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02 जून 2010
दलहन में आयात पर बढ़ेगी निर्भरता
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में भारत में दलहन आयात में लगभग 18 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है। उपभोक्ता मामले विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2009-10 में देश में 34 लाख टन दालों का आयात हुआ था जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 40 लाख टन होने की संभावना है। मांग के मुकाबले देश में दलहन का उत्पादन नहीं बढ़ रहा है इसीलिए आयात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने बताया कि देश में दलहन की सालाना खपत बढ़कर करीब 180 लाख टन की हो गई है लेकिन पैदावार 145-147 लाख टन पर ही स्थिर बनी हुई है। इसीलिए आयात में बढ़ोतरी हो रही है। वर्ष 2008-09 में देश में दलहन का आयात 24 लाख टन का ही हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2009-10 में दलहन का आयात बढ़कर 34 लाख टन हो गया जिसका मूल्य 1,900 करोड़ रुपये था। रिका ग्लोबल इम्पैक्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एस. अग्रवाल ने बताया कि भारत की मांग को देखते हुए म्यांमार के निर्यातकों ने मूंग पेड़ीसेवा, उड़द एसक्यू एंड एफक्यू तथा लेमन अरहर के दाम बढ़ा दिए हैं। म्यांमार के पास अभी मूंग का करीब 1.5 लाख टन का स्टॉक बचा है लेकिन माल कुछ स्टॉकिस्टों के पास ही है। इसीलिए इसके मुंबई पहुंच दाम बढ़कर 1,600 डॉलर प्रति टन हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह से उड़द का स्टॉक म्यांमार के पास करीब 3.5 लाख टन का बचा हुआ है लेकिन बिकवाली कम आने से उड़द एफएक्यू और एसक्यू का दाम मुंबई पहुंच बढ़कर क्रमश: 1,150 और 1,250 डॉलर प्रति टन हो गया है। अरहर का स्टॉक भी करीब पांच लाख टन का म्यांमार के पास होने का अनुमान है। जबकि लेमन अरहर का भाव भी मुंबई पहुंच इस समय 1,100 डॉलर प्रति टन चल रहा है। जून-जुलाई में इनके दाम तेज ही बने रहने का अनुमान है। हालांकि अगस्त में मूंग की घरेलू फसल आ जाएगी। जिससे अगस्त में मूंग में गिरावट आ सकती है। कृषि मंत्रालय के अनुसार 1998-99 में दलहन का 149.1 लाख टन का उत्पादन हुआ था। लेकिन इसके बाद 1,999 से 2002-2003 तक उत्पादन 111 से 134 लाख टन के बीच ही बना रहा। इसके बाद फिर 2003-04 में उत्पादन बढ़कर 149.1 लाख टन का हुआ। लेकिन उसके बाद से उत्पादन में कमी ही आई है। 2009-10 में दलहन उत्पादन का अनुमान 147.7 लाख टन होने का है जबकि वर्ष 2008-09 में देश में उत्पादन 145.7 लाख टन का हुआ था। उन्होंने बताया कि उत्पादन में कमी का प्रमुख कारण किसानों को दलहनों का उचित मूल्य नहीं मिलना है। (बिज़नस भास्कर.....आर अस राणा)
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