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14 सितंबर 2012
खुद प्याज बेच सकेंगे निर्यातक
सरकारी एजेंसी को सौंपे बिना प्याज निर्यातकों को इसके निर्यात की अनुमति मिल सकती है। देश से प्याज निर्यात को मुक्त करने के कदम के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय इसे मुक्त कर सकता है। मौजूदा समय में प्याज निर्यातकों की खेपों का विनियमन स्टेट ट्रेडिंग एजेंसी करती है।
ऐसा तब हो रहा है जब प्याज निर्यात को ओपन जनरल लाइसेंस के तहत रखा गया है और सरकार ने न्यूनतम निर्यात कीमत की सीमा हटा दी है। सूत्रों ने कहा, सरकारी एजेंसियों के बिना निर्यातक अब सीधे प्याज की खेप विदेश भेज सकेंगे और डीजीएफटी के सामने कागजात पेश कर सकेंगे।
इस प्रगति से जुड़े सूत्रों ने कहा, इस साल अब तक करीब 8 लाख टन प्याज का निर्यात हुआ है। मॉनसून में सुधार के बाद प्याज की फसल मेंं सुधार की उम्मीद बढ़ी है और ऐसे वक्त में देश के विभिन्न भंडार गृहों में भंडारित प्याज के सडऩे की संभावना भी बढ़ गई है। सूत्रों ने कहा कि इतना ज्यादा प्याज देशी बाजार में नहीं उतारा जा सकता क्योंकि लागत के हिसाब से यह लाभकारी नहीं होगा।
अगस्त के आखिर से भंडार गृहों से आवक के चलते थोक बाजार में प्याज की कीमतें घट रही हैं। प्याज का भंडारण करने वाले कारोबारी व किसान इसके सडऩे के डर से प्याज बेचने की जल्दी में हैं। इसके साथ ही प्याज की ताजा फसल की आवक आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में शुरू हो गई है।
दूसरी ओर, सूत्रों ने कहा कि निर्यातकों की शिकायत है कि प्याज निर्यात के लिए नियुक्त स्टेट ट्रेडिंग एजेंसी प्रक्रियागत देरी कर रही है और इस वजह से लेन-देन की लागत बढ़ रही है। एक कारोबारी ने कहा, प्याज निर्यात की तत्काल जरूरत है क्योंकि वैश्विक बाजार में इसकी कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं और देसी बाजार में भी कीमतें नीचे आ रही हैं। इसके अलावा भंडारित प्याज के नष्ट होने का भी डर है। ऐसे में प्याज की ताजा आवक से पहले भंडारित प्याज का एक हिस्सा बाजार में उतारना बेहतर रहेगा।
इस साल मई में सरकार ने प्याज से न्यूनतम निर्यात मूल्य हटा लिया था, वहीं चीनी निर्यात से भी मात्रात्मक प्रतिबंध हटा लिया था। इस बीच, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में खरीफ में उत्पादित प्याज की आवक शुरू हो गई है। वास्तव में कर्नाटक में यह अगस्त के आखिर में शुरू हो गई। आंध्र प्रदेश में कुल रकबे के 66 फीसदी हिस्से यानी 12,000 हेक्टेयर में खरीफ प्याज की बुआई हुई है, वहीं कर्नाटक में पिछले साल के मुकाबले 18 फीसदी रकबे में खरीफ प्याज की बुआई होने की संभावना है। पिछले साल 17,500 हेक्टेयर में खरीफ प्याज की बुआई हुई थी।
प्याज की आवक सितंबर के आखिर तक जारी रहने की संभावना है। मॉनसून में देरी के चलते महाराष्ट्र में पिछले साल के मुकाबले करीब 45 फीसदी रकबे में प्याज की बुआई की संभावना है और यहां कुल रकबा 33,000 हेक्टेयर रह सकता है। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक देश में प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। गुजरात में पिछले साल के मुकाबले खरीफ के दौरान करीब 95 फीसदी रकबे में प्याज की बुआई की संभावना है और यह करीब 2700 हेक्टेयर है। बारिश में देरी और अपर्याप्त बारिश के चलते ऐसा हुआ है।
राजस्थान में पिछले साल के मुकाबले करीब 80 फीसदी रकबे में खरीफ प्याज की बुआई की संभावना है और यह करीब 17,000 हेक्टेयर है। यहां प्याज की बुआई करीब-करीब समाप्त हो गई है। (BS Hindi)
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