नई दिल्ली। दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने के कारण गुरूवार को मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित अरहर के साथ ही मसूर की कीमतों में तेजी आई जबकि उड़द, चना और काबूली चना के भाव स्थिर बने रहे।
विदेश से आयात बना रहने एवं बुआई में हुई 5.37 फीसदी की बढ़ोतरी के बावजूद दाल मिलों की हाजिर मांग बनी रहने से बर्मा लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी में 50-50 रुपये की तेजी आकर भाव क्रमश: 6,400 रुपये और 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। वहीं, अरुषा अरहर के भाव भी 25 रुपये तेज होकर 6,150 से 6,175 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 25 रुपये बढ़कर 6,050 से 6,075 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
केंद्र सरकार द्वारा मसूर के आयात शुल्क को 30 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी करने, के बावजूद भी नीचे दाम पर मिलों की मांग बढ़ गई। कनाडा लाईन की मसूर के साथ ही आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव भी 50-50 रुपये बढ़कर भाव क्रमश: 6,500 रुपये और 6,550 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। के आयात पर कृषि सेस को भी केंद्र सरकार ने 20 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। इसके अलावा, विदेशों से आवक होने के कारण भी कीमतों पर दबाव देखा गया।
बर्मा उड़द एफएक्यू नई और पुरानी के भाव क्रमश: 6,750 रुपये और 6,650 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। उड़द की आवक विदेश से बराबर बनी हुई है, साथ ही समर की देसी उड़द भी आ रही है लेकिन चालू खरीफ में बुआई में आई 23 फीसदी की गिरावट आई है।
दाल मिलों की हाजिर मांग से सूडान लाईन के काबुली चना के भाव 5,300-5,500 रुपये और रूस के काबुली चना के भाव 5,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। 40 फीसदी आयात शुल्क होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।
इसी तरह, से तंजानिया के चना के भाव भी 4,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। विभिन्न राज्यों में नेफेड खरीदे गए चना के स्टॉक की लगातार बिकवाली कर रही है।
नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज, एनसीडीईएक्स पर अगस्त वायदा अनुबंध में चना की कीमतों में 11 रुपये की गिरावट आई, जबकि सितंबर वायदा अनुबंध में इसके भाव में 18 रुपये का मंदा आया।
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