नई दिल्ली। स्थानीय दाल मिलों की हाजिर मांग बढ़ने से गुरूवार को दिल्ली के नया बाजार में कनाडा की मसूर के साथ ही चना और काबूली चना में तेजी आई, जबकि उड़द एसक्यू में गिरावट देखी गई। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चार लाख टन उड़द का आयात कोटा जारी कर दिया।
बर्मा उड़द एसक्यू की कीमतों में 50 रुपये गिरावट आकर भाव 8,250 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए चार लाख टन उड़द का आयात कोटा जारी कर दिया जबकि मुंबई और चेन्नई में कीमतों में आई नरमी का असर रहा, हालांकि हाजिर में आयातित उड़द का स्टॉक कम होने के बावजूद भी कीमतों में गिरावट आई। एफएक्यू उड़द के दाम दिल्ली में 7,400 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे।
दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने के कारण गुरूवार को चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता में बर्मा उड़द एफएक्यू और एसक्यू की कीमतों में 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। हालांकि, बर्मा में हड़ताल के कारण विदेशी आपूर्ति जल्द होने की उम्मीद नहीं है।
केंद्र सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2021-22 के लिए उड़द का चार लाख टन का कोटा जारी करने के बावजूद भी बर्मा में उड़द एफएक्यू और एसक्यू के दाम स्थिर बने रहे। हड़ताल के कारण बंदरगाह पर लोडिंग, तथा अनलोडिंग का काम शुरू नहीं हो पाया है। बर्मा के आधारित स्थानीय व्यापारी के अनुसार, एक सप्ताह के अंदर म्यांमार में बैंकिंग लेनदेन और बंदरगाह संचालन फिर से शुरू होने की संभावना है। स्थानीय मिलों की मांग कमजोर बनी रहने से, घरेलू बाजार में देसी उड़द की कीमतों मेंं क्वालिटीनुसार 50 से 200 रुपये प्रति क्विंटल का मंदा आया।
दाल मिलों की मांग बढ़ने से कनाडा लाईन की मसूर की कीमतों में 50 रुपये की तेजी आकर भाव 5,700 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। घरेलू मंडियों में नई मसूर की आवक शुरू हो गई है, जबकि आयातित मसूर का स्टॉक भी ज्यादा है। हालांकि पड़ते नहीं होने के कारण मसूर का आयात नहीं हो पायेगा। मध्य प्रदेश की मसूर के दाम दिल्ली में 5,700 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बने रहे, हालांकि घरेलू बाजार में स्टॉकिस्ट खरीद नहीं कर रहे हैं।
दाल मिलों की हाजिर मांग कमजोर होने से गुरूवार को कनाडा की मसूर की कीमतों में मुंबई, मुंद्रा, कांडला और हजीरा बंदरगाह पर 25 से 50 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई। घरेलू बाजार में नई फसल की आवकों को देखते मिलर्स की मांग कमजोर रही। आयातित मसूर का स्टॉक लगातार कम हो रहा है तथा आयात पड़ते नहीं लगने के कारण मसूर का आयात संभव नहीं है लेकिन घरेलू आवक बढ़ रही है, इसलिए मिलों की मांग देसी मसूर में बढ़ेगी।
कोलकाता में आयातित मसूर का स्टॉक लगभग 60,000-70,000 टन बचा हुआ है इसमें कनाडा की मसूर का लगभग 50,000 टन और ऑस्ट्रेलिया मसूर का 10,000 टन होने की उम्मीद है। मुंद्रा बंदरगाह पर मसूर का स्टॉक 1,10,000 टन, कांडला बंदरगाह पर 30,000 टन और हजीरा बंदरगाह पर 40,000 टन होने का अनुमान है।
नई फसल की आवक बढ़ने एवं मिलों की मांग कमजोर होने के कारण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख बाजारों में मसूर की कीमतों में क्वालिटीनुसार 50 से 100 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई।
मूंग की कीमतों में हरदा में 150 रुपये की तेजी आकर भाव 5,000 से 8,050 रुपये प्रति क्विंटल हो गए, लेकिन केकड़ी मंडी में 100 रुपये का मंदा आकर भाव 6,300 से 6,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।
दिल्ली में राजस्थानी चना के दाम 25 रुपये बढ़कर 5,150 से 5,175 रुपये और मध्य प्रदेश लाईन के चना के दाम 5,125 से 5,150 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश और इंदौर लाईन के काबुली चना में स्थानीय मिलों की मांग बढ़ने से 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई। हालाँकि, महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश में नए काबूली चना की आवक बराबर बनी हुई है।
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