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02 जून 2011
तांबा, सोना और कोयले के दाम में रहेगी तेजी
मुंबई: अगले दो से तीन सालों के दौरान कमोडिटी में तेजी की अगुवाई तांबा, सोना, लौह अयस्क और कोयला के हाथों में होगी। यह कहना है स्टैंडर्ड चार्टर्ड का। बैंक मुताबिक, भारत और चीन जैसे देशों में खपत ज्यादा रहने की वजह से इन कमोडिटी की मांग आपूर्ति से ज्यादा रहेगी। स्टैंचार्ट के ग्लोबल हेड (कमोडिटी सेल्स) आशीष मित्तल ने कहा, 'मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ रहा है। इसकी वजह से अगले तीन सालों के दौरान कमोडिटी की कीमतें बढ़ेंगी। असल में वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान कंपनियों ने कई निवेश स्थगित कर दिए थे।' अप्रैल में भी लगातार पांचवें महीने स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जीएससीआई इंडेक्स ने शेयरों, बॉन्ड और डॉलर से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसकी प्रमुख वजह निवेशकों की कमोडिटी में दिलचस्पी है। ऊंची मंहगाई दर के चलते निवेशक कमोडिटी पर दांव लगाना फायदेमंद मान रहे हैं। पिछले करीब 14 सालों में यह पहला मौका है, जब इस इंडेक्स ने लगातार पांच महीनों तक शेयर, बॉन्ड और डॉलर को पीछे किया है। इस इंडेक्स में 24 कमोडिटी शामिल हैं। उधर, गोल्डमैन सैक्स ने भी इस हफ्ते कमोडिटी में तेजी का रुझान व्यक्त किया है। इसने ऑयल, तांबा और जिंक में खरीदारी की सलाह दी है जबकि पिछले महीने गौल्डमैन सैक्स ने इन कमोडिटी को बेचने की सलाह दी थी। गुरुवार को जी-8 के नेताओं की ओर से ऐसे संकेत आए कि कमोडिटी की ऊंची कीमतें वैश्विक आर्थिक रिकवरी के लिए खतरा साबित हो सकती हैं। बैंक ऑफ जापान के असिस्टेंट गवर्नर हिरोशी नाकासो ने कहा कि उभरते बाजारों में तेज ग्रोथ की वजह से पैदा हो रही मांग को पूरा करने में उत्पादकों को समय लग सकता है, जिसके कारण कीमतों में और इजाफे की आशंका है। कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण अप्रैल में वैश्विक खाद्य कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। इसके चलते कई देशों के केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में वृद्धि करनी पड़ी। मित्तल ने कहा, 'लोग अपनी कारों के लिए महंगे ईंधन का खर्च वहन कर सकते हैं, लेकिन वे खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें नहीं दे सकते।' मित्तल ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर कृषि कमोडिटी पर भी पड़ेगा क्योंकि क्रूड के दाम बढ़ने से वैकल्पिक ईंधन की मांग बढ़ेगी और चीनी, मक्का और पॉम ऑयल के भाव बढ़ेंगे। संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, पिछले महीने 55 खाद्य कमोडिटी का एक सूचकांक बढ़कर 232.1 पर पहुंच गया जो मार्च में 231 अंक पर था। फरवरी में यह सूचकांक 237.2 अंक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। 6 मई को खत्म हुए हफ्ते के दौरान एसएंडपी जीएससीआई इंडेक्स 11 फीसदी उछल गया, जो दिसंबर 2008 के बाद से सबसे बड़ा उछाल है। पिछले साल की तुलना में इस साल इसमें 10 फीसदी उछाल आ चुका है। गैसोलीन, गैस ऑयल और चांदी में आई तेजी की वजह से इसमें इतनी उछाल देखने को मिली। (ET Hindi)के
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