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10 जुलाई 2015

GASC Buys 1.8 Lakh Tonne Russian Wheat At $212.26 Per T




Egypt's state grain buyer-GASC has bought 1.8  lakh tonne of Russian and Ukrainian wheat in a tender for Aug. 11-20  shipment.It bought 60,000 tonnes of Russian wheat from Cargill, another 60,000 tonnes of Russian wheat from Olam and 60,000 tonnes of Ukrainian wheat from Olam.
 
It has bought wheat at an average price of $212.26 a tonne cost and freight,  60,000 tonnes of Russian wheat from Cargill at $202 a tonne on a free-on-board (fob) basis and $10 a tonne freight from  National Navigation 60,000 tonnes of Russian wheat from Olam at $202.40 a tonne fob and $10 a tonne freight from National Navigation 60,000 tonnes of Ukrainian wheat from Olam at $200.50 a tonne fob and $11.88 a tonne freight from National  Navigation-Reuters

खाद्य तेल पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग

सोयाबीन प्रसंस्करण इकाइयों के एक प्रमुख मंच ने सरकार से मांग की है कि वह खाद्य तेल के आयात शुल्क को बढ़ाकर घरेलू किसानों और तेल प्रसंस्करण इकाइयों के हितों की रक्षा करे। इंदौर स्थित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के चेयरमैन डेविश जैन ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को हाल में इस संबंध में पत्र भेजा है। संगठन ने मांग की है कि कच्चे खाद्य तेल पर आयात शुल्क 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 25 प्रतिशत और रिफाइंड खाद्य तेल पर आयात शुल्क को 15 फीसद से बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाए। उन्होंने कहा, 'भारत हर साल करीब 1.10 करोड़ टन खाद्य तेल आयात कर रहा है। इससे न केवल देश का कारोबारी संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि प्रसंस्करणकर्ताओं और किसानों के हित भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।' (BS Hindi)

मूंगफली दाने के निर्यात में कमी के बावजूद भी कीमतों में तेजी का रुख


आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में मूंगफली दाने का निर्यात घटकर 89,023 टन का ही हुआ है, इसके बावजूद भी उत्पादक मंडियों में भाव तेज बने हुए हैं। षुक्रवार को राजकोट मंडी में मूंगफली के भाव बढ़कर 4,800 से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
मूंगफली के थोक कारोबारी समीर भाई षाह ने बताया कि उत्पादक मंडियों में मूंगफली की दैनिक आवक काफी कम हो गई है जबकि उत्पादक राज्यों गुजरात और राजस्थान में चालू महीने में अच्छी बारिष नहीं हुई है। चालू महीने में होने वाली मानसूनी बारिष खरीफ में मूंगफली की पैदावार तय करेगी। वैसे भी पिछले साल खरीफ में सीजन में मूंगफली की पैदावार में भारी गिरावट आई थी। यहीं कारण है कि इस समय मूंगफली में मिलों की मांग अच्छी बनी हुई है जिससे भाव तेज चल रहे है।
एपीडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में मूंगफली दाने का निर्यात घटकर 89,023 टन का ही हुआ है जबकि वित्त वर्ष 2014-15 के पहले दो महीनों में 1,03,827 टन का निर्यात हुआ था। मूंगफली व्यापारी दया लाल ने बताया कि पिछले साल खरीफ के साथ रबी सीजन में भी मूंगफली की पैदावार में कमी आई थी जिसकी वजह से इस समय उत्पादक मंडियों में आवक कम है जबकि इस समय मूंगफली तेल में मांग अच्छी बनी हुई। मूंगफली तेल के भाव बढ़कर राजकोट में 1,100 रुपये प्रति 10 किलो हो गए।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में मूंगफली की पैदावार घटकर 66.48 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 97.14 लाख टन की हुई थी। खरीफ 2014-15 में मूंगफली की पैदावार 50.57 लाख टन की हुई थी जबकि इसके पिछले साल खरीफ में 80.58 लाख टन की पैदावार हुई थी। रबी में भी पैदावार 15.91 लाख टन की ही हुई थी जबकि पिछले साल रबी सीजन में 16.56 लाख टन मूंगफली का उत्पादन हुआ था।......आर एस राणा

09 जुलाई 2015

चालू महीने में बारिष नहीं होने से सोयाबीन की फसल को नुकसान की आषंका


जून महीन में हुई अच्छी बारिष से 90 फीसदी क्षेत्रफल में हो चुकी है बुवाई
आर एस राणा
नई दिल्ली। सोयाबीन के प्रमुख उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेष, महाराष्ट्र और गुजरात में जून महीने में हुई अच्छी बारिष से 90 फीसदी क्षेत्रफल में बुवाई पूरी हो चुकी है लेकिन पिछले आठ-दस दिनों से उत्पादक राज्यों में बारिष नहीं होने से फसल को नुकसान होने की आषंका बनी हुई है। हालांकि मध्य प्रदेष के ग्वालियर जिले में गुरुवार को बारिष हुई लेकिन अन्य जिलों में अभी भी बारिष नहीं हुई है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (सोपा) के अध्यक्ष डेविष जैन ने बताया कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में जून महीने में अच्छी बारिष हुई थी जिससे सोयाबीन की बुवाई करीब 90 फीसदी क्षेत्रफल में पूरी हो चुकी है। चालू महीने में अभी तक उत्पादक राज्यों में बारिष नहीं हुई है तथा आगामी पांच-सात दिनों में बारिष नहीं हुई तो फिर फसल को नुकसान होने की आषंका है। चालू महीने के मध्य पखवाड़े तक बारिष नहीं हुई तो फिर पांच से सात फीसदी क्षेत्रफल में सोयाबीन की बुवाई दोबारा करनी पड़ सकती है। उन्होंने बताया कि चालू महीने में अगर अच्छी बारिष हुई तो फिर सोयाबीन की बुवाई पिछले साल के 110 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 118 लाख हैक्टेयर में होने का अनुमान है।
सोयाबीन के व्यापारी राजेष अग्रवाल ने बताया कि विष्व बाजार में दाम कम होने के कारण भारत से सोया खली की मांग काफी कमजोर बनी हुई है। विष्व बाजार में ब्राजील, अर्जेटीना और अमेरिका की सोया खली की उपलब्धता ज्यादा है जिससे विष्व बाजार में दाम नीचे बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में सोया खली के भाव 30,500 से 31,000 रुपये प्रति टन चल रहे हैं। उत्पादक मंडियों में सोयाबीन के भाव 3,250 रुपये तथा प्लांट डिलीवरी भाव 3,350 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल हैं। सोया रिफाइंड तेल का भाव इंदौर में 590 रुपये प्रति 10 किलो है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान देष से केवल 34,161 टन सोया खली का ही निर्यात हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,00,746 टन सोया खली का निर्यात हुआ था। भारतीय बंदरगाह पर सोया खली के भाव जून में घटकर 553 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि मई महीने में इसके भाव 592 डॉलर प्रति टन थे।
कृषि मंत्रालय के तीसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2014-15 में देष में सोयाबीन की पैदावार घटकर 107.05 लाख टन होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसकी पैदावार 118.61 लाख टन की हुई थी।....आर एस राणा

केस्टर तेल का निर्यात बढ़ने के बावजूद कीमतों में आई गिरावट


जुलाई मध्य के बाद केस्टर सीड की नई फसल की बुवाई होगी षुरु
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 90,396 टन का हुआ है। हालांकि ग्रीस संकट के कारण चीन के आयात सौदे चालू सप्ताह में कम हुए हैं जिससे उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की कीमतें घट हैं। गुरूवार को उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड के भाव 3,875 से 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
केस्टर तेल के निर्यातक कुषल राज पारिख ने बताया कि ग्रीस संकट का असर केस्टर तेल के आयात सौदों पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि केस्टर तेल का सबसे बड़ा आयातक देष चीन है तथा चालू सप्ताह में इसके सौदे कम हुए है लेकिन उम्मीद है कि चालू महीने में केस्टर तेल का कुल निर्यात पिछले साल के जुलाई महीने के बराबर ही होगा। उन्होंने बताया कि ग्रीस संकट का असर देष से केस्टर तेल के कुल निर्यात पर नहीं पड़ेगा तथा पिछले साल देष से कुल 4.59 लाख टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ था जबकि चालू वित्त वर्ष में इसमें पांच से सात फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। केस्टर तेल के निर्यात सौदे इस समय 1,280 डॉलर प्रति टन की दर से हो रहे हैं।
केस्टर कारोबारी प्रकाष भाई ने बताया कि उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की दैनिक आवक घटकर 30 से 35 हजार बोरी (एक बोरी-75 किलो) की रह गई है लेकिन मिलों की मांग कम होने से भाव में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि जून महीने में उत्पादक राज्यों में अच्छी बारिष हुई थी लेकिन केस्टर सीड की बुवाई 15 जुलाई के बाद षुरु होगी, ऐसे में चालू महीने में होने वाली बारिष केस्टर सीड की फसल के लिए अहम है। पिछले आठ-दस दिनों से उत्पादक राज्यों में बारिष नहीं हुई है ऐसे में उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड की मौजूदा कीमतों में और गिरावट की संभावना नहीं है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएषन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में केस्टर तेल का निर्यात बढ़कर 90,396 टन का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2014-15 के पहले महीनों में 85,837 टन तेल का ही निर्यात हुआ था। एसईए के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 में देष से कुल 4.59 लाख टन केस्टर तेल का निर्यात हुआ था।.....आर एस राणा

07 जुलाई 2015

Monsoon Effects In Karnataka Coffee Growing Areas




Late monsoon in the biggest coffee growing area in Karnataka,Coorg coffee growers have experienced droppings of  Robusta  coffee bean prematurely due to heavy rains in the last two weeks of June,wherein the record crop estimation  by Coffee board for the 2015-16 crop of 355.600 lakh tons  may be affected

Egypt Restricts Cotton Import To Protect Local Growers


Agriculture Ministry of Egypt said it would stop cotton imports from all origins to protect local production. The country aims to protect the local growers and resolve marketing issues of cotton by restricting the fiber imports.