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29 अप्रैल 2009
विदेशी तेजी के बाद भी घरेलू बाजार में चीनी नरम
भारत में सरकार द्वारा चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश की कोशिशें रंग ला रही हैं। लंदन समेत एशियाई बाजारों में चीनी में जारी तेजी के बावजूद भारतीय बाजारों में भाव तुलनात्मक रूप से नरम हैं। सरकार द्वारा ज्यादा कोटा जारी करने से बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ी है। जिसका असर कीमतों पर देखा जा रहा है। मौजूदा समय में थाईलैंड में रॉ शुगर की कीमतों में बढ़त हुई है। कारोबारियों के मुताबिक आईसीई रॉ शुगर वायदा में आई तेजी का असर स्पष्ट है। आईसीई में मई रॉ शुगर वायदा सोमवार को करीब 13.70 सेंट प्रति पौंड पर रहा। एक सप्ताह पहले यह करीब 12.92 सेंट प्रति पौंड था। बैंकाक के एक कारोबारी के मुताबिक थाईलैंड में चीनी के उत्पादन में कमी की आशंका से भी भाव में तेजी आई है। थाईलैंड में इस साल गन्ने की पैदावार में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। केन एंड शुगर बोर्ड के मुताबिक इस साल यहां करीब 6.7 करोड़ टन गन्ना पैदा होने का अनुमान है। बोर्ड के प्रवक्ता के मुताबिक इस साल भारत और मध्य पूर्व एशियाई देशों से चीनी की आयात मांग निकलने की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान लंदन में चीनी की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। वहीं इस दौरान भारत में चीनी की कीमतों में तगड़ी गिरावट देखी गई है। पिछले एक सप्ताह के दौरान भारतीय हाजिर और वायदा बाजारों में चीनी के भाव करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल तक लुढ़क चुके हैं। सरकार द्वारा ज्यादा चीनी का कोटा जारी करने से भाव में नरमी आई है। जानकारों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा ब्राजील और थाईलैंड से चीनी का आयात करने की संभावना से भी कीमतों में गिरावट आई है। मंगलवार को मुंबई के वाशी थोक बाजार में एस-30 ग्रेड चीनी का भाव 2220-2230 रुपये प्रति क्विंटल रहा। एक सप्ताह पहले यहां 2325 रुपये क्विंटल तक चीनी बिकी थी। बॉंम्बे शुगर मर्चेट एसोसिएशन के सचिव मुकेश कुवाडिया ने बताया कि बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने से कीमतों कर दबाव बढ़ा है। सरकार ने इस महीने के कोटे की चीनी को माह के अंत तक बेचने का निर्देश दिया है। (Business Bhaskar)
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