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17 दिसंबर 2008
बर्ड फ्लू फैलने के बाद अंडों चिकन के भाव गिरने लगे
असम के बाद पश्चिम बंगाल में बर्ड फ्लू फैलने के बाद पोल्ट्री उत्पादों अंडे और चिकन के भाव में गिरावट शुरू हो गई है। खाड़ी देशों में पोल्ट्री उत्पादों का निर्यात भी घट गया है। उधर बर्ड फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में बीमारीग्रस्त मुर्गियों की छंटाई और उन्हें मारने का काम शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने बीमारी का जल्द से जल्द पता लगाने के लिए छह नए जांच केंद्र खोलने की योजना बनाई है। कृषि मंत्री शरद पवार ने मंगलवार को यह जानकारी राज्यसभा में दी। पवार के अनुसार अगले साल मार्च तक कोलकाता और जालंधर में जांच सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके चार अन्य शहरों में जांच केंद्र खोले जाएंगे। राज्यसभा ने मंगलवार को प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ इंफेक्शियस एंड कंटेंजियस डिजीज इन एनिमल बिल 2005 को पारित कर दिया । इससे पूरे देश में जानवरों में फैलने वाले रोगों की जांच और निगरानी के लिए एक कानून होगा। अभी बर्ड फ्लू की जांच के लिए देश में केवल एक जांच केंद्र भोपाल में है। उधर असम के पशुपालन विभाग के अनुसार मंगलवार तक राज्य में बीमारीग्रस्त 3,58,000 मुर्गियों को मारा जा चुका है। बर्ड फ्लू से प्रभावित क्षेत्रों के पांच किलोमीटर के अंदर की सभी मुर्गियों और अंडों को नष्ट किया जा रहा है। विभाग के अनुसार बुधवार तक माल्दा में भी मुर्गियों को मारने का काम शुरू हो जाएगा। मुर्गियों और अंडो को नष्ट करने पर तुरंत मुआवजा दिया जा रहा है। इसमें पचास-पचास फीसदी केंद्र और राज्य सरकार दे रही है। बर्ड फ्लू भले ही सिर्फ पूर्वी राज्यों में ही फैला है लेकिन अंडों और चिकन की बिक्री उत्तरी भारत में भी प्रभावित होने लगी है। सर्दियों के कारण जोरदार खपत का सीजन होने के बावजूद भावों में गिरावट दर्ज होने लगी है। स्थानीय थोक मंडी में दिसंबर माह की शुरूआत में अंडों के दाम 220 रुपए प्रति सैकड़ा थे जो अब घटकर 200 रुपए प्रति सैकड़ा रह गए हैं। इसी अवधि में ब्रॉयलर मुर्गियों के दाम 50 रुपए प्रति किलो से घटकर 45 रुपए हो गए है। देश में सालाना 53 अरब अंडों और 3.2 करोड़ टन मुर्गियों के मीट का उत्पादन होता है। भारत दुनिया में अंडों का दूसरा बड़ा उत्पादक और बॉयलर का तीसरा बड़ा उत्पादक है।पोल्ट्री क्षेत्र के काम करने वाले गैर सरकारी संगठन नेशनल एग कोआर्डिनेशन कमेटी (एनईसीसी) की डायरेक्टर अनुराधा देसाई के अनुसार देश में बर्ड फ्लू फैलने की खबर के बाद खाडी देशों की ओर होने वाले मुर्गियों और अंडों के निर्यात में कुछ कमी आई है। यदि इस पर जल्दी काबू नही पाया गया तो निर्यात में भारी कमी आ सकती है।उल्लेखनीय है कि बर्ड फ्लू की वजह से आने वाले दिनों के दौरान मुर्गी दाने की मांग में भी कमी आने की आश्ांका जताई जा रही है। ऐसे में पहले से ही मंदी की मार झेल रहे मक्का और सोयाबीन की मांग में और कमी आने से इनकी कीमतों में गिरावट देखी जा सकती है। जिसका सीधा असर किसानों को होने वाले मुनाफे पर पड़ सकता है। जबकि आम तौर पर सर्दी के मौसम में मुर्गी दाने की मांग में इजाफा देखा जाता है। (Business Bhaskar)
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