ग्लोबल मार्केट में सोना पिछले 4 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है।
सोना 1210 डॉलर के पास कारोबार हो रहा है। अमेरिका में नॉन फार्म
पेरोल डाटा अनुमान से बेहतर आया है। जून में वहां 2,22,000 लोगों को
नौकरियां मिली हैं जबकि बाजार को करीब 1,80,000 नौकरियों का अनुमान था। ऐसे
में अमेरिका में ब्याज दरें और बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। चांदी
में सोने से भी ज्यादा गिरावट आई है और कॉमैक्स पर ये 15.5 डॉलर के नीचे आ
गया है। पिछले हफ्ते चांदी में करीब 7.5 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। चांदी
की कीमतें पिछले 16 महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं। कच्चे तेल में जोरदार तेजी आई है और इसका दाम करीब 1 फीसदी बढ़
गया है। बढ़त के बावजूद नायमैक्स पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 45 डॉलर के
नीचे है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर को अमेरिका में रोजगार के
अच्छे आंकड़ों से सपोर्ट मिला है और इसकी गिरावट पर ब्रेक लग गई है। आज
डॉलर के मुकाबले रुपये में रिकवरी है और 1 डॉलर की कीमत 64.5 रुपये पर आ गई
है।
10 जुलाई 2017
मध्य और दक्षिण भारत में मॉनसून की चाल कमजोर
मध्य और दक्षिण भारत में मॉनसून की चाल कमजोर पड़ गई है। मध्यप्रदेश में इस
सीजन सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश हुई है। जबकि दक्षिण भारत के
तमिलनाडु और केरल में भी चिंताजनक हालात हैं। हालांकि उत्तर भारत में
राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के अलावा उत्तर प्रदेश में भी इस साल अच्छी
बारिश हुई है और अगले 24 घंटे में पूर्वी यूपी और बिहार के अलावा बंगाल और
पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है।
08 जुलाई 2017
एग्री कमोडिटी में आगे की रणनीति कैसे बनाए
एग्री कमोडिटी दलहन,
तिलहन, और मसालों के साथ ही गेहूं, मक्का, जौ, कपास, खल, बिनौला, ग्वार
सीड, चीनी, और कपास आदि की कीमतों में कब आयेगी तेजी तथा आगे की रणनीति
कैसे बनाये, भाव में कब आयेगी तेजी, किस भाव पर स्टॉक करने पर मिलेगा
मुनाफा, क्या रहेगी सरकार की नीति, आयात-निर्यात की स्थिति के साथ ही विदेष
में कैसी है पैदावार, इन सब की स्टीक जानकारी के लिए हमसे
जुड़े............एग्री कमोडिटी की दैनिक रिपोर्ट के साथ ही मंडियों के ताजा
भाव आपको ई-मेल से हिंदी में भेजे जायेंगे
एग्री जिंसों के अलावा किराना में हल्दी, जीरा, धनिया, लालमिर्च, इलायची, कालीमिर्च आदि की जानकारी भी हिंदी में ई-मेल के माध्यम से
दी जायेगी। हमें ई-मेल करे या फिर फोन पर संपक करें।
............एक महीना रिपोर्ट लेने का चार्ज मात्र 1,000 रुपये, 6 महीने का 5,000 रुपये और एक साल का केवल 8,000 रुपये........
आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
rsrana2017@yahoo.com
mobile no. 09811470207
आर एस राणा
rsrana2001@gmail.com
rsrana2017@yahoo.com
mobile no. 09811470207
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में मक्का की बुवाई बढ़ी, कर्नाटका, यूपी में घटी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मक्का की बुवाई बढ़ी है, वहीं कर्नाटका, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में पिछड़ रही है। हालांकि चालू खरीफ में मक्का की कुल बुवाई बढ़कर 41.49 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 41.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
दक्षिण भारत की मंडियों में मक्का में स्टार्च मिलों के साथ ही पोल्ट्री उद्योग की मांग अच्छी है जिससे मौजूदा भाव में और भी 25 से 30 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आने का अनुमान है। निजामाबाद मंडी में मक्का के भाव बढ़कर 1,630 रुपये, दावणगिरी में 1,700 रुपये, करनीनगर में 1,580 रुपये, सांगली मंडी में 1,730 रुपये, जलगांव में 1,450 रुपये तथा मल्कापुर में 1,660 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश और पंजाब में साठी मक्का की आवक कम हो रही है, लेकिन जुलाई के आखिर में इसकी आवक कम हो जायेगी, जबकि खरीफ की नई फसल की आवक उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में सितंबर में बनेगी। इसलिए अगस्त में उत्तर भारत के राज्यों में भी इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है। दिल्ली में मक्का के भाव 1,300 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मध्य प्रदेश में मक्का की बुवाई बढ़कर 8.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 5.52 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। उधर महाराष्ट्र में मक्का की बुवाई बढ़कर 3.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 2.20 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
उधर कर्नाटका में चालू खरीफ में मक्का की बुवाई अभी तक केवल 4.62 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 7.97 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। उधर उत्तर प्रदेश में भी मक्का की बुवाई अभी तक केवल 3.02 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 4.48 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में राजस्थान में मक्का की बुवाई अभी तक केवल 4.13 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 5.83 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। बिहार में मक्का की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 2.40 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 1.52 लाख हैक्टेयर में, हिमाचल प्रदेश में 2.79 लाख हैक्टेयर में तथा तेलंगाना में 2.42 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।............... आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में मक्का की बुवाई बढ़ी है, वहीं कर्नाटका, उत्तर प्रदेश तथा बिहार में पिछड़ रही है। हालांकि चालू खरीफ में मक्का की कुल बुवाई बढ़कर 41.49 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 41.23 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
दक्षिण भारत की मंडियों में मक्का में स्टार्च मिलों के साथ ही पोल्ट्री उद्योग की मांग अच्छी है जिससे मौजूदा भाव में और भी 25 से 30 रुपये प्रति क्विंटल का सुधार आने का अनुमान है। निजामाबाद मंडी में मक्का के भाव बढ़कर 1,630 रुपये, दावणगिरी में 1,700 रुपये, करनीनगर में 1,580 रुपये, सांगली मंडी में 1,730 रुपये, जलगांव में 1,450 रुपये तथा मल्कापुर में 1,660 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश और पंजाब में साठी मक्का की आवक कम हो रही है, लेकिन जुलाई के आखिर में इसकी आवक कम हो जायेगी, जबकि खरीफ की नई फसल की आवक उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश की मंडियों में सितंबर में बनेगी। इसलिए अगस्त में उत्तर भारत के राज्यों में भी इसके भाव में सुधार आने का अनुमान है। दिल्ली में मक्का के भाव 1,300 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मध्य प्रदेश में मक्का की बुवाई बढ़कर 8.64 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई केवल 5.52 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। उधर महाराष्ट्र में मक्का की बुवाई बढ़कर 3.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 2.20 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
उधर कर्नाटका में चालू खरीफ में मक्का की बुवाई अभी तक केवल 4.62 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 7.97 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। उधर उत्तर प्रदेश में भी मक्का की बुवाई अभी तक केवल 3.02 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 4.48 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में राजस्थान में मक्का की बुवाई अभी तक केवल 4.13 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 5.83 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। बिहार में मक्का की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक 2.40 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 1.52 लाख हैक्टेयर में, हिमाचल प्रदेश में 2.79 लाख हैक्टेयर में तथा तेलंगाना में 2.42 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।............... आर एस राणा
उत्तर भारत के साथ महाराष्ट्र में कपास की बुवाई बढ़ी, गुजरात में घटी
आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के साथ ही महाराष्ट्र में कपास की बुवाई बढ़ी है लेकिन गुजरात के साथ ही मध्य प्रदेश में पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में महाराष्ट्र में कपास की बुवाई बढ़कर 21.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 18.97 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। उधर गुजरात में चालू खरीफ में अभी तक कपास की बुवाई केवल 12.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 20.91 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी।
तेलांगाना में भी चालू खरीफ में कपास बढ़कर अभी तक 12.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.33 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। पंजाब में खरीफ में कपास की बुवाई बढ़कर 3.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.56 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हुई थी। हरियाणा में चालू खरीफ में कपास की बुवाई 6.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 4.98 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से राजस्थान में कपास की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 4.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 3.51 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुवाई अभी तक केवल 4.56 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 4.94 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश में कपास की बुवाई 2.44 लाख हैक्टेयर में, कर्नाटका में 1.99 लाख हैक्टेयर में, उड़ीसा में 0.94 लाख हैक्टेयर में और तमिलनाडु 0.05 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हुई है।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की कुल बुवाई बढ़कर 71.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 67.88 लाख हैक्टेयर में हुई थी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में कपास की कुल बुवाई 8 से 10 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान है जबकि उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश अच्छी हो रही है तथा आगे भी मानसून सामान्य रहने का अनुमान है। ऐसे में कपास के उत्पादन में चालू खरीफ में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसलिए आगामी दिनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट ही आने का अनुमान है।................ आर एस राणा
नई दिल्ली। उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के साथ ही महाराष्ट्र में कपास की बुवाई बढ़ी है लेकिन गुजरात के साथ ही मध्य प्रदेश में पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में महाराष्ट्र में कपास की बुवाई बढ़कर 21.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 18.97 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। उधर गुजरात में चालू खरीफ में अभी तक कपास की बुवाई केवल 12.68 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में राज्य में 20.91 लाख हैक्टेयर में कपास की बुवाई हो चुकी थी।
तेलांगाना में भी चालू खरीफ में कपास बढ़कर अभी तक 12.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.33 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। पंजाब में खरीफ में कपास की बुवाई बढ़कर 3.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 2.56 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हुई थी। हरियाणा में चालू खरीफ में कपास की बुवाई 6.30 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 4.98 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। इसी तरह से राजस्थान में कपास की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 4.61 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 3.51 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी।
मध्य प्रदेश में चालू खरीफ में कपास की बुवाई अभी तक केवल 4.56 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक राज्य में 4.94 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। अन्य राज्यों में आंध्रप्रदेश में कपास की बुवाई 2.44 लाख हैक्टेयर में, कर्नाटका में 1.99 लाख हैक्टेयर में, उड़ीसा में 0.94 लाख हैक्टेयर में और तमिलनाडु 0.05 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हुई है।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में कपास की कुल बुवाई बढ़कर 71.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 67.88 लाख हैक्टेयर में हुई थी। जानकारों के अनुसार चालू सीजन में कपास की कुल बुवाई 8 से 10 फीसदी ज्यादा होने का अनुमान है जबकि उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश अच्छी हो रही है तथा आगे भी मानसून सामान्य रहने का अनुमान है। ऐसे में कपास के उत्पादन में चालू खरीफ में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसलिए आगामी दिनों में घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट ही आने का अनुमान है।................ आर एस राणा
चालू खरीफ में बाजरा की बुवाई ज्यादा, ज्वार की कम
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां बाजरा की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है, वहीं ज्वार की बुवाई पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार बाजरा की बुवाई बढ़कर 30.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 18.88 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 6.21 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक ज्वार की बुवाई 7.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
बाजरा की बुवाई चालू खरीफ में प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में बढ़कर 23.97 लाख हैक्टयेर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में बाजरा की बुवाई केवल 13.41 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। महाराष्ट्र में बाजरा की बुवाई बढ़कर 2.37 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 0.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। हरियाणा में बाजरा की बुवाई बढ़कर 2.06 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.71 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। कर्नाटका में बाजरा की बुवाई 1.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
बाजरा की कीमतों में महीने भर में भारी गिरावट आई है, दिल्ली में बाजरा के भाव 1,140 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि राजस्थान और हरियाणा की मंडियों बाजरा के भाव 1,070 से 1,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। उत्पादक राज्यों की मंडियों में ज्वार के भाव 1,800 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में बाजरा में हल्की मांग बढ़ेगी, जिससे हल्का सुधार तो आने का अनुमान है। चालू खरीफ में जहां बुवाई ज्यादा होने का अनुमान है, साथ ही मानसूनी बारिश भी अच्छी हो रही है इसलिए बाजरा की कीमतों में नई फसल तक बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।................ आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में जहां बाजरा की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है, वहीं ज्वार की बुवाई पिछड़ रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार बाजरा की बुवाई बढ़कर 30.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 18.88 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 6.21 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक ज्वार की बुवाई 7.19 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
बाजरा की बुवाई चालू खरीफ में प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में बढ़कर 23.97 लाख हैक्टयेर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में बाजरा की बुवाई केवल 13.41 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। महाराष्ट्र में बाजरा की बुवाई बढ़कर 2.37 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 0.95 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। हरियाणा में बाजरा की बुवाई बढ़कर 2.06 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 1.71 लाख हैक्टेयर में बुवाई हुई थी। कर्नाटका में बाजरा की बुवाई 1.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।
बाजरा की कीमतों में महीने भर में भारी गिरावट आई है, दिल्ली में बाजरा के भाव 1,140 से 1,150 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि राजस्थान और हरियाणा की मंडियों बाजरा के भाव 1,070 से 1,100 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। उत्पादक राज्यों की मंडियों में ज्वार के भाव 1,800 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार आगामी दिनों में बाजरा में हल्की मांग बढ़ेगी, जिससे हल्का सुधार तो आने का अनुमान है। चालू खरीफ में जहां बुवाई ज्यादा होने का अनुमान है, साथ ही मानसूनी बारिश भी अच्छी हो रही है इसलिए बाजरा की कीमतों में नई फसल तक बड़ी तेजी की संभावना नहीं है।................ आर एस राणा
07 जुलाई 2017
खरीफ फसलों की बुवाई में आई भारी तेजी
धान के साथ ही कपास, दलहन और मोटे अनाजों की बुवाई बढ़ी
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में धान के साथ ही कपास, दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई आगे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई बढ़कर 404.27 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 371.39 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। देशभर में मानसूनी बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में भारी तेजी आई है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई बढ़कर चालू रबी में 79.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 78.28 लाख हैक्टेयर में रौपाई ही हो पाई थी। दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 44.11 लाख हैक्टेयर में ही चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में दालों की बुवाई 35.88 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। चालू खरीफ में जहां अरहर की बुवाई पिछड़ रही है, वहीं मूंग और उड़द की बुवाई आगे चल रही है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 72.87 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 69.74 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। तिलहनों में जहां सोयाबीन की बुवाई आगे चल रही है, वहीं मूंगफली की बुवाई पिछड़ रही है। मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 80.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है तथा पिछले साल इस समय तक 70.11 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है जबकि मक्का की बुवाई भी आगे चल रही है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 71.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 67.89 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 47.93 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.22 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...... आर एस राणा
आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में धान के साथ ही कपास, दलहन के साथ ही मोटे अनाजों की बुवाई आगे चल रही है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की बुवाई बढ़कर 404.27 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 371.39 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। देशभर में मानसूनी बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में भारी तेजी आई है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई बढ़कर चालू रबी में 79.81 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 78.28 लाख हैक्टेयर में रौपाई ही हो पाई थी। दलहन की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 44.11 लाख हैक्टेयर में ही चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में दालों की बुवाई 35.88 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो पाई थी। चालू खरीफ में जहां अरहर की बुवाई पिछड़ रही है, वहीं मूंग और उड़द की बुवाई आगे चल रही है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 72.87 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 69.74 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई थी। तिलहनों में जहां सोयाबीन की बुवाई आगे चल रही है, वहीं मूंगफली की बुवाई पिछड़ रही है। मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 80.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है तथा पिछले साल इस समय तक 70.11 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हुई थी। मोटे अनाजों में बाजरा की बुवाई में भारी बढ़ोतरी हुई है जबकि मक्का की बुवाई भी आगे चल रही है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 71.82 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 67.89 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 47.93 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.22 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...... आर एस राणा
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
