कुल पेज दृश्य

14 जुलाई 2015

गेहूं की सरकारी खरीद 280 लाख टन के पार


भारतीय खाद्य निगम ने गेहूं की खरीद बंद की
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू रबी विपणन सीजन 2015-16 में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 280.87 लाख टन गेहूं की खरीद की है जोकि पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक नहीं हो रही है जिसकी वजह से एफसीआई ने चालू रबी विपणन सीजन में खरीद बंद कर दी है।
एफसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू रबी विपणन सीजन में एमएसपी पर 280.87 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है जबकि पिछले रबी विपणन सीजन में निगम ने 280.23 लाख टन गेहूं की खरीद की थी। अभी तक हुई कुल खरीद में पंजाब की हिस्सेदारी 103.43 लाख टन, हरियाणा की 67.77 लाख टन, उत्तर प्रदेष की 22.67 लाख टन और मध्य प्रदेष की 73.09 लाख टन है। राजस्थान से चालू रबी विपणन सीजन में 13 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।
उन्होंने बताया कि सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक समाप्त हो गई है इसलिए निगम ने खरीद बंद कर दी है।.......आर एस राणा

उत्पादक राज्यों में बारिष की कमी से हल्दी में तेजी की संभावना


निर्यातकों के साथ घरेलू मसाला कंपनियों की आगामी दिनों में बढ़ेगी मांग
आर एस राणा
नई दिल्ली। जून महीने में हल्दी के प्रमुख उत्पादक राज्यों में हुई अच्छी बारिष से बुवाई तो पिछले साल की तुलना में बढ़ी है लेकिन पिछले पंद्रह-बीस दिनों से बारिष नहीं होने के कारण स्टॉकिस्टों की खरीद हल्दी में बढ़ गई है। इसीलिए सप्ताहभर में उत्पादक मंडियो में हल्दी की कीमतों में 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आ चुकी है। रमजान का महीना समाप्त होने के बाद खाड़ी देषों की आयात मांग तो बढ़ेगी ही, साथ में घरेलू मसाला कंपनियों की मांग भी तेजी आयेगी।
हल्दी कारोबारी पूनम चंद गुप्ता ने बताया कि हल्दी में घरेलू मसाला कंपनियों की मांग बढ़ी हुई है जिससे कीमतों में तेजी देखी जा रही है। निजामाबाद मंडी में मंगलवार को हल्दी के भाव बढ़कर 7,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गए जबकि इरोड़ मंडी में भाव बढ़कर 7,800 से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। इरोड़ में हल्दी की दैनिक आवक 4,000 बोरी (एक बोरी-70 किलो) की हो रही है जबकि दैनिक सौदे 4,500 से 5,000 बोरियों के हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि रमजान के बाद खाड़ी देषों की आयात मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे भाव में तेजी बनी रह सकती है।
हल्दी व्यापारी एस सी गुप्ता ने बताया कि जून महीने में हल्दी के उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिष हुई थी जिसकी वजह से हल्दी की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है लेकिन उत्पादक राज्यों में पिछले पंद्रह-बीस दिनों से बारिष नहीं हुई है जबकि इस समय फसल को एक पानी की सख्त जरुरत है। ऐसे में हल्दी की कीमतों में तेजी-मंदी काफी हद तक बारिष पर निर्भर करेगी। अगर सप्ताहभर में उत्पादक क्षे़त्रों में अच्छी बारिष नहीं हुई तो फिर कीमतों में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी और भी आ सकती है, हॉ अगर इस दौरान एक-दो अच्छी बारिष हो गई तो फिर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। उन्होंने बताया कि हल्दी की उपलब्धता है तथा आगामी दिनों में निर्यात मांग जरुर बढ़ेगी जिससे अच्छी गुणवत्ता की हल्दी में मांग अच्छी रहेगी।
भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार वित वर्ष 2014-15 के दौरान हल्दी का निर्यात बढ़कर 86,000 टन का हुआ है जबकि वित वर्ष 2013-14 में इसका निर्यात 77,500 टन का हुआ था। मसाला बोर्ड ने वित वर्ष 2014-15 में हल्दी के निर्यात का लक्ष्य 80,000 टन का रखा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हल्दी का भाव 3.53 डॉलर प्रति किलो है जबकि पिछले साल की समान अवधि में भी विष्व बाजार यही भाव थे।.......आर एस राणा

13 जुलाई 2015

स्टॉक कम होने के बावजूद भी गुड़ की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में प्रमुख उत्पादक मंडी मुज्जफरगनर में गुड़ का स्टॉक 8.73 लाख कट्टो (एक कट्टा-40 किलो) का ही हुआ है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2 लाख कट्टे कम है। इसके बावजूद भी चीनी के दाम कम होने के कारण गुड़ की कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है।
फैडरेशन आफ गुड़ ट्रेडर्स के अध्यक्ष अरुण खंडेलवाल ने बताया कि चालू सीजन में प्रमुख उत्पादक मंडी में मुज्जफरनगर में केवल 8.73 लाख कट्टों का ही गुड़ का स्टॉक हो पाया है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 2 लाख कट्टे कम है। स्टॉक कम होने के बावजूद भी खपत राज्यों की मांग कमजोर होने से गुड़ की कीमतों में गिरावट बनी हुई है। पिछले सप्ताह मंडियों में गुड़ की कीमतों में करीब 50 से 60 रुपये प्रति 40 किलो की गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि चालू सीजन में चीनी के भाव काफी नीचे बने हुए हैं तथा चीनी की कीमतों में अभी तेजी की संभावना भी नहीं है। ऐसे में गुड़ की कीमतों में भी तेजी की उम्मीद नहीं है। सोमवार को मुज्जफरनगर मंडी में गुड़ चाकू के भाव 980 से 1,040 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
गुड़ कारोबारी देशराज ने बताया कि महाराष्ट्र के पूना लाईन में नए गुड़ की आवक शुरु हो गई है साथ ही, मध्य प्रदेश में भी नए गुड़ की आवक हो रही है। यही कारण है कि गुड़ में मांग कमजोर बनी हुई है। मुज्जफरनगर मंडी में गुड़ के भाव 2,400 से 2,600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे है जबकि उत्तर प्रदेश में चीनी के एक्स फैक्ट्री भाव 2,200 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल है।......आर एस राणा

बासमती चावल के निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी


चालू वित्त वर्ष में बासमती चावल का निर्यात 10 फीसदी बढ़ने का अनुमान
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल से मई के दौरान देश से बासमती चावल के निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 7.8 लाख टन का हो चुका है। हालांकि मूल्य के हिसाब से बासमती चावल के निर्यात में इस दौरान 13 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष में देश से बासमती चावल के निर्यात में कुल 10 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई के दौरान बासमती चावल के निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल निर्यात 7.8 लाख टन का हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2014-15 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में देश से 6.22 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था। एपीडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों में निर्यात में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमतें कम होना भी है। फसल सीजन 2014-15 में देश में बासमती चावल की पैदावार ज्यादा हुई थी जिसकी वजह से घरेलू बाजार में भाव कम रहे। उन्होंने बताया कि बासमती चावल की पैदावार बढ़कर इस दौरान 80 लाख टन की हुई जबकि इसके पिछले साल पैदावार 67 लाख टन की हुई थी। हालांकि निर्यातकों की मांग बढ़ने से चालू महीने में घरेलू मंडियों में बासमती चावल की कीमतों में तेजी आई है। उत्पादक मंडियों में पूसा-1,121 बासमती चावल सेला की कीमतें बढ़कर 4,400 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के अप्रैल-मई में मूल्य के हिसाब से 12.79 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 4,650.07 करोड़ रुपये का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 5,331.93 करोड़ रुपये मूल्य का निर्यात हुआ था।
एपीडा के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में देश से कुल 37 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था जबकि इसके पिछले वित्त वर्ष 2013-14 में देश से कुल 37.5 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था।
बासमती चावल में इस समय निर्यात मांग अच्छी अच्छी होने से मंडियों में बासमती धान की कीमतों में तेजी आई है। हरियाणा की करनाल मंडी में पूसा 1,121 बासमती धान के भाव 2,400 रुपये और नरेला मंडी में 2,300 से 2,350 रुपये प्रति क्विंटल रहे। बासमती धान की कीमतों में सप्ताहभर में करीब 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में धान की रोपाई 89.49 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 94.73 लाख हैक्टेयर में हुई थी।.....आर एस राणा

10 जुलाई 2015

दलहन, तिलहन और कपास की बुवाई में भारी बढ़ोतरी


धान की रोपाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जून महीने में हुई अच्छी बारिष से दलहन, तिलहन के साथ ही कपास की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि धान की रोपाई पिछले साल की तुलना में पिछड़ी र्है। चालू खरीफ में अभी तक देषभर में 445.11 लाख हैक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 275.10 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई बढ़कर 32.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 22.71 लाख हैक्टेयर में इनकी बुवाई हुई थी। खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की बुवाई 13.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 5.25 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से उड़द की बुवाई बढ़कर 8.24 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 2.26 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। मूंग की बुवाई चालू खरीफ में 7.64 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 3.44 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 101.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 22.24 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की बुवाई बढ़कर 75.39 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.90 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुवाई बढ़कर चालू खरीफ में 21.65 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक मूंगफली की बुवाई 11.69 लाख हैक्टेयर में हुई थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 81.80 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मोटे अनाजों की बुवाई 38.36 लाख हैक्टेयर में हुई थी। धान की रोपाई चालू खरीफ में 89.49 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 94.73 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
कपास की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 87.83 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.10 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। गन्ने की बुवाई चालू खरीफ में 44.29 लाख हैक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 43.92 लाख हैक्टेयर में गन्ने की बुवाई हो चुकी थी।.......आर एस राणा

Brazil Completes Coffee Harvesting About 52%-Safras




Farmers have completed around 21.9%of  coffee harvesting in the region of  cooperative Cooxupe as of July 3,2015 which is below than 42.5% of last year record during the same period of time. In 2013, it was harvested around 31.5% during the corresponding period of time. As whole harvesting of Brazil have been completed around 52% of the estimated 50.4 million bags crop as on 7th July 2015 which less than 55% of previous year harvesting pace as southeast coffee belt of Brazil has been wet in early July 2015. On the other hand, total sales is recorded at 27% of harvested crop of this season.

Malaysia's Palm Oil Ending Stocks Lower By 4.33 Percent In June: MPOB




Malaysia's Palm oil ending stocks for June 2015 was at 2,151,287 tons (2,248,577 tons), down 4.33 percent from May 2015. Trade estimates estimated Malaysia’s Palm Oil ending stocks at 2.12 million tons. Production for June was at 1,763,928 tons (1,810,709 tons), down by 2.58 percent from May 2015. Exports were higher by 5.19 percent at 1,697,256 tons (1,613,566 tons). Imports were higher by 8.40 percent at 79,396 tons (73,241 tons). Values in brackets are figures of May 2015.