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29 अप्रैल 2009
एफसीआई की बिकवाली आने की संभावना से बाजरा सस्ता
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों से करीब तीन लाख टन बाजरा की खुले बाजार में बिक्री होने की संभावना है। इससे व्यापारी बाजरा के भाव में बड़ी गिरावट का अनुमान लगा रहे हैं। दूसरी ओर बिहार में नई मक्का की आवक के बाद पशुआहार के लिए बाजरा की मांग घटने लगी है। इससे राजस्थान की मंडियों में अप्रैल के दूसर पखवाड़े के दौरान बाजरा में पांच फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।हरियाणा में भारतीय खाद्य निगम के सूत्रों के मुताबिक एफसीआई ने तीन लाख टन बाजरा बेचने के लिए मार्च में निविदाएं मांगी थी और अब जल्दी ही इसकी बिक्री शुरू होने की उम्मीद है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक एफसीआई शुरू में पांच से सात हजार टन बाजरा बेच सकती है। यह देखते हुए व्यापारियों का कहना है कि एफसीआई की बिकवाली के बाद बाजरा के भावों में पंद्रह फीसदी तक गिरावट संभव है।जयपुर के थोक व्यापारी राकेश खंडेलवाल का कहना है कि हरियाणा में एफसीआई की ओर से लगभग 750 रुपए क्विंटल के भाव पर बाजरा बेचने की संभावना है। बिहार में नई मक्का की आवक के बाद पशुअहार के लिए बाजरा का उठान नगण्य रह गई है क्योंकि नई मक्का तथा बाजरा के भाव लगभग समान स्तर पर होने से पशुआहार में अब मक्का ही उपयोग की जा रही है। दूसरी तरफ शराब फैक्ट्रियों ने भी बाजरा की खरीद बंद कर दी है। अब केवल राजस्थान के रगिस्तानी इलाके बाड़मेर लाइन में ही खाने के लिए बाजरा की छिटपुट मांग निकल रही है। इस कारण कई दिनों से जयपुर मंडी में बाजरा 900 से 910 रुपए प्रति क्विंटल पर टिका हुआ है जबकि अलवर व भरतपुर मंडी में इस पखवाड़े बाजरा के भाव पांच फीसदी से ज्यादा घटकर 850 से 875 रुपए क्विंटल रह गए हैं। एफसीआई द्वारा बाजरा बेचने के लिए मांगी गई निविदाओं में खरीदारों की ओर से 612 से 866 रुपए क्विंटल तक की बोली लगाने का अनुमान है। जयपुर के व्यापारी के.जी झालानी ने बताया कि मार्च में मक्का और ज्वार महंगा पड़ने के कारण बाजरा में तेजी का रुख बना था लेकिन बिहार में नई मक्का आने के बाद बाजरा में तेजी पर ब्रेक ही नहीं लगा बल्कि इसके भावों पर दबाव बन गया है। इस समय जयपुर मंडी में मक्का के भाव 970 से 980 रुपए, जबकि बाजरा 900 से 925 रुपए क्विंटल के बीच है। ऐसे में पशुआहार के लिए बाजरा का उठान काफी घट गया है। अलवर के व्यापारी हीरालाल अग्रवाल ने बताया कि पहले गुजरात से मांग निकलने के कारण अलवर समेत भरतपुर संभाग की मंडियों में बाजरा का उठाव बढ़ा था लेकिन अब गुजरात की मांग लगभग समाप्त होने से भी बाजरा पर चौतरफा दबाव आ गया है। (Business Bhaksar)
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