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02 अप्रैल 2010
उद्योगों को रॉ शुगर आयात की मंजूरी
सरकार ने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स, कन्फेक्शनरी और बिस्कुट कंपनियों को डयूटी फ्री रॉ शुगर आयात करने की अनुमति दे दी है। हालांकि इस फैसले का बाजार पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है क्योंकि रॉ शुगर को रिफाइंड करवाना उपभोक्ताओं के लिए आसान नहीं होगा। ऐसे में यह फैसला सांकेतिक भर साबित हो सकता है।अभी तक उपभोक्ता उद्योगों को डयूटी फ्री रिफाइंड शुगर यानि तैयार चीनी आयात करने की ही अनुमति थी। देश में चीनी की कुल मांग में से 60 फीसदी खपत उपभोक्ता उद्योगों द्वारा ही की जाती है।इस तरह देश की कुल 230 लाख टन चीनी खपत में उद्योगों की हिस्सेदारी करीब 138 लाख टन है। उपभोक्ता उद्योगों को ड्यूटी फ्री रॉ शुगर आयात की अनुमति देश में सप्लाई सुधारने के लिए दी गई है लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है। उद्योगों के सामने रॉ शुगर को रिफाइंड कराने में दिक्कत हो सकती है। देश में चीनी की रिफाइनरी सिर्फ एक है। रणुका शुगर की इस रिफाइनरी ने पहले ही अपनी क्षमता के अनुरूप तीन लाख टन रॉ शुगर रिफाइंड करने का अनुबंध कर लिया है। ज्यादातर दूसरी चीनी मिलें गन्ने का पेराई सीजन खत्म होने के बाद रिफाइंड कर नहीं पाएंगी क्योंकि उनके पास ईंधन के लिए बगास (गन्ने की खोई) खत्म हो चुकी होगी। ऐसे में सरकार का यह फैसला सांकेतिक ही साबित हो सकता है।सरकार ने पिछले साल अप्रैल में चीनी मिलों को डयूटी फ्री रॉ शुगर और रिफाइंड शुगर आयात की अनुमति दी थी। वे इस साल दिसंबर तक इसका आयात कर सकती हैं। अभी तक देश में 60 लाख टन चीनी का आयात किया जा चुका है। इससे उत्पादन के मुकाबले चीनी की ज्यादा मांग पूरी हो सकेगी। (बिज़नस भास्कर)
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