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14 जुलाई 2022

चालू तेल वर्ष के पहले आठ महीनों में खाद्य एवं अखाद्य तेलों का आयात एक फीसदी बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू तेल वर्ष 2021-22 (नवंबर-21 से जून-22 ) के दौरान खाद्य एवं अखाद्य तेलों के आयात में एक फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 8,760,640 टन का हुआ है, जबकि पिछले तेल वर्ष की समान अवधि में इनका आयात 8,674,012 टन का ही हुआ था।

साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार जून में खाद्य एवं  अखाद्य तेलों के आयात में 0.44 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 991,650 टन का ही हुआ, जबकि पिछले साल जून में इनका आयात 996,014 टन का हुआ था। जून में जहां खाद्य तेलों का आयात 941,471 टन का हुआ, वहीं इस दौरान अखाद्य तेलों का आयात 50,179 टन का हुआ।

एसईए के अनुसार इंडोनेशियाई सरकार ने पाम तेल के निर्यात पर 28 अप्रैल को प्रतिबंध लगाया था, जिस कारण निर्यात घटकर 10 साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया। अत: इंडोनेशियाई सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगा देने से वहां इन्वेंट्री बढ़ गई, तथा कारखानों के टैंक भी भरे गए। सूत्रों के अनुसार इंडोनेशिया में पाम तेल का स्टॉक बढ़कर इस दौरान करीब 8.5 मिलियन टन से अधिक हो गया। इसी कारण इंडोनेशिया ने 23 मई 2022 को निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा लिया, साथ ही इन्वेंट्री को कम करने के लिए निर्यात कर और लेवी को 575 डॉलर से घटाकर 488 डॉलर कर दिया, साथ ही इसमें और भी कमी करने की उम्मीद है। अत: इंडोनेशिया सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उठाये जा रहे कदमों से पाम तेल की कीमतों में हाल ही में भारी गिरावट आई है।

भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलीन के भाव घटकर जून में 1,519 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि मई में इसका भाव 1,769 डॉलर प्रति टन था। इसी तरह से क्रूड पाम तेल के भाव जून में घटकर 1,557 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि मई में इसका भाव 1,811 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान क्रुड सोया तेल का भाव मई के 1,889 डॉलर से घटकर जून में 1,686 डॉलर प्रति टन रह गया।

अक्टूबर से जून के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 70 फीसदी घटा, सोयाबीन का आयात बढ़ा - उद्योग

नई दिल्ली। चालू फसल सीजन 2021-22 के पहले 9 महीनों अक्टूबर से जून के दौरान सोया डीओसी के निर्यात में 69.87 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 5.63 लाख टन का ही हुआ है, जबकि पिछले फसल सीजन की समान अवधि में 18.69 लाख टन का निर्यात हुआ था।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया, सोपा के अनुसार अक्टूबर से जून अंत तक 75 लाख टन सोयाबीन की आवक उत्पादक मंडियों में हो चुकी है, जिसमें से 60 लाख टन की पेराई हो चुकी है। इस दौरान 2.25 लाख टन की सीधी खपत हो चुकी है, जबकि 0.69 लाख टन का निर्यात हो चुका है। अत: पहली जुलाई को मिलों, व्यापारियों एवं किसानों के पास 48.17 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ है, जोकि पिछले साल की सामन अवधि के 13.04 लाख टन से ज्यादा है।

सोपा के अनुसार चालू फसल सीजन में 118.89 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था, जबकि नई फसल की आवकों के समय 1.83 लाख टन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। अत: कुल उपलब्धता 120.72 लाख टन की बैठी थी। अक्टूबर से जून अंत तक करीब 3.39 लाख टन सोयाबीन का आयात हो चुका है, जोकि पिछले साल की समान अविध के 1.79 लाख टन से ज्यादा है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में 8 जुलाई तक सोयाबीन की बुआई 54.42 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की अवधि के 69.54 लाख हेक्टेयर से कम है। महाराष्ट्र में चालू खरीफ में सोयाबीन की बुआई 32.17 लाख हेक्टेयर में और मध्य प्रदेश में 10.70 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है। पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 34.78 लाख हेकटेयर और 24.21 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। राजस्थान में जरुर चालू खरीफ में सोयाबीन की बुआई बढ़कर 5.66 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुआई केवल 4.11 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

09 जुलाई 2022

मंडियों में 9 जुलाई 2022 को जिंसों के भाव इस प्रकार रहे

मंडियों में 9 जुलाई 2022 को जिंसों के भाव इस प्रकार रहे।

MANDI- BILASPUR. UP

Sarbati New.
Rate- 1950.

ऐलनाबाद मंडी बोली भाव
 दिनांक 09/07/2022
भरत कानसरिया
नरमा = 9700
ग्वार = 4000/4500
सरसो = 5570/6273
चना = 4000/4550
कनक = 1975/2011
तारा मीरा = 4970

सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 09-06-2022
नरमा = 9800/-(लगभग)
गेहूं  = 1980-2010/-
Sirsa Mandi group
सरसों = 5500-6295/-
गवार =4500-4911/-
मूंग = 4000-5251/-

Aligarh Mandi
1509 Hand@ 3800 to 3975

सरसो 6100 रुपये सिरा रेटआज 9 जुलाई  को कालांवाली मंडी, में बोली पर बिकी ,औसत 5900 से 6000,गेंहू 1950, गवार 4800 से 4900

Karnal Mandi 1509 rate 3880

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Sarso Boli 6471

Chana Boli 4425

Guwar Boli 4949

आज गंगोह अनाज मंडी में 1509 की 5000 बोरी मंडी में आई 🌾🌾🌾
भाव 3700 से लेकर के 3881 तक रहे

दिल्ली चना भाव
राजस्थान 4825/50
मध्यप्रदेश 4775/4800

सरसो का भाव


*★सरसों *
(MUSTARD)
★जयपुर (JAIPUR)-6850 -50

★दिल्ली (DELHI)
42%कंडीसन-6600 -50

नरमा भाव
सिरसा 9800
आदमपुर 10000

Karnal Mandi Paddy 1509 Arrival 4000 Bags@3650 To 3850 Bayer Local and K R B L

DATE- 09/07/2022.

MANDI- KARNAL. HARYANA

Aarival- 4'000. Bags.

Paddy 1509 New.
Rate- 3650 se 3850.

 Bayer Local and K R B L

DATE- 09/07/2022.

MANDI- JAHANGIRABAD. UP

Aarival- 8'000. Bags.

Paddy 1509 New
Rate- 3500 se 3881.

DATE- 09/07/2022.

MANDI- NARELA. DEHLI

1121 HAND Old.
Rate- 4500.

1509. HAND Old.
Rate- 4175.

Basmati. HAND Old.
Rate- 3752.

New 1509 rate 3201-3501
Aarival 3000 bag
Mausam kharab (baarish)
Grahak kamjor
Garh mandi UP

सिरसा मंडी ग्रुप
दिनांक 09-06-2022
नरमा = 9800/-(लगभग)
गेहूं  = 1980-2010/-

Mandi Adampur
Sarwan Pandit
Narma---10000

बर्मा में उड़द मंदी तो अरहर तेज, घरेलू बाजार दलहन में मिलाजुला रुख

नई दिल्ली, 8 जूलाई। बर्मा में भाव तेज होने के साथ घरेलू बाजार में दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने के कारण शुक्रवार को बर्मा की लेमन अरहर के भाव तेज हो गए, जबकि अन्य दालों के दाम लगभग स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार अरहर एवं उड़द के आयातकों को डिस्पैरिटी का सामना करना पड़ रहा है, तथा चालू खरीफ में अरहर के साथ ही उड़द की बुआई पिछड़ रही है। इसलिए इनके भाव में आगे और सुधार आयेगा।

सूत्रों के अनुसार स्थानीय एवं निर्यातकों की मांग कमजोर होने के कारण बर्मा में उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में आज 15-20 डॉलर की गिरावट आकर भाव क्रमश: 915 डॉलर और 1,015 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। भारतीय आयातकों की खरीद नहीं हो रही है।

हालांकि इस दौरान स्थानीय मांग बढ़ने से लेमन अरहर के भाव में 15 डॉलर की तेजी आकर भाव 845 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ हो गए। व्यापारियों के अनुसार भारत में चेन्नई के लिए उड़द-अरहर का एक वैसल 12 जुलाई को बर्मा से लोड होने की उम्मीद है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 46.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 46.10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है।

हालांकि खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर और उड़द की बुआई पिछले साल की तुलना में पिछड़ रही है। अरहर की बुआई चालू खरीफ में 16.58 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 23.22 लाख हेक्टेयर से कम है। इसी तरह से उड़द की बुआई चालू खरीफ में घटकर केवल 7.47 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 8.33 लाख हेक्टेयर की तुलना में कम है। हालांकि मूंग की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 16.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 11.65 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

गुजरात में समर मूंग की सरकारी खरीद 21 जुलाई से शुरू होगी, उत्पादक मंडियों में मूंग के भाव एमएसपी से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल नीचे हैं तथा मूंग एमएसपी पर बेचने के लिए किसानों को 11 से 20 जुलाई तक पंजीकरण कराना होगा। उधर मध्य प्रदेश में भी मूंग की सरकारी खरीद के जल्द शुरू होने का अनुमान। इससे मूंग की कीमतों में सुधार बन सकता है।

दिल्ली में बर्मा की लेमन अरहर 2022 की फसल के भाव 50 रुपये तेज होकर 6,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

दिल्ली डिलीवरी के लिए महाराष्ट्र की नांदेड़ लाईन की अरहर के भाव 6,800 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर स्थिर बने रहे।

इस दौरान चेन्नई में बर्मा की लेमन अरहर की कीमतें 50 रुपये तेज होकर 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

दाल मिलों की मांग सुधरने से मुंबई में बर्मा की लेमन अरहर के भाव 50 रुपये बढ़कर 6,600 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।

इस दौरान मुंबई में अफ्रीकी लाइन की अरहर के भाव स्थिर बने रहे। तंजानिया की अरुषा और मटवारा अरहर के भाव क्रमश: 5,600 से 5,700 रुपये और 5,550 से 5,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मोजाम्बिक लाइन की गजरी अरहर की कीमतें 5,475 से 5,550 रुपये प्रति क्विंटल बोली गई। मलावी अरहर के भाव 5,050 से 5,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

दिल्ली में मध्य प्रदेश की मसूर की कीमतों में 25 रुपये की तेजी आकर भाव 7,250 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, जबकि कनाडा की मसूर के दाम इस दौरान 7,025 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार मिलर्स आयातित के बजाए घरेलू मसूर की खरीद ज्यादा मात्रा में कर रहे हैं, तथा कनाडा से आगामी दिनों में मसूर का आयात बढ़ने की उम्मीद है। क्योंकि कनाडा से आयातित मसूर के भाव बंदरगाह पर 6,925 रुपये प्रति क्विंटल है।

इंदौर में मसूर के बिल्टी भाव 25 रुपये कमजोर होकर दाम 5,950 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

ऑस्ट्रेलियाई मसूर के भाव कंटेनर में 7,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, वहीं कनाडा की मसूर के भाव इस दौरान 7,250 रुपये प्रति क्विंटल के पूर्व स्तर पर टिके रहे।

दिल्ली में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू के भाव के भाव क्रमश: 7,450 से 7,475 रुपये तथा 8,250 से 8,275 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

आंध्रप्रदेश लाइन की नई उड़द का दिल्ली के लिए व्यापार 7,900 रुपये प्रति क्विंटल की पूर्व दर पर हुआ।

मुंबई में बर्मा उड़द एफएक्यू की कीमतें 7,250 से 7,275 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गई।

चेन्नई में उड़द एसक्यू के हाजिर डिलीवरी के भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

दिल्ली में राजस्थानी के भाव 4,850 रुपये और मध्य प्रदेश के चना के भाव 4,775 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।

मूंग के बिल्टी भाव इंदौर में 50 रुपये घटकर 5,800 से 5,950 रुपये और एवरेज क्वालिटी के 5,000 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

खरीफ फसलों की कुल बुआई 9 फीसदी से ज्यादा पिछड़ी, दलहन की बुआई में हल्का सुधार

नई दिल्ली। पहली जून से 8 जुलाई तक देशभर के 22 फीसदी हिस्से में मानसूनी बारिश कम हुई है, जिसका असर खरीफ फसलों की बुआई पर देखा जा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में देशभर के राज्यों में 8 जुलाई 2022 तक फसलों की बुआई 9.27 फीसदी पिछड़कर 406.66 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई 448.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

मंत्रालय के अनुसार धान की रोपाई चालू खरीफ में 72.24 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 95 लाख हेक्टयेर से कम है।

हालांकि दलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 46.55 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 46.10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुआई चालू खरीफ में 16.58 लाख हेक्टेयर में, उड़द की 7.47 लाख हेक्टेयर में और मूंग की 16.02 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले खरीफ सीजन की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 23.22 लाख हेक्टेयर में, 8.33 लाख हेक्टेयर में और 11.65 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

मोटे अनाजों की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 65.31 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 64.36 लाख हेक्टयेर से ज्यादा है। मोटे अनाजों में ज्वार की बुआई 4.50 लाख हेक्टेयर में और बाजरा की 26.77 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल समय तक इनकी बुआई क्रमश: 4.59 लाख हेक्टेयर और 14.93 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई थी। इसके अलावा मक्का की बुआई चालू खरीफ में 31.84 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 41.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी।

तिलहनी फसलों की बुआई चालू खरीफ में घटकर 77.80 लाख हेक्टेयर में ही हो पाई है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 97.56 लाख हेक्टेयर से कम है। तिलहन में मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में 20.51 लाख हेक्टेयर में, सोयाबीन की 54.43 लाख हेक्टेयर में और सनफ्लवर की 1.16 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई है, जबकि पिछले साल इनकी बुआई क्रमश: 25.31 लाख हेक्टेयर में, 69.54 लाख हेक्टेयर में और 80 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

कपास की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 84.60 लाख हेक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 84.75 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी।

अच्छी बारिश से राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई 72 फीसदी बढ़ी

नई दिल्ली। प्री मानसून के साथ ही मानसूनी बारिश अच्छी होने से राजस्थान में खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आई है। राज्य में पांच जुलाई तक फसलों की बुआई 72 फीसदी बढ़कर 72.26 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 42.01 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी।

भारतीय मौसम विभाग, आईएमडी के अनुसार पहली जून से 6 जुलाई तक पश्चिमी राजस्थान में जहां 64 फीसदी बारिश सामान्य से ज्यादा हुई है, वहीं पूर्वी राजस्थान में इस दौरान 25 फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

राज्य के कृषि निदेशालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की बुआई बढ़कर राज्य में 6.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 5.79 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। हालांकि कुल बुआई तय लक्ष्य 8 लाख हेक्टेयर से अभी भी कम है। ग्वार सीड की बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 9.63 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 3.51 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। ग्वार सीड की बुआई का लक्ष्य 25 लाख हेक्टेयर तय किया गया है।

खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल मूंगफली की बुआई चालू खरीफ में 5.84 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक 5.68 लाख हेक्टेयर में ही इसकी बुआई हुई थी। इसी तरह से सोयाबीन की बुआई चालू खरीफ में राज्य में बढ़कर 5.66 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 4.11 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हुई थी। तिलहनी फसलों की कुल बुआई चालू खरीफ में बढ़कर 12.02 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई केवल 10.20 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।

राज्य में दालों की बुआई चालू खरीफ सीजन में बढ़कर 16.29 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 6.15 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो पाई थी। खरीफ दलहन में मूंग की बुआई राज्य में 9.07 लाख हेक्टेयर में और मोठ की 4.45 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि में इनकी बुआई क्रमश: 4.90 लाख हेक्टेयर में और 34 हजार हेक्टेयर में ही हो पाई थी।

धान, ज्वार, बाजरा एवं मक्का की बुआई चालू खरीफ में 26.62 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जोकि पिछले साल की समान अवधि के 15.09 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। बाजरा की बुआई चालू सीजन में बढ़कर 21.42 लाख हेक्टेयर में, मक्का की 1.68 लाख हेक्टेयर में और ज्वार की 2.71 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक इनकी बुआई क्रमश:  9.02 लाख हेक्टेयर, 4.21 और 1.50 लाख हेक्टेयर में हुई थी।

05 जुलाई 2022

बासमती चावल

 भारतीय निर्यातको ने पिछले सप्ताह ईरान से बासमती चावल के जो सौदे किये थे उन सौदों की
की शिप्मैन्ट कुछ भारतिय निर्यातक 20 से 22 जुलाई को ईरान को रवाना करेंगे

शिपमैन्ट के चलते भारतीय घरेलू बाजार मे आने बाले 15 दिन बहूत महात्यपूर्ण रह सकते हैं इस शिप्मैन्ट के चलते भारतीय घरेलू बाजार मे 1/2 दिन के अन्दर कुछ और नये बासमती खरिदार देखने को मिल सकते हैं

उधर सऊदि अरब से बासमती चावल की  1121 स्टीम और 1401 स्टीम के साथ साथ बासमती सेले मे भी हज के चलते अच्छी मॉग निकलने लगी है
जिसके चलते घरेलु बाजार मे पुसा सेला मे 3/4 दिनो मे करीब रू.300/400 कि तेजी़ देखने को मिली है|

हाला के जिन भारतीय बडे़ निर्यातकों के पास सौदों की मात्रा का चावल मौजुद है वह निर्यातक बाजार मे धीरे धीरे चावल परचेज़ कर के अपने सौदों का शिप्मैन्ट पूरा कर सकते हैं

और कुछ भारतीय निर्यातक चावल से खाली हैं बह निर्यातक केवल बाजार पर ही निरभर हैं
हो सकता है अगले कुछ दिनो मे कहीं बाजार मे अफरा तफरी का माहौल न बन जाऐ|भारतीय घरेलू बाजार मे पहले से ही चावल की कमी है ऐसे मे घरेलु चावल बाजार पर अभि कोई दवाब नहीं दिख रहा है