नई
दिल्ली। बढ़े दाम पर दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से मंगलवार को
मुंबई में शुरूआती कारोबार में आयातित चना और काबुली चना के भाव में गिरावट
दर्ज की गई।
बढ़े दाम पर मिलों की मांग कमजोर होने से सूडान लाईन
के काबुली चना में 50 रुपये की गिरावट आकर भाव 5,250-5,450 रुपये प्रति
क्विंटल रह गए। इसी तरह, रूस के काबुली चना के भाव भी 50 रुपये की गिरावट
के साथ 5,050-5,100 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। हालांकि काबुली चना पर 40
फीसदी आयात शुल्क होने के कारण आयात पड़ते नहीं लग रहे हैं।
वायदा
कीमतों में आई गिरावट से मुंबई में तंजानिया चना के भाव 50 रुपये घटकर
4,650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। नेफेड विभिन्न राज्यों में लगातार चना की
बिकवाली कर रही है।
सरकारी नीतियों के कारण मौजूदा दरों पर व्यापारी सीमित मात्रा में ही कारोबार कर रहे हैं।
साथ
ही व्यापारियों को इस बात का भी डर है कि कहीं सरकार काबुली चने के आयात
शुल्क में कमी ना कर दे, या फिर सफेद मटर के आयात पर लगे प्रतिबंध को हटा
दे।
दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़े भाव में कमजोर होने से बर्मा
लाईन की लेमन अरहर नई के साथ ही पुरानी के भाव क्रमश: 6,300 रुपये और
6,200 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। विदेश से लगातार आवक होने के
साथ ही चालू खरीफ में बुआई भी आगे चल रही है। वहीं, अरुषा अरहर के साथ ही
मोजाम्बिक लाईन की गजरी किस्म की अरहर के भाव भी 6,250 रुपये और 6,150
रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे। साथ ही सूडान की अरहर के भाव भी
6,650 रुपये प्रति क्विंटल बोले गए।
बर्मा उड़द एफएक्यू नई और
पुरानी के भाव क्रमश: 6,850 रुपये और 6,750 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर
बने रहे। चालू खरीफ में उड़द की बुआई पिछे चल रही हैं, हालांकि विदेश के
साथ ही समर उड़द की आवक घरेलू मंडियों में बराबर बनी हुई है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश एवं बाढ़ से खरीफ उड़द की खड़ी फसल को नुकसान की आशंका है।
कनाडा लाईन की मसूर के भाव मुंबई, कांडला, हजीरा और मुंद्रा बंदरगाह पर तथा आस्ट्रेलियाई मसूर के भाव मुंबई में स्थिर बने रहे।
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