04 जुलाई 2012
जुलाई-अगस्त में मानसून सक्रिय होने की उम्मीद
तेज हो सकती है जून में पिछड़ी खरीफ की बुवाई
अभी तक बारिश में कमी - चालू मानसून सीजन में पहली जून से पहली जुलाई तक देशभर में सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे कम बारिश 71 फीसदी उत्तर-पश्चिमी भारत में हुई है। जबकि मध्य भारत में अभी तक सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश हुई है। दक्षिण भारत में भी पहली जून से पहली जुलाई तक सामान्य से 29 फीसदी कम बारिश हुई।
जून महीने में हुई कम बारिश से देश के कई हिस्सों में खरीफ की बुवाई धीमी पड़ गई। लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) को जुलाई और अगस्त में लगभग सामान्य बारिश होने की उम्मीद है। इससे खरीफ की बुवाई पर पड़े असर की भरपाई हो सकती है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार जुलाई महीने में देशभर में सामान्य के मुकाबले 98 फीसदी और अगस्त महीने में 96 फीसदी बारिश होने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत में सप्ताहभर में बारिश शुरू होने की संभावना है।
आईएमडी के प्रवक्ता एस. सी. भान ने सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि जुलाई और अगस्त महीने में अच्छी बारिश होने की संभावना है। लंबी अवधि के मौसम के अनुसार जुलाई महीने में 98 फीसदी बारिश होने का अनुमान है जबकि अगस्त महीने में 96 फीसदी बारिश होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि जून महीने में कम हुई बारिश की भरपाई जुलाई-अगस्त में होने का अनुमान है।
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में सप्ताहभर में मानसूनी बारिश शुरू होने का अनुमान है। आईएमडी के अनुसार चालू मानसून सीजन में पहली जून से पहली जुलाई तक देशभर में सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे कम बारिश उत्तर-पश्चिमी भारत में 71 फीसदी हुई है। जबकि मध्य भारत की हालत भी अच्छी नहीं है। यहां अभी तक सामान्य से 39 फीसदी कम बारिश हुई है।
दक्षिण भारत में भी पहली जून से पहली जुलाई तक सामान्य से 29 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि उत्तर पूर्वी भारत में हालात कुछ बेहतर है लेकिन यहां भी सामान्य से सात फीसदी कम बारिश हुई है। (Business Bhaskar....R S Rana)
तय हो सकती है प्राकृतिक रबर की न्यूनतम कीमत
वैश्विक बाजार में प्राकृतिक रबर की कीमतों में गिरावट को थामने के लिए विश्व का दूसरे सबसे बड़ा उत्पादक देश इंडोनेशिया दूसरे दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ समझौते के तहत इस जिंस की न्यूनतम कीमत का प्रस्ताव रखने पर विचार कर रहा है। बैंकॉक में रबर की आरएसएस-3 किस्म की कीमत सोमवार को घटकर 183 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई जबकि तीन हफ्ते पहले इसकी कीमत 190 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
इंडोनेशिया के व्यापार मंत्री गीता विरजावन ने कहा - मौजूदा वैश्विक आर्थिक हालात में घटती मांग को देखते हुए इस कदम से प्राकृतिक रबर की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। जकार्ता में अपने कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा - न्यूनतम कीमत की व्यवस्था हमारे कई विकल्पों में से है, जिन पर हम विचार कर रहे हैं। सरकार जल्द ही थाईलैंड और मलयेशिया सरकार से इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेगी, लेकिन इसकी तारीख अभी तय नहीं हो पाई है।
थाईलैंड के कृषि व सहकारिता मंत्री एन. साईकुआ ने कहा - ये तीनों देश प्राकृतिक रबर के वैश्विक उत्पादन में 70 फीसदी का योगदान करते हैं और ये आवश्यकता के मुताबिक संयुक्त रूप से निर्यात को सीमित कर सकते हैं और प्राकृतिक रबर के निर्यात कोटा तय कर सकते हैं। थाईलैंड विश्व में प्राकृतिक रबर का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और 2011 में यहां 35 लाख टन रबर का उत्पादन हुआ जबकि इंडोनेशिया में 30 लाख टन और मलयेशिया में 9.96 लाख टन रबर का उत्पादन हुआ। 2009 में इन देशों के बीच हुआ त्रिपक्षीय समझौता पहले के आर्थिक संकट के दौर में बिक्री घटाने और कीमतों को बनाए रखने में काफी प्रभावी साबित हुआ था।
इस तिमाही में रबर वायदा 28 फीसदी फिसला है, जो साल 2008 के बाद की सबसे खराब तिमाही है और इस साल रबर में अब तक 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है क्योंकि वैश्विक मांग कमजोर रही है। इंडोनेशियाई रबर एसोसिएशन के चेयरमैन ए सुल्तान आमिर ने कहा - न्यूनतम कीमत करीब 4 डॉलर प्रति किलोग्राम तय की जानी चाहिए। तीनों देशों को आपूर्ति के प्रबंधन की योजना भी बनाने की दरकार होगी और उन्हें निर्यात की मात्रा पर भी सहमति बनानी होगी। साथ ही इसके उत्पादन को भी घटाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त कोशिश को प्रभावी बनाने के लिए तीनों देशों को सभी कदम उठाने चाहिए, न कि एकमात्र कदम।
किसानों में टैपिंग का काम घटा दिया है, जिसकी वजह से देश में रबर का उत्पादन 9.7 फीसदी घटकर 28 लाख टन रह जाएगा, जो पूर्व के 30 लाख टन के अनुमान से कम है। इस साल की पहली तिमाही में घरेलू उत्पादन पहले ही एक साल पहले के मुकाबले 6 फीसदी घटकर 7 लाख टन पर आ गया है। एसोसिएशन के आंकड़ों से पता चलता है कि उत्पादन घटने के साथ ही निर्यात भी 8 फीसदी घटकर इस साल 23 लाख टन पर आने की संभावना है। इस साल पहली तिमाही के दौरान इंडोनेशिया ने 5,64,320 टन रबर का निर्यात किया, जो एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 10 फीसदी कम है। (BS HIndi)
पीएमओ ने की पीडीएस में सुधार की समीक्षा
खाद्य सुरक्षा कानून को अमली जामा पहनाने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को एक बैठक में जनवितरण प्रणाली के कंप्यूटरीकरण में हुई प्रगति, इसमें होने वाली गड़बडिय़ों के साथ-साथ भंडारण, अनाज के परिवहन के मुद्दे की समीक्षा की। खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पीएमओ को देश भर में पीडीएस के कंप्यूटरीकरण की प्रगति की जानकारी दी गई और यह भी बताया गया कि राज्य इस मामले में क्या कर रहे हैं।
प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पृष्ठभूमि में यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस कानून केतहत देश की 65 फीसदी आबादी को सस्ते अनाज मुहैया कराने की गारंटी दी जाएगी। यह अधिनियम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की महत्वाकांक्षी परियोजना है और संप्रग सरकार अगले आम चुनाव से पहले इसे लागू करने की कोशिश में जुटी हुई है। पूर्व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने 2012-13 के बजट भाषण में हालांकि हर तरह की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था लेकिन ज्यादातर विशेषज्ञों को लगता है कि राजकोषीय स्थिति को देखते हुए इस साल इस कार्यक्रम को लागू करना सरकार के लिए काफी मुश्किल होगा। अगर इसे लागू किया गया तो सरकार का सालाना सब्सिडी बोझ 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है जबकि अभी यह 75,000 करोड़ रुपये है।
अधिकारियों ने कहा कि यह बैठक और भी महत्वपूर्ण इसलिए हो गई क्योंकि खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने हाल में संसद में कहा था कि देश में जन वितरण प्रणाली के तहत 20 करोड़ लाभार्थी हैं और इनमें से 2 करोड़ फर्जी राशन कार्ड धारक पाए गए हैं। हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन साल 2005 में अनुमान लगाया गया था कि ऐसे 40 फीसदी अनाज लक्षित लोगों तक नहीं पहुंच पाते। हालांकि राशन कार्ड धारकों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है और ट्रकों में जीपीएस लगाकर अनाजों की आवाजाही की निगरानी भी की जा रही है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य पहले ही कई कदम उठा चुका है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। केंद्र चाहता है कि दूसरे राज्य भी छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को अपनाए। जीपीएस की निगरानी व्यवस्था का यह भी फायदा है कि राशन की दुकानों को अनाज की सुपुर्दगी के बाद हकदार लोगों को एसएमएस के जरिए इसकी सूचना दी जा सकती है। (BS Hindi)
सीएआई का सदस्यता रद्द करने का अनुरोध
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने वायदा बाजार नियामक एफएमसी से अपनी सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया है। दरअसल बोर्ड में मतदान के अधिकार को लेकर सीएआई का गैर-कपास सदस्यों से मतभेद है और इसी वजह से सीएआई ने सदस्यता रद्द करने का अनुरोध किया है।
सीएआई के बोर्ड में गैर-कपास सदस्यों को शामिल करने के मामले पर कुछ महीने पहले एफएमसी ने सीएआई से कहा था कि फैसले लेने की प्रक्रिया में वह सिर्फ कपास सदस्यों को ही शामिल करे। इसके अलावा एफएमसी ने कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व सीएमडी एम बी लाल और मुंबई के कपास कारोबारी व निर्यातक शैल एक्सपोट्र्स के एमडी के साथ-साथ उद्योग के दिग्गज विनोद पटोदिया को बोर्ड में शामिल किया था। इन लोगों की नियुक्ति का मकसद सीएआई की रोजाना की गतिविधियों की निगरानी करना था, जहां मोटे तौर पर कुछ सदस्यों का वर्चस्व स्थापित हो गया था। साथ ही इसका मकसद करीब 400 सदस्यों के हितों की रक्षा करना भी था।
एम बी लाल ने कहा - 'एफएमसी ने सीएआई से कहा है कि वह गैर-कपास सदस्यों के मतदान के अधिकार को वापस ले ले क्योंकि यह संगठन प्राथमिक तौर पर कपास के कारोबार से जुड़ा है। कपास के कारोबार में जिनका हित नहीं है, उन्हें फैसला लेने की प्रक्रिया से दूर रखा जाना चाहिए और उनके पास मतदान का अधिकार भी नहीं होना चाहिए ताकि रोजाना की गतिविधियों में अनुशासन स्थापित किया जा सके। चूंकि सीएआई की गतिविधियां उसके अपने उपनियमों से संचालित होती हैं, लिहाजा इसके ठीक तरह से संचालन के लिए अनुशासन जरूरी है।' (BS Hindi)
केंद्रीय पूल से 20 लाख टन गेहूं निर्यात का फैसला
बिजनेस भास्कर नई दिल्ली
केंद्रीय पूल में गेहूं के भारी-भरकम स्टॉक को हल्का करने के लिए सरकार ने सब्सिडी देकर 20 लाख टन गेहूं निर्यात की अनुमति दे दी है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की मंगलवार को हुई बैठक में इस आशय का फैसला लिया गया। गेहूं निर्यात के लिए सरकार ने न्यूनतम दाम 280 डॉलर प्रति टन (करीब 12,700 रुपये) तय किया है।
बैठक के बाद खाद्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो.के.वी. थॉमस ने बताया कि 90 हजार टन गेहूं का निर्यात तुरंत सार्वजनिक कंपनी एसटीसी द्वारा हाल ही में मांगी गई निविदा के माध्यम से किया जाएगा। बाकी बचे गेहूं के निर्यात के लिए सीसीईए वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित करेगी। थॉमस ने कहा कि सरकार पर सब्सिडी का भार नहीं पड़ेगा, लेकिन खाद्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार 20 लाख टन गेहूं का निर्यात करने पर करीब 1,263 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ेगा।
चालू रबी विपणन सीजन में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 12,850 रुपये प्रति टन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की दर से गेहूं की खरीद की है। अन्य खर्चे जोडऩे के बाद इस गेहूं की इकोनॉमिक लागत 18,225 रुपये प्रति टन बैठती है। लुधियाना से कांडला बंदरगाह का रेल से भाड़ा करीब 1,460 रुपये प्रति टन है। इस आधार पर बंदरगाह पर पहुंच गेहूं का भाव 19,680.50 रुपये प्रति टन हो जाएगा। (Business Bhaskar....R S Rana)
मिल्क पाउडर निर्यात बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) के निर्यात में तेजी लाने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि स्टॉक में रखा मिल्क पाउडर जल्दी निर्यात नहीं किया गया तो यह खरीद हो सकता है। पिछले माह सरकार ने देश में आवश्यकता से ज्यादा स्टॉक और डेयरी कंपनियों की खस्ता हाल वित्तीय स्थिति को देखते हुए मिल्क पाउडर के निर्यात की मंजूरी दे दी थी।
चारे की कमी के कारण देश में दूध के उत्पादन पर असर के बारे में पूछे गए एक सवाल पर पवार ने संवाददाताओं को बताया कि दूध की पर्याप्त उपलब्धता अच्छी बात है लेकिन इस समय देश में आवश्यकता से ज्यादा स्टॉक का दबाव है। हमारे पास एक साल की खपत के लिए मिल्क पाउडर उपलब्ध है। इसे खराब होने से बचाने के लिए जल्दी निर्यात किया जाना चाहिए।
मिल्क पाउडर का मूल्य घरेलू बाजार में पिछले साल के 190-200 रुपये प्रति किलो से घटकर 150 रुपये प्रति किलो रह गया है। निर्यात की अनुमति दिए जाने के बावजूद इसका शिपमेंट अभी काफी धीमा है। भारत दूध उत्पादन में दुनिया का सबसे बड़ा देश है। वर्ष 2011 में देश में 12 करोड़ टन दूध का उत्पादन होने का अनुमान है। (Business Bhaskar)
मानसूनी बारिश की कमी से निपटने को पूरी तैयारी
उम्मीदों के सहारे - मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार जुलाई और अगस्त में मानसून अच्छा रहेगा और जून में मानसूनी वर्षा की कमी इन महीनों में पूरी हो जाएगी। हालात उतने खराब नहीं, जितने बताए जा रहे हैं। -शरद पवार, कृषि मंत्री
केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा है कि जून में मानसूनी बारिश 31 फीसदी कम रहने के बाद राज्यों को आकस्मिक योजना बनाकर प्रतिकूल हालात से निपटने के लिए कहा गया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं है क्योंकि जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश होने की संभावना है। पवार ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मानसून के आने में दो सप्ताह की देरी जरूर हुई है लेकिन आगामी दिनों में अच्छी बारिश होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि देश में अभी सूखे जैसे हालात नहीं है। हालांकि कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात में मोटे अनाजों और मूंगफली की शुरूआती बुवाई पर कुछ असर जरूर पड़ा है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के अधिकारियों ने मुझे बताया है कि जुलाई और अगस्त में मानसून अच्छा रहेगा और जून में मानसूनी वर्षा की कमी इन महीनों में पूरी हो जाएगी।
पवार ने कहा कि मानसून में दो सप्ताह की देरी जरूर हुई है लेकिन स्थिति उतनी गंभीर नहीं है, जितनी बताई जा रही है। उम्मीद है अगले सप्ताह में बारिश जोर पकड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश में खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और यदि राज्यों की ओर से मांग आई तो सरकार आपूर्ति के लिए तैयार हैं। राज्यों से किसी भी आकस्मिक योजना के निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। आकस्मिक योजना की जरूरत के लिए बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार चालू मानसून सीजन में पहली जून से तीन जुलाई तक देशभर में सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है। सबसे कम बारिश उत्तर-पश्चिमी भारत में हुई, जहां सामान्य के मुकाबले 71 फीसदी कम बारिश हुई। जबकि मध्य भारत की हालत भी अच्छी नहीं है। यहां अभी तक सामान्य से 36 फीसदी कम बारिश हुई है।
उधर, दक्षिण भारत में भी पहली जून से पहली जुलाई तक सामान्य से 26 फीसदी कम बारिश हुई है। हालांकि उत्तर पूर्वी भारत में हालात कुछ बेहतर हैं लेकिन यहां भी सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। कृषि मंत्रालय के बुवाई आंकड़ों के अनुसार 29 जून तक देशभर में धान की बुवाई में 26 फीसदी की कमी आकर कुल बुवाई 30.72 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 41.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। (Business Bhaskar....R S Rana)
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