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09 अक्टूबर 2023

MANDI- NARELA paddy rate 9 Oct. Delhi.

 MANDI- NARELA Delhi.


Paddy 1509 

Arrival 50000 bag

Comb..@3200 to 3553/

Hand ..@3500 to 3747/


Paddy 1847

Arrival 7000 bag

Comb..@2800 to 3200/

Hand @3100 to 3451/


Paddy Taj

Arrival 7000 bag

Comb@2300 to 2550/

Hand @2600 to 2761/


Rh 10

Arrival 1000 

Hand @2300to 2580/


Paddy 1121 

Arrival 50 bag 

 Comb.@4502/

दिनांक 09 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार बाजार बंद (MARKET CLOSE)

 दिनांक 09 अक्टूबर 2023  दिन सोमवार  बाजार बंद (MARKET CLOSE) 


दिल्ली (DELHI) 

चना (CHANA) एमपी नया(MP NEW)-6275/6300+75

राजस्थान नया(RAJ.NEW)-6300/25+50

मसूर (MASUR) (2/50 kG)-6575/6600+25

मूंग(MUNG) 

राजस्थान (RAJ.) लाइन (LINE)-8600+75

मोठ(MOTH) (राजस्थान RAJ.) नया (NEW)-6900+50

गेंहू(WHEAT) एमपी&यूपी&राज. (MP&UP& RAJ.)-2650+25

तुवर (TUAR )  

लेमन (LEMON)-11800+0

महाराष्ट्र (MAH)-11900+0

उड़द (URAD)

एफएक्यू (FAQ)-8850+0

एसक्यू (SQ)-9700+0

उत्तर भारत के राज्यों में कपास का उत्पादन 50 लाख गांठ से ज्यादा होने का अनुमान

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में बुआई में हुई बढ़ोतरी से उत्तर भारत के राज्यों में कपास का उत्पादन बढ़कर 50.02 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो होने का अनुमान है जबकि पिछले खरीफ सीजन में उत्पादन 41.21 लाख गांठ का हुआ था।


इंडियन कॉटन एसोसिएशन लिमिटेड के अनुसार फसल सीजन 2023-24 में पंजाब में कपास का उत्पादन बढ़कर 4.89 लाख गांठ का होने का अनुमान है, जोकि पिछले फसल सीजन के 2.52 लाख गांठ से ज्यादा है। इस दौरान हरियाणा में कपास का उत्पादन बढ़कर 17.48 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले साल राज्य में 9.88 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था। राजस्थान की गंगानगर लाइन में कपास का उत्पादन 16.25 लाख गांठ और लोअर राजस्थान में 12.61 लाख गांठ होने का अनुमान है। पिछले फसल सीजन में इनमें कपास का उत्पादन क्रमश: 19 लाख गांठ एवं 10.79 लाख गांठ का हुआ था।

इन राज्यों में सितंबर में नई कपास की आवक 3.60 लाख गांठ की हो चुकी है जबकि पिछले साल सितंबर में आवक 2.12 लाख गांठ की हुई थी।

पंजाब में नई रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव कमजोर होकर 5960 से 6060 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव में घटकर 5900 से 6000 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में नई रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के दाम नरम होकर 5825 से 6070 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के दाम 6075 से 6100 रुपये प्रति मन बोले गए।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 16.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

महाराष्ट्र में सोयाबीन और कपास की बुआई बढ़ी, मूंगफली एवं अरहर की घटी

नई दिल्ली। चालू खरीफ में महाराष्ट्र में जहां सोयाबीन और कपास की बुआई बढ़ी है, वहीं मूंगफली के साथ ही अरहर की बुआई घटी है। दलहन की कुल बुआई भी चालू खरीफ में पिछले साल की तुलना में कम हुई है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 3 अक्टूबर तक राज्य में सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 50.85 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के 49.09 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू सीजन में 52.45 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल के 51 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.43 हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले खरीफ में इसकी बुआई 1.60 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 3 अक्टूबर तक घटकर 16.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक बुआई 18.84 लाख हेक्टेयर में हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर राज्य में 11.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 11.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। इसी तरह से मूंग की बुआई चालू खरीफ में 1.81 लाख हेक्टेयर में और उड़द की 2.56 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 2.69 लाख हेक्टेयर में और 3.58 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मक्का की बुआई चालू खरीफ में 9.13 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 8.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी। धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 15.32 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय 15.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। ज्वार की बुआई चालू सीजन में घटकर 1.11 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 1.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

राज्य में कपास की बुआई बढ़कर 42.34 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुआई 42.29 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

राज्य में चालू खरीफ सीजन में कुल फसलों की बुआई 141.31 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 143.09 लाख हेक्टेयर से कम है।

आयातित खाद्य तेल सस्ते होने से कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा, बिनौले में मिलाजुला रुख

नई दिल्ली। आयातित खाद्वय तेलों के दाम सस्ते होने के साथ ही वनस्पति घी निर्माताओं की मांग कमजोर होने से गुरुवार को कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा आया, जबकि इस दौरान बिनौला के भाव मिलाजुला रुख रहा। कपास खली की कीमतें स्थिर बनी रही।


व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में आपूर्ति बढ़ने से कॉटन वॉश की उपलब्धता बढ़ेगी, जबकि सबसे बड़े आयातक भारत और चीन मांग कमजोर बनी हुई है। इसलिए विश्व बाजार में अभी खाद्वय तेलों की कीमतों में बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

विदेशी बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में गिरावट का रुख रहा, अत: घरेलू बाजार में कॉटन वॉश की कीमतों में मंदा आया। अकोला में कॉटन वॉश के दाम 10 रुपये कमजोर होकर भाव 785 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। इस दौरान धुले में कॉटन वॉश के दाम 20 रुपये घटकर 785 रुपये प्रति 10 किलो रह गए। जालना में कॉटन वॉश की कीमतें कमजोर होकर 775 रुपये प्रति दस किलो के स्तर पर आ गई।

मलेशियाई पाम तेल की कीमतों में 2.8 फीसदी की गिरावट आई, साथ ही शिकागो में भी सोया तेल की कीमतें कमजोर हुई। कपास की दैनिक आवक उत्पादक मंडियों में लगातार बढ़ रही है, जिससे कॉटन वॉश की उपलब्धता आगे और बढ़ेगी। विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार कम है इसलिए इसकी कीमतों में हल्का सुधार तो आ सकता है, लेकिन ज्यादा तेजी की संभावना नहीं है।

तेल मिलों की ग्राहकी सीमित बनी रहने से बिनौले के भाव में उत्तर भारत के राज्यों में मिलाजुला रुख रहा। हरियाणा में बिनौले के भाव 3050 से 3150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान श्रीगंगानगर लाइन में बिनौला के भाव 50 रुपये बढ़कर 3250 से 3450 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। बिनौला के दाम पंजाब में 50 रुपये नरम होकर 3100 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

तेल मिलों की सीमित मांग के कारण बिनौला की कीमतों में उत्तर भारत में मिलाजुला रुख रहा। भारत के साथ ही चीन की आयात मांग कमजोर होने के कारण विश्व बाजार में खाद्वय तेलों की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। वैसे भी आगामी दिनों में घरेलू मंडियों में नई कपास की आवक बढ़ने से बिनौला की उपलब्धता बढ़ेगी। आयात ज्यादा होने से घरेलू बाजार में खाद्वय तेलों का बकाया स्टॉक ज्यादा है। इसलिए बिनौला की मौजूदा कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है।

ग्राहकी सीमित बनी रहने से कपास खली की कीमतें स्थिर बनी रही। पिंपलगाव में कपास खली की कीमतें 2900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई। इस दौरान जितुंर में पतली कपास खली के दाम 2900 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। मोरबी में शुगर बारदाने में कपास खली के दाम 1620 रुपये प्रति 50 किलो पर स्थिर हो गए।

तेल मिलों की बिक्री नीचे दाम पर कम आने से कपास खली की कीमतें गुरुवार को स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर तेल मिलों को पड़ते नहीं लग रहे हैं, इसलिए बिकवाली तो कमजोर है, लेकिन बढ़े दाम पर खपत राज्यों की मांग भी सीमित बनी हुई है। ऐसे में इसके भाव में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है। उत्पादक राज्यों में मौसम साफ है, इसलिए आगामी दिनों बिनौला की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कपास खली का उत्पादन बढ़ेगा।

खरीफ में धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी, दलहन एवं तिलहन की घटी

नई दिल्ली। चालू मानसूनी सीजन में बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, जबकि दलहन के साथ ही तिलहन एवं कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में कम हुई है।


चालू खरीफ सीजन में 29 सितंबर तक कुल फसलों की बुआई बढ़कर 1107.16 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1104.79 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 29 सितंबर के दौरान देशभर में सामान्य से 6 फीसदी कम बारिश हुई है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई 411.96 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 404.27 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 123.57 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 128.98 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 43.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 46.13 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 33.08 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 33.52 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 31.94 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 33.99 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 14.21 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 14.81 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 188.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 184.77 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 14.53 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 70.95 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 85.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 15.88 लाख हेक्टेयर में, तथा 70.59 लाख हेक्टेयर में एवं 82.62 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 11 लाख हेक्टेयर हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 10.64 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 193.23 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 196.39 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 43.91 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 125.62 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 12.43 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 9.52 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 45.53 लाख हेक्टेयर में, 124.79 लाख हेक्टेयर में, 13.44 लाख हेक्टेयर में और 9.31 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 29 सितंबर तक कपास की बुआई 123.87 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 127.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 59.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.66 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

मानसूनी बारिश की कमी से चालू खरीफ में कपास की बुआई तीन फीसदी घटी

नई दिल्ली। देशभर में मानसूनी बारिश 6 फीसदी कम होने से चालू खरीफ सीजन में कपास की बुआई में 3.02 फीसदी की कमी आई है।  


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 29 सितंबर तक कपास की बुआई घटकर 123.87 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 127.73 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक देशभर में सामान्य की तुलना में 6 फीसदी बारिश कम हुई है।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 16.24 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक हरियाणा में बारिश सामान्य से एक फीसदी कम, पंजाब में सामान्य से 5 फीसदी कम तथा राजस्थान में सामान्य से 15 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

गुजरात में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 26.82 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 25.48 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18 फीसदी अधिक बारिश हुई है।

महाराष्ट्र में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 42.34 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 42.29 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से तीन फीसदी कम बारिश हुई है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर 6.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य बारिश हुई है।

तेलंगाना में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 18.12 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 20.23 लाख हेक्टेयर से कम है। आंध्र प्रदेश में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 3.98 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.47 लाख हेक्टेयर से कम है।

आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक तेलंगाना में सामान्य से 15 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है। इस दौरान आंध्र प्रदेश में सामान्य से सात फीसदी कम बारिश हुई है।

कर्नाटक में कपास की बुआई खरीफ में घटकर 6.97 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.25 लाख हेक्टेयर से कम है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है।

ओडिशा में कपास की बुआई खरीफ में बढ़कर 2.35 लाख हेक्टेयर में हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.16 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 30 सितंबर तक राज्य में सामान्य से तीन फीसदी कम बारिश हुई है।