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05 जनवरी 2009
स्टील सेक्टर से मांग बढ़ने से निकल में मजबूती
मुंबई : पिछले हफ्ते स्टील कंपनियों की ओर से अच्छी मांग रहने से निकल में मजबूती दिखी। स्टील कंपनियों कच्चे माल के तौर पर निकल का इस्तेमाल करती हैं। दुनिया के प्रमुख कमोडिटी इंडेक्स में औद्योगिक धातुओं ने मजबूती दिखाई। निवेशकों की रुचि बढ़ने से भी इंडेक्स में मजबूती दिखी। कमोडिटी बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि निकल की कीमतें काफी कम हो गई थीं, इस वजह से भी इसमें उछाल आया है। यूं तो औद्योगिक धातुओं की मांग कमजोर बने रहने की आशंका है, लेकिन जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार के राहत पैकेज से इन धातुओं को फायदा हो सकता है। इसका असर निकल पर भी देखने को मिलेगा। लंदन मेटल एक्सचेंज पर निकल करीब 34 फीसदी चढ़कर 12900 डॉलर प्रति टन पर चला गया, वहीं इसके पहले या 9600 डॉलर पर बंद हुआ था। पिछले हफ्ते एमसीएक्स पर जनवरी का निकल कॉन्ट्रैक्ट 31 फीसदी चढ़कर 631 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया। वहीं इससे पिछले सप्ताह यह 482 रुपए किलो पर बंद हुआ था। हर साल कमोडिटी इंडेक्स में अलग-अलग कमोडिटी को अलग-अलग वेटेज मिलता है। एंजेल कमोडिटीज के हेड रिसर्च अमर सिंह ने बताया, 'कमोडिटी इंडेक्स में निकल और कॉपर का वेटेज ज्यादा होगा।' उन्होंने यह भी बताया, 'स्टेनलेस स्टील का कारोबार आगे कैसा रहता है, इससे निकल की तकदीर भी तय होगी। आने वाले हफ्तों में एलएमई पर निकल को 13450 डॉलर प्रति टन पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। अगर यह इस स्तर को पार कर जाता है तो निकल की कीमत 14300 डॉलर प्रति टन तक जा सकती है।' उन्होंने बताया कि एमसीएक्स पर निकल के जनवरी कॉन्ट्रैक्ट को 690 रुपए प्रति किलो पर प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा और 520 रुपए पर समर्थन मिलेगा। निर्मल बांग कमोडिटीज के रिसर्च एनालिस्ट कुणाल शाह ने बताया, 'आने वाले दिनों में निकल आकर्षक बना रहेगा, अभी भी इसकी कीमत उत्पादन लागत से नीचे है। ऑस्ट्रेलिया में मौजूदा समय में 8-8.5 डॉलर प्रति पौंड उत्पादन लागत है, लेकिन यह बाजार में 4.5 डॉलर से 5.6 डॉलर प्रति पौंड पर उपलब्ध है। इसलिए इसके ऊपर जाने की अच्छी संभावनाएं हैं।' फिर निकल में तकनीकी उछाल भी देखने को मिल सकती है। यह मई 2007 के उच्चतम स्तर 5200 डॉलर प्रति टन के स्तर से करीब 80 फीसदी नीचे गिरकर अक्टूबर 2008 में 8750 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम स्तर पर आ गया था। रिजर्व बैंक के कर्ज दरों में कटौती किए जाने के बाद से घरेलू एक्सचेंज एमसीएक्स पर निकल और दूसरे औद्योगिक धातुओं को अच्छा समर्थन मिलेगा। भारत सरकार ने भी देश में फंड की कमी को पूरा करने के लिए कई तरह के पैकेज की घोषणा की है। सरकार और आरबीआई के प्रयासों से बेस मेटल को समर्थन मिलेगा, ट्रेडरों को उम्मीद है कि इससे बेस मेटल की मांग में तेजी आएगी। (ET Hindi)
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