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20 मार्च 2010

खरीफ सीजन में सूखे की स्थिति से निपटने की तैयारी

पिछले साल के भीषण सूखे के बाद अगले खरीफ सीजन को लेकर सरकार अभी से ही सतर्क हो गई है। खरीफ सीजन की तैयारियों में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का है कि सूखे की स्थिति फिर से पैदा हो तो कैसे निपटा जाए। खरीफ 2010 की तैयारियों के लिए आयोजित कृषि गोष्ठी में राज्यों के सचिवों और अन्य अधिकारियों ने खरीफ सीजन की तैयारियों पर गहन विचार किया।कृषि सचिव पी। के. बसु ने बताया कि पिछले वर्ष पड़े सूखे के लिए राज्य सरकार पूरी तरह तैयार नहीं थीं, हालांकि इस बार मानसून के सामान्य रहने की उम्मीद है लेकिन फिर भी राज्यों ने सूखे से निपटने के लिए भी योजना बना ली हैं। बसु के मुताबिक बुवाई से पहले खेतों में डाइ अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की भी कोई कमी न रहे, इसके लिए राज्यों ने संभावित मांग से अधिक स्टॉक जुटा लिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को अच्छे बीज सुलभ कराने की व्यवस्था की जा रही है।कृषि कमिश्नर डॉ. गुरबचन सिंह ने बताया कि अभी तक गेंहू की पैदावार बढ़िया रहने के संकेत हैं। लेकिन 25 मार्च के बाद ही उत्पादन का सही अनुमान लग पाएगा। वैसे कृषि वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि गेंहू का इस साल रिकार्ड उत्पादन हो सकता है। डॉ. सिंह के मुताबिक पशुओं के लिए चार का भी राज्यों के पास उचित प्रबंध है। सूखे की स्थिति में भी चार की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि दलहनों का उत्पाद बढ़ाने के लिए इक्रिसेट के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। इसके अलावा बारिश के पानी को एकत्रित करने के लिए नरगा, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत तालाबों, कुंड आदि का निर्माण भी किया जा रहा है। बसु ने कहा कि न्यूट्रिएंट आधारित फर्टिलाइजर नीति का किसानों को लाभ मिलेगा। नई स्कीम के अनुसार सब्सिडी सिर्फ खाद में मौजूद पोषक तत्वों पर मिलेगी, पूर उत्पाद पर नहीं। इससे किसानों को अपने खेत की आवश्यकता के अनुसार खाद का चयन करने में आसानी होगी। इससे खेती की लागत में कमी आएगी और मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी। (बिज़नस भास्कर)

मुश्किल वक्त में भी सोना चमका

नई दिल्ली / लंदन : सोने की कीमतों में शुक्रवार को घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में मामूली बदलाव देखने को मिला। घरेलू बाजार में सोने जार में खमें जहां थोड़ी तेजी आई, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। शुक्रवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में 30 रुपए का मामूली उछाल आया। दिल्ली सर्राफा बाजार में खरीदारी को समर्थन मिलने से सोने का भाव 30 रुपए उछलकर 16,940 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शुक्रवार को सोना यूरो की कमजोरी का शिकार हुआ। डॉलर के मुकाबले यूरो के कमजोर होने से सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आई। हालांकि, हालिया कारोबारी सत्रों में सोने ने डॉलर के मजबूत होने के बावजूद जिस तरह से खुद को बड़ी गिरावट से रोक रखा है, उसे देखकर कारोबारी काफी खुश नजर आ रहे हैं। न्यूयॉर्क में शुक्रवार को सोने की हाजिर कीमत 1,120।95 डॉलर प्रति औंस रही जबकि गुरुवार को सोना 1,125.45 डॉलर पर रहा था। इसी तरह से न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज के कॉमेक्स डिवीजन पर सोने के अप्रैल फ्यूचर्स का भाव 5.90 डॉलर गिरकर 1,121.60 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। एक एनालिस्ट के मुताबिक, 'एक ओर तो डॉलर की मजबूती का सोने पर दबाव बन रहा है जबकि दूसरी ओर बाजार में लगातार निवेशक आ रहे हैं। गोल्ड ने डॉलर की मजबूती के खिलाफ डटने की जबरदस्त क्षमता दिखाई है।' दिल्ली सर्राफा बाजार में स्टैंडर्ड गोल्ड और गहने दोनों के भाव खरीदारी के चलते 30 रुपए चढ़कर क्रमश: 16,940 रुपए और 16,790 रुपए पर पहुंच गए। कारोबारियों के मुताबिक, खरीदारी बाजार में सोने के लिए अच्छा संकेत बनी और इससे इसकी कीमतों में तेजी आई। शुक्रवार को दिल्ली में चांदी पर बिकवाली का दबाव रहा। इसके चलते इसमें 75 रुपए की गिरावट आई। तैयार चांदी की कीमत इस गिरावट के साथ 27,175 रुपए प्रति किलो रही। (ई टी हिंदी)

ई-एक्सचेंज से FCI बेचेगा गेहूं

मुंबई : खाद्य उत्पादों की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) खुले बाजार में गेहूं पहुंचाने के लिए कमोडिटी स्पॉट एक्सचेंज का इस्तेमाल कर रहा है। एक्सचेंज के अधिकारियों ने बताया कि सरकार की नोडल खाद्य खरीद एजेंसी ने फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज और एनसीडीईएक्स की ओर से प्रमोट स्पॉट एक्सचेंज के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत पायलट आधार पर उनके इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए गेहूं बेचा जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से वितरण में तेजी आएगी और भुगतान भी जल्द होगा। एनएसईएल दिल्ली में एफसीआई का गेहूं भंडार बेचेगा जबकि आंध्र प्रदेश में बिक्री का जिम्मा एनस्पॉट पर होगा। ओपन माकेर्ट सेल्स स्कीम (ओएमएसएस) के तहत गेहूं की बिक्री महीने के अंत तक वन टाइम स्कीम के तहत इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी। एनसीडीईएक्स और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज के एनएसईएल की ओर से लॉन्च एनस्पॉट का मानना है कि इससे वितरण में सुधार और तेजी आएगी। सरकार जब कभी कमोडिटी की कीमतों में नरमी लाना चाहती है तो ओपन माकेर्ट सेलिंग स्कीम (ओएमएसएस) के तहत बाजार में दखल देती है। सामान्य तौर पर एफसीआई टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से न्यूनतम 100 टन और अधिकतम 1,000 टन गेहूं की नीलामी करता है। इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट एक्सचेंज से गेहूं बेचने से सरकार की खुले बाजार में इसकी कीमतों पर समयबद्ध तरीके से काबू पाने की कोशिश कामयाब हो सकेगी। साथ ही उसे वेयरहाउस से भंडार उठाकर दूसरी जगह पहुंचाने और स्टॉक के लिए भुगतान हासिल करने की चिंता भी नहीं करनी होगी, जिसकी जिम्मेदारी एक्सचेंज खुद उठाएंगे। एनएसईएल के एमडी और सीईओ अंजनी सिन्हा ने बताया, 'एफसीआई टेंडर सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जिसमें दिलचस्पी रखने वाले कारोबारियों को डिमांड ड्राफ्ट जारी कर बोली लगानी होती है। अगर उनकी बोली स्वीकार नहीं की जाती तो रिफंड में आम तौर पर देरी होती है। अब ओएमएसएस की पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड होगी और अगर कारोबारी की बोली स्वीकार नहीं की जाती है तो अगले ही दिन माजिर्न मनी उसके एकाउंट में क्रेडिट हो जाएगा। अगर ट्रांजैक्शन होता है तो उसके अगले ही दिन पैसा लेकर एफसीआई तक पहुंचा दिया जाएगा।' सिन्हा ने कहा कि एक्सचेंज ने कुछ महीने पहले इन प्लेटफॉर्म के जरिए गेहूं की बिक्री का प्रस्ताव किया था। हालांकि, एफसीआई हाल में ही इस बात पर राजी हुआ। (ई टी हिंदी)

कृषि उत्पादन के लिए बेहतर तैयारी

नई दिल्ली : साल 2010-11 में कृषि उत्पादन में भारी बढ़ोतरी सुनिश्चित करने के लिए सरकार कोई भी कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहती है। शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि साल 2010 में सूखे जैसे हालात नहीं पैदा होंगे। हालांकि सरकार ने सभी तरह के मानसून हालात में खरीफ फसलों का अधिकतम उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत केंद्र ने राज्य सरकारों से बारिश से जुड़ी मुश्किलों से मुकाबला करने के लिए आपातकालीन योजना तैयार करने को कहा है। यहां दो दिनों तक चले खरीफ सम्मेलन में इससे जुड़ी अहम चिंताओं पर विचार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर राज्यों में जल संरक्षण के हालात काफी खराब हैं और ऐसे में इन राज्यों को ज्यादा सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इन राज्यों से सिंचाई और बाकी उद्देश्यों के लिए पानी के इस्तेमाल में काफी सावधानी बरतने को कहा गया है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा कृषि आंकड़ों के मामले पर खास तवज्जो की उम्मीद है। इसका मकसद प्रमुख फसलों के उत्पादन अनुमानों में होने वाली गड़बड़ी को रोकना और जिला और राज्य स्तर पर उत्पादन आंकड़ों को दुरुस्त करना है। सम्मेलन में कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया कि पिछले खरीफ सीजन में आए जबरदस्त सूखे की वजह से अनाजों के उत्पादन और बढ़ोतरी के लक्ष्य को पाने में खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, हालांकि खरीफ फसलों के नुकसान को कम कर और रबी फसलों की जल्दी बुआई के लिए मदद मुहैया कराकर इस संकट से निपटने की यथासंभव कोशिश की गई। साल 2009-10 में फसलों के उत्पादन संबंधी अनुमानों (खासकर शुगर) के बारे में सही वक्त पर जानकारी मुहैया नहीं कराए जाने के लिए उन्होंने राज्य सरकारों को दोषी ठहराते हुए कहा कि इस वजह से ऊंचे उत्पादन के गलत आंकड़े आए, जिसके परिणामस्वरूप चीनी की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला। पवार के मुताबिक, आगामी कृषि वर्ष में 4 फीसदी कृषि विकास दर हासिल करने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं और इसके जरिए साल 2009-10 में कृषि उत्पादन में हुई गिरावट की क्षतिपूर्ति करने का प्रयास किया जाएगा। संकेत मिल रहे हैं कि अल नीनो का प्रभाव विकसित हो रहा है और इसके बाद के साल में सामान्यतया सामान्य बारिश होती है। फार्म सचिव पी के बसु ने इस सम्मेलन में किसानों को उचित वक्त पर खाद उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगले खरीफ सीजन के दौरान उत्पादन बढ़ाने में इसकी भूमिका काफी अहम होगी। बसु ने राज्य सरकारों से न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी पॉलिसी को लागू करने के लिए सभी एहतियाती उपाय करने का अनुरोध किया। न्यूट्रिएंट आधारित सब्सिडी पॉलिसी 1 अप्रैल 2010 से लागू होने वाली है। सम्मेलन में मौजूद विशेषज्ञों ने नकली कीटनाशकों के प्रयोग और मिट्टी जांच प्रयोगशालाओं की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने पर खासी चिंता जताई। (ई टी हिंदी)

मक्के के भाव समर्थन मूल्य से नीचे

नई दिल्ली March 19, 2010
मक्के की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात एवं अन्य कई राज्यों की मंडियों में मक्के के भाव अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे चल रहे हैं।
महाराष्ट्र में तो मक्के की औसत की कीमत एमएसपी के 50 रुपये प्रति क्विंटल कम चल रही है। कर्नाटक में भी कमोबेश यही हाल है और यहां मक्के की कीमत एमएसपी या फिर उससे 20-30 रुपये प्रति क्विंटल कम बतायी जा रही है। मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य फिलहाल 840 रुपये प्रति क्विंटल है।
कृषि उपज विपणन परिषद (एपीएमसी) के मुताबिक महाराष्ट्र की चालीसगांव मंडी में मक्के की कीमत 790 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर है। वहीं कर्नाटक की हनगल एवं होनाली मंडी में मक्के के भाव क्रमश: 770 व 820 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं।
निप्पानी में यह कीमत 840 रुपये प्रति क्विंटल है तो चल्लाकेरे में 800 रुपये प्रति क्विंटल। जानवरों के खिलाए जाने के लिए मक्के से बने दाना के विक्रेताओं के मुताबिक दाने की कीमत लगातार बढ़ रही है। इसमें कोई गिरावट नहीं है, लेकिन मंडियों में मक्के के भाव नहीं बढ़ रहे हैं।
कारोबारी इस बात को स्वीकारते हैं कि मंडी में कम कीमत का सीधा नुकसान किसानों को होता है। एमएसपी से कम कीमत मिलने पर किसान का रुख अन्य फसल की ओर हो जाएगा और मक्के के उत्पादन में कमी आएगी जिससे जानवरों के खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ेंगी। कारोबारी कहते हैं कि ऐसा भी नहीं है कि मक्के के उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मक्के का उत्पादन खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में होता है और निम्न आय वर्ग के लोग मक्के का इस्तेमाल अपने खाने में भी करते हैं। ऐसे में इसकी कीमत में अच्छी खासी बढ़त दर्ज होनी चाहिए, लेकिन मक्के के साथ इसका उल्टा हो रहा है।
जिन राज्यों में मक्के की बिक्री एमएसपी से ऊपर की कीमत पर हो रही है वहां भी किसानों को कोई खास दाम नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब जैसे राज्यों में मक्के के भाव 900-950 रुपये प्रति क्विंटल तक बताए जा रहे हैं। (बीएस हिंदी)

बुरे मौसम और महंगाई का असर दूध उत्पादन पर

अहमदाबाद March 19, 2010
देश के लोकप्रिय ब्रांड अमूल के तहत दूध और दूध उत्पाद उतारने वाले गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ) का अनुमान है कि 2009-10 में दूध हासिल कर पाने की औसत वृद्धि दर पिछले सालों के मुकाबले कम रहेगी।
महासंघ के अधिकारियों के मुताबिक इस साल अनियमित बारिश और पशु चारे का महंगा होना इसकी प्रमुख वजहें हैं। जीसीएमएफ के एक सदस्य संघ का तो मानना है कि 2009-10 में दूध की मात्रा पिछले साल से भी कम रह सकती है।
2007-08 और 2008-09 में प्रति दिन दूध खरीद में अच्छी बढ़त को देखते हुए महासंघ ने इस वित्त वर्ष के लिए औसत दूध खरीद में 5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ प्रति दिन 90 लाख किलो दूध खरीद का अनुमान लगाया था। 2008-09 में दूध की औसत खरीद में पिछले साल के मुकाबले 14.87 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई।
2008-09 में प्रति दिन 87.19 लाख किलो दुध की खरीद की गई। इसी तरह 2007-08 में दूध खरीद में 12.9 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई और प्रति दिन की औसत खरीद 75.90 लाख किलो रही। इससे पहले 2006-07 में औसत दूध प्राप्ति में महज 4.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली थी। इस साल प्रति तदिन दूध खरीद 67.25 लाख किलो रही थी।
जीसीएमएमएफ के एक उच्चाधिकारी ने बताया, 'इस वित्त वर्ष में कई जिलों में दूध खरीद घटी है जिसका असर औसत वृद्धि दर पर हुआ है। हालांकि दूध प्राप्ति पिछले साल के 87.19 लाख किलो प्रति दिन के स्तर से नीचे नहीं जाएगी क्योंकि सौराष्ट्र के इलाके में इस साल दूध खरीद बढ़ी है।'
कम बारिश की वजह से पशुओं को भरपूर मात्रा में हरा चारा नहीं दिया जा सका जिससे इस साल दूध उत्पादन कम रहा है। वहीं, चारे के भाव भी 30 फीसदी चढ़ चुके हैं। इसका असर भी दूध उत्पादन पर हो रहा है। (बीएस हिंदी)

एफसीआई गेहूं को भाया एनएसईएल का बाजार

मुंबई March 19, 2010
खुला बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत एनएसईएल के जरिए पहली बार गेहूं बेचने का अनुभव भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को काफी रास आया है।
एफसीआई गेहूं की दूसरी खेप अगले हफ्ते की शुरुआत में ही उतारने का मन बना रहा है। फाइनैंशियल टेक्नोलॉजीज द्वारा प्रवर्तित हाजिर जिंस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म नैशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) की योजना अगले हफ्ते की शुरुआत में ज्यादा मात्रा में एफसीआई गेहूं की नीलामी करने की है। पहली नीलामी 16 मार्च को दिल्ली के 3 केंद्रों (मायापुरी, नरेला और घेवरा) में हुई।
इसे काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली और एनएसईएल ने प्रीमियम के बावजूद 1200 टन गेहूं की बिक्री की। एनएसईएल के प्रबंध निदेशक अंजनी सिन्हा का कहना है कि उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन संतोषजनक रहा क्योंकि हाजिर कीमतों की तुलना में ऑनलाइन नीलामी में ज्यादा कीमत रही।
गेहूं की फेयर एवरेज क्वॉलिटी (एफएक्यू) का कारोबार नीलामी के 1244 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले हाजिर बाजार में 1225 रुपये प्रति क्विंटल पर होता है। 31 मार्च तक एनएसईएल अधिकतम 3 नीलामी कराएगा।
अगले सीजन तक के लिए एफसीआई ने दो निजी हाजिर कमोडिटी एक्सचेंज को एजेंसी के गेहूं की बिक्री की मंजूरी दे दी थी। हरेक निजी हाजिर जिंस एक्सचेंज को 31 मार्च तक 15,000 टन तक की बिक्री करनी थी।
एनएसईएल ने अपने पहले चरण की नीलामी की है जबकि नैशनल कमोडिटी एवं डेरिवेटिव एक्सचेंज प्रवर्तित एनसीडीईएक्स स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड ने अनुबंध नोट की कुछ शर्तो में बदलाव की कोशिश की है। एक एक्सचेंज के अधिकारी का कहना है कि सरकार के दिशानिर्देश में बदलाव से काफी वक्त जाया होता है। लेकिन अगर बिक्री की अवधि 31 मार्च से ज्यादा नहीं बढ़ाई जाती है तो वे हाथ से मौका नहीं जाने देना चाहते।
एनसीडीईएक्स स्पॉट एक्सचेंज 'असीमित जिम्मेदारियों के शर्त' से इत्तेफाक नहीं रखता है, जिसकी वजह से एक्सचेंज के अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य की कारोबारी दिलचस्पी पर असर पड़ सकता है। लेकिन एक्सचेंज सभी दूसरी जरूरी चीजों के साथ तैयार होगा।
खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार ने पहले से ही सरकारी और निजी एजेंसियों के पास पर्याप्त भंडारण सुविधा के अभाव की ओर इशारा किया था। ऐसे में किसान जल्दीबाजी में बिक्री करते हैं जिससे उन्हें ऐसे संवेदनशील जिंस के लिए कम वसूली मिलती है। (बीएस हिंदी)