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27 अगस्त 2011
'ओजीएल के तहत जारी रहे कपास निर्यात
मुंबई August 26, 2011
कृषि मंत्रालय ने खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत कपास निर्यात को सितंबर 2011 के बाद भी जारी रखने की सिफारिश की है। फिलहाल इस वर्ष सितंबर तक कपास निर्यात नियंत्रण मुक्त है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि 'बुआई काफी अच्छी रही है। अगस्त 2011 में आज तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पूरे देश में कपास का कुल रकबा बढ़कर 117 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि तक 106.80 लाख हेक्टेयर था। कपास के रकबे में 10 फीसदी बढ़ोतरी से कुल फसली रकबा अगस्त में तेजी से बढ़ा है। इस तरह फसल काफी अच्छी रहेेगी और किसानों को बेहतर मिले, इसके लिए निर्यात को मंजूरी देना जरूरी है।Óभारतीय कपास निगम के अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार बुआई सीजन के अंत तक इसका रकबा बढ़कर 120 लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। भारतीय कपास निगम देश में फसल की स्थिति का पता लगाने के लिए फिलहाल प्रारंभिक सर्वे कर रहा है। जानकार सूत्रों ने बताया कि 'रकबे के हिसाब से चालू सीजन में कपास का उत्पादन 350 लाख गांठों से अधिक रहने का अनुमान है।Óअगस्त में आज की तारीख तक फसल के रकबे में शुद्ध बढ़ोतरी 13.19 लाख हेक्टेयर हुई है, जो जून-जुलाई में मुश्किल से 7-8 लाख हेक्टेयर थी। चावल और कपास उन प्रमुख फसलों में शामिल हैं, जिनसे कुल रकबे में बढ़ोतरी हुई है। जबकि दालों और मोटे अनाजों का रकबा घटा है। गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में कपास के रकबे में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतें पिछले साल की तुलना में कम हैं। फिलहाल कपास की कीमतें 38,000-39,000 रुपये प्रति कैंडी हैं। कपास निर्यात की पात्रता के मानदंडों पर भारी शोर-शराबे के बाद अच्छी आपूर्ति और इस महीने के प्रारंभ में घरेेलू कीमतों में गिरावट को देखते हुए सरकार ने खुले सामान्य लाइसेंस (ओजीएल) के तहत इसके नियंत्रण मुक्त निर्यात को स्वीकृति देने का निर्णय लिया। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) कपास निर्यातकों के लिए पात्रता मानदंडों को समाप्त कर चुका है। हालांकि दिशानिर्देशों के मुताबिक निर्यातकों को निर्यात के दस्तावेजी प्रमाण पेश करने होंगे। इसके अलावा लाइसेंस धारक द्वारा पंजीकरण के बाद निर्यात नहीं करने की स्थिति में पैनल उपखंड का प्रावधान लागू रहेगा।अभी तक कपास निर्यात के लिए शर्त थी कि निर्यातक ने पिछले सीजन में निर्यात किया हो। इस शर्त को 9-10 निर्यातकों द्वारा न्यायालय में चुनौती दी गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान बंबई हाईकोर्ट ने डीजीएफटी को कोटा आवंटन 8 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश जारी किया था, जो 15 जुलाई तक ही पूरा हो चुका था। इसके बाद डीजीएफटी ने उच्च न्यायालय के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। (BS Hindi)
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