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02 जून 2011
रबड़ के दाम में फिर आ सकता है उछाल
कोच्चि : पिछले कुछ हफ्तों में प्राकृतिक रबड़ की कीमतों में तेज गिरावट आई है। इसकी वजह ज्यादा उत्पादन और बढ़ता आयातहै। हालांकि, मानसून आने के बाद रबड़ का ऑफ सीजन होने पर इसकी कीमतों में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। मई में टायर कंपनियों की खरीदारी टालने से रबड़ की हाजिर कीमत में 11 फीसदी गिरावट आई थी। बाजार के सूत्रों के मुताबिक, कुल रबड़ उत्पादन की 62 फीसदी खरीदारी टायर कंपनियां करती हैं। मई के दौरान उनकी खरीदारी में 25 फीसदी की कमी आई थी। अप्रैल में रबड़ का उत्पादन लगभग 6 फीसदी ज्यादा रहा। रबड़ उत्पादकों और डीलरों के मुताबिक, मई में भी ऐसी की स्थिति रह सकती है। वित्त वर्ष 2010-11 में उत्पादन में लगभग 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इंडियन रबड़ डीलर्स फेडरेशन के प्रेसिडेंट जॉर्ज वैली के मुताबिक, 'ज्यादा बारिश, पेड़ों की बेहतर सुरक्षा और 20 फीसदी आयात शुल्क को बदलकर 20 रुपए या 20 फीसदी (जो भी कम हो) किए जाने से कीमतों में गिरावट आई है।' अप्रैल से 27 मई के बीच देश में 16,668 टन रबड़ का आयात हुआ, लेकिन यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 35 फीसदी कम है। सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और रबड़ का आयात हो सकता है। बाजार के जानकारों का कहना है कि मानसून के दौरान उत्पादन का ऑफ सीजन शुरू होने पर रबड़ की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है। केरल तट पर उम्मीद से पहले मानसून आने से उत्पादन में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। मई में 215 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहे रबड़ की कीमत सोमवार को 218 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई थी। विदेशी बाजार में मई के अंतिम पखवाड़े में रबड़ की कीमतों में कमी आई। इस दौरान इसकी औसत कीमत 230.63 रुपए प्रति किलोग्राम रही। (ET Hindi)
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