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22 दिसंबर 2012
खाद्य सुरक्षा विधेयक के खिलाफ हैं अखिलेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि खाद्य मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए इस विधेयक से देश के सभी राज्यों में शहरी और ग्रामीण इलाकों के 33 प्रतिशत लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से अलग हो जाएंगे, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने खासकर सभी राज्यों में 33 प्रतिशत लोगों को खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के फायदे से बाहर किए जाने के फार्मूले को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
यादव का कहना है कि इससे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के साथ भेदभाव होगा, जहां तमाम राज्यों की तुलना में गरीबी बहुत ज्यादा है। साथ ही यहां प्रति व्यक्ति आय भी कई राज्यों से कम है। यादव का कहना है कि पीडीएस प्रणाली का दायरा गरीब राज्यों के लिए व्यापक किए जाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री चाहते हैं कि इस विधेयक में ग्रामीण इलाकों के शत प्रतिशथ लोगों और शहरी इलाकों के 95 प्रतिशत लोगों को शामिल किया जाए।
उन्होंने तेंदुलकर समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश में 37.7 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 29.8 प्रतिशत है। पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 12 प्रतिशत से लेकर 24.5 प्रतिशत है। इस तरह से सभी राज्यों को एक साथ करना ठीक नहीं है।
उनका कहना है कि हरियाणा जैसे राज्य में प्रति व्यक्ति आमदनी बहुत ज्यादा है, जबकि 2009-10 में प्रति व्यक्ति आमदनी 23,392 रुपये रही है, जो 46,117 रुपये के राष्ट्रीय औसत की आधी है। यादव ने पत्र में कहा है, 'इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि विधेयक के तहत उत्तर प्रदेश के गांवों में रहने वाले सभी लोगों और शहरों में रहने वाले 95 प्रतिशत लोगों को विधेयक में पीडीएस के तहत लाया जाए। इसके मुताबिक विधेयक में संशोधन किया जाना चाहिए।' (BS Hindi)
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