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17 दिसंबर 2008
नई फसल की आवक से पहले लाल मिर्च में बिकवाली बढ़ी
स्टॉकिस्टों की बिकवाली बढ़ने से पिछले एक सप्ताह में लाल मिर्च के भावों में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। गुंटूर मंडी के कोल्ड स्टोरों में रखे माल को चालू माह के आखिर तक निकालना है जबकि इस समय निर्यातकों के साथ-साथ घरेलू मांग भी कमजोर चल रही है। जनवरी के मध्य तक नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी इसलिए आगामी दिनों में लाल मिर्च के मौजूदा भावों में और गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है।गुंटूर मंडी स्थित मैसर्स स्पाइसेज ट्रेडिंग कंपनी के डायरेक्टर विनय बुबना ने बिजनेस भास्कर को बताया कि कोल्ड स्टोरों में रखी लालमिर्च की समय सीमा 31 दिसंबर को समाप्त हो रही है जिसकी वजह से बिकवाली का दबाव बना हुआ है। चीन में नई फसल की आवक बनने के बाद से मलेशिया व इंडोनेशिया चीन से खरीद कर रहे हैं। चीन के निर्यातक लालमिर्च के भाव 1600 डॉलर प्रति टन (सी एंड एफ) बोले रह हैं जबकि भारतीय लालमिर्च के भाव 1700 डॉलर प्रति टन (एफओबी) चल रहे हैं। इसलिए पिछले एक सप्ताह में गुंटूर मंडी में लाल मिर्च के भावों में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आकर तेजा क्वालिटी के भाव 7000 रुपये, 334 के भाव 5600 रुपये, सनम के 5700 रुपये, 273 क्वालिटी के 6000 रुपये, ब्याडगी क्वालिटी के 7000 रुपये व पांच नं0 के 6500 रुपये तथा फटकी क्वालिटी के भाव 1200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। इस समय लालमिर्च की 70 से 80 हजार बोरी (एक बोरी 45 किलो) की बिकवाली आ रही है लेकिन निर्यातकों के साथ ही घरेलू मांग कमजोर होने से मात्र 15 से 20 हजार बोरी ही बिक पा रही है। ब्याडगी लाइन से नई लालमिर्च की 2000 बोरियों की आवक शुरू हो गई है। गुंटूर में नई फसल की आवक 15 जनवरी के बाद शुरू हो जाएगी तथा फरवरी के प्रथम पखवाड़े तक आवक का दबाव बन जाएगा। इंदौर के लालमिर्च व्यापारी खजोरमल प्रजापति ने बताया कि राज्य की मंडियों में लालमिर्च की आवक करीब सवा लाख बोरी की हो रही है तथा भाव 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल चल रहे हैं। मुंबई के लालमिर्च निर्यातक अशोक दत्तानी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर तक भारत से लालमिर्च का निर्यात 1,21,500 टन का हो चुका है जोकि बीते वर्ष की समान अवधि के 1,21,420 टन से थोड़ा ज्यादा है। उन्होंने बताया कि पहले मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड व इंडोनेशिया के साथ खाड़ी देशों की अच्छी मांग बनी हुई थी लेकिन पाकिस्तान और चीन में नई फसल आने से भारत से लालमिर्च के निर्यात में पिछले डेढ़-दो महीने से काफी कमी आई है। (Business Bhaskar........R S Rana)
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