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10 जुलाई 2012

कमोडिटी बाजार: सोने-चांदी की तेजी पर लगाम

सोने और चांदी की तेजी पर लगाम लग गई है। दुनिया भर में सोने-चांदी की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। एसीएक्स पर सोने में 0.30 फीसदी की गिरावट के साथ 29,574 रुपये के स्तर पर कारोबार हो रहा है, जबकि चांदी आधे फीसदी से ज्यादा टूट चुकी है। वहीं घरेलू बाजार में गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग में भारी कमी आई है, जून महीने में निवेशकों ने रिकॉर्ड 230 करोड़ रुपये निकाले हैं। जिसके चलते गोल्ड ईटीएफ की होल्डिंग करीब 2.5 फीसदी घट गई है। हालांकि दुनिया भर बाजारों में मंदी गहराती जा रही है। बावजूद इसके सोने में निवेशकों को रुझान कम होता जा रहा है। कच्चे तेल में आज जोरदार गिरावट आई है, घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 1 से ज्यादा फीसदी तक गिरावट आ चुकी है। वहीं भाव 4,800 रुपये से फिसलकर 4,750 रुपये के भी नीचे आ गया है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतें 1-2 फीसदी टूट चुकी हैं। नार्वे में तेल कंपनियों की हड़ताल खत्म होने से ब्रेंट क्रूड में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। वहीं आज चीन में ट्रेड डाटा भी जारी होने वाला है। जिसका असर भी कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। एमसीएक्स पर बेस मेटल्स में भी दबाव की स्थिति देखी जा रही है। घरेलू बाजार में सभी मेटल्स में लाल निशान के साथ कारोबार हो रहा है। एल्युमीनियम, कॉपर, निकेल और लेड 0.30 फीसदी तक टूट चुके हैं। एलएमई पर भी कॉपर में गिरावट के साथ ही कारोबार हो रहा है। एनसडीईएक्स पर इस सप्ताह लगातार दूसरे दिन हल्दी में 4 फीसदी का ऊपरी सर्किट लग गया है। हल्दी अगस्त वायदा का भाव 4,800 रुपये के भी पार जा पहुंचा है। वहीं पिछले 1 महीनें में हल्दी की कीमतों में 35 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है। साथ ही सोयाबनी के भाव ने 4,300 रुपये के ऊपर एक नया रिकॉर्ड कायम कर लिया है। हालांकि घरेलू स्तर पर सोयाबीन की बुआई शुरू हो चुकी है और मॉनसून भी लगभग पूरे देश में पहुंच चुका है। (Money control.com)

07 जुलाई 2012

इस साल घटेगा कपास का उत्पादन : आईसीएसी

पिछले दो साल से रिकॉर्ड उत्पादन के बाद देश में कपास का उत्पादन साल 2012-13 में 7 फीसदी घटकर 54 लाख टन रहने की संभावना है। साल 2011-12 में 59 लाख टन कपास का उत्पादन हुआ था। कपास की घटती कीमतों के चलते इसका रकबा 10 फीसदी घटकर 110 लाख हेक्टेयर रह जाएगा। हालांकि घटती कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात में सुधार के कारण देश में कपास का इस्तेमाल साल 2012-13 में 7 फीसदी बढ़कर 47 लाख टन पर पहुंच जाएगा जबकि साल 2011-12 के दौरान इसमें 4 फीसदी की गिरावट आई थी। अंतरराष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति (आईसीएसी) के कार्यकारी निदेशक टेरी टाउनसेंड ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया - 'देश से 7.5 लाख टन निर्यात का अनुमान है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 61 फीसदी कम है। घटते उत्पादन और देसी मिलों में ज्यादा खपत के साथ-साथ दूसरे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण ऐसा होगा।' उन्होंने कहा कि भारत में साल 2012-13 के दौरान उत्पादन में गिरावट वैश्विक गिरावट (8 फीसदी कम यानी 249 लाख टन) के मुताबिक ही होगी और इसकी वजह वैश्विक स्तर पर कपास की कीमतों में गिरावट है। कपास उत्पादक व खपत वाले देशों की सरकारों के संगठन आईसीएसी ने अपने अनुमान में कहा है कि चीन के कम खरीद अनुमान के कारण वैश्विक कपास कारोबार 18 फीसदी लुढ़ककर 76 लाख टन रह जाएगा। वैश्विक स्तर पर कपास के भंडार में लगातार इजाफे और कारोबार में गिरावट का असर इसकी कीमतों पर पड़ेगा। साल 2011-12 में कपास के कारोबार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी और यह 92 लाख टन पर पहुंच गया था, जो साल 2012-13 में 18 फीसदी घटकर 76 लाख टन रह जाने की संभावना है। वैश्विक स्तर पर 2012-13 के दौरान 249 लाख टन कपास उत्पादन का अनुमान है, जो पिछले सीजन के मुकाबले 8 फीसदी कम है। आईसीएसी ने कहा, 'कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी के चलते सूती धागे की मांग पर भी असर पड़ा है। हालांकि कपास की कमी दूर करने के लिए चीन की मिलों ने कपास का काफी आयात किया। चीन सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर भंडार तैयार किया था।' आईसीएसी के मुताबिक मांग में सुधार के चलते कपास का आयात मजबूत होगा, लेकिन यह उतना नहीं है कि चीन की कमी की भरपाई कर दे, क्योंकि चीन के पास काफी स्टॉक है। (BS Hindi)

सरकार फिर जारी करेगी गेहूं निर्यात की निविदा

केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात के लिए फिर से निविदा जारी करने का फैसला किया है। सरकार केंद्रीय भंडार से 20 लाख टन गेहूं का निर्यात करना चाहती है क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों में वैश्विक कीमतों में मजबूती देखने को मिली है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट ने पिछले हफ्ते न केवल 90,000 टन गेहूं के लिए पहले जारी निविदा को रद्द करने का पैसला किया बल्कि पूरी मात्रा के लिए फिर निविदा जारी करने का भी निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि पिछली निविदा में बिक्री मूल्य 228 डॉलर प्रति टन रखा गया था, वहीं अब वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमत 260 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। नई निविदा पूरी मात्रा के लिए होगी और इसे एक बार में नहीं बेचा जाएगा। अधिकारी ने यह भी कहा कि केंद्रीय भंडार से गेहूं का निर्यात करने के लिए अगले एक साल में करीब 10-15 निविदा जारी होगी। यह कदम करीब छह साल बाद गेहूं के बढ़ते भंडार को कम करने के लिए उठाया गया है। पिछले हफ्ते आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने खाद्य मंत्रालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी, जिसमें 20 लाख टन गेहूं के निर्यात का प्रस्ताव रखा गया था। इससे पहले सरकारी उपक्रम स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ने 90,000 टन गेहूं निर्यात के लिए निविदा जारी की थी और यह निविदा भारतीय गेहूं की वैश्विक बाजार में मिलने वाली कीमतों का अंदाजा लगाने के लिए जारी हुई थी। निविदा में उच्चतम कीमत 228 डॉलर प्रति टन मिली। हालांकि तब से वैश्विक कीमतों में मजबूती आई है क्योंकि कुछ प्रमुख निर्यातक देशों में खड़ी फसलों के नुकसान की खबर है। अधिकारी ने कहा कि मौजूदा परिदृश्य में भारतीय गेहूं को वैश्विक बाजार में 260 डॉलर (14,300 रुपये प्रति टन) प्रति टन का भाव मिल सकता है। पहले यह 12,850 रुपये प्रति टन बैठता था। आधार कीमत को लचीला रखा गया है और हर निविदा में अलग-अलग आधार कीमत होगी, लेकिन सरकार 228 डॉलर प्रति टन से नीचे का भाव स्वीकार नहीं करेगी। न्यूनतम रिजर्व कीमत से सरकार को पुराना स्टॉक निकालने में मदद मिलेगी, जिसकी मौजूदा कीमतें कम हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति निविदा का आकलन करेगी। समिति में एसटीसी व अन्य कारोबारी संस्थानों के अधिकारी शामिल होंगे। हालांकि सरकार ने 20 लाख टन गेहूं निर्यात का फैसला किया है, लेकिन इस कदम को देसी आटा मिलों व कारोबारियों का समर्थन नहीं मिला है। चंडीगढ़ संवाददाता के अनुसार कारोबारियों ने आरोप लगाया है कि निर्यात की अनुमति दिए जाने के फैसले से कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। वे चाहते हैं कि सरकार गेहूं निर्यात की बजाय वैल्यू ऐडेड उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करे। ऑल इंडिया ग्रेन एक्सपोट्र्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डी पी सिंह ने कहा कि आदर्श रूप में सरकार को निर्यात की मंशा जाहिर नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव को बढ़ावा मिलता है। रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन ऑफ गुजरात के अध्यक्ष रमेश सर्राफ के मुताबिक गेहूं का आपूर्ति करने वालों ने पिछले कुछ दिनों में गेहूं की कीमतें 60-70 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दी हैं। इस साल गेहूं की बंपर पैदावार से सरकारी गोदामों में 820 लाख टन अनाज का रिकॉर्ड भंडार है जबकि भंडारण की क्षमता महज 640 लाख टन है। (BS Hindi)

बढ़ सकती हैं चीनी की कीमतें

मॉनसून का दगा अब मिठास कम करेगा। दरअसल रकबा बढऩे के बावजूद कम बारिश के कारण चीनी का उत्पादन कम रहने की आशंका है, जिससे फिलहाल सस्ती मिल रही चीनी महंगी हो सकती है। पिछले चार दिन में 120 रुपये प्रति क्विंटल तक महंगी हो चुकी चीनी में आगे भी मजबूती आने की आशंका जताई जा रही है। चीनी विक्रेता कंपनी एसएनबी इंटरप्राइजेज के मालिक सुधीर भालोटिया ने बताया कि उत्पादन घटने की आशंका से उत्तर प्रदेश में चीनी का एक्स फैक्ट्री भाव 100-120 रुपये चढ़कर 3,130 से 3,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। महाराष्ट्र में दाम 3,000 से 3,025 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। चीनी कारोबारी आरपी गर्ग के मुताबिक दिल्ली में तीन दिन पहले चीनी का थोक भाव 3,150-3,230 रुपये था, जो अब 3,300 से 3,350 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी करीब 35 डॉलर महंगी होकर 608 डॉलर प्रति टन बिक रही है। ब्राजील में भी भारी बारिश के कारण फसल बिगड़ी है। भालोटिया के मुताबिक दोनों प्रमुख देशों में फसल प्रभावित होने से चीनी के दाम बढऩे के पूरे आसार हैं। इस साल 28 जून तक गन्ने का रकबा 4.6 फीसदी बढ़कर 52.2 लाख हेक्टेयर हो गया, लेकिन बारिश की कमी से उत्पादन में गिरावट की आशंका है। कमोडिटीइनसाइट डॉट कॉम के वरिष्ठï जिंस विश्लेषक प्रशांत कपूर कहते हैं कि कम बारिश से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में चीनी की रिकवरी घट सकती है। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) का भी मानना है कि वर्ष 2012-13 में चीनी उत्पादन कम रहेगा। (BS Hindi)

छोटी मात्रा में कई टेंडरों के जरिये होगा गेहूं का निर्यात

बेहतर मूल्य पाने को सरकारी कंपनियां डेढ़-डेढ़ लाख टन के टेंडर जारी करेंगी सार्वजनिक क्षेत्र की ट्रेडिंग कंपनियां एसटीसी, एमएमटीसी और पीईसी 20 लाख टन गेहूं निर्यात करने के लिए छोटी मात्रा के कई वैश्विक टेंडर जारी कर सकती हैं। सरकार ने इस सप्ताह के शुरू में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों स 20 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी थी। सूत्रों के अनुसार बेहतर मूल्य पाने के लिए प्रत्येक निर्यात टेंडर में 1.5 लाख टन गेहूं निर्यात के लिए बिड आमंत्रित की जाएंगी। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने नई फसल के गेहूं के लिए गोदाम खाली करने के मकसद से 20 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दी है। सीसीईए ने सरकार की ओर से गेहूं निर्यात करने के लिए ट्रेडिंग कंपनियों को निर्देश दिया है। निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य 228 डॉलर प्रति टन तय किया गया है। सूत्रों के अनुसार ट्रेडिंग कंपनियों को बंदरगाहों पर समुद्री जहाजों की दिक्कत को देखते हुए छोटी मात्रा में निर्यात के लिए कंपनियों को 10 से 15 टेंडर जारी करने को कहा गया है। हाल में एसटीसी ने गेहूं निर्यात का मूल्य पता लगाने के लिए टेंडर जारी किया गया था। लेकिन निर्यात नई बिड के आधार पर किया जाएगा। हालांकि प्रत्येक टेंडर का फ्लोर प्राइस वाणिज्य सचिव की अगुवाई वाली एक कमेटी तय करेगी। हाल में केंद्रीय खाद्य मंत्री के. वी. थॉमस ने कहा था कि सरकार एक बार में सारा 20 लाख टन गेहूं निर्यात नहीं करेगी, बल्कि कमेटी वैश्विक मूल्य का जायदा लेगी और सही समय पर निर्यात का फैसला करेगी। उन्होंने कहा था कि हम निर्यात की जल्दी में नहीं है। वैश्विक बाजार पर नजर रखी जा रही है क्योंकि मूल्य में सुधार हो रहा है। पिछले दो सप्ताह के दौरान शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (सीबॉट) में गेहूं के दाम करीब 20 फीसदी बढ़ गए। सरकार द्वारा खरीदे गए गेहूं की आर्थिक लागत 18,220 रुपये प्रति क्विटंल बैठ रही है। कम भाव पर 20 लाख टन गेहूं का निर्यात करने पर सरकार को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना होगा। (Business Bhaskar)

विदेश में तेजी से बढऩे लगे मंडियों में कॉटन के दाम

बिजनेस भास्कर नई दिल्ली 34,800 प्रति कैंडी पर पहुंच गई कॉटन 20 दिन में 7% बढ़कर घरेलू बाजार में 72.75 सेंट प्रति पाउंड भाव हो गया हफ्ते भर में 7.4% बढ़कर एनबॉट में 352 लाख गांठ उत्पादन होने का अनुमान है वर्ष 2011-12 में कपास की बुवाई चालू खरीफ में कपास की बुवाई 37.56 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 46.61 लाख हैक्टेयर में हुई थी। तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2011-12 में कपास का उत्पादन 352 लाख गांठ होने का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में आए सुधार और मानसून की देरी से कॉटन (जिनिंग की हुई रुई) की कीमतों में तेजी आई है। सप्ताहभर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉटन के दाम 7.4 फीसदी बढ़े हैं। जबकि घरेलू बाजार में पिछले 20 दिनों के दौरान कॉटन के दाम 7 फीसदी बढ़कर 34,400 से 34,800 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) हो गए। मानसून में देरी हुई तो कीमतों में और भी तेजी आने की संभावना है। नॉर्थ इंडिया कॉटन एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश राठी ने बताया कि प्रमुख कॉटन उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में मानसूनी की देरी के कारण कॉटन की कीमतों में मजबूती आई है। उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क बोर्ड ऑफ ट्रेड में जुलाई महीने के वायदा अनुबंध में कॉटन की कीमतें घटकर 28 जून को 67.70 सेंट प्रति पाउंड रह गई थी जबकि चार जुलाई को बढ़कर 72.75 सेंट प्रति पाउंड हो गई। मानसून में और देरी हुई तो मौजूदा कीमतों में और भी तेजी बनने की संभावना है। गुजरात जिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दलीप पटेल ने बताया कि कॉटन में यार्न मिलों की मांग बढ़ गई है। गुजरात में चालू खरीफ में कपास की बुवाई अभी तक केवल 3.82 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 4.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। हालांकि देशभर में बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है लेकिन मानसून की देरी का असर फसल पर पडऩे की आशंका है। इसीलिए मिलों की खरीद बढ़ी हुई है। अहमदाबाद मंडी में शंकर-6 किस्म की कॉटन का भाव 15 जून को 32,300 से 32,500 रुपये प्रति कैंडी (एक कैंडी-356 किलो) जबकि अब बढ़कर 34,400 से 34,800 रुपये प्रति कैंडी हो गया। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुवाई अभी तक 37.56 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 46.61 लाख हैक्टेयर में हुई थी। तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार वर्ष 2011-12 में कपास का उत्पादन 352 लाख गांठ होने का अनुमान है। जबकि वर्ष 2010-11 में 330 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ था। (Business Bhaskar....R S Rana)

लेट मानसून से 58% घटी मोटे अनाजों की बुवाई

बिजनेस भास्कर नई द पिछले साल के मुकाबले धान की रोपाई 26%, तिलहन की 29% कम चालू खरीफ सीजन में मानसून की बेरुखी का सबसे ज्यादा असर मोटे अनाजों की बुवाई पर पड़ा है। अभी तक देशभर में मोटे अनाजों की बुवाई में 57.8 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई है। इनकी बुवाई केवल 21.95 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है। वैसे तो तिलहन और धान की रोपाई में भी क्रमश: 28.9 और 26.2 फीसदी की कमी आई है, लेकिन पिछले दो दिनों में मानसून की सक्रियता बढऩे से इनकी बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी बुवाई आंकड़ों के अनुसार मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ सीजन में अभी तक केवल 21.95 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 52.03 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अनाजों की प्रमुख फसल मक्का की बुवाई 14.43 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 19.28 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का के प्रमुख उत्पादक राज्यों कर्नाटक में इसकी बुवाई 5.4 लाख हैक्टेयर से घटकर 2.25 लाख हैक्टेयर और पंजाब में 1.28 लाख हैक्टेयर से घटकर केवल 90,000 हजार हैक्टेयर रह गई है। राजस्थान में बुवाई अभी शुरू ही नहीं हो पाई है जबकि पिछले साल 4.76 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। धान की रोपाई चालू खरीफ सीजन में अभी तक 55.40 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 75.12 लाख हैक्टेयर में इसकी रोपाई हो चुकी थी। तिलहनों की बुवाई भी पिछले साल के 37.35 लाख हैक्टेयर से घटकर 26.55 लाख हैक्टेयर रह गई है। उधर दलहन, गन्ना और कपास की बुवाई में पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी हुई है। मानसून सक्रिय, धान रोपाई होगी तेज नई दिल्ली आखिर मानसून उत्तरी भारत में भी सक्रिय हो गया। इससे खरीफ फसलों, खासकर धान की रोपाई में अब तेजी आएगी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार उत्तर में मानसून शुक्रवार को जयपुर, चंडीगढ़, अमृतसर तक पहुंच गया। 6 जुलाई को देशभर में औसतन 7.5 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्यतया 9 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए। उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 8 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्यतया 6 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। मध्य क्षेत्र में 10 मिलीमीटर सामान्य बारिश के मुकाबले 12 मिलीमीटर औसत बारिश हुई। पांच जुलाई को हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब के ज्यादातर जिलों में एक से 12 मिलीमीटर तक बारिश हुई। मध्य प्रदेश और गुजरात में इस दौरान 1 से 16 मिलीमीटर तक बारिश हुई। (ब्यूरो) एमपी में 25 लाख हैक्टेयर में बुवाई भोपाल बीते दो दिनों से पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सक्रिय मानसून की बदौलत बुवाई में तेजी आ गई है। मध्य प्रदेश में मानसून में देरी के कारण अब तक सोयाबीन की बुवाई सर्वाधिक पिछड़ी है। चूंकि 15 जुलाई तक ही सोयाबीन की बुवाई की जाती है, इसलिए किसान अब तेजी से इसमें जुट गए हैं। ग्वालियर, शहडोल, रीवा, जबलपुर, सागर संभागों में बुवाई का कार्य तेजी से शुरू हुआ है। शुक्रवार तक प्रदेश में 25 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है। मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन में 114 लाख हैक्टेयर में बुवाई का अनुमान है। (Business Bhaskar....R S Rana)