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06 अप्रैल 2011
10-20 फीसदी तक सस्ते हो सकते हैं खाद्य तेल
कोलकाता / अहमदाबाद : घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमत अगले एक महीने में 10 से 20 फीसदी तक कम हो सकती है। दरअसल, खाद्य तेल बनाने वाली भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की घटी कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं को देने लगी हैं। खाद्य तेल उत्पादक कंपनी इमामी पहले ही कीमतों में कमी कर चुकी है। अब अदानी विल्मर ने कहा है कि वह स्थिति की समीक्षा कर रही है। भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा आयातक है। यहां हर साल लगभग 1.66 करोड़ टन खाद्य तेल की खपत होती है। यह अपनी खपत का आधा खाद्य तेल विदेश से मंगाता है। इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल और ब्राजील और अर्जेंटीना से सोया तेल मंगाया जाता है। इमामी ग्रुप ऑफ कंपनीज के निदेशक आदित्य अग्रवाल के मुताबिक, 'अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान खाद्य तेलों की कीमत में 15 फीसदी तक कमी आई है। हमने प्रोडक्ट के हिसाब से कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक कमी की है। अगर विदेशी बाजार में कीमत और घटती है तो हम इसका फायदा उपभोक्ताओं को भी देंगे।' अग्रवाल ने कहा कि खाद्य तेलों की कीमत में गिरावट मई तक जारी रह सकती है। उन्होंने कहा कि कीमतों में सबसे ज्यादा गिरावट सोया और सूरजमुखी तेल सेगमेंट में आई है। इमामी 'हेल्दी एंड टेस्टी' ब्रांड से खाद्य तेल बेचती है। अग्रवाल ने कहा कि कीमतों में गिरावट से ब्रांडेड ऑयल कंपनियों को अपनी बिक्री बढ़ाने में मदद मिलेगी। घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की खपत सालाना 5 फीसदी की दर से बढ़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि खाद्य तेलों की लॉन्ग टर्म मांग में लगातार बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह भारत और चीन में खाद्य तेलों की खपत में बढ़ोतरी है। यहां लोगों की बढ़ती समृद्धि से लोगों के खान-पान में बदलाव आया है। पेस्ट्री, चॉकलेट और आइसक्रीम जैसे प्रोसेस्ड फूड की मांग बढ़ी है। इनमें खाद्य तेलों का इस्तेमाल होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम में कमी की वजह मलेशिया में सोयाबीन की ज्यादा पैदावार होने की खबरें और जापान में भूकंप और सुनामी से तबाही के चलते पाम ऑयल की कीमतों में कमी आने की आशंका है। विश्लेषकों का मानना है कि सट्टेबाजी के चलते भी खाद्य तेलों की कीमत में कमजोरी आई है। उम्मीद की जा रही है कि खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव अगले कुछ महीने तक जारी रह सकता है। इस साल रबी की तिलहन की पैदावार 98.7 लाख टन होने की उम्मीद है। पिछले साल तेल सीजन में 90.7 लाख टन तिलहन की पैदावार रही थी। इस साल कुल 2.54 करोड़ टन तिलहन उत्पादन होने की उम्मीद है, जो पिछले साल 2.28 करोड़ टन था। भारत में तेल सीजन नवंबर से अक्टूबर तक होता है। अदानी विल्मर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर आंगशू मल्लिक ने कहा, 'सरसों की पैदावार इस साल काफी अच्छी रह सकती है। इस साल 75 लाख टन से ज्यादा तिलहन की पैदावार हो सकती है। पिछले तेल वर्ष में 55 लाख टन तिलहन उपजा था। इससे हमें काफी राहत मिली है।' अदानी विल्मर हर महीने फॉर्च्यून, किंग्ज, आइवरी और फ्रायोला ब्रांड के तहत लगभग एक लाख टन खाद्य तेल बेचती है। (ET Hindi)
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