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07 अगस्त 2012
सोने के आयात में गिरावट
सोने के आयात में गिरावट
दिलीप कुमार झा / मुंबई August 06, 2012
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देश में सोने की रिकॉर्ड कीमतों और उपभोक्ता की ओर से सुस्त मांग के साथ-साथ चालू खाते का घाटा कम करने के लिए आयात पर सरकार की सख्ती का सोने पर असर हुआ है। इस कारण मौजूदा कैलेंडर वर्ष में देश में सोने का आयात अब तक 40 फीसदी घटा है।
सोने-चांदी के कारोबारियों का अनुमान है कि जनवरी से जुलाई तक करीब 350 टन सोने का आयात हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम है। अनुमान है कि अगले दो महीने में 100 टन सोने का और आयात होगा, लिहाजा इस साल सितंबर तक कुल आयात 450 टन रहने का अनुमान है।
वल्र्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक साल 2011 के पहले छह महीने में कुल 553 टन सोने का आयात हुआ था, जो सितंबर 2011 तक बढ़कर 753 टन पर पहुंच गया था। बॉम्बे बुलियन एसोसिएशन के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक इस साल सितंबर तक सोने का आयात शायद ही 450 टन के पार जा पाए।
दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट का असर भारत में भी साफतौर पर विकास व स्थानीय कीमतों पर नजर आता है। इस समय भारत तेज महंगाई के साथ-साथ आर्थिक विकास में नरमी से जूझ रहा है। इसकी वजह आपूर्ति के मसले और मुद्रा में कमजोरी है जिससे महंगाई को बढ़ावा मिला है। इस साल उपभोक्ताओं की मांग अपेक्षाकृत कमजोर रही है। अब भारतीय रिजर्व बैंक भी ऐसी योजना ला रहा है जिसमें सोने जितना रिटर्न मिलेगा। पिछले तीन-चार सालों में सोने ने करीब 100 फीसदी का रिटर्न दिया है, लिहाजा देश में इसका आयात बढ़ा है।
मुंबई के जवेरी बाजार में 19 जून को सोने की कीमतें 30,295 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, जबकि इस साल की शुरुआत में यह 27,175 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थीं। सोना स्टैंडर्ड सोमवार को कारोबार के दौरान एक बार फिर 30,000 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, लेकिन यह 29,765 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ जो शनिवार के मुकाबले थोड़ा ज्यादा है। इस स्तर पर सोने ने स्थानीय मुद्रा में करीब 11.5 फीसदी का रिटर्न दिया है। चूंकि डॉलर के मुकाबले रुपया मौजूदा समय में 55.5 पर है, लिहाजा डॉलर में रिटर्न कम है और यह 1607 डॉलर प्रति आउंस की मौजूदा कीमत पर महज 4.4 फीसदी है।
स्थानीय बाजार में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के चलते पिछले कुछ महीनों से उपभोक्ता सक्रिय खरीदारी से दूर रहे हैं। अगर कीमतें एकतरफा बढ़ती या घटती हंै तो उपभोक्ता बढ़त या गिरावट की उम्मीद में ताजा खरीदारी कर सकते हैं। लेकिन उतार-चढ़ाव की दशा में उपभोक्ता नए आभूषणों का ऑर्डर देने की बजाय स्थिरता का इंतजार करना पसंद करेंगे। श्री गणेश जूलरी हाउस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक उमेश पारिख ने कहा कि ग्राहक आभूषणों के खरीदार खरीद से पहले स्पष्ट दिशा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डब्ल्यूजीसी के आंकड़ों से पता चलता है कि 2011 में रिकॉर्ड 969 टन सोने का आयात हुआ था, जबकि घरेलू मांग साल 2010 के 963.1 टन के मुकाबले घटकर 933.4 टन रही थी। सोने के आयात में बढ़ोतरी से चालू खाते का घाटा बढ़ा है क्योंकि उपभोक्ताओं ने इस धातु में निवेश का विकल्प चुना। परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2011-12 में देश का चालू खाते का घाटा 78.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो साल 2010-11 में 46 अरब डॉलर था। कोठारी को हालांकि उम्मीद है कि त्योहारी सीजन शुरू होने व भारत के विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढऩे के बाद सितंबर में सोने की मांग बढ़ेगी। (BS Hindi)
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