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09 जनवरी 2010
डॉलर में गिरावट से कालीमिर्च निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ीं
डॉलर में गिरावट के कारण काली मिर्च निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। शुक्रवार को रुपये के मुकाबले डॉलर घटकर 45।83 के स्तर पर आ गया जबकि जनवरी 2009 में 48.52 के स्तर पर था। डॉलर घटने का असर भारत से कालीमिर्च के निर्यात पर पड़ रहा है। नवंबर महीने में भारत से काली मिर्च के निर्यात में 29 फीसदी की कमी आई है। दूसरी ओर केरल और कर्नाटक में नीलामी केद्रों पर नई फसल की आवक शुरू हो चुकी है। चालू फसल सीजन में देश में काली मिर्च की पैदावार में बढ़ोतरी की संभावना है इसलिए मौजूदा कीमतों में गिरावट की ही आशंका है।मैसर्स केदारनाथ संस के डायरेक्टर अजय अग्रवाल ने बिजनेस भास्कर को बताया कि डॉलर कमजोर होने से काली मिर्च के निर्यातकों को पड़ते नहीं लग रहे हैं। भारत में नई फसल की आवक शुरू हो गई है तथा वियतनाम में नई फसल की आवक फरवरी में शुरू हो जाएगी। इंटरनेशनल पिपर कम्युनिटी (आईपीसी) के अनुसार नए सीजन में विश्व में काली मिर्च की पैदावार में तीन फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है। अत: भारत और वियतनाम की नई फसल को देखते हुए अमेरिका और यूरोप के आयातक नए सौदे नहीं कर रहे हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ ही घरेलू बाजार में काली मिर्च की कीमतों में गिरावट आ रही है। काली मिर्च के निर्यातक महेंद्र पारिख ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में काली मिर्च के दाम 3275-3300 डॉलर से घटकर 3175-3250 डॉलर प्रति टन रह गए। कोच्चि मंडी में एमजी-वन कालीमिर्च के भाव घटकर शुक्रवार को 13,900 रुपये प्रति क्विंटल रह गए जबकि 21 दिसंबर को भाव 14,400 रुपये प्रति क्विंटल थे। एनसीडीईएक्स पर जनवरी महीने के वायदा अनुबंध में भी पिछले बीस दिनों में करीब पांच फीसदी की गिरावट आ चुकी है। 21 दिसंबर को वायदा में इसके दाम 14,425 रुपये प्रति क्विंटल थे जो कि शुक्रवार को घटकर 13,707 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।भारतीय मसाला बोर्ड के अनुसार नवंबर महीने में भारत से कालीमिर्च के निर्यात में 29 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 1500 टन का ही हुआ है जबकि पिछले साल नवंबर महीने में 2100 टन का निर्यात हुआ था। आईपीसी के मुताबिक विश्व में काली मिर्च की पैदावार में तीन फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल उत्पादन 290,472 टन होने की संभावना है। पिछले साल विश्व में काली मिर्च का उत्पादन 281,974 टन रहा था। प्रमुख उत्पादक देश वियतनाम में नए सीजन में 1.10 लाख टन का उत्पादन होने की उम्मीद है। जबकि भारत में काली मिर्च का उत्पादन पिछले साल के 50 हजार टन से बढ़कर 52-53 हजार टन होने की संभावना है। उत्पादक राज्यों में इस समय करीब पांच-छह हजार का बकाया स्टॉक बचा हुआ है जबकि एनसीडीईएक्स के वेयर हाउस में भी करीब पांच हजार टन काली मिर्च का स्टॉक है। ऐसे में मौजूदा कीमतों में और भी गिरावट की ही आशंका है। (बिज़नस भास्कर.....आर अस राणा)
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