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16 जुलाई 2025

चालू तेल वर्ष के पहले 8 महीनों में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी कम - एसईए

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों नवंबर-24 से जून-25 के दौरान देश में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 8 फीसदी कम होकर 9,434,593 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 10,229,106 टन का हुआ था। हालांकि खाद्य तेलों के आयात के आंकड़ों में नेपाल से आयात हुई मात्रा शामिल नहीं है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2024-25 के जून 2025 में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात थोड़ा कम होकर 1,549,825 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल जून में इनका आयात 1,550,659 टन का हुआ था। इस दौरान खाद्वय तेलों का आयात 1,531,328 टन का एवं अखाद्य तेलों का आयात 18,497 टन का हुआ है। हालांकि मई के मुकाबले जून में खाद्वय एवं अखाद्य तेलों के आयात में 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

चालू तेल वर्ष 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान खाद्वय एवं अखाद्य तेलों का आयात 6,575,525 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष 2024 की समान अवधि के दौरान यह 7,756,830 टन था, यानी कि इसमें 15 फीसदी की गिरावट आई है।

चालू खरीफ सीजन में 9 जुलाई 2025 तक, अखिल भारतीय स्तर पर मानसूनी बारिश सामान्य से 15 फीसदी अधिक हुई है। प्रमुख तिलहन उत्पादक क्षेत्रों में मानसून के जल्दी आने से खरीफ फसलों की बुवाई विशेष रूप से मूंगफली और सोयाबीन में बढ़ोतरी हुई है। 4 जुलाई 2025 तक कुल खरीफ तिलहन रकबा 108.21 लाख हेक्टेयर था, जोकि पिछले वर्ष की समान अवधि के 94.90 लाख हेक्टेयर की तुलना में 12.3 फीसदी अधिक है।

चालू तेल वर्ष 2024-25 की पहले आठ महीनों नवंबर 24 से जून 25 के दौरान 1,381,818 टन की तुलना में 982,711 टन रिफाइंड तेल (आरबीडी पामोलीन) का आयात किया गया और नवंबर 23 से जून 24 के दौरान 8,713,347 टन की तुलना में 8,225,880 टन क्रूड तेल का आयात किया गया। आरबीडी पामोलीन और सीपीओ के कम आयात के कारण रिफाइंड तेल का अनुपात 14 फीसदी से घटकर 11 फीसदी रह गया, जबकि सोया तेल के आयात में वृद्धि के कारण क्रूड पाम तेल का अनुपात 86 फीसदी से बढ़कर 89 फीसदी हो गया।

एसईए के अनुसार नवंबर 2024 से जून 2025 के दौरान, पाम तेल का आयात नवंबर 2023 से जून 2024 के 5,763,367 टन से घटकर 4,285,573 टन का ही रह गया, जबकि सॉफ्ट ऑयल का आयात पिछले वर्ष की इसी अवधि के 4,331,799 टन से बढ़कर 4,923,018 टन हो गया। अत: पाम तेल की हिस्सेदारी 57 फीसदी से घटकर 47 फीसदी रह गई, जबकि सॉफ्ट तेलों की हिस्सेदारी 43 फीसदी से बढ़कर 53 फीसदी हो गई।

मई के मुकाबले जून में आयातित खाद्वय तेलों के दाम भारतीय बदंरगाह पर तेज हुए हुए हैं। जून में आरबीडी पामोलिन का भाव भारतीय बंदरगाह पर बढ़कर 1,006 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि मई में इसका भाव 1,004 डॉलर प्रति था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल का भाव भारतीय बंदरगाह पर जून में बढ़कर 1,055 डॉलर प्रति टन हो गया, जबकि मई में इसका भाव 1,039 डॉलर प्रति टन था। क्रूड सोया तेल का भाव मई में भारतीय बंदरगाह पर 1,106 डॉलर प्रति टन था, जोकि जून में बढ़कर 1,122 डॉलर प्रति टन हो गया। 

चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई की बुआई 6.23 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई की 6.23 फीसदी बढ़कर 597.86 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 560.59 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 123.680 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 111.85 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 67.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 53.39 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान अरहर की बुआई 25.42 लाख हेक्टेयर में, मूंग की बुआई 23.16 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 11.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 27.18 लाख हेक्टेयर में, 12.19 लाख हेक्टेयर और 11.54 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई थोड़ी घटकर 137.27 लाख हेक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय 139.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 32.99 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 99.03 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 49,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 28.04 लाख हेक्टेयर में, 107.78 लाख हेक्टेयर में तथा 48,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

शीशम सीड की बुआई चालू खरीफ में 4.48 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.12 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। कैस्टर सीड की बुआई 23 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 15 हजार हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 116.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 99.78 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 61.88 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 44.01 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 59.73 और 29.59 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 8 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 7.39 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 55.16 लाख हेक्टेयर में और कपास की 92.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 54.88 लाख हेक्टेयर और 95.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई 74 फीसदी पूरी, दलहन एवं तिलहन तथा कपास की बढ़ी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन राजस्थान में फसलों की बुवाई 74 फीसदी क्षेत्रफल में पूरी हो चुकी है। दलहन एवं तिलहन के साथ ही मोटे अनाज तथा कपास की बुआई में बढ़ोतरी हुई है।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 11 जुलाई तक राज्य में खरीफ फसलों की बुआई 121.95 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में केवल 82.12 लाख हेक्टेयर में ही बुआई थी। चालू खरीफ सीजन में राज्य में 165.39 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई का लक्ष्य तय किया है।

चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर 53.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई केवल 34.30 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की 37.47 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 8.83 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसके अलावा धान की रोपाई 1.97 लाख हेक्टेयर और ज्वार की बुआई 5.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 27.78 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 13.30 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई 17.88 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 6.61 लाख हेक्टेयर तथा उड़द की 47 हजार हेक्टेयर तथा छौला की 2.65 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है ।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई राज्य में बढ़कर 18.40 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 17.41 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 8.05 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 9.05 लाख हेक्टेयर में तथा शीशम की 1.22 लाख हेक्टेयर में और कैस्टर सीड की 9 हजार हेक्टेयर में हुई है।

चालू खरीफ में कपास की बुआई राज्य में 6.13 लाख हेक्टेयर में तथा ग्वार सीड की बुआई 13.35 लाख हेक्टेयर में और गन्ने की बुआई 3 हजार हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.79 लाख हेक्टेयर में, 10.15 लाख हेक्टेयर और गन्ने की 4 हजार हेक्टेयर में हुई थी।


12 जुलाई 2025

उद्योग ने कॉटन के उत्पादन बढ़ाया, 311.40 लाख गांठ का होने का अनुमान

नई दिल्ली। उद्योग ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में 10.25 लाख गांठ की बढ़ोतरी की है।  पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में कॉटन का उत्पादन बढ़कर 311.40 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है जबकि इससे पहले 301.15 लाख गांठ का अनुमान जारी किया था।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई के अनुसार महाराष्ट्र में कॉटन के उत्पादन अनुमान में 5 लाख गांठ की बढ़ोतरी का अनुमान है, जबकि गुजरात और तेलंगाना में क्रमश: 1.50-1.50 लाख गांठ उत्पादन बढ़ा है। कर्नाटक में 1 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 0.50 लाख गांठ और हरियाणा तथा राजस्थान अपर और लोअर क्षेत्रों में क्रमश: 0.25 लाख गांठ, 0.25 लाख गांठ तथा 0.25 लाख गांठ का उत्पादन ज्यादा होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुमान के अनुसार पंजाब में कॉटन का उत्पादन फसल सीजन 2024-25 में 1.50 लाख गांठ, हरियाणा में 8.05 लाख गांठ, अपर राजस्थान में 10.35 लाख गांठ एवं लोअर राजस्थान के 9.65 लाख गांठ को मिलाकर कुल 29.55 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार मध्य भारत के राज्यों गुजरात में चालू फसल सीजन में 77.50 लाख गांठ, महाराष्ट्र में 90 लाख गांठ तथा मध्य प्रदेश के 19 लाख गांठ को मिलाकर कुल 18.50 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तेलंगाना में चालू फसल सीजन में 49.50 लाख गांठ, आंध्र प्रदेश में 12 लाख गांठ एवं कर्नाटक में 24 लाख गांठ तथा तमिलनाडु के 4 लाख गांठ को मिलाकर कुल 89.50 लाख गांठ के कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

ओडिशा में चालू खरीफ में 3.85 लाख गांठ एवं अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ कॉटन के उत्पादन का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार जून 2025 अंत तक कॉटन का आयात बढ़कर 30 लाख गांठ का हो चुका है, वहीं इस दौरान निर्यात 15.25 लाख गांठ का ही हुआ है। कूल आयात चालू सीजन में 39 लाख गांठ होने का अनुमान है। फसल सीजन 2023-24 के दौरान 15.20 लाख गांठ कॉटन का आयात हुआ था। मालूम हो कि फसल सीजन 2024-25 के दौरान देश से कॉटन का निर्यात 17 लाख गांठ होने का अनुमान है।

सीएआई के अनुसार पहली अक्टूबर 2024 को कॉटन का बकाया स्टॉक 30.19 लाख गांठ का बचा हुआ था, जबकि 311.40 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान है। चालू सीजन में करीब 39 लाख गांठ कुल कॉटन का आयात होने की उम्मीद है। ऐसे में कुल उपलब्धता 380.59 लाख गांठ की बैठेगी।

चालू फसल सीजन में कॉटन की कुल घरेलू खपत 308 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि इस दौरान 17 लाख गांठ के निर्यात की उम्मीद है।

सीएआई के अनुसार उत्पादक मंडियों में जून अंत तक 296.57 लाख गांठ कॉटन की आवक हो चुकी है, जिसमें से 233.50 लाख गांठ की खपत हो चुकी है। अत: पहली जुलाई को मिलों के पास 32 लाख गांठ एवं सीसीआई, महाराष्ट्र फेडरेशन, एमएनसी, जिनर्स एवं निर्यातकों के साथ ही व्यापारियों के पास 76.01 लाख गांठ कॉटन का बकाया स्टॉक है।

केंद्र सरकार ओएमएसएस के तहत 2,550 रुपये में परिवहन लागत जोड़कर बेचेगी गेहूं

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना, ओएमएसएस के तहत फसल सीजन 2025-26 के लिए गेहूं का बिक्री मूल्य 2,550 रुपये प्रति क्विंटल रिजर्व किया है तथा इसमें परिवहन लागत अलग से जोड़कर गेहूं की बिक्री की जायेगी।


केंद्रीय खाद्वय एवं उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी अधिसूचना के अनुसार ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री का रिजर्व भाव 2,550 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है इसमें  परिवहन लागत अगल से जोड़ी जायेगी। ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री की यह दर 30 जून 2026 तक प्रभावी होगी।

केंद्र सरकार नैफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी केंद्रीय सहकारी संस्थाओं को भी खुदरा बिक्री हेतु भारत ब्रांड के तहत स्टोर, मोबाइल वैन या ई कॉमर्स के माध्यम से भी 2,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपलब्ध करायेगी। सामुदायिक रसोई घरों के लिए भी इसी दर पर गेहूं दिया जायेगा।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, भारतीय खाद्वय निगम एफसीआई अपनी कुल स्टॉक पोजिशन को देखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली, पीडीएस तथा बफर स्टॉक के तय मानकों के साथ ही किसी आकस्मिक स्थिति के लिए 20 लाख टन गेहूं स्टॉक में रखने के बाद अन्य गेहूं की नीलामी करेगी।

दिल्ली के लॉरेंस रोड पर गुरुवार को गेहूं का भाव 2,740 से 2,745 प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे। जानकारों के अनुसार दिल्ली की रोलर फ्लोर मिल रिजर्व भाव 2,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद करती है, तो इसमें परिवहन लागत एवं अन्य खर्च जोड़ने के बाद मिल पहुंच गेहूं की कीमतों में ज्यादा अंतर नहीं आयेगा। इसलिए हाजिर बाजार में गेहूं की कीमतों में बड़ी तेजी, मंदी के आसार नहीं है।

केंद्रीय पूल में गेहूं का बंपर भंडार होने के बावजूद कीमतों में तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक स्टॉक लिमिट लगा रखी है।

सूत्रों के अनुसार केंद्रीय पूल में पहली मई 2025 को 356.72 लाख टन गेहूं का स्टॉक मौजूद है।

रबी विपणन सीजन 2025-26 में देशभर में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर खरीद 299.24 लाख टन की हुई थी, हालांकि गेहूं की खरीद का लक्ष्य 322.7 लाख टन का था। इसके पिछले रबी सीजन में गेहूं की कुल खरीद 266 लाख टन की ही हुई थी।

10 जुलाई 2025

चालू खरीफ सीजन में फसलों की बुआई बढ़कर 437 लाख हेक्टेयर के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में 43.66 फीसदी क्षेत्रफल में फसलों की बुआई का कार्य पूरा हो चुका है। इस दौरान धान के साथ ही दलहन एवं तिलहन तथा मोटे अनाज एवं कपास की बुआई आगे चल रही है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 4 जुलाई तक देशभर के राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई 11.08 फीसदी बढ़कर 437.47 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में केवल 393.81 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी।

देशभर के राज्यों में धान की रोपाई बढ़कर 69.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रोपाई केवल 64.52 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

दलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 42.57 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 31.48 लाख हेक्टेयर में तुलना में बढ़ी है। इस दौरान अरहर की बुआई 16.47 लाख हेक्टेयर में, मूंग की बुआई 16.58 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 5.27 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 18.52 लाख हेक्टेयर में, 6.73 लाख हेक्टेयर और 5.02 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

चालू खरीफ सीजन में तिलहनी फसलों की बुआई बढ़कर 108.25 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय केवल 94.94 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 26.74 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 79.04 लाख हेक्टेयर में तथा सनफ्लावर की 46,000 हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 17.73 लाख हेक्टेयर में, 75.46 लाख हेक्टेयर में तथा 45,000 हेक्टेयर में ही हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई बढ़कर चालू खरीफ सीजन में 77.18 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 63.79 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई थी। मोटे अनाजों में मक्का की 39.35 लाख हेक्टेयर में तथा बाजरा की 30.82 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 40.21 और 16.78 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। ज्वार की बुआई 5.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 4.64 लाख हेक्टेयर की तुलना में ज्यादा है।

चालू खरीफ में गन्ने की बुआई 55.16 लाख हेक्टेयर में और कपास की 79.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 54.88 लाख हेक्टेयर और 78.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

सीसीआई ने कॉटन के बिक्री भाव 200 रुपये बढ़ाए, हाजिर बाजार में भी दाम तेज

नई दिल्ली। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) ने मंगलवार को ई-नीलामी में कॉटन की बिक्री कीमतों में 200 रुपये प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इससे घरेलू बाजार में भी कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।


जानकारों के अनुसार सीसीआई कुल खरीदी हुई कॉटन का लगभग 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा घरेलू बाजार में बेच चुकी है। सीसीआई द्वारा बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब घरेलू कॉटन की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में प्रीमियम पर कारोबार कर रही हैं। मालूम हो कि पिछले सप्ताह भी सीसीआई ने कॉटन की बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की थी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बढ़ने के कारण मंगलवार को गुजरात में कॉटन की कीमत महंगी हो गई, जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम स्थिर से तेज हुए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव मंगलवार को 300 रुपये तेज होकर दाम 55,800 से 56,000 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5,890 से 5,900 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5,630 से 5,700 रुपये प्रति मन बोले गए।ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के 5,750 से 5,950 रुपये प्रति मन बोले गए।लोअर राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के 56,200 से 56,300 रुपये कैंडी बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 10,100 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा कारोबार में कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। एनसीडीईएक्स पर अप्रैल 26 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 0.5 रुपये तेज होकर 1,606 रुपये प्रति 20 किलो हो गए। एमसीएक्स पर जुलाई 25 महीने के वायदा अनुबंध में कपास के दाम 460 रुपये तेज होकर 53,500 रुपये प्रति कैंडी हो गए। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन की कीमतों में तेजी दर्ज की गई।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमतों में तेजी आई, जबकि उत्तर भारत में इसके दाम स्थिर से तेज हुए। व्यापारियों के अनुसार सीसीआई ने सोमवार 1,38,000 गांठ कॉटन के बिक्री की थी। प्राइवेट बाजार में जिनर्स के पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: जिनर्स की बिकवाली भी कमजोर है। इसलिए मिलों को कॉटन की ज्यादा खरीद सीसीआई से करनी पड़ रही है। ऐसे में हाजिर बाजार में कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी काफी हद तक सीसीआई के बिक्री भाव पर ही निर्भर करेगी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 4 जुलाई तक देशभर के राज्यों में कपास की बुआई 1.2 फीसदी बढ़कर 79.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 78.58 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी।