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09 सितंबर 2023

चालू खरीफ में कपास की बुआई 1.48 फीसदी घटी

नई दिल्ली। अगस्त में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम हुई है, जिस कारण कपास की बुआई चालू खरीफ में पिछले साल की तुलना में 1.48 फीसदी कम हुई है।


कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 8 सितंबर तक कपास की बुआई 124.99 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 126.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 8 सितंबर तक देशभर में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है।

उत्तर भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में चालू खरीफ में कपास की बुआई 16.24 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.81 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

गुजरात में चालू खरीफ में कपास की बुआई 26.79 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 25.45 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.25 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

महाराष्ट्र में चालू खरीफ में कपास की बुआई 42.28 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 42.29 लाख हेक्टेयर से कम है।

आंध्रप्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुआई 5.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 6.06 लाख हेक्टेयर से कम है। तेलंगाना में चालू खरीफ में कपास की बुआई 18.22 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के दौरान 20.06 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी।

कर्नाटक में चालू खरीफ में कपास की बुआई 6.63 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.15 लाख हेक्टेयर से कम है।

ओडिशा में चालू खरीफ में कपास की बुआई 2.34 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 2.15 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

चालू खरीफ में धान की रोपाई की रोपाई ज्यादा, दलहन के साथ तिलहन की कम

नई दिल्ली। अगस्त में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के बावजूद भी चालू खरीफ सीजन में धान के साथ ही मोटे अनाजों की बुआई बढ़ी है, जबकि दलहन के साथ ही तिलहन एवं कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।


चालू खरीफ सीजन में 8 सितंबर तक कुल फसलों की बुआई बढ़कर 1088.50 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1080.02 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार चालू मानसूनी सीजन में पहली जून से 8 सितंबर के दौरान देशभर में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है, जबकि जुलाई अंत तक बारिश सामान्य से ज्यादा हुई थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई 2.69 फीसदी बढ़कर 403.41 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 392.81 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

दालों की बुआई चालू खरीफ में 8.58 फीसदी पिछड़कर 119.91 लाख हेक्टेयर ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 131.17 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में घटकर 42.92 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 45.61 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई घटकर चालू सीजन में 31.89 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 37.08 लाख हेक्टेयर से कम है।

इस दौरान मूंग की बुआई घटकर 31.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 33.67 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। अन्य दालों की बुआई चालू खरीफ में 13.68 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई इस समय तक 14.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 182.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 181.24 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ज्वार की बुआई चालू खरीफ में 14.08 लाख हेक्टेयर में, बाजरा की 70.84 लाख हेक्टेयर में तथा मक्का की 83.33 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 15.58 लाख हेक्टेयर में, तथा 70.46 लाख हेक्टेयर में एवं 80.97 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

रागी की बुआई चालू खरीफ में घटकर 8.73 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 9.29 लाख हेक्टेयर से कम है।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ सीजन में घटकर 191.49 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 193.30 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनी फसलों में मूंगफली की बुआई 43.73 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 125.40 लाख हेक्टेयर में और शीशम की 11.98 लाख हेक्टेयर में तथा कैस्टर सीड की 9 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है। पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश: 45.30 लाख हेक्टेयर में, 124.06 लाख हेक्टेयर में, 12.97 लाख हेक्टेयर में और 7.94 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 1 सितंबर तक कपास की बुआई 125 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई 126.87 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

गन्ने की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 59.91 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 55.65 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

आंध्रप्रदेश में कपास के साथ ही मूंगफली और धान की रोपाई घटी

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में आंध्र प्रदेश में खरीफ की प्रमुख फसल धान के साथ ही मूंगफली और कपास की बुआई पिछले साल की तुलना में पीछे चल रही है।


राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार 6 सितंबर तक राज्य में खरीफ फसलों की कुल बुआई घटकर 21.70 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल राज्य में इस समय तक 28.61 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुआई हो चुकी थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार राज्य में पहली जून से 7 सितंबर के दौरान सामान्य से पांच फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य में अगस्त में बारिश सामान्य से काफी हुई।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार कपास की बुआई चालू खरीफ में घटकर 3.80 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय राज्य में 6.06 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। सामान्य: राज्य में कपास की बुआई 6.18 लाख हेक्टेयर में होती है।

धान की रोपाई चालू खरीफ में घटकर 11.37 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इसकी बुआई 12.54 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में धान की रोपाई करीब 15.52 लाख हेक्टेयर में होती है।

मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में घटकर 2.93 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के इसकी बुआई 5.38 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राज्य में मूंगफली की बुआई करीब 6.44 लाख हेक्टेयर में होती है।

दलहनी फसलों में की बुआई चालू खरीफ सीजन में 1.43 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 2.07 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मोटे अनाजों में बाजरा की बुआई चालू खरीफ में घटकर 1.38 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई 1.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। मोटे अनाजों में मक्का की बुआई चालू खरीफ में 93 हजार हेक्टेयर में ही हुई है जोकि पिछले साल की समान अवधि के 1.09 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

उत्पादक राज्यों में नेफेड 18 सितंबर से सरसों की बिक्री शुरू करेगी

नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के साथ ही गुजरात में 18 सितंबर से नेफेड सरसों की बिक्री शुरू करेगी। सूत्रों के अनुसार सरसों की नीलामी कई पोर्टलों जैसे एग्री बाजार आदि के माध्यम से की जायेगी।


व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में घरेलू बाजार में सरसों की कीमतों में तेजी, मंदी नेफेड के बिक्री भाव पर भी निर्भर करेगी।  

नेफेड के सूत्रों के अनुसार निगम ने राजस्थान से 4,85,709.45 टन सरसों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर की थी। इसके अलावा निगम ने हरियाणा से 3,41,758.49 टन एवं मध्य प्रदेश से 1,67,090 अन एवं उत्तर प्रदेश से 32,268 टन तथा गुजरात से 84,336 टन सरसों की खरीद एमएसपी पर की थी।

केंद्र सरकार ने फसल सीजन 2022-23 के लिए सरसों का एमएसपी 5,450 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था।

सूत्रों के अनुसार नेफेड के पास करीब 14 लाख टन सरसों का बकाया स्टॉक है। उद्योग के अनुसार पहली सितंबर को देशभर में सरसों का बकाया स्टॉक 57.50 टन का बचा हुआ है, जिसमें से किसानों के पास करीब 35.50 लाख टन एवं व्यापारियों, मिलर्स एवं स्टॉकिस्टों के पास करीब 8 लाख टन का है।

अगस्त में सरसों की पेराई 8.50 लाख टन की हुई है, जबकि जुलाई में इसकी पेराई 9 लाख टन की हुई थी। चालू फसल सीजन में मार्च से अगस्त के दौरान 54.50 लाख टन सरसों की पेराई हुई है। चालू फसल सीजन में मार्च से अगस्त के दौरान देशभर की मंडियों में सरसों की कुल आवक 76.50 लाख टन की हुई है।

05 सितंबर 2023

दिल्ली चना में 6600 रुपए प्रति क्विंटल

 दिल्ली चना में 6600 रुपए प्रति क्विंटल 

★दिल्ली (व्यापार)

★DELHI (TRADE)

चना (GRAM)

मध्य प्रदेश (M.P BEST)-6575  +0

राजस्थान  (RAJ)-6575  +0

~~~~

★मसूर (LENTIL)

दिल्ली  (DELHI)

M. P.(2/50KG- 6850  +0

~~~~

★ मूंग (MUNG) 

राजस्थान (RAJ NEW)- 9550/9600

आवक- 22 मोटर 

~~~~~

 मोठ (MOTH)

नया (NEW)-8150/8200

रामगंजमंडी 08 अगस्त 2023



धनिया आवक 4000 बोरी 

मार्केट समान 

 रेन ब्लैक टच 5600/5800

 रेड क्वालिटी 6000/6200

 धनिया बदामी-6200/6600

घनिया- ईगल- 7000/7300

स्कुटर धनिया  7500/7800

रगंदारक्वालिटी-8000/9500

 सोयाबीन 4700/4930

सरसों- 4900/5420

चना - 4600/4911

कलौजी- 13500/15862

उड़द -6000 /7300

 गेहू -2250/2500

  मेथी 6200/7000

अलसी 4700/4900

मंसूर   5200/5700

ईसबगोल 18000/23200

बढ़े दाम पर मिलों की मांग कमजोर होने से अधिकांश दालों में मिलाजुला रुख, मूंग तेज

नई दिल्ली। स्टॉकिस्टों की सक्रियता से घरेलू बाजार में सोमवार को दलहन की कीमतों में मिलाजुला रुख देखा गया। जहां अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर एवं आयातित मसूर के साथ ही चना की कीमतों में गिरावट आई, वहीं देसी मसूर और मूंग के दाम तेज हुए।


भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 4 सितंबर के दौरान देशभर में सामान्य की तुलना में 11 फीसदी बारिश हुई है। इस दौरान 36 सबडिवीजनों में से 7 में बारिश सामान्य से कम हुई है।

आईएमडी के अनुसार पांच सितंबर को तेलंगाना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ के साथ ही  कर्नाटक में कई बारिश होने का अनुमान है। छह और सात सितंबर को मध्य प्रदेश, विदर्भ, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ के अलावा कर्नाटक और तमिलनाडु में बारिश होने का अनुमान है। 8 सितंबर को महाराष्ट्र के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश होने का अनुमान है।

चेन्नई में बर्मा की उड़द एफएक्यू और एसक्यू के साथ ही लेमन अरहर के दाम स्थिर बने रहे। उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव अगस्त एवं सितंबर शिपमेंट के फसल सीजन 2023 के क्रमश: 1,010 डॉलर और 1,105 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। इस दौरान लेमन अरहर के दाम 1,310 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ के पूर्व स्तर पर स्थिर बने रहे।

आयातित उड़द के दाम स्थिर होने से घरेलू बाजार में उड़द की कीमतों में मिलाजुला रुख रहा। उड़द के उत्पादक राज्यों में पिछले एक, दो दिनों में बारिश हुई है, तथा अगले दो, तीन दिनों में और बारिश होने का अनुमान है। ऐसे में इसकी कीमतों में तेजी, मंदी चालू महीने मौसम कैसा रहता है इस पर भी निर्भर करेगी। जानकारों के अनुसार त्योहारी सीजन के कारण उड़द दाल में दक्षिण भारत की मांग अभी बनी रहेगी, जबकि बर्मा में पुरानी उड़द का बकाया स्टॉक पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। बर्मा से उड़द के आयात पड़ते महंगे हैं। ऐसे में उड़द की कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार कम है, हालांकि बढ़ भाव में मुनाफावसूली करनी चाहिए।

लेमन के साथ ही देसी अरहर के दाम तेज, लेकिन अफ्रीकी देशों में आयातित अरहर में गिरावट आई। अरहर के उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक के साथ ही मध्य प्रदेश में अगले दो, तीन दिन अच्छी बारिश होने का अनुमान है। व्यापारियों के अनुसार खपत का सीजन होने के कारण अरहर दाल में मांग बराबर बनी हुई है, साथ ही घरेलू बाजार में देसी अरहर का बकाया स्टॉक भी कम है। स्टॉक लिमिट लगी होने के कारण दाल मिलों के पास भी तय मात्रा में ही अरहर का स्टॉक बचा हुआ है जबकि घरेलू मंडियों में देसी अरहर की आवक पहले की तुलना में कम हो गई है। अफ्रीकी देशों से अरहर के आयात में देरी हो रही है इसलिए अरहर की कीमतों में अभी बड़ी गिरावट के आसार नहीं है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली आयातित मसूर के दाम कमजोर हुए है, लेकिन देसी के दाम दिल्ली में तेज ही बने रहे। मसूर में व्यापारी अभी ज्यादा मंदे में नहीं है। त्योहारी सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार, बंगाल एवं असम की मांग बनी हुई। वैसे भी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की मंडियों में देसी मसूर की आवक काफी कम हो गई है। जानकारों के अनुसार इसके भाव में बढ़ी हुई कीमतों में स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली समय, समय बनेगी। उधर कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया से आयातित मसूर की आवक बराबर बनी रहने का अनुमान है।

स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली से दिल्ली में चना के दाम कमजोर हुए हैं। जानकारों के अनुसार नेफेड त्योहारी सीजन में चना की बिक्री बढ़ायेगी। ऐसे में चना की तेजी, मंदी काफी हद तक नेफेड की निविदा के भाव पर तय होगी। हालांकि उत्पादक राज्यों में चना का बकाया स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी कम बचा हुआ है। चना की नई फसल फरवरी, मार्च में ही आयेगी। त्योहारी सीजन के कारण चना दाल एवं बेसन की मांग अभी बनी रहेगी। इसलिए इसके भाव में बड़ी गिरावट के आसार कम है।

सूत्रों के अनुसार नेफेड ने मध्य प्रदेश में फसल सीजन 2023 का खरीदा हुआ 3.15 लाख टन चना बेचने का फैसला किया है, इसके अलावा अगले दो महीनों में निगम करीब 15 लाख टन चना की बिक्री करेगी। सरकार का मकसद त्योहारी सीजन में कीमतों को काबू में रखना है।

मूंग के दाम तेज बने हुए है। जानकारों के अनुसार उत्पादक राज्य में बारिश की कमी से फसल का उतारा कम आ रहा है। इसलिए मूंग में बिकवाली कम आ रही है। खपत का सीजन होने के कारण मूंग दाल की मांग अभी बनी रहेगी। इसलिए इसकी कीमतें अभी ज्यादा मंदा आने का अनुमान नहीं है। हालांकि बढ़ी हुई कीमतों में स्टॉकिस्टों की मुनाफावसूली आ सकती है। जानकारों के अनुसार मौसम अनुकूल रहा तो आगामी दिनों में नई मूंग की आवक बढ़ेगी।