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18 फ़रवरी 2009
कपड़ा निर्यात पर ड्यूटी ड्रा बैक बढ़ाने की तैयारी
वित्तीय संकट से परेशान टेक्सटाइल कंपनियों को सरकार और राहत दे सकती है। बजट में दी गई ब्याज दरों में दो फीसदी की छूट के अलावा टेक्सटाइल मंत्रालय ड्यूटी ड्रा बैक की दरें बढ़ाने पर विचार कर रही है। मंगलवार को दिल्ली में हैंडलूम मार्केटिंग कांप्लेक्स के शिलान्यास के अवसर पर टेक्सटाइल मंत्री शंकर सिंह बाघेला ने यह जानकारी दी। सोमवार को प्रस्तुत अंतरिम बजट में वित्त मंत्री ने टेक्सटाइल निर्यातकों को राहत देते हुए ब्याज दरों में दो फीसदी की छूट दी है। हालांकि कि उद्योग ने इसमें चार फीसदी की छूट मांगी थी। बाघेला ने संवाददाताओं को बताया कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय से ड्यूटी ड्रा बैक छूट की दरों को बढ़ाने की मांग करेंगे। जिससे की कंपनियां दुनिया भर में जारी आर्थिक मंदी का सामना कर सकें।उन्होंने कहा कि मंत्रालय प्रयास करेगा कि आम चुनावों की घोषणा से पहले ही ब्याज दरों में छूट बढ़ा दी जाए। पिछले साल रुपये की मजबूती से टेक्सटाइल उत्पादों का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ था। केंद्र सरकार ने उससे राहत देने के लिए ड्यूटी ड्रा बैक देना शुरू कर दिया था। सरकार ने 8.8 फीसदी की दर से ड्यूटी ड्रॉ बैक देने का फैसला किया था। अमेरिका और यूरोपीय देशों से अपैरल की मांग में कमी होने से भारतीय निर्यातकों को भारी दिक्कत हो रही है। जिससे टेक्सटाइल कंपनियों का वित्तीय संकट बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए कंपनियां लगातार ड्यूटी ड्रा बैक दरों को बढ़ाकर 12.8 फीसदी करने की मांग कर रही है। इसी अवसर पर उपस्थित टेक्सटाइल सचिव गीता मेनन ने कहा कि उद्योग की ओर से की गई कर्ज व ब्याज अदायगी दो साल के लिए स्थगित करने और फ्रिंज बेनीफिट टैक्स (एफबीटी) हटाने की मांग भी की है जिसे टेक्सटाइल मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय और योजना आयोग के सामने रखा है। घरलू बाजार में भाव तेज होने और विदेशों में कम होने की वजह से चालू वर्ष में भारत से कॉटन के निर्यात में भी भारी गिरावट देखी जा रही है। (Business Bhaskar)
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