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17 अगस्त 2012
नहीं बढ़ेगा चावल खरीद का लक्ष्य
केंद्रीय पूल में चावल का भरपूर भंडार होने और असमान बारिश के चलते कम उत्पादन की आशंका के कारण सरकार इस साल शायद चावल खरीद का लक्ष्य नहीं बढ़ाएगी। चावल का फसल वर्ष अक्टूबर से शुरू होता है। वर्ष 2011-12 में सरकार ने केंद्रीय पूल के लिए करीब 353.1 लाख टन चावल खरीदने का लक्ष्य रखा था, जिसमें मध्य जुलाई तक करीब 344.7 लाख टन चावल की खरीद की जा चुकी थी।
यह लक्ष्य इससे पिछले सीजन के 327.5 लाख टन के लक्ष्य से 7.81 फीसदी अधिक था। अधिकारियों का कहना है कि 2012-13 में लक्ष्य में बढ़ोतरी की ज्यादा संभावना नहीं है। एक जुलाई को केंद्रीय पूल में चावल का स्टॉक करीब 307 लाख टन था, जो पिछले साल की समान अवधि के स्टॉक से 14.3 फीसदी अधिक है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम विभिन्न राज्यों से खरीद के लक्ष्य ले रहे हैं और इसके बाद ही अंतिम आंकड़ा जारी किया जाएगा।' केंद्र ने हाल में प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है।
केंद्र सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जरिये हर साल उत्पादित कुल चावल का 30-35 फीसदी हिस्सा खरीदती है। यह चावल सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाता है। वर्ष 2010-11 में सामान्य किस्म का चावल 1,080 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीदा गया था, जबकि 'ए' किस्म का धान 1,110 रुपये प्रति क्विंटल पर। कुछ अधिकारियों ने कहा कि सूखे के चलते प्रमुख उत्पादक राज्य पंजाब और हरियाणा में चावल उत्पादन में मामूली गिरावट आने से खरीद पर असर पडऩे की संभावना है। केंद्रीय पूल में पंजाब और हरियाणा का योगदान करीब 28 फीसदी होता है।
2011-12 में पंजाब ने केंद्रीय पूल में सबसे अधिक 77 लाख टन चावल का योगदान दिया, जबकि इसमें हरियाणा ने 19 लाख टन का। इस साल असमान बारिश से दोनों प्रमुख उत्तर भारतीय राज्यों में चावल उत्पादन घटने की संभावना है। वैसे, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में धान की बुआई सामान्य है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर बारिश से उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब में सोमवार तक दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून सामान्य से करीब 68 फीसदी कम रहा। हरियाणा में यह सामान्य से 73 फीसदी कम और उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में 32 फीसदी कम रहा है। देश में दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून 1 जून से 6 अगस्त, 2012 तक सामान्य से करीब 17 फीसदी कम रहा है। (BS Hindi)
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