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02 जून 2011
पेट्रोल में एथॅनाल मिलाने के कार्यक्रम पर संकट के बादल
नई दिल्लीः पेट्रोल में अनिर्वाय रूप से 5 फीसदी एथनॉल मिलाने के प्रस्ताव पर काले बादल घिर आए हैं। एक प्रभावशाली सलाहकार समिति ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम पर दोबारा विचार करने या कम से कम फिलहाल इसे अनिवार्य न बनाने का मशविरा दिया है। सी रंगराजन की अगुवाई वाली प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) ने कहा है कि देशभर में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम शुरू करने से पहले से कुछ सवालों के जवाब ढूंढे जाने चाहिए। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि ईएसी ने सरकार को फिलहाल एथनॉल मिश्रण को अनिवार्य बनाने से बचने और रसायन तथा पोटेबल अल्कोहल जैसे दूसरे अहम क्षेत्रों की जरूरत पूरा होने के बाद बचने वाले एथनॉल पर काम करने की सलाह दी थी। अप्रैल के मध्य में लिखे गए एक पत्र में दलील दी गई है कि मंत्रालय की ओर से बताए गए उद्देश्यों और इन उद्देश्यों का समर्थन करने वाले सबूतों के बीच 'तालमेल' की भारी कमी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सवालों को खाद्य, पीडीएस और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सामने रखा था, जिसने ब्लेंडिंग के इस कार्यक्रम पर विचार-विमर्श किया। एथनॉल मिलाने को अनिवार्य बनाने के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी, ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, चीनी सेक्टर को फायदा पहुंचेगा और साथ ही पर्यावरण की दृष्टि से भी यह कदम वाजिब रहेगा। यह कार्यक्रम तभी कामयाब रहेगा, जब पर्याप्त मात्रा में एथनॉल हो। और इस बारे में राय बंटी हुई है। रसायन और अल्कोहल उद्योग का कहना है कि सभी के लिए पर्याप्त एथनॉल नहीं है। अगर एथनॉल को ब्लेंडिंग के लिए घुमा दिया जाता है, तो उन्हें अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए आयात करने पर मजबूर होना होगा। तमिलनाडु ने पहले ही एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के लिए होने वाली सप्लाई पर पाबंदी लगा दी है, जबकि बिहार ने 'अनाधिकारिक' रूप से इसे प्रोत्साहित न करने का रुख दिखाया है। योजना आयोग के सदस्य सौमित्र चौधरी की अगुवाई में सरकार की ओर से गठित एक समिति ने एथनॉल की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े किए थे। चौधरी ईएसी के सदस्य भी हैं। हालांकि, चौधरी पैनल के आठ सदस्यों में से पांच ने एथनॉल के सेक्टरवार आवंटन के मुद्दे के खिलाफ जाने का फैसला किया है, जिसमें एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भी शामिल है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक ए वर्मा ने 5 फीसदी ब्लेंडिंग कार्यक्रम के लिए एथनॉल की सप्लाई में कमी आने वाली चिंताओं को सिरे से दरकिनार किया है। उन्होंने बताया कि 58 करोड़ लीटर की सप्लाई के लिए पहले ही अनुबंध हो चुका है। सौमित्र चौधरी पैनल का कहना है कि ब्लेंडिंग के लिए 60 करोड़ लीटर एथनॉल उपलब्ध है। अक्टूबर से शुरू होने वाले साल में एथनॉल की कुल मांग 100 करोड़ लीटर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। ईएसी ने खाद्य सुरक्षा चिंताओं को लेकर सीधे गन्ने से एथनॉल का उत्पादन करने का भी विरोध किया है। फिलहाल एथनॉल का उत्पादन चीनी मैन्युफैक्चरिंग के बाई-प्रोडक्ट के रूप में होता है। (ET Hindi)
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