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21 जनवरी 2009
मिलों को टेंडर के जरिये कपास बेचने का फैसला टला
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर किसानों से खरीदी कपास टेंडर के जरिये बेचने के प्रस्ताव पर फैसला केंद्र सरकार ने फिलहाल टाल दिया है। कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) निर्धारित मूल्य पर मिलों को कपास की पहले बिक्री पहले ही कर रही है। अब तक वह 9 लाख गांठ कपास खुले बाजार में बेच चुकी है। टेंडर के जरिये कपास बेचने का फैसला टलने से मिलों को राहत मिली है। इस बिक्री व्यवस्था में कपास के भाव बढ़ने की उन्हें आशंका थी।टेक्सटाइल मंत्रालय के उच्च अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के बढ़ते दामों को देखते हुए सरकार ने कपास की खुले बाजार में टेंडर के जरिये बिक्री करने का फैसला फिलहाल टाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के दाम पिछले एक महीने में 42 सेंट से बढ़कर 57 सेंट प्रति पौंड तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में घरेलू बाजार में दाम 20,000 रुपये प्रति कैंडी से बढ़कर 21500 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गए हैं। सरकार ने फिलहाल कपास के बढ़ते दामों को देखते हुए टेंडर न लाने का फैसला लिया है। सीसीआई इस समय 22500 रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) के दाम पर कपास बेच रही है। हालांकि यह भाव एमएसपी से नीचे है। बाजार में कपास के दामों को देखते हुए इसको समय-समय पर बदल दिया जाता है। इन दामों पर ही मिलें कपास की खरीद कर रही है। केंद्र सरकार ने नई फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी कर 2500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास के दाम एमएसपी से नीचे चल रहे है।इसको देखते हुए टेक्सटाइल कंपनियों ने मांग की थी कि सीसीआई उनको अंतरराष्ट्रीय दामों पर कपास बेचे। बाजार में कपास के दाम एमएसपी से नीचे रहने के चलते सीसीआई लगातार कपास की खरीद कर रही है। अभी तक सीसीआई 55 लाख गांठ की खरीद कर चुकी है। घरेलू बाजार में अभी तक 1.55 लाख गांठ कपास की ही आवक हुई है। (Business Bhaskar)
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