव मुंबई पहुंच भाव 6,400 से 6,500 रुपये कनाडा की पीली मटर के भाव 2,571 और हरी मटर के 2,800 से 2,900 रुपये प्रति क्विंटल हैं।....आर एस राणा

चीनी उद्योग को 6,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देगी सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। किसानों के बकाया भुगतान से जुझ रहे चीनी उद्योग को केंद्र सरकार ने 6,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में चीनी मिलों को ब्याज मुक्त ऋण की अवधि एक साल की होगी।
सीसीईए की बैठक के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने संवाददाओं को बताया कि चीनी उद्योग को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 6,000 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का फैसला किया हैं, इससे चीनी मिलों को किसानों के बकाया भुगतान करने में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि चीनी उद्योग को एक साल के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जायेगा। चालू पेराई सीजन 2014-15 में चीनी मिलों पर किसानों के बकाया का बोझ बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये का हो चुका है। उन्होंने बताया कि सीसीईए की बैठक में चीनी का बफ्र स्टॉक बनाने को लेकर कोई विचार नहीं हुआ।
इससे पहले भी केंद्र सरकार ने चीनी उद्योग को राहत देने के लिए आयात षुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही रॉ-षुगर के निर्यात पर इनसेंटिव आदि देने की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने चीनी के आयात तो हत्तोसाहित करने के लिए आयात ष्षुल्क को 25 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी कर दिया था। इससे पहले केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 14 लाख टन रॉ-षुगर के निर्यात पर 4,000 रुपये प्रति टन की दर से इनसेंटिव देने की घोषणा भी की थी। केंद्र सरकार द्वारा इनसेंटिव घोषित करने के बाद से चीनी मिलें करीब 3 लाख टन रॉ-षुगर का निर्यात कर चुकी है।ष्
चालू पेराई सीजन में 31 मई 2015 तक 279.57 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जबकि देष में चीनी की सालाना खपत 225 से 230 लाख टन की होती है। चीनी का उत्पादन ज्यादा होने के कारण चीनी के दाम नीचे बने हुए है जिससे चीनी मिलों को घाटा हो रहा है। इसलिए चीनी मिलें किसानों को समय पर भुगतान नहीं कर पा रही है तथा चालू पेराई सीजन में किसानों के बकाया का बोझ बढ़कर 22,000 करोड़ को पार कर चुका है। ....आर एस राणा

09 जून 2015

एफसीआई ने ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री शुरु की


पंजाब, हरियाणा और एमपी से 1,550 रुपये की दर से बेचेगी गेहूं
आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री शुरु कर दी है। रोलर फ्लोर मिलों को नए सीजन का गेहूं पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से 1,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा जायेगा, तथा परिवहन लागत मिलों को स्वयं वहन करनी होगी।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ओएमएसएस के तहत पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेष से गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी गई है। उन्होंने बताया कि पिछले साल ओएमएसएस के तहत 100 लाख टन गेहूं का आवंटन किया गया था लेकिन चालू सीजन में गेहूं बेचने की कोई सीमा तय नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि ओएमएसएस के तहत चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 के गेहूं की बिक्री की जायेगी, तथा फ्लोर मिलों को पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से गेहूं खरीदना होगा। परिवहन लागत फ्लोर मिलों को स्वयं वहन करनी होगी। उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों को स्थिर करने के लिए एफसीआई ने गेहूं की बिक्री जल्द शुरु की है। आमतौर पर एफसीआई ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री नवंबर से मार्च के दौरान करती है। दिल्ली के लारेंस रोड़ पर गेहूं के भाव 1,520 से 1,530 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
भारतीय खाद्य निगम चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) पर 272.83 लाख टन गेहूं की खरीद कर चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 267.29 लाख टन गेहूं की खरीद की गई थी। एफसीआई ने चालू रबी विपणन सीजन में 300 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य तय किया है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में 280 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। केंद्रीय पूल में पहली जून को 403.5 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है।......आर एस राणा