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25 जुलाई 2025

कपास की बुआई 3.42 फीसदी कम, धान एवं दलहन के मोटे अनाजों की बुआई ज्यादा

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई की 4.10 फीसदी बढ़कर 708.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 680.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। इस दौरान जहां कपास की बुआई में 3.42 फीसदी की कमी आई है, वहीं धान, दलहन एवं मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 18 जुलाई तक देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 176.68 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 157.21 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 81.98 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 80.13 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान अरहर की बुआई 30.09 लाख हेक्टेयर में, मूंग की बुआई 27.31 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 14.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ में इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 31.70 लाख हेक्टेयर में, 24.52 लाख हेक्टेयर और 16.51 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई थोड़ी घटकर 156.76 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय 162.80 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 38.01 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 111.67 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 54,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 37.16 लाख हेक्टेयर में, 118.96 लाख हेक्टेयर में तथा 55,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

शीशम सीड की बुआई चालू खरीफ में 6.04 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.58 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। कैस्टर सीड की बुआई 43 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 28 हजार हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 133.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 117.66 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 71.21 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 48.94 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 61.73 और 42.09 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 9.99 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.81 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़ी है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 55.16 लाख हेक्टेयर में और कपास की 98.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 54.88 लाख हेक्टेयर और 102.05 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गुजरात में खरीफ फसलों की बुआई 7.74 फीसदी पिछड़ी, मूंगफली की बढ़ी तो कपास की घटी

नई दिल्ली। गुजरात में चालू सीजन में खरीफ फसलों की बुआई 7.74 फीसदी पीछे चल रही है। राज्य में जहां खरीफ की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई में बढ़ोतरी हुई है, वहीं कपास की बुआई पीछे चल रही है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 21 जुलाई तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 5,838,630 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान राज्य में 6,328,269 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। सामान्यतः: खरीफ सीजन में राज्य में 8,557,510 हेक्टेयर में फसलों की बुआई होती है।

चालू खरीफ सीजन में तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई 1,942,143 हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 1,828,144 हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहन की कुल बुआई राज्य में बढ़कर 2,248,416 हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 2,162,488 हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। अन्य तिलहनी फसलों में सोयाबीन की 224,964 हेक्टेयर में तथा शीशम की 25,980 हेक्टेयर और कैस्टर सीड की 55,179 हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 1,962,033 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 2,234,194 हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में ग्वार सीड की बुआई 41,479 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल के 31,340 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाजों की बुआई घटकर 687,767 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 834,550 हेक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में बाजरा की 123,522 हेक्टेयर में तथा मक्का की 219,016 हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 341,785 हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 2,88 हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में 194,211 हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 253,697 हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। खरीफ दलहन में अरहर की बुआई 16,901 हेक्टेयर में और मूंग की 32,990 हेक्टेयर में तथा उड़द की 39,031 हेक्टेयर तथा मोठ की 4,338 हेक्टेयर में हो चुकी है।

सीसीआई 70 फीसदी कॉटन की कर चुकी है बिक्री

नई दिल्ली। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया, सीसीआई चालू फसल सीजन 2024-25 की खरीद हुई 69,96,100 गांठ, एक गांठ -170 किलो कॉटन की बिक्री कर चुकी है जोकि कुल खरीद का करीब 70 फीसदी है।


सूत्रों के अनुसार सीसीआई ने चालू सप्ताह में घरेलू बाजार में फसल सीजन 2024-25 की खरीद हुई 327,700 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इसके अलावा निगम ने फसल सीजन 2023-24 की खरीद हुई करीब 200 गांठ कॉटन बेची। पिछले सप्ताह की तुलना में सीसीआई की बिक्री में कमी आई है।

व्यापारियों के अनुसार देशभर की स्पिनिंग मिलों ने पिछले दिनों सीसीआई से भारी मात्रा में कॉटन की खरीद की थी, इसलिए मिलों के पास स्टॉक अच्छा है। इस दौरान व्यापारियों ने भी बड़ी मात्रा में सीसीआई से कॉटन खरीदी है। उधर यार्न में निर्यात मांग सामान्य की तुलना में कमजोर है, जिस कारण मिलों को घरेलू बाजार में यार्न की बिकवाली ज्यादा करनी पड़ रही है। अत: हाल ही में जिस अनुपात में कॉटन के दाम तेज हुए, उसके अनुरूप यार्न की कीमत नहीं बढ़ पाई। इसलिए कॉटन की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने का अनुमान है।

स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण शनिवार को गुजरात में कॉटन की कीमत स्थिर हो गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर से तेज हुए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव 57,500 से 57,800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव 5,970 से 5,980 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,670 से 5,800 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,800 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए। लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 57,300 से 57,400 रुपये कैंडी बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 7,100 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

19 जुलाई 2025

राजस्थान में खरीफ की बुआई 80 फीसदी पूरी, दलहन एवं तिलहन के साथ कपास की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन राजस्थान में फसलों की बुवाई 80 फीसदी क्षेत्रफल में पूरी हो चुकी है। दलहन एवं तिलहन के साथ ही मोटे अनाज तथा कपास की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 17 जुलाई तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 132.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 114.94 लाख हेक्टेयर में ही बुआई थी। चालू खरीफ सीजन में राज्य में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर 57.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 46.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की 39.29 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 9.29 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 2.45 लाख हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 6.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में बाजरा और मक्का की बुआई क्रमश: 30.57 लाख हेक्टेयर में तथा 8.71 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 30.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 24.91 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 19.75 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 7.63 लाख हेक्टेयर तथा उड़द की 2.78 लाख हेक्टेयर तथा छौला की 57 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 20.15 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 19.35 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 9.02 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 9.49 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 1.49 लाख हेक्टेयर में और कैस्टर सीड की 14 हजार हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 6.25 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 15.77 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.94 लाख हेक्टेयर में, 16.20 लाख हेक्टेयर और गन्ने की 4 हजार हेक्टेयर में हुई थी।

चालू वित्त वर्ष के पहली तिमाही में डीओसी का निर्यात एक फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2025-26 की पहली अप्रैल से जून के दौरान डीओसी के निर्यात में एक फीसदी की मामूली कमी आकर कुल निर्यात 1,094,593 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 1,102,632 टन का हुआ था।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार जून में डीओसी के निर्यात में 7 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 313,404 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल जून में इसका निर्यात 335,196 टन का हुआ था।

चालू मानसून सीजन में 9 जुलाई 2025 तक, देशभर के राज्यों में बारिश सामान्य की तुलना में 15 फीसदी अधिक हुई है, जोकि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल है। गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में बुआई जल्द शुरू होने एवं बारिश अनुकूल होने से मूंगफली और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कपास की बुआई भी अच्छी चल रही है। हालांकि, अच्छे मानसून के बावजूद, 11 जुलाई 2025 तक खरीफ तिलहनों की बुआई 137.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 139.82 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है।

फसलवार आंकड़ों से पता चलता है कि मूंगफली की बुआई में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। इसकी बुआई पिछले साल की समान अवधि 28.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में बढ़कर 32.99 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। हालांकि सोयाबीन का रकबा 107.78 लाख हेक्टेयर की तुलना में घटकर 99.03 लाख हेक्टेयर रह गया। इसका प्रमुख कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव और अन्य लाभकारी फसलों से प्रतिस्पर्धा के कारण हुआ है। कपास की बुवाई 92.83 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष के 95.22 लाख हेक्टेयर से थोड़ा कम है। कुल मिलाकर, अच्छे मानसून ने खरीफ उत्पादन के लिए एक मजबूत नींव रखी है। हालांकि उत्पादन का सही अनुमान आगे मानसून कैसा रहता है, ही बुआई के कुल आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

सरसों के तेल, विशेष रूप से पारंपरिक 'कच्ची घानी' किस्म की अच्छी घरेलू मांग के कारण, देशभर के उत्पाद राज्यों में इसकी पेराई में तेजी आई हैं, जिससे सरसों डीओसी का उत्पादन बढ़ा है। अत: सरसों डीओसी के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है। तेल वर्ष 2025-26 (अप्रैल से जून) की पहली तिमाही के दौरान, चीन ने लगभग 180,000 टन भारतीय सरसों डीओसी का आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान केवल 7,000 टन की तुलना में बड़ी वृद्धि है। इस तेज वृद्धि का श्रेय काफी हद तक वैश्विक बाजारों में भारत के प्रतिस्पर्धी मूल्य को भी जाता है। मई 2025 में, भारतीय सरसों डीओसी की कीमत 201 डॉलर प्रति टन थी, जो हैम्बर्ग एक्स-मिल कीमत 313 डॉलर प्रति टन से काफी कम थी। 14 जुलाई 2025 तक भी, भारतीय सरसों डीओसी की कीमत में बढ़त बनी हुई है, जो हैम्बर्ग के 246 डॉलर प्रति टन के मुकाबले 198 डॉलर प्रति टन है। इस मूल्य अंतर के साथ-साथ खपत वाले देशों के नजदीक होने के कारण लॉजिस्टिक लाभ ने वैश्विक डीओसी व्यापार में, विशेष रूप से चीन के लिए, जो अपने प्रोटीन फीड आयात में तेजी ला रहा है, एक विश्वसनीय और लागत प्रभावी आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत किया है।

भारतीय बंदरगाह पर जून में सोया डीओसी का भाव तेज होकर 389 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि मई में इसका दाम 382 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य जून में भारतीय बंदरगाह पर घटकर 198 डॉलर प्रति टन का रह गया, जबकि मई में इसका भाव 201 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम मई के 77 डॉलर प्रति टन से तेज होकर जून में 79 डॉलर प्रति टन का हो गया।

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री भाव 200 रुपये बढ़ाए, 8.32 लाख गांठ बेची

नई दिल्ली। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने बुधवार देशभर में कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी 356 किलो की बढ़ोतरी की। अत: घरेलू बाजार में भी कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


सीसीआई ने बुधवार को ई-नीलामी के के माध्यम से देशभर के राज्यों में लगभग 8,32,200 गांठ, एक गांठ 170 किलो कॉटन की बिक्री। निगम चालू सीजन में खरीदी हुई करीब 65 फीसदी से ज्यादा कॉटन की बिक्री घरेलू बाजार में कर चुकी है। प्राइवेट बाजार में कॉटन का बकाया स्टॉक सीमित मात्रा में ही बचा हुआ है इसलिए नई फसल तक मिलो को सीसीआई से ही ज्यादा कॉटन की खरीद करनी होगी। ऐसे में घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री दाम पर निर्भर करेगी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण बुधवार को शाम के सत्र में गुजरात के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में कॉटन की कीमतों में तेजी जारी रही।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव बुधवार को 350 रुपये तेज होकर दाम 57,600 से 58,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए। पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5,960 से 5,970 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,660 से 5,770 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम 5,800 से 6,000 रुपये प्रति मन बोले गए।
लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम बढ़कर 57,200 से 57,300 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 8,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एमसीएक्स पर जुलाई 25 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 460 रुपये तेज होकर 55,900 रुपये प्रति कैंडी हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई। व्यापारियों के अनुसार प्राइवेट बाजार में जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। इसलिए मिलों को कॉटन की ज्यादा खरीद सीसीआई से करनी पड़ रही है। ऐसे में हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री भाव पर ही निर्भर करेगी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार 11 जुलाई तक चालू खरीफ सीजन देशभर में कपास की बुआई 2.51 फीसदी कम होकर 92.83 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 95.22 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

16 जुलाई 2025

चालू फसल सीजन के 9 महीनों में सोया डीओसी का निर्यात 12 फीसदी से ज्यादा घटा - सोपा

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2024-25 के पहले 9 महीनों अक्टूबर 24 से जून 25 के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 12.21 फीसदी घटकर केवल 15.60 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि में इसका निर्यात 17.77 लाख टन का हुआ था।


सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन के अक्टूबर से जून के दौरान 68.65 लाख टन सोया डीओसी का उत्पादन हुआ है, जबकि नई सीजन के आरंभ में 1.33 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। इस दौरान 15.60 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है जबकि 6.15 लाख टन की खपत फूड में एवं 46.50 लाख टन की फीड में हुई है। अत: पहली जुलाई को मिलों के पास 1.75 लाख टन सोया डीओसी का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.45 लाख टन से कम है।

सोपा के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के पहले 9 महीनों में देशभर की उत्पादक मंडियों में 89 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई है, जिसमें से जून अंत तक 87 लाख टन की पेराई हुई है। इस दौरान 4.25 लाख टन सोयाबीन की खपत डारेक्ट हुई है जबकि 0.10 लाख टन का निर्यात हुआ है। अत: प्लांटों एवं व्यापारियों तथा किसानों के पास पहली जुलाई को 30.43 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 36.32 लाख टन की तुलना में कम है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में सोयाबीन का उत्पादन 125.82 लाख टन का हुआ है, जबकि 8.94 लाख टन का बकाया स्टॉक नई फसल की आवक के समय बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 134.76 लाख टन की बैठी है, जबकि चालू सीजन में करीब 25 हजार टन सोयाबीन के आयात का अनुमान है। पिछले फसल सीजन में 118.74 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि नई फसल की आवक के समय 24.07 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: पिछले साल कुल उपलब्धता 142.81 लाख टन की बैठी थी, जबकि 6.25 लाख टन का आयात हुआ था।