नई दिल्ली। दाल मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से घरेलू बाजार में गुरुवार को उड़द एवं अरहर की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस दौरान मसूर एवं चना के दाम स्थिर हो गए। मूंग के दाम उत्पादक राज्यों में स्थिर से कमजोर हुए।
बर्मा का दलहन बाजार 1 मई को भी बंद रहेगा।
बर्मा से आयातित उड़द एफएक्यू एवं एसक्यू की कीमत चेन्नई में कमजोर हुई। उड़द एफएक्यू के भाव मई शिपमेंट के कमजोर होकर 820 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए, जबकि इस दौरान एसक्यू उड़द के भाव मई शिपमेंट के 915 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए। ब्राजील की उड़द के दाम जून एवं जुलाई शिपमेंट के कमजोर होकर 880 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ रह गए।
लेमन अरहर फसल सीजन 2026 के भाव चेन्नई में मई शिपमेंट के भाव 840 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। इस दौरान फसल सीजन 2025 के भाव चेन्नई में मई शिपमेंट के 815 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ बोले गए।
चेन्नई में उड़द की कीमतों में मंदा आया है, जबकि इस दौरान बर्मा में अवकाश के कारण बाजार बंद रहा। घरेलू बाजार में दाल मिलों की खरीद कमजोर बनी रहने से उड़द की कीमतों में नरमी आई। जानकारों के अनुसार हाल ही में बर्मा में उड़द की कीमतों में तेजी, मंदी बनी रही थी, जिस कारण दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है। आयातकों को इन भाव में डिस्पैरिटी लग रही है, जिस कारण नीचे दाम पर बिकवाली भी कम आ रही है। इसलिए घरेलू बाजार में उड़द की कीमतों में ज्यादा मंदे के आसार नहीं है। आयातित उड़द की शिपमेंट पहले की तुलना में बढ़ी है, जबकि खपत का सीजन होने के बावजूद भी उड़द दाल मांग अपेक्षा अनुरूप कमजोर है। इसलिए आगामी दिनों में उड़द की कीमतों में तेजी, मंदी गर्मियों की फसल की आवक के साथ ही इसके आयात पड़ते के आधार पर बनेगी। आंध्र प्रदेश में रबी उड़द की आवक बराबर बनी हुई है। हालांकि उड़द मोगर एवं गोटा में मांग पहले की तुलना में बढ़ी है। उत्पादक मंडियों में उड़द की कीमत 7,800 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की तुलना में नीचे बने हुए हैं।
चालू समर सीजन में उड़द की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है तथा मध्य प्रदेश और गुजरात में गर्मियों की फसल की कटाई आरंभ हो गई है तथा मंडियों में छिटपुट आवक बनी है। माना जा रहा है कि अगले महीने के मध्य तक आवक बढ़ेगी।
चेन्नई में लेमन अरहर की कीमत स्थिर हो गई, जबकि अवकाश के कारण बर्मा का बाजार बंद रहा। घरेलू बाजार में दाल मिलों की मांग बनी रहने आयातित अरहर की कीमतों में मंदा आया, जबकि देसी के भाव स्थिर हो गए। व्यापारियों के अनुसार अरहर की कीमतों में अभी सीमित तेजी, मंदी बनी रहने की उम्मीद है। घरेलू बाजार में दाल मिलें जरुरत के हिसाब से ही अरहर की खरीद कर रही हैं। यही कारण है कि आयातकों को इन भाव में डिस्पैरिटी लग रही है तथा आयातकों की बिकवाली भी कमजोर है, इसके बावजूद भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है। अरहर की समर्थन मूल्य पर कई राज्यों में खरीद हो रही है लेकिन खरीद भी सीमित मात्रा में ही हो रही है। केंद्र सरकार ने अरहर का समर्थन मूल्य 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है लेकिन उत्पादक मंडियों में देसी अरहर के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले नीचे बने हुए हैं। म्यांमार से अरहर की लगातार शिपमेंट आने के साथ, ही घरेलू मंडियों में देसी की आवक बनी हुई है।
सफेद अरहर के दाम मई शिपमेंट के नाव सेवा बंदरगाह पर 645 से 650 डॉलर एवं गजरी के दाम मई शिपमेंट के 635 से 640 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर बने रहे।
दाल मिलों की मांग सीमित होने से दिल्ली में चना के दाम स्थिर हो गए। बुधवार को इसकी कीमतों में नरमी आई थी तथा नीचे दाम पर शाम को चना में कुछ ग्राहकी देखी गई। ऐसे में व्यापारी इसकी कीमतों में यहां से बड़ी गिरावट के पक्ष में नहीं है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की उत्पादक मंडियों में चना की दैनिक आवक अगले महीने के मध्य तक कम हो जायेगी। चालू सीजन में 6 लाख टन से ज्यादा चना की खरीद हो चुकी है। हालांकि केंद्र सरकार ने समर्थन मूल्य पर 10 लाख टन चना खरीदने का लक्ष्य तय किया है। चालू सीजन में पीली मटर का कुल आयात पिछले साल की तुलना में कम हुआ है, जिससे चना की खपत बढ़ने का अनुमान है। बंदरगाह पर आयातित का स्टॉक ज्यादा है लेकिन गुजरात एवं कर्नाटक तथा महाराष्ट्र की मंडियों में चना की आवक पहले की तुलना में कम हुई है। उत्पादक मंडियों में देसी चना के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 5,875 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे बने हुए हैं।
ऑस्ट्रेलिया से आयातित चना के भाव केंटनर में मई एवं जून डिलीवरी के 580 डॉलर तथा वैसल में इसके दाम 560 डॉलर प्रति, टन सीएडंएफ पर स्थिर हो गए। तंजानिया के चना के भाव मई एवं जून शिपमेंट के नवा सेवा बंदरगाह पर 555 डॉलर प्रति टन, सीएडंएफ पर स्थिर हो गए।
पीली मटर पर 30 फीसदी आयात शुल्क है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर बना हुआ है। अत: आयातित मटर के भाव 30 फीसदी शुल्क के बाद 4,200 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल भारतीय बंदरगाह पर पड़ रही है, जबकि घरेलू बाजार में इसके दाम 4,000 से 4,100 रुपये प्रति क्विंटल है। इसलिए पीली मटर का आयात कम हो रहा है।
देसी मसूर के दाम दिल्ली में स्थिर हो गए, साथ ही इस दौरान बंदरगाह पर आयातित मसूर की कीमत भी स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार मसूर की कीमतों में ज्यादा मंदे की उम्मीद नहीं है, क्योंकि हाल ही में उत्पादक मंडियों में इसकी दैनिक आवकों में कमी आई है। वैसे भी उत्पादक मंडियों में मसूर के भाव समर्थन मूल्य से काफी नीचे बने हुए हैं। उधर उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में चालू सीजन में मसूर की आवक सामान्य की तुलना में कम रही, क्योंकि जानकार उत्पादन कम मान रहे हैं। इस दाल मिलें जरुरत के हिसाब से खरीद ही कर रही है, हालांकि खपत का सीजन होने के कारण मसूर दाल में बिहार एवं बंगाल तथा असम की मांग बनी रहेगी। मसूर के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे बने हुए हैं।
मूंग के दाम जयपुर में कमजोर हुए, जबकि अन्य अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे। व्यापारियों के अनुसार मूंग की कीमतों में अभी बड़ी तेजी के आसार नहीं है क्योंकि दाल मिलें जरूरत के हिसाब से ही खरीद कर रही है तथा कई राज्यों में मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीद तो हो रही है, लेकिन कुल आवक की तुलना में खरीद सीमित मात्रा में ही हो रही है। मौसम अनुकूल बना हुआ है इसलिए मूंग की आवक उत्पादक मंडियों में अभी बनी रहने की उम्मीद है। चालू समर सीजन में भी मूंग की बुआई पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। उधर केंद्रीय पूल मूंग का स्टॉक सबसे ज्यादा है। अत: अभी इसके भाव में बड़ी तेजी मानकर व्यापार नहीं करना चाहिए। मूंग की कीमत उत्पादक मंडियों में एमएसपी 8,768 प्रति क्विंटल की तुलना में काफी नीचे चल रहे है।
चेन्नई में उड़द एफएक्यू के दाम 25 रुपये नरम होकर 7,875 से 7,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए, जबकि एसक्यू के भाव 8,575 से 8,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में उड़द एफएक्यू के दाम 8,300 से 8,325 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए, जबकि एसक्यू के भाव 25 रुपये कमजोर होकर 8,900 से 8,925 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
मुंबई में उड़द एफएक्यू के दाम 25 रुपये कमजोर होकर 7,975 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
कोलकाता में उड़द एफएक्यू के दाम 8,125 से 8,150 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
गुंटूर में उड़द पॉलिश के दाम 25 रुपये नरम होकर 8,050 से 8,075 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। विजयवाड़ा में उड़द पॉलिश के भाव 8,050 से 8,100 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
चेन्नई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 50 रुपये कमजोर होकर 7,550 से 7,575 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
दिल्ली में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 7,800 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
मुंबई में लेमन अरहर के भाव शाम के सत्र में 50 रुपये कमजोर होकर 7,550 से 7,775 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
देसी अरहर के दाम अधिकांश उत्पादक मंडियों में स्थिर बने रहे।
मुंबई में अफ्रीकी देशों से आयातित अरहर के भाव कमजोर हो गए। सूडान से आयातित अरहर के भाव 100 रुपये कमजोर होकर दाम 6,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस दौरान गजरी अरहर के भाव 50 रुपये घटकर 6,175 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। मतवारा की अरहर का स्टॉक नहीं है। सफेद अरहर के दाम 50 रुपये कमजोर होकर 6,250 से 6,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
दिल्ली में देसी मसूर के दाम 6,725 से 6,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। चालू सप्ताह में इसके दाम 100 रुपये कमजोर हुए।
कनाडा की मसूर के दाम कंटेनर में 6,150 से 6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। जबकि ऑस्ट्रेलिया की मसूर के भाव कंटेनर में 6,100 से 6,125 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए। कनाडा की मसूर के दाम मुद्रा बंदरगाह पर 5,900 से 5,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। हजिरा बंदरगाह पर इसके दाम 5,900 से 5,925 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। पटना में देसी मसूर के भाव 6,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
दिल्ली में राजस्थान के चना के दाम 5,525 से 5,550 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान मध्य प्रदेश के चना का व्यापार 5,475 से 5,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुआ। जयपुर लाइन के चना के भाव 5,500 से 5,525 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।
इंदौर में बोल्ड किस्म के मूंग के दाम 8,400 से 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। इस दौरान जयपुर में चमकी मूंग के भाव 100 रुपये कमजोर होकर 7,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। राजस्थान लाइन की मूंग के दाम दिल्ली में 7,000 से 7,800 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए। अकोला में चमकी मूंग के दाम 8,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर हो गए।

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