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17 अगस्त 2012
नई फसल में देरी से महंगा होगा प्याज!
नई फसल के उत्पादन में देरी के चलते अक्टूबर के बाद प्याज की उपलब्धता और इसकी कीमतों पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रीय बागवानी शोध व विकास फाउंडेशन (एनएचआरडीएफ) की तरफ से संग्रहित आंकड़ों के मुताबिक देश में खरीफ सीजन के प्याज का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 30-40 फीसदी तक घट सकता है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा - इसके अलावा प्याज के उत्पादन में एक महीने की देरी होगी क्योंकि इसकी बुआई जुलाई के आखिर में शुरू हुई थी। ऐसे में यह फसल चार महीने का चक्र पूरा करने के बाद अक्टूबर में तैयार होगी। सामान्यत: प्याज की फसल सितंबर के आखिर में आनी शुरू होती है।
इस प्रक्रिया में सरकार पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में प्याज की फसल पर जोर दे रही है, जहां प्याज का उत्पादन कंद की बुआई के जरिए होता है जबकि देश के दूसरे इलाकों में बीज के जरिए। अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय ने पहले ही डीजल व बीज सब्सिडी देने का ऐलान कर दिया है और इसमें ये राज्य भी शामिल होंगे। प्याज उत्पादक क्षेत्रों समेत विभिन्न राज्यों में किसानों को खास तौर से हरे प्याज की खेती करने की सलाह दी गई है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इससे स्थानीय बाजार की आंशिक मांग पूरी हो सकती है, जहां से सामान्य प्याज दूरदराज के उन इलाकों में भेजा जा सकता है जहां प्याज उपलब्ध नहीं है।
महाराष्ट्र और गुजरात प्याज का उत्पादन करने वाले दो प्रमुख राज्य हैं, जहां खरीफ में देर से उगाए जाने वाले प्याज की खेती होती है। मौजूदा समय में देश के विभिन्न बाजारों में प्याज की विभिन्न किस्में 400 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल पर उपलब्ध है। एक ओर जहां देश भर में प्याज की थोक कीमतें महीने दर महीने के हिसाब से जुलाई-अगस्त 2012 में तेजी से बढ़ी हैं, वहीं देश भर के बाजारों में साल दर साल के हिसाब से 2011 की इसी अवधि के मुकाबले काफी हद तक नीचे आई है।
महाराष्ट्र के नासिक और कर्नाटक में देर से मॉनसून आने के चलते प्याज का उत्पादन प्रभावित हुआ है और किसानों ने बेहतर कीमत के लिए प्राथमिकता के आधार पर सोयाबीन व मक्के की बुआई को प्राथमिकता दी है। कम बारिश के चलते किसान अब ज्वार-बाजरे का रुख कर चुके हैं, चारे के तौर पर जिसकी कीमतें बेहतर हैं। हालांकि कृषक सूत्रों ने कहा कि जुलाई और अगस्त में बारिश में सुधार के चलते प्याज की बुआई सुधरी है। इसकी बुआई जुलाई के मध्य में शुरू हुई है और यह अगस्त तक चलेगी। खरीफ सीजन में देर से होने वाली बुआई अगस्त में शुरू होगी औ्र मध्य सितंबर तक चलेगी। सूत्रों ने कहा कि प्याज की पूरी फसल सितंबर में उपलब्ध नहीं होगी बल्कि इसकी उपलब्धता अक्टूबर-दिसंबर में होगी, जब देर से बोई गई फसल पूरी तरह पक चुकी होगी।
इसी तरह देर से बारिश शुरू होने व अपर्याप्त बारिश के चलते गुजरात के प्याज उत्पादक इलाकों में पिछले साल के मुकाबले महज 10-15 फीसदी रकबे में ही खरीफ के प्याज की बुआई हुई है। खरीफ के प्याज की बुआई अगस्त के दूसरे पखवाड़े में होने की संभावना है, अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश होती है।
मई व जून मेंं करीब 29.5 लाख टन प्याज का भंडारण हुआ है और मौजूदा समय में बाजार में होने वाली आवक इसी भंडार से हो रही है। इस तरह से कुल भंडार के 35-40 फीसदी हिस्से की खपत हो चुकी है।
एनएचआरडीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉनसून की देरी से महाराष्ट्र में खरीफ का रकबा करीब 50 फीसदी घटने की संभावना है। कर्नाटक में पिछले साल के मुकाबले खरीफ का रकबा करीब 25-30 फीसदी रहने की संभावना है। आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी कम बारिश के चलते खरीफ का रकबा घटा है। (BS Hindi)
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